[सतयुग आगमन या युग परिवर्तन क्रांति]
सतयुग या युग परिवर्तन एक क्रांति (Revolution) है जो शीघ्र ही आरंभ होने वाली है. प्रत्येक क्रांति से पहले एक प्रति-क्रांति (Counter Revolution) आरम्भ होती है जो साम-दाम, दंड-भेद अर्थात किसी भी कीमत पर क्रांति को कुचलने के लिए तत्पर रहती है. दुसरे शब्दों में कहें तो अंतिम चरण में जब क्रांति और प्रति-क्रांति साथ-साथ चल रही होती हैं तो प्रति-क्रांति कर रहे लोगों का चरमपंथ या कट्टरता ही उन्हें उखाड़ फेंकने का कारण बनती है. परन्तु यह बहुत अंत में जा कर होता है. ऐसी ही स्तिथि आज भी बन रही है.
■ सतयुग आगमन ■
बहुत से विद्वानों, ज्योतिषों, साधकों, योगियों, धार्मिक संस्थानों के अनुसार सतयुग बस कुछ वर्षों में ही आरम्भ होने वाला है। बल्कि अब तो 2025-26 तक सतयुग आरम्भ होने की बात भी कही जा रही है। ये जो समय चल रहा है, इसे कलियुग और सतयुग का संगम या संधि काल/युग कहा जा रहा है, जब दो युगों का मिलन होता है। आज विभिन्न विचारकों, ज्योतिषों, गणितज्ञों आदि भी शीघ्र सतयुग आरम्भ होने की बात कह रहे हैं।
● गायत्री परिवार (पं. श्रीराम शर्मा आचार्य):
गायत्री परिवार के संस्थापक पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य ने लिखा था कि 2000 में सतयुग का नक्षत्र योग आ रहा है। उन्होंने कहा था कि 2000 में पृथ्वी की काया पलट हो जायेगी और 2000 में युग परिवर्तन की संभावना है। उन्होंने सतयुग का आगमन वर्ष 2000 के कुछ बाद तक का कहा है। कुछ जगह उन्होंने ये वर्ष 2000 के समीप भी कहा है। गायत्री परिवार के विभिन्न विद्वान अनुयायी निकट भविष्य की अलग अलग सतयुग आगमन की तिथियां देते रहते हैं। संभवतः ये इस समय को संधि युग कहते हैं यानि जब दो युग मिल रहे हैं.
गायत्री परिवार वाले आज भी इस पर (युग परिवर्तन) कार्य कर रहे हैं और इसके लिए 18 सत्संकल्प सूत्र संकल्प लेने को कहते हैं जैसे : सतयुग एक वर्ग, संस्था, संगठन के बल बुते पर नहीं आ सकता। ये सभी के योगदान से ही संभव होगा। जहाँ कोई अधीन लाने से नहीं बल्कि सहयोगी बनाने से संभव होगा। हमें पहले व्यक्तित्व का निमार्ण करना है। जो संस्थागत तरीके से आगे बढ़ेगा। व्यक्तियों के बाद परिवार का निर्माण होगा। फिर समाज का, फिर देश का और। अंत मे विश्व का। इसी तरह पहले मन पवित्र व स्वच्छ होगा, फिर शरीर और अंत में वातावरण अपने आप शुद्ध रखने लगेंगे। हमें अग्रदूत बनना है। लोगो में चेतना बढ़ानी है। ये एक नैतिक क्रांति है। उज्जवल भविष्य बानाना है। समाज बेहतर बनाना है। निरोग रहे, प्राथना करे, नियमित उपासना करे, चिंतन मनन करे, साधना योग करे, ईश्वर का मंत्रजाप करे।
भविष्यपुराण की भूमिका में पंडित जी ने लिखा है कि पुराण कल्पना और रोचकता के आधार पर लिखे गए थे. इसलिए पंडित जी लाखों वर्षों पश्चात् सतयुग आरम्भ होने की मान्यता से सहमत नहीं दिखाई देते.
● ब्रह्माकुमारी समाज:
ब्रह्माकुमारी समाज युग परिवर्तन में अटूट विश्वास रखता है। इसकी स्थापना 1930 में हुई थी। इनका मुख्यालय माउंट आबू में है। इनके संस्थापक बाबा लेखराज कृपलानी थे जिन्हें प्रजापति ब्रह्मा या ब्रह्मा बाबा या ओम बाबा के नाम से भी जाना जाता है। इनका जन्म 1880 और मृत्यु 1969 में हुई। 1936 में इन्हें 'शिव या शिव बाबा या ईश्वर' के साक्षात दर्शन होने शुरू हुए। इसलिए इनका नया रूप या जन्म 1936 को माना जाता है। ये ईश्वर को शिव बाबा कहते है। ये मानते हैं कि परमात्मा ने कहा कि मेरा अवतरण 100 वर्ष तक अगले संगम काल तक चलता है और फिर युग बदलता है व नया युग आता है। यानी अब 2036 में युग परिवर्तन होना है, 1936 में हुए दर्शन या नए जन्म के 100 वर्ष बाद। ये मानते है कि कुल 5000 वर्ष का चतुर्यग होता है जिसमें 1250 वर्ष का प्रत्येक युग होता है। ये दो युगों के मिलन काल को संगम युग/काल कहते हैं।
सतयुग में मनुष्य को ही देवी देवता कहा जाता था। सतयुग में 150 वर्ष उनकी आयु होती थी, अकाल मृत्यु नहीं होती थी तो अमर कहलाते थे और वंही त्रेतायुग में आयु 100 वर्ष होने लगी।
जो इनके सिद्धान्तों पर चलता है ब्रह्माकुमार/ब्रह्माकुमारी कहलाता है। इनके यंहा स्त्रियों बहुत आगे रहती है। ये पूजा को मुरली कहते है।
● तुलसीदास बाबा जयगुरुदेव:
बाबा जयगुरुदेव का सतयुग आने पूर्ण विश्वास था। वो कहते थे कि एक दिन धरती ज़रूर पर सतयुग आयेगा। इनका नारा था ‘सतयुग आएगा, सतयुगा आएगा’। सो इनके भक्तों ने इसी आधार पर एक अन्य नारा बनाया: ‘जयगुरुदेव, सतयुग आयेगा’। इसके अलावा बाबा का विचार था कि जल्द ही भारत विश्व के शीर्ष स्थान पर होगा, सबका अगुवा होगा और विश्व में परिवर्तन का कारण होगा।
बाबा जय गुरुदेव कहते थे कि कलियुग में हजारों वर्षों के लिए सतयुग आएगा। मुसलमान फकीरों कि किताबों में लिखा हुआ है कि 14वी सदी में कोहराम मचेगा और एक फकीर आएगा और सभी को खुदा को पैगाम सुनाएगा, सभी इंसानों को चाहे कोई भी धर्म का हो।
बाबा
जय गुरुदेव ने एक बड़े महापुरुष/अवतार के भूतकाल में जन्म लेने की बात/
भविष्यवाणी भी की थी। बाबा ऐसी विचित्र बात कहते रहते थे। शायद उन्होने ये बात
किसी विशेष शिष्य के बारे में कही हो जो बाद में किसी कारणवश सिद्ध न कर पाये हो या
शायद अपने बारे में ही कही हो।
https://www.youtube.com/watch?v=C9q8z-d8FYY&pp=ygUvSmFpZ3VydWRldnVrbSArIFNhdHl1Z2EgS2FsaXl1Z2EgWXVnYSBQYXJ2YXJ0YW4%3D
● बापूजी दशरथभाई पटेल:
बापूजी दशरथ भाई पटेल एक सन्यासी, साधक, योगी, अध्यात्मिक गुरु हैं. इनका मुख्यालय अहमदबाद में है और गुरुग्राम में भी एक आश्रम है. बापूजी निर्गुण निराकार, ब्रह्मा, विष्णु, शिव, देवता, गीता, चतुर्युग, अर्धप्रलय, अंतिम या महाप्रलय, मन्वन्तर, कल्प, युग आदि सभी में विश्वास करते हैं. यह समाधी में जा कर ज्ञान प्राप्त करते हैं. बापूजी के कुछ विचार और मान्यताएं ब्रह्माकुमारी से मिलती जुलती अवश्य हैं मगर उनसे अनेकों वैचारिक मतभेद भी रखते हैं.
यह कहते हैं कि आम मान्यता अनुसार 432000 वर्ष बाद कलियुग अंत नहीं है बल्कि एक पल में ब्रह्माण्ड बदल सकता है जैसे पिछले कुछ दशक में ही विज्ञान ने इतनी तेज और असंभावित तरक्की कर ली जो किसी ने नहीं सोचा था. महाशिव, शिव निराकार यह क्षण भर में कर सकता है. कलयुग के विनाश के बाद सतयुग आता है, अब विनाश नहीं होगा परिवर्तन होगा. इस कलयुग के बाद शीघ्र सतयुग आएगा. यह स्वपरिवर्तन से होगा. युग परिवर्तन को सूक्ष्म जगत वाले रोक हैं, वे विनाश करने में लगे हैं. धरती पर परमशान्ति की वाईब्रेशन से युग परिवर्तन होगा. यह महा विश्व परिवर्तन होगा. स्वपरिवर्तन से विश्व परिवर्तन होगा. अगर यह वाईब्रेशन हम नहीं फैला पाये तो विनाश होगा यानी या तो परमशान्ति होगी या प्रलय. चतुर्युग के बाद अर्ध प्रलय आती रहती है पर धरती का समय अब नहीं बचा है (बहुत ही कम बचा है) क्योंकि प्रलय के साधन अर्थात हथियार हमनें बहुत बना लिए है और इसलिए महाप्रलय होनी है. परा सदैव के लिए अंत नहीं होगा. 2018 में परिवर्तन होना था मगर हमारे कारण ही ये आगे बढ़ता जा रहा है हालाँकि युग परिवर्तन 2018 से शुरू हो गया है. समय ऐसा आ रहा है की परिवर्तन होना है. आने वाले 2 वर्षों में वह सर्वशक्तिमान विश्व परिवर्तन कर देगा (संभवतः 2018 से पूर्व का कथन).
इनके शब्द हैं कि इसके बाद ‘बेहद’ की परमशान्ति प्राप्त होगी. 'हद' है पाँच तत्व और पाँच तत्वों की दुनिया. 'बेहद' है परम तत्व और परम तत्वों की दुनिया। सो बेहद का अर्थ है अनंत अर्थात जिसका अन्त न हो. बेहद के अंतर्गत अनंत करोड़ ब्रह्मांड हैं। ‘बेहद का बाप’ का अर्थ उस एक सर्वशक्तिमान (परमेश्वर) से है. इस प्रलय को यह इस्लाम की क़यामत और ईसाइयत के डूम्स डे से भी जोड़ते हैं. इस परिवर्तन में आने वाले कल्कि के भी अपने अर्थ (संभवतः महापरिवर्तन के बाद बेहद के दर्शन) लेते हैं. बापूजी ने Life in Multiverse नामक अपनी एक पुस्तक में इस परिवर्तन पर विस्तार से बात करी है.
इनका यह भी मानना है कि भारत विश्व में सर्वोत्तम स्थान
पर होगा, पूरा
विश्व हमें देखगा, भारत विश्व को शांति की राह देगा, भारत ही
सब आरम्भ करेगा, सब
भारतवासी सुधर जायंगे, भारतीय आत्मज्ञानी हो जायंगे, सब भारत से
ही सीखेंगे, विश्वगुरु बनेगा,
सोने
की चिड़िया बनेगा, भारत के लिए डायमंड युग आयगा, सब सनातनी हो
जायंगे, भारत हिन्दूराष्ट्र बनेगा. भारत इसके लिए लड़ाई नहीं करेगा.
https://www.youtube.com/watch?v=yUqIowTTBYY
(watch from 8 minutes onwards – शीघ्र परिवर्तन )
https://www.youtube.com/watch?v=ljHoEiycbik
(भारत की भूमिका)
https://www.youtube.com/watch?v=BhDtKp5SIxk
(अब विनाश नहीं होगा, परिवर्तन होगा, 2018 से होगा)
https://www.youtube.com/watch?v=AJj277rdHz8
https://www.youtube.com/shorts/PtBBRzNm9rU
https://www.youtube.com/watch?v=AgAbgcLrzZY
https://www.youtube.com/watch?v=jjwhnW2J2Dg
https://www.youtube.com/watch?v=GLD-DVWzZ8U
https://www.youtube.com/watch?v=D9o1eYn0cus
https://www.paramshanti.org/
● भविष्य मालिका पुराण ग्रन्थ
भविष्य मालिका पुराण की चर्चा आजकल चारों ओर है. इस ग्रन्थ के बारे में दावा है कि यह कल्कि विषय पर 600 वर्ष पूर्व लिखा गया था. काशीनाथ मिश्र इसके लेखक हैं। महापुरुष संत अच्युतानन्द को इस ग्रन्थ का मूल लेखक बताया जाता है. 15वीं सदी में उड़ीसा के महान संत अच्युतानन्द अनेकों ग्रन्थ के लेखक थे और पञ्चसखा (संस्कृत से उड़िया में हिन्दू ग्रंथों का अनुवाद करने वाले पांच विद्वान मित्र) में से एक थे. इस ग्रन्थ की प्रमाणिकता के बारे में कुछ नहीं कहा जा सकता मगर इसे पढ़ने वाले अनेकों लोग एक सा ही दावा कर रहे हैं जो इस प्रकार है:
इस ग्रन्थ के अनुसार वर्ष 2032 तक सतयुग की शुरवात होगी और सभी बड़े-छोटे धर्म, मान्यताएं, प्रथाएं सत्य सनातन धर्म में आत्मसात हो जाएंगी और मानव जाति को एक उज्जवल भविष्य की ओर ले जाएंगी. बहुत तबाही मचेगी और इस समय तक केवल 64 करोड़ लोग धरती पर बच पायंगे.
Bhavishya Malika Puraan is an important book of Odia culture which was written 600 years ago in Odia language on copper planks by Panch Sakha (5 friends) about Kalki avatar – last incarnation of supreme lord Maha Vishnu. As per this, by the year 2032, all major and minor religions, beliefs and practices will assimilate into Satya Sanatan dharma and lead mankind to a brighter future his book must be considered as the sole warning and sole salvation for mankind before the impending doom. It is said that it is written in it that only 64 cores people will remain till this time.
● Shunyamurti:
Shunyamurti is a spiritual, meditation and Yoga Guru who runs Sat Yoga Ashram & Institute in Costa Rica.
He often wears skull cap. He has been associated with Baba Hari Dass and Sri Ramana Maharshi. He
also claims that Kaliyuga has very short life span left but whether it will be Satyuga after it or something else, he's not sure. But he is sure that if not here, surely Satyuga will happen somewhere else in this creation.
https://www.youtube.com/watch?v=U8I-A_qNqY4&t=4s
https://www.youtube.com/watch?v=h4WhD9FvP8E
(watch from 18 minutes onwards)
● हितेश चंदेल: यह एक विचारक, साधक व योगी हैं और 2025 में सतयुग आगमन की तिथि बताते हैं जो इन्हें ध्यान अवस्था में अनुभूति हुई है। वह इसकी तिथि 4 जून, 2025 बताते हैं। वह CRDG जैसी संस्थाओं के साथ मिलकर इस पर काम कर हैं जिसे वे प्रोजेक्ट युग परिवर्तन (PYP) कहते हैं।
https://youtube.com/c/CRDGFoundation
https://www.youtube.com/watch?v=KBOUWg6GT_4
(watch from 5 minutes onwards)
◆ जयश्री वर्मा: इनका मत है कि कलियुग अंत और सतयुग आगमन में अभी समय बचा (कई वर्ष बाकी) है क्योंकि पुराणों में बताई कई घटनाएं अभी होनी बाकी हैं यघपि इस दशक के अंत तक (2030 तक) इससे संबंधित बहुत बड़े बदलाव होने हैं. इनके शब्दों से इनका जुड़ाव गायत्री परिवार से प्रतीत होता है.
https://www.youtube.com/watch?v=A-sXr7rr7uE&t=1s
https://www.youtube.com/watch?v=-kt13C9Eyvo&t=145s
◆ आचार्य सलिल: यह एक प्रसिद्द ज्योतिष हैं. यह कहते हैं कि कलियुग अपनी अंतिम साँसे ले रहा है। कलियुग 432000 वर्षों से अब केवल 5000 वर्षों में बदल गया है। क्योंकि जो घटनाएँ या बुराइयाँ इन लाखों वर्षों में होनी थी, वो इन हजारों वर्षों में ही होने लगी हैं। इनकी संस्था में 20000 वर्षों का कालचक्र माना जाता है और यह बह्माकुमारी से जुड़े हुए हैं.
https://www.youtube.com/watch?v=fnRgNqld5cQ
◆ राजयोगी बी.के. सूरज: ब्रह्माकुमारी संस्थान के ही वरिष्ठ राजयोगी बी.के. सूरज भाई जी कहते हैं कि 2036 तक दुनिया में भारी उथल-पुथल होगी.
https://www.youtube.com/watch?v=9jEx-2v071k
◆ मातावनखंडी धाम, कठुवा कमेटी मेंबर: ये कहते हैं कि अभी
संगम युग चल रहा है और कलियुग के बाद सतयुग आना है। 2023 से 20232 तक का समय महाप्रलय
का समय है। इनका जुड़ाव भी गायत्री परिवार या ब्रह्माकुमारी समाज से लगता है।
(5 मिनट के बाद से देखिए)
◆बाबा उमाकांत जी महाराज: बाबा जय गुरुदेव के शिष्य जैसे बाबा उमाकांत जी महाराज
भी शीघ्र कलियुग जाने की और सतयुग आने कि बात करते हैं। वो कहते हैं कि
कलियुग में ही सतयुग आएगा। जब भी कोई युग जाता है तो उस युग के बुरे लोगों
का सर्वनाश हो जाता है। इसलिए आज के कलियुग में जी रहे लोगों को समझाना है।
जल्दी ही युग परिवर्तन होने वाला है, भयंकर तबाही होने वाली है।
https://www.youtube.com/shorts/Yr8BLUqVkGQ
https://www.youtube.com/watch?v=S9mXWCCPchw
https://www.youtube.com/watch?v=PKF5YStjPQo
https://www.youtube.com/watch?v=FiW31cTAKzg
◆ पूर्व RSS सरसंघ चालक एस. सुदर्शन: इन्होंने लगभग साल 2000 के करीब बताया था की युग परिवर्तन का समय है क्योंकि अभी संधि काल (175 साल का) चल रहा हैं। इन्होंने 2011 से भारत के स्वर्णयुग के आरंभ होने की बात कही थी जो कि एकता और बंधुत्व में विश्व को पिरो देगा मगर उससे पहले आसुरी शक्तियां इसे रोकने का पूरा प्रयास कर रही है। इसका आधार उन्होंने स्वामी विवेकानंद के गुरु के जन्म को सतयुग आरंभ होने का आधार बनाया है।
https://www.youtube.com/watch?v=o2k1nb1Q9Bo
■ वर्तमान द्वापर से त्रेता या वर्तमान कलि से द्वापर का मिलन ■
शीघ्र भविष्य में होने जा रहे युग परिवर्तन (कलयुग से सतयुग में नहीं बल्कि द्वापर से त्रेता या कलि से द्वापर में जाना) पर कुछ संस्थानों, विद्वानों आदि के मत इस प्रकार हैं.
● ईशा फाउंडेशन (सद्गुरु जग्गी वासुदेव):
It takes the planet 72 years to pass through one degree of the zodiac and 25,920 years to complete one full circle of 360 degrees. One half of the journey takes 12,960 years and covers the four yugas. Satya Yuga lasts 5184 years. Treta Yuga lasts 3888 years. Dwapara Yuga lasts 2592 years. Kali Yuga lasts 1296 years. These four yugas taken together come to a total of 12,960 years. In 3140 BCE, the Kurukshetra War ended, and in 3102 BCE, Krishna left his body. Three to four months after the war, the Kali Yuga began. As of 2012 AD, Krishna’s era ended 5,114 years ago. If you subtract 2592, which is the cumulative number of years of the two Kali Yugas that are at the bottom of the ellipse which describes the axial precession, you arrive at 2522 years. That means we have already completed 2522 years of Dwapara Yuga, and since its total duration is 2592 years, we still have 70 years until its completion. In the year 2082, we will complete Dwapara Yuga and move on to Treta Yuga. The solar system with the Sun and the planets around it is moving in the galaxy. It takes 25,920 years for our solar system to complete one cycle around a larger star.
● बिभू देव मिश्रा
यह खगोलशास्त्र, इतिहास, सभ्यता, धर्म व विज्ञान आदि के क्षेत्र में एक शोधकर्ता व लेखक हैं और IIT, IIM के छात्र रहे हैं. इन्होने कलियुग का अंत 2025 में होना है सिद्ध किया है.
इनका शोध संक्षिप्त (हिंदी) में:- 12000 वर्ष के चार युगों (ईसापूर्व निर्मित महाभारत और मनुस्मृति अनुसार) को बाद में (ईसा पश्चात निर्मित पुराणों में) लाखों वर्षो का माना जाने लगा. पारसियों में 12000 वर्षो का और यूनानियों में 10800 व 12954 वर्षों का चार युगकाल माना जाता था. ये संकृतियाँ भारत से निकट और संबंधित भी थीं और ज्योतिष शास्त्र में निपुण भी. तर्क कहता है कि उस समय ये काल सभी जगह समान होने चाहिए. बाल गंगाधर तिलक ने कहा है की 1200 वर्ष का कलियुग था (यानि 12000 वर्षों का चतुर्युग). आर्यभटीय में आर्यभट्ट कहता है कि मेरा जन्म हुए 23 वर्ष हो चुके हैं जब से 60 बार 60 वर्ष (3600 वर्ष) और 3/4 युग बीत चुके हैं. सामान्यता इसी आधार पर 3102 BC को कलियुग का आरंभ माना जाता है परन्तु 6 सदी AD तक इस तिथि का उल्लेख कंही नहीं मिलता है. अलबेरुनी कहता है कि ब्रह्मगुप्त लिखता है कि आर्यभट ने 4 युगों का समान कालिक माना है और इसी कारण वह स्मृतिशास्त्र से भिन्न मत रखने के कारण हमारा विरोधी है, वह एक कीड़े के सामान है, जो ज्ञानी लोग हैं, वे आर्यभट, श्रीसेना, विष्णुचंद्र के विपक्षी है. अलबेरुनी पौलसिया के बारे में भी कहता है कि वह भी युगों को समान कालिक मानता था. यानी ये दोनों 3000 वर्षो के 4 युग मानते थे. सम्भवता युगों को 4:3:2:1 की रेशियों में मापना 5वी सदी से पहले शुरू हुआ हो. पारसी भी बराबर काल के (3000 वर्षों के 4 युग यानि 12000 वर्षों का चतुर्युग) चार युग मानते थे. मेक्सिकन सभ्यता में लगभग 4000 वर्ष के 2 और लगभग 5000 वर्ष के 2 युग बताए गए है. सूर्य को अग्रगमन करने (12 नक्षत्र राशियों से होते हुए पीछे घुमने) में 25,765 वर्ष लगते हैं जो की 24,000 वर्षो के युगकाल के बराबर है. आर्यभट्ट की सूर्यसिद्धान्त इस अग्रगमन की गति 54 आर्क प्रति सेकंड बताता है परत्नु आज विज्ञान ये गति 50.29 प्रति सेकंड बताता है जिससे ये काल 24000 वर्षो का सिद्ध हो जाता है. युक्तेश्वर गिरी ने 12000 वर्ष का युगकाल बताया है जो आरोही और अवरोही यानि घटते व बढ़ते हुए चलता है जो पूर्णतया 24000 वर्षो में पूरा चक्र पूरा करता है. जैन, बोद्ध व यूनानियों में भी आरोही और अवरोही युगकाल की धारणा मानी जाती है. हजारों वर्षों से सप्तऋषि पंचांग भारत में प्रचलित है जो मौर्या (4थी सदी BC) काल में बहुत अधिक प्रयोग और और आज भी कई जगह प्रयोग होता है. सप्तऋषि (Great Bear constellation or Ursa Major) 7 तारो का एक तारामंडल है, ये तारे 7 ऋषियों के नाम पर है, ये देखने में पतंग या भालू जैसा दिखता है. इसे बड़ा भालू नक्षत्र भी कहते है. इसमें 2700 वर्षों का युग होता है, 4 युग होते है 10800 वर्ष के यानि यूनानियों के समान. इसका मतलब उस समय भारत और यूनान इस पर एकमत था. सिकंदर से पीछे चलने पर यूनानी राजा डायोनिसस या रोमन राजा बच्चुस का काल, यूनानी प्लिनी 6451 BC और रोमन एरिएन 6462 बताते है. सप्तऋषि का आरंभ 6676 BC से माना जाता है. ये सभी तिथियाँ एक दुसरे के निकट है. इस समय में हुए यूनानी राजा डायोनिसस या रोमन राजा बच्चुस को विलियम जोंस ने श्रीरामचन्द्र माना है. श्री राम के बाद से ही द्वापर शुरू हुआ था. सप्तऋषि के 2 पंचांग है, एक नया और दूसरा पुराना. नय और पुराने सप्तऋषि काल का आरम्भ सप्तऋषियों के कृतिका क्षेत्र में पाए जाने से हुआ यानी जो 6676 में पाया गया था. ये प्रकरण उत्तर भारत में 4th century BCE से चालू है, जिसका यूनानीयों, रोमनों ने भी उल्लेख किया है और जिसे वर्द्धागर्ग ने भी ईसा काल के आरंभ में प्रयोग किया है. बाद में एक दूसरा सप्तऋषि पंचाग भारत में शुरू हुआ 3076 BCE से. पर 3076 BCE तक इसे ली जाने वाली नयी गिनती बाद में की गयी ताकि कलियुग के निकट इसे रखा जा सके. सप्तऋषि कलियुग तब शुरू हुआ था जब सप्तऋषि रोहिणी क्षेत्र में थे. सप्तऋषि 3676 BCE में रोहिणी में थे. इसका अर्थ है की एक सप्तऋषि युग 6676 BC से शुरू हुआ. फिर 3000 वर्ष बाद 3676 BCE में दुसुरा युग शुरू हुआ. पर इसमें तो 2700 वर्ष ही होते है. इसका अर्थ है की 300 वर्ष का मिलन काल होता है. यही असल युग का काल है. इसकी शुरुवात 12676 BCE में हुई थी जब यह बड़ा भालू तारामंडल श्रवण नक्षत्र में थे. 300 वर्षो के मिलन काल के कारण, बड़ा भालू तारामंडल प्रत्येक युग में 3 नक्षत्र बढ़ता है. महाभारत बताती है की श्रवण नक्षत्र को प्राचीन परम्परा में नक्षत्र चक्र में प्रथम स्थान दिया जाता था. ब्रह्मवैवर्त पुराण (पाठ 50, 59) में भगवान कृष्ण, देवी गंगा से कहते हैं कि कलियुग के 5,000 वर्षों के बाद एक नए स्वर्ण युग का उदय होगा जो 10,000 वर्षों तक चलेगा। कलियुग की शुरुवात 3676 ईसा पूर्व में हुई थी यानी आज इसे लगभग 5,700 वर्ष हो चुके हैं। इसके बाद 3 युग का अंत 9,000 वर्षों के बाद होगा। पारसी यह मानते हैं की अहुरा मज़्दा द्वारा इस संसार का निर्माण ज़र्थ्रुष्ट्र से 9000 वर्ष पूर्व हुआ था. ज़र्थ्रुष्ट्र को 600 BC में जन्मा माना जाता हैं. इस प्रकार उनके हिसाब से 9600 BC में संसार का निर्माण हुआ था. 12676 BCE में सतयुग घटना शुरू हुआ. 9676 BCE में त्रेता घटना शुरू हुआ. 6676 BCE में द्वापर घटना शुरू हुआ. 3676 BCE में कलि घटना शुरू हुआ. 676 BCE में कलि वापिस द्वापर की और बढ़ना शुरू हुआ. (2700 वर्ष 2025 में पुरे हो रहे हैं जब कलि समाप्त होकर द्वापर से मिलना शुरू हो जाएगा, यानि 2025 मिलन काल होगा). 2325 AD में द्वापर वापिस त्रेता की और बढ़ना शुरू होगा. हिमयुग का अंत सतयुग काल के अंत के आसपास हुआ था. त्रेता काल के आसपास मनु की नौका डूबने (Black Sea Catastrophe) की घटना हुई थी. द्वापर के अंत समय के आसपास महाभारत व ट्रॉय जैसे युद्ध हुए थे. कलियुग के द्वापर की ओर वापिस बढ़ने के समय बुद्ध, महावीर, कनफुसिय्स, ज़र्थुरुष्ट्र पायथागोरस, थेल्स जैसे महानुभाव हुए थे. द्वापर आते आते विश्वयुद्धों, परमाणु बम के कारण राष्ट्रवाद की धारणा फैलाना शुरू हुई.His research in detail (English): The popularly
accepted date for the beginning of the Kali Yuga is 3102 BCE, thirty-five years
after the conclusion of the battle of the Mahabharata. This date is believed to
be based on a statement made by the noted astronomer Aryabhatta in the Sanskrit
text Aryabhatiya, where he writes that: When sixty times sixty years (i.e.
3,600 years) and three quarter Yugas had elapsed, twenty-three years had then
passed since my birth (Aryabhatiya, Kalakriyapada, verse 10). Scholars
generally assume that the Kali Yuga had started in 3102 BCE, and then use this
statement to justify that the Aryabhatiya was composed in 499 CE. However, we
cannot use the reverse logic, i.e. we cannot say that the Kali Yuga must have
started in 3102 BCE since the Aryabhatiya was composed in 499 CE, for we do not
know when Aryabhatta lived or completed his work. Another important
source is the Aihole inscription of Pulakesin II of Badami, which was incised
on the expiry of 3,735 years after the Bharata war and 556 years of the Saka
kings (D.C. Sircar, Indian Epigraphy, Motilal Banarsidass Publ., 1965,
318). If we take the beginning of the Saka Era as 78 CE, then the Bharata
War took place in 3102 BCE, then the Kali Yuga, which started 35 years after
the Bharata War, began on 3067 BCE. But we must remember there is an Old Saka
Era as well, whose beginning date is disputed, and for which various dates have
been proposed by scholars ranging from 83 BCE – 383 BCE (Richard Salomon,
Indian Epigraphy: A Guide to the Study of Inscriptions in Sanskrit, Prakrit,
and the other Indo-Aryan Languages, Oxford University Press, 1998, 181).
If the Aihole inscription refers to the Old Saka Era, then the Kali Era starts
a few hundred years before 3102 BCE. The truth is that there is no text
or inscription which gives us an unambiguous date for the beginning of the Kali
Yuga. Although the popularly accepted date is 3102 BCE, there is no astronomical
basis for it. There is a claim that the computation was based on the
conjunction of the five ‘geocentric planets’ (i.e. the planets visible to the
naked eye) – Mercury, Venus, Mars, Jupiter and Saturn – at 0° Aries at the
beginning of the Kali Yuga as mentioned in the Surya Siddhanta. But the Surya
Siddhanta explicitly states that this conjunction of planets at 0° Aries takes
place at the end of the Golden Age (Surya-Siddhanta: A Text-Book of Hindu
Astronomy, tr. Ebenezer Burgess, Phanindralal Gangooly, Motilal Banarsidass
Publ., 1989, Chapter 1, 41). Besides, modern simulations indicate that on
17/18 February 3102 BCE, the five geocentric planets occupied an arc of roughly
42° in the sky, which cannot be considered as a conjunction by any means. Therefore,
neither is there any astronomical basis for the start date, nor do we have any
evidence that Aryabhatta or any other astronomer had calculated the date.
Before the 6th century CE, the date does not occur in any Sanskrit text or
inscription. It could have been invented by later day astronomers or adopted
from some other calenda. In many Sanskrit texts the 12,000-year duration
of the Yuga Cycle was artificially inflated to an abnormally high value of
4,320,000 years by introducing a multiplication factor of 360, which was
represented as the number of ‘human years’ which constitutes a ‘divine year’.
In the book, The Arctic Home in the Vedas (1903), B.G. Tilak wrote that: The
writers of the Puranas, many of which appear to have been written during the
first few centuries of the Christian, era, were naturally unwilling to believe
that the Kali Yuga had passed away… An attempt was, therefore, made to extend
the duration of the Kali Yuga by converting 1,000 (or 1,200) ordinary human
years thereof into as many divine years, a single divine year, or a year of the
gods, being equal to 360 human years… this solution of the difficulty was
universally adopted, and a Kali of 1,200 ordinary years was at once changed, by
this ingenious artifice, into a magnificent cycle of as many divine, or 360 ×
1200 = 432,000 ordinary years (Lokamanya Bâl Gangâdhar Tilak, The Arctic Home
in the Vedas, Messrs. TILAK BROS, 1903). However, certain important
Sanskrit texts such as the Mahabharata (The Mahabharata, tr. Kisari Mohan Ganguli,
Book 12: Santi Parva, Section CCXXXI) and the Laws of Manu (Laws of Manu, tr.
G. Buhler, Chapter 1 verses 69, 70, 71), which scholars believe were composed
earlier than the Puranas, still retain the original value of the Yuga Cycle as
12,000 years. The Mahabharata explicitly mentions that the Yuga Cycle duration
is based on the days and nights of human beings. The Zoroastrians also believed
in a Cycle of the Ages of 12,000 years’ duration. The Great Year or Perfect
Year of the Greeks was variously represented as being of 12,954 years (Cicero)
or 10,800 years (Heraclitus) duration. Surely, the Yuga Cycle cannot be of
different durations for different cultures. In the book The Holy Science
(1894)Sri Yukteswar clarified that a complete Yuga Cycle takes 24,000 years,
and is comprised of an ascending cycle of 12,000 years when virtue gradually
increases and a descending cycle of another 12,000 years, in which virtue
gradually decreases. Hence, after we complete a 12,000-year descending cycle
from Satya Yuga -> Kali Yuga, the sequence reverses itself, and an ascending
cycle of 12,000 years begins which goes from Kali Yuga -> Satya Yuga.
Yukteswar states that, “Each of these periods of 12,000 years brings a complete
change, both externally in the material world, and internally in the
intellectual or electric world, and is called one of the Daiva Yugas or
Electric Couple” (Sri Yukteswar, The Holy Science, 1894, xi). The
24,000-year duration of the complete Yuga Cycle closely approximates the
Precessional Year of 25,765 years, which is the time taken by the sun to
‘precess’, i.e. move backwards, through the 12 Zodiac constellations.
Interestingly, the Surya Siddhanta specifies a value of 54 arc seconds per year
for precession, as against the current value of 50.29 arc seconds per year.
This translates into a Precessional Year of exactly 24,000 years! This means
that the current observed value of precession may simply be a temporary
deviation from the mean. The concept of an ascending and descending cycle
of Yugas is still prevalent among the Buddhists and Jains. The Jains believe
that a complete Time Cycle (Kalachakra) has a progressive and a regressive
half. During the progressive half of the cycle (Utsarpini), there is a gradual
increase in knowledge, happiness, health, ethics, and spirituality, while
during the regressive half of the cycle (Avasarpini) there is a gradual
reduction in these qualities. These two half cycles follow each other in an
unbroken succession for eternity, just like the cycles of day and night or the
waxing and waning of the moon. The ancient Greeks also appear to have
believed in an ascending and descending Cycle of Ages. The Greek poet Hesiod
(c. 750 BCE – 650 BCE) had given an account of the World Ages in Works and
Days, in which he inserted a fifth age called the ‘Age of Heroes’, between the
Bronze Age and the Iron Age. In Hesiod’s Cosmos, Jenny Strauss Clay writes:
Drawing on the myth in Plato’s Statesman, Vernant also claimed that the
temporal framework of Hesiodic myth, that is, the succession of races, is not
linear but cyclical; at the end of the age of iron, which he divides into two,
the cycle of races starts again with a new golden age or, more likely, a new
age of heroes, as the sequence reverses itself…Vernant himself offers a
solution when he remarks that “there is not in reality one age of iron but two
types of human existence” (Jenny Strauss Clay, Hesiod’s Cosmos, Cambridge
University Press, 2003, 83). This is very interesting. Jean-Pierre
Vernant, who is a highly-acclaimed specialist in ancient Greek culture,
believes that the Cycle of the Ages reverses itself as per Hesiod’s account.
Not only that, he states the Iron Age has two parts, which corresponds to
Yukteswar’s interpretation in which the descending Kali Yuga is followed by the
ascending Kali Yuga. We can surmise, in this context, that the ‘Age of Heroes’,
which immediately followed the Bronze Age in Hesiod’s account, must be the name
ascribed by Hesiod to the descending Kali Yuga. The evidence from
different sources supports the notion of a complete Yuga Cycle of 24,000 years,
comprised of an ascending and descending cycle of 12,000 years each. This
brings us to the question of the relative durations of the different Yugas in
the Yuga Cycle, and the transitional periods, which occur at the beginning and
end of each Yuga, and are known as Sandhya (dawn) and Sandhyansa (twilight)
respectively. The values in the following table are provided in the Sanskrit
texts for the duration of the Yugas and their respective dawns and twilights:
Links:
https://grahamhancock.com/dmisrab6/
https://www.bibhudevmisra.com/2012/07/end-of-kali-yuga-in-2025-unraveling.html?m=1
https://www.geopolitica.ru/en/article/end-kali-yuga-2025-unravelling-mysteries-yuga-cycle
◆ Shiv Parsaud & Maik Sulmaya Phersson:
Shiv Parsaud in his reasearch paper on Kaliyuga talks about the end of Kaliyuga in 2025 while referring to the book 'Summa Dharamalogica' by Maik Sulmaya Phersson who makes this conclusion on the baisis of Bhibhu Dev Misra's research.
◆ आर्यभट्ट :
ऊपर दी गयी रीसर्च में ही यह बताया गया है कि अलबेरुनी ने लिखा है कि ब्रह्मगुप्त के अनुसार, आर्यभट्ट ने युगकाल समान माने है। बाल गंगाधर तिलक भी लिखते हैं कि आर्यभट्ट ने चारों युगों को समान वर्षो का माना है। दूसरी ओर सूर्य सिद्धान्त में बताई गई आर्क चाल से काफी हद तक 24000 वर्षो का चतुर्यग काल सिद्ध होता है।
विदेशी और अन्य प्रमाणों के आधार पर यह कहा जा सकता है कि 3000 वर्षों का (300 वर्ष मिलन काल सहित) प्रत्येक युगकाल होता है, जो मिलकर आरोही और अवरोही क्रम में 24000 वर्षों में चक्र पूरा करते हैं, जिसके चार अवरोही क्रम है - 12676 BC, 9676 BC, 6676 BC, 3676 BC, जबकि आरोही क्रम है - 676 BC (कलियुग द्वापर की ओर बढ़ना शुरू) [यानी 2025 AD में कलि द्वापर से टकरा कर समाप्त हो जायगा और फिर 300 वर्ष मिलन काल के बाद पूर्णतया द्वापर में बदल जायगा], 2325 AD (द्वापर शुरू), 5325 AD, 8325 AD.
यानी युगकाल तिथि तय करने की उपेक्षा की जाए और गैर-आर्यभट्टीय तथ्यों की मानें तो आर्यभट्ट का 2025 (कलियुग अंत) से यही संबध निकलता है।
आर्यभट्ट कहता है कि 3/4 युग (तत्कालीन) को समाप्त हुए, 3600 वर्षकाल व 23 वर्ष बीत चुके हैं, जब मेरा जन्म हुआ था. इससे यह समझ में आता है कि 3676 BC कलियुग आरम्भ - 3600 वर्ष = 76 BC -23 वर्ष = 53 BC में आर्यभट्ट का जन्म हुआ। जबकि ऐतिहासिक साक्ष्य (अप्रमाणिक ही सही) आर्यभट्ट की जन्मतिथि को अलग अलग बताते हैं (क्योंकि आम तौर पर कलियुग को 3102 BC से आरंभ माना जाता है परंतु इसका भी कोई ठोस सबूत नहीं हैं) जैसा नीचे भी लिखा है:
■ युग परिवर्तन ■
सतयुग आगमन या युग परिवर्तन या असाधारण बदलाव (वर्तमान काल
से एकदम उलट) बस आने वाले कुछ वर्षों में ही धरती पर होने वाले हैं, उनके बारे में लगातार अलग अलग तरह से भविष्यवाणीयां सामने
आ रही हैं और चेताया जा रहा है जैसे:
◆ Yogi Rajat Mehta: He is a follower of spirituality and considers Paramhansa Yogananda as his teacher. On the basis of his experience and knowledge, he says that Kaliyuga will end and Satyuga will begin soon. This transition of ages (Yuga Parivartan) will be from year 2021 to 2030. It will be due to cosmic change, reduce in magnetic field of earth and earth’s floating movement into a new belt (photon belt) or anew cloud or new area of energy which will increase the frequency of earth and humans will also require to increase their frequency to match with it. This will be the Yuga Parivartan. He also says that everything big in this world is going to get done by the end of this decade. That is why he asks why Elon Musk wants to start civilization in sapce by 2028 at any cost, why World Economy Forum (WEF) head Klaus Schwab wants to have Great Reset by 2030, why Transforming our world: the 2030 Agenda for Sustainable Development or Envision 2030 or Agenda 2030: Slow down population growth by UNO, all are to be achieved by 2030, why only 2030, why not 2040 or 2050?
https://www.youtube.com/watch?v=mJMrYXrcPXw&t=393s
https://www.youtube.com/watch?v=b3Wm655XzvE
◆ ज्योतिष हिमांशु: इन्होनें 2022 में कहा था कि कलियुग 2022 में ही समाप्त है. 432000 वर्ष बाद कलियुग समाप्त होगा, ये गलत धारणा और गणना है. 2043-2050 बहुत महत्वपूर्ण समय है, कलियुग समाप्त हो चूका है और संधि चल रही है.
https://www.youtube.com/watch?v=wYxys8_Tuxs
◆ राकेश शर्मा: यह एक अध्यात्म गुरु व ज्योतिष हैं और कहते हैं कि कलयुग बस समाप्त हो चुका है, केवल थोड़ा सा बचा है और सगयुग आरम्भ होने वाला है। वह यह भी कहते हैं कि सत्य के पक्ष में खड़े लोग ही इस महाविनाश में बच पायंगे और असत्य वाले समाप्त हो जायँगे, जैसे महाभारत के समय में पांडव सुरक्षित रहे और कौरव मरते रहे थे। आने वाले समय में भारत से एक गुरु का उदय होगा जो संसार को बदल देगा। भारत हमेशा रहेगा। युग परिवर्तन होगा। परमात्मा करवाएगा।
https://www.instagram.com/reel/CuufVF3R11H/?igshid=MTc4MmM1YmI2Ng%3D%3D
● ज्योतिष राजन खिल्लन: राजन खिल्लन कहते हैं कि जिस वर्ष में अधिक मास और ग्रहण एक साथ आते हैं तो वो वर्ष बहुत खराब होता है। 2026 में अधिक मास होगा और 4 ग्रहण होंगे। मार्च से अक्टूबर 2026 में बहुत बुरा समय होगा पूरे विश्व के लिए, विशेष तौर पर भारत के लिए। भुखमरी, राजनैतिक अस्थिरता, बाढ़, भूकंप, युद्ध। वैसे ये समय 2019-20 से ही चल रहा है। महाभारत युद्द के समय भी अधिक मास और 4 ग्रहण हुए थे। संभवत ऐसा फिर से अर्थात अधिक मास और ग्रहण पैदा होना 2047 में होगा और शायद 2047 में ही कलि जन्म लेगा। कलि को मारने कल्कि अवतार आएगा। कलियुग समाप्ति में लाखों वर्ष बाकी नहीं हैं।
https://www.youtube.com/shorts/j5ShP7dkFPU?feature=share7
https://www.youtube.com/watch?v=rrOF0edjFn8
(37 मिनट के बाद से देखिए)
● डॉ. प्रवीण भाटिया: ये शीघ्र युग परिवर्तन लाने के लिए प्रयासरत हैं। इनके मतानुसार युग परिवर्तन वर्तमान हालातों को बदलना है। यह पौराणिक लाखों वर्षो के कालों की बजाय युक्तेश्वर गिरी और जग्गी वासुदेव जैसे विद्वानो की काल गणनाओं पर विश्वास रखते हैं और मानते हैं कि यह कलियुग नहीं चल रहा। राम को त्रेता, कृष्ण को द्वापर और बुद्ध को कलियुग में जन्म मानते हैं। अखंड भारत और न्यू वर्ल्ड ऑर्डर जैसे मुद्दों को भी इससे जोड़ते है। मानव के 5th dimension में जाने की बात करते है।
https://youtube.com/@great.awakening?si=O7cDn6RERiHKaAqJ
● विजय कुमार: यह भी युग परिवर्तन या नए युग की विचारधारा में विश्वास रखते है।
https://www.youtube.com/watch?v=m_Qa0SDzZMo&t=216s
◆ शिवसूत्रम: शिवसूत्रम
नामक एक योग भी जल्दी ही युग परिवर्तन अर्थात कलियुग खतम होने कि और सतयुग
आने कि बात करता है और कहता है कि ये परिवर्तन स्वयं लोगों पर निर्भर करता
है। वह यह भी कहता है कि युकतेश्वर गिरी के अनुसार 19 वी सदी के अंत तक ही
कलियुग खतम हो गया था और अभी संधि चल रही है जिससे हम कुछ ही दशकों में
निकलने वाले हैं।
https://www.youtube.com/watch?v=Y35j30dsAdo
https://www.youtube.com/watch?v=H2Vm3Ytb-4c&t=571s (1.45 Minutes onwards)
https://www.youtube.com/watch?v=FdxbVsZoHtY
https://www.youtube.com/@shivsutram/videos
● K the Last Warrior नाम से चैनल चला रहे साधक मोरगन भी युग परिवर्तन, कलियुग से सतयुग में जाने और नए वर्ल्ड ऑर्डर आने का, समर्थन करते हैं। इनके चैनल पर लोग ऐसे ही विचार ररखने वाले बहुत से लोग आ कर विमर्श करते हैं।
https://www.youtube.com/@kthelastwarrior/videos
https://www.youtube.com/watch?v=5KyhzAhE6mc
https://www.youtube.com/watch?v=sH-9pW3-isw
https://www.youtube.com/watch?v=0wBtQBd8A0g
स्वामी रुपरेश्वरानंद भी कलियुग समाप्त होने जा रहे है कि बात करते हैं।
https://www.youtube.com/watch?v=oCbJMyK-bb0
पुलिन पंड्या: लाखो साल बाद नही अभी हो रहा कलियुग का अंत.
https://www.youtube.com/watch?v=idAycw0pfMQ
पीपल बाबा कहते हैं कि वैज्ञानिक आधार पर कह रहे हैं कि 2020 से 2030 तक विनाश ही विनाश है।
https://www.youtube.com/watch?v=TtzNlrDjBCA&t=216s
इस चैनल पर जल्दी ही होने जा रहे महाविनाश, विश्वयुद्द की भी कई विद्वान, लोग बात करते हुए नजर आते हैं.
https://www.youtube.com/watch?v=U0nfDUeql8o
ज्योतिष ऋषीपार्थ विनुकोंडा और स्वामी दिव्य सागर कहते हैं कि कल्कि अवतार का जन्म हो चुका है।
https://www.youtube.com/watch?v=CsuSpBsU8-M
https://www.youtube.com/watch?v=bWbKye8uM6I
■ बड़ा परिवर्तन ■
● सद्गुरु जग्गी वासुदेव
सद्गुरु कहते हैं कि 2026 तक एक दुर्लभ खगोलीय घटना से धरती पर कुछ आसाधरण होगा। सूरज के धब्बों में बहुत बदलाव आने वाला है। ऐसे बदलाव पर मानव चेतना में भी बदलाव आता है। जैसे पूर्णिमा या अमावस्या के दिनों में मानव मानसिकता में बदलाव होता है। ये नियंत्रित नहीं बल्कि दिशाहीन बदलाव होंगे। ये तीव्रता लाएंगे। अधिकतर लोगों का इसका एहसास नहीं होगा। ये धब्बे एक अस्थिर ऊर्जा पैदा करेंगे। असंतुलित और असंतुलित हो जाएंगे, जो ध्यान में है वो और ध्यान में चले जाएंगे, जो कोमल है वो और कोमल हो जायेंगे, जो उन्मत या विक्षिप्त हैं, वे और अधिक पागल हो जाएंगे। ये हमारे लिए कैसे काम करेगा, ये हम पर निर्भर करेगा। इसके लिए एक योजना चाहिए। ये योजना हमारे पास हैं। इसे हम अपने अनुसार ढाल सकते हैं। ये पहले भी होता रहा है पर इस बार बड़े स्तर पर होगा और बहुत अलग होगा। इस समय मानव चेतना को अधिक ऊपर उठाया जा सकता है। जैसे हवा के बहाव अनुसार, जहाज उड़ा भी सकते हैं और क्रैश भी करवा सकते हैं। हमें हवा के अनुसार काम करना है। हमारे पास ऊपर उठने की योजना है सो हमारे साथ चलिए।
https://www.youtube.com/watch?v=izlJADiLlJY&t=61s
● डॉ. विकास जगदले।
यह युग परिवर्तन होने की और 2025-27 तक अत्यधिक तबाही होने की बात करते हैं। प्राकृतिक आपदा आने की और उसके लिए तैयारी करने को भी कहते हैं। इनके अनुसार आने वाले समय में बहुत बड़ी तबाही होगी और इसके बाद पुनर्निर्माण होगा। नए वर्ल्ड ऑर्डर का भी उल्लेख करते हैं।
https://www.instagram.com/reel/CtlNB9mg5vv/?igshid=MTc4MmM1YmI2Ng%3D%3D
https://www.instagram.com/reel/CtZTKTSgWFp/?igshid=MTc4MmM1YmI2Ng%3D%3D
● मनोज कुमार गुप्ता
यह एक ज्योतिष हैं और 2025 में युग परिवर्तन की बात कहते हैं। परन्तु वह इसका मार्ग हिंसा व युद्ध बताते हैं. इस सन्दर्भ में ये इस्लाम की बात भी करते हैं. ये कहते हैं कि आज इस्लाम में खुली सोच आई है और आगे बड़ा परिवर्तन होगा. इस्लाम की नई विचारधारा व एक नया रूप दिखेगा और यह विश्व में शांति की स्थापना में अपनी भूमिका निभाएगा. हर धर्म की कट्टर विचारधाराओं को छोड़कर, सर्वधर्म सम्मान व मानवता को आगे रखना पड़ेगा. ये विचारधारा 2022 से आरम्भ होने के बाद, 2023 से प्रभावी होगी और 2027 तक सभी जगह फैल जाएगी. युग परिवर्तन होगा. नयी विचारधारा में इस्लामी कट्टरपंथ नहीं होगा, सनातन-पुरातन भारतीय संस्कृति के साथ तालमेल बिठाने वाली होगी. ये धर्म परिवर्तन नहीं होगा, बल्कि विचारधारा परिवर्तन होगा. हर धर्म के कट्टरवादी सोच वालों को छोड़ कर विश्व आगे बढेगा. सभी एक मंच पर आएंगे और विश्व को राह दिखायंगे, इसमें सबसे आगे भारतीय सनातन विचारधारा होगी.
https://www.youtube.com/watch?v=katXP-GpFSU
■ धर्म विशेष के लिए परिवर्तन ■
● पूरी शंकराचार्य
श्रीपुरीशंकराचार्य
जी महाभाग कहते हैं: हृदय से
बोल रहा हूँ कि गुरु, गोविंद, ग्रँथ ही मेरा
जीवन है। भगवान को जो मुझसे कराना है, यंत्रवत मुझे आगे कर देते
है। मेरा अपना कोई संकल्प नही है, ना मेरी कोई योजना है. ईश्वर, सिद्ध ऋषि, मुनि, पितर, ये सब जो करना चाहते हैं, उनके रुख को देखकर मैं स्वयं
को निमित्त मात्र बना देता हूँ. सारी
योजना ऊपर होती हैं, ब्रह्मलोक में। जिस व्यक्ति से जिस कार्य की सिद्धि होनी है,
ये ईश्वरीय संविधान है
कि उसके सहयोगी की प्राप्ति जब होनी चाहिए
तब हो ही जाती है। (अर्थात शंकराचार्य अनुसार उन्हें भगवान/नियति ने किसी विशेष कार्य के लिए चुना हुआ है और वह जानते हैं की वही इस कार्य को अंजाम देंगे).
अभी बहुत कुछ होना है, आप सुन लेंगे तो भी चौक
जाएंगे। तो मैंने सङ्केत किया कि अभी क्या
हुआ है? कुछ नहीं, अभी तो बहुत कुछ होना बाकी है, भारत
जैसा दिख रहा है, वैसा नही रहेगा। असंभावित ढंग से
(औरों के लिए असंभावित) घटना घटेगी। विश्व में भी बहुत विचित्र
परिवर्तन होगा। आगे जो कुछ होना है, उसकी कल्पना तक नही कर सकते हैं, उसके लिए सवा
करोड़ सैनिक दिव्य लोक में तैयार हैं। हमारी अन्दर से तैयारी है, हथियारों आदि की नहीं. थोड़े समय
बाद कोई और घटना घटने वाली है. वेश यही रहेगा,
पद यही रहेगा लेकिन किसी और मोर्चे पर होगें और आगे विश्व स्तर पर आर-पार का युद्ध
भी होगा। (अर्थात शंकराचार्य संभवतः कुछ इसी प्रकार के परिवर्तन का बीड़ा उठाए हुए हैं).
साढ़े तीन वर्ष में भारत हिन्दूराष्ट्र बनेगा। जो हमारे मुख से निकल जाता है, वह होकर ही रहता है (जुलाई, 2021 का वक्तव्य, यानी लगभग 2025 तक). भारत मे पहले विप्लप होगा ओर फिर भारत अपना वास्तविक स्वरूप यानि हिन्दुराष्ट्र बनेगा. भारत का अखंड होना, हिन्दूराष्ट्र होना या एशिया महाद्विप का हिन्दूद्विप होना, मेरे लिए असंभव नही हैं (अर्थात उन्हें यह असंभव नहीं लगता).
● देवकीनंदन ठाकुर
कथावाचक देवकीनंदन ठाकुर भी पुरी शंकराचार्य जी को (और भविष्य मालिका पुराण - संत अच्युतानन्द को) रेफर करते हुए कहते हैं कि भविष्यवाणी है कि कुछ ही वर्षों में अधर्मियो का सर्वनाश हो कर, भारत को पुनः सनातनी शासनतंत्र प्राप्त होगा और ऐसा 2024-2026 में होगा. एक जगह ऐसा कहा गया है कि देवकीनंदन ठाकुर जी के अनुसार कलियुग 2024-2027 तक अंत हो रहा मगर उन्होंने कंहीं भी अपने मुख से कलियुग शब्द का प्रयोग नहीं किया है बल्कि बस एक बड़े परिवर्तन की ही बात करी है.
https://www.facebook.com/reel/871500487425263?mibextid=6AJuK9&s=chYV2B&fs=e
https://www.youtube.com/watch?v=o1G1W3BaSvU
● संत रामपाल
कबीर पंथी संत रामपाल भी 2025 तक एक बड़े परिवर्तन या अवतार की बात करते आये हैं। तुलसीदास बाबा जय गुरुदेव ने एक बड़े महापुरुष/अवतार के भूतकाल में जन्म लेने की बात/ भविष्यवाणी की थी। अब संत रामपाल के भक्त संत रामपाल पर इस बात को फिट करते हैं। इनके र्तक, तथ्य, अवतार आदि के दावे गलत साबित हो चुके हैं। संत रामपाल के भक्त सभी धर्मो के एक ही धर्म में समाहित होने का दावा भी करते हैं जो की मानव या कबीर पंथ होगा. इनका मानना है है कि परमात्मा नामान्तरण करके चारों युगों में आए है।
https://www.youtube.com/watch?v=hpHWTsV_Spg
https://www.youtube.com/watch?v=bpfckgH7ZeM
[अन्य धर्मों में आगामी युग परिवर्तन धारणा]
● Christianity:
Some Christians or Christian eschatology (a branch of study that deals with the doctrine of the Second Coming of Christ and the End/Last Things - whether of the end of an individual, age, world, Kingdom of God and the) organizations believe that Great Tribulation (trouble or suffering) – a time period mentioned by Jesus or the Time of End/ End Times is going to begin from 2025. As per Dead Sea Scroll, they also claim that final 50 years of an age (2025 – 2075 in this case) sees the maximum fulfillment of prophecies (last time in 25 – 75 AD when many noteworthy things took place in connection with Jesus and Christianity). They also see some kind of ties between Hindu, Jewish and Christian understandings of such prophecies like Kaliyuga and Kalki.
https://www.youtube.com/shorts/lZuaiWiUVOE
https://www.youtube.com/watch?v=tPEFXlTVbMA
https://www.youtube.com/watch?v=RMok6QEosmw
https://www.youtube.com/watch?v=5QmNstB11bY
https://www.youtube.com/watch?v=JqdF3BqR5u8
https://www.youtube.com/watch?v=sh-jV1zO8uc
https://www.youtube.com/watch?v=wI8daH8CU7A
https://www.youtube.com/watch?v=UDI2OwbC4SM
● Islam:
On the basis of Quran and Ahadith, it hase been proven by Allama Syed Abdullah Tariq Sahab, President of WORK (World Organisaiton of Relgions & Knwoldge) that Yuga Parivartana will take place in 2026 or 40 lunar years after it (conditional).
◆ K the Last Warrior नामक चैनल के ऐडमिन मोरगन (हिन्दू धर्मी) ने भी अल्लामा साहब के मत का समर्थन किया है।
https://youtu.be/Nsr56bGDiZc?si=AnlUjdJXAPQgQ4r5
◆ ज्योतिष मुकेश वत्स भी अल्लामा साहब के मत का समर्थन करते हैं मगर ये इस्लाम अनुसार बताए परिवर्तन की बजाय 2026 में इस्लाम के अंत की बात कर रहे हैं। ऐसा लग रहा है कि जैसे आज के माहौल में जारी मजबूरी के मद्देनजर यह जल्द होने वाले परिवर्तन वाली सही बात लोगों से छिपा रहा हैं।
https://www.facebook.com/watch/live/?ref=watch_permalink&v=959527472313180
(58 Minutes owards)
https://www.youtube.com/@MukeshVats/videos
भारत में होने वाली क्रांति प्रतिक्रांति पर शाह वालीलुल्लाह देहलवी रह., मौलाना अली मियां नदवी, मौलाना शम्स नवेद उस्मानी, डॉक्टर इसरार अहमद, मौलाना सज्जाद नोमानी, मौलाना सलमान नदवी जैसे उलेमा भी काफी कुछ कह चुके हैं।
● जैन :
2025 तक वह समय आने वाले है जब हर घर में भयानक रोग का सदस्य जरुर होगा.
https://www.instagram.com/reel/Cu9DF9QvMB4/?igshid=MTc4MmM1YmI2Ng%3D%3D
[सतयुग आगमन या युग परिवर्तन क्रांति के विरुद्ध जारी प्रति-क्रांति]
अक्सर क्रांति को कुचलने के लिए प्रति-क्रांति आती है. बहुत से विद्वान, धार्मिक गुरु, ज्योतिष आदि इस प्रति-क्रांति के आने की भविष्यवाणी कर रहे हैं या अनुमान लगा रहे हैं जैसे:-
◆ राम विलास वेदन्ती (धार्मिक गुरु एंव पूर्व भाजपा सांसद):
अभी तो 300 सीट है मगर 2024 के चुनाव में भाजपा 400 सीट के पार जाएगी और उसके बाद राम जन्म भूमि पर केसरिया ध्वज लहराएगा और संविधान में हिन्दू राष्ट्र घोषित होगा। जिसकी कल्पना गोलवलकर, हेडगवार, अशोक सिंघल, महंत दिग्विजयनाथ, महंत वेदनाथ, शंकराचार्य शान्तानन्द सरस्वती जी ने की थी।
https://www.youtube.com/shorts/RAZlORs4UyQ
https://www.facebook.com/watch/?v=1227388794778511
◆ ज्योतिष सुशील कुमार सिंह (अयोध्यावासी):
यह भारत की कुंडली अनुसार बताते हैं कि सितंबर 2025 से भारत मंगल की दशा में होगा और मुखरता, उन्माद, राष्ट्रवाद हावी होगा। 2025 के बाद हिन्दूराष्ट्र बनेगा। संघ का हस्तक्षेप सरकार में बढ़ेगा। योगी 2025 से 2027 के बीच प्रधानमंत्री बन सकते हैं। कुछ महीने के लिए अमित शाह भी प्रधानमंत्री बन सकते है। कोई विवाद नहीं होगा स्तिथियों को ले कर।
https://www.youtube.com/watch?v=S60VCUrvO6g
https://www.youtube.com/@Astrosushil/videos
https://www.youtube.com/watch?v=gaWxraU9eT4
◆ आचार्य डॉ अशोक कुमार मिश्र:
ब्रहस्पति 19 जून 2014 से राशि चक्र में आया था और यह चक्र 31 अक्टूबर 2026 में पूरा होगा। 2026 में हिन्दू राष्ट्र बनने की पूरी संभावना है।
https://www.youtube.com/watch?v=tWlDzwI6fo0
(watch from 9 – 11 minutes)
◆ श्री संत बेत्रा अशोक जी :
2024 में मोदी 400 सीट पार करेंगे। योगी 2027 तक मुख्यमंत्री रहेंगे मगर उसके बाद ऐसा कुछ होगा कि योगी प्रधानमंत्री अवश्य बनेंगे। हालांकि मोदी 2030 तक प्रधानमंत्री रहेंगे। हिन्दूराष्ट्र के प्रथम प्रधानमंत्री योगी ही होंगे। भारत विश्वगुरु बनेगा।
https://www.youtube.com/shorts/KULn3tvmf2Q
https://www.youtube.com/watch?v=ir0tr4t8KTQ
https://www.youtube.com/watch?v=o5vPZdnhxFo
https://www.youtube.com/watch?v=qNaqka1sMOk
https://www.youtube.com/watch?v=gbLKwG3zuzk
◆ ज्योतिष प्रशांत कपूर:
अगस्त – सितंबर 2024 तक हिन्दू राष्ट्र की नींव रख दी जाएगी।
https://www.youtube.com/watch?v=cTOG9m5AEwE
(watch from 15 min. onwards)
◆ ज्योतिष निशांत भारद्वाज:
2032 से 2034 में योगी भारत को हिन्दू राष्ट्र घोषित कर देंगे। दुनिया सनातन धर्म में शामिल
हो जाएगी, न कि इस्लाम। 2027 तक मोदी पीएम रहंगे। 2028 तक योगी पीएम बन जाएंगे। 2080-88 में युग परिवर्तन संभव है परंतु कलियुग तब भी समाप्त नहीं होगा और न ही सम्पूर्ण विनाश होगा। सोच का परिवर्तन होगा। 2025-28 तक हम लड़ेंगे मरंगे और इसके बाद 50 साल तक शांति युग होगा। फिर भयानक युद्द होगा और इसके बाद फिर अंत में 1000 साल की शांति होगी।
https://www.youtube.com/watch?v=YU4QzQaUMy4
https://www.youtube.com/watch?v=hSrTMCCAphw
https://www.youtube.com/watch?v=OCU4RptIrwM
https://www.youtube.com/watch?v=IeXpMApBTVI
● प्रति-क्रांति (राजनैतिक):-
क्रांति को कुचलने के लिए तत्पर प्रति-क्रांति चरमपंथ या कट्टरपन का सहारा लेती है. इनके मनसूबें पहले से ही तय्यार होते हैं बस निर्धारित समय पर अमली जामा पहनना बाकी होता है. यह डेडलाइन कई कारण वश आगे-पीछे होती रहती है. यह एक प्रकिया के माध्यम से किया जाता है और शुगुफें छोड़ कर धीरे धीरे जनता का माइंड वाश - मेकअप भी लगातार किया जाता है. फिर एक दिन जनता भी स्वयं कह देती है, हमें यही चाहिए.
नोट: हिन्दू राष्ट्र और अखंड भारत बनाने की योजना या उद्देश्य एक सदी पुराना है और दशकों से इस पर काम हो रहा है. मज़बूरी, आवश्यकता और सत्ता आदि के मद्देनज़र इसकी डेड लाइन आगे पीछे होती रही है.
नोट: विभिन्न नेताओं द्वारा राजनीती में ऐसे बयान देना कोई नयी बात नहीं है. मगर अमित शाह जिस संगठन, पार्टी, विचारधारा से संबंध रखते हैं, उनके बुनियादी इरादें, लगातार जारी समबंधित घटनाओं, राजनैतिक फैसलों और समाज में फैलाई जा रही नफरत आदि को मिलाकर देखने पर ऐसे बयानो, भावी योजनायें व उद्देश्यों को समझना कोई मुश्किल काम नहीं है.
नोट: प्रोपगंडा और समय समय पर ऐसे बयान या शगुफें छोड़ कर जनता का माइंड वाश किया जाता है कि अब चुनावों की आवश्यकता नहीं है, देश पर खर्चे का बोझ पड़ता है, विपक्ष देशद्रोही और नाकारा है, वर्तमान शीर्ष नेतागण ही सर्व उपयुक्त हैं. ऐसा इतिहास में हो चूका है। आज भी सोशल मिडिया पर ऐसा प्रचार होता हुआ और और इसको समर्थन मिलते हुए दिख जायगा.
नोट: लोगों के माइंड मेकअप करने का काम ज़ोर शोर से शुरू हो गया है। फ़िलहाल बहलाने के लिए आज़ादी के 100 साल बाद 2047 में नए संविधान को अपनाने की बात खुल कर कहनी शुरू हो गयी है। वजह पुराने कोलोनियल कानून बता रहे हैं। कहने वाला PM इकॉनमी एडवाइजरी के हेड बिबेक देबरॉय हैं। ज़ाहिर है टारगेट डेट पहले की ही है। साथ में 2047 तक भारत को अपर मिडल इनकम देश बनाने का लॉलीपॉप भी दिया जा रहा है। यह शायद कवर फायर या रैपर है। संविधान बदलने पर अब ऐसे और भी बयान आ रहे हैं। पहले इक्का-दुक्का ही आते थे।
नोट: इसके अलावा भारत और विदेशों में अनगिनत लोग, राजनीतिज्ञ, समाचार एजेंसिया आदि है जो भारत में आ चुके या आने जा रहे फासीवाद के ऊपर अपनी राय रख चुके हैं। ऐसा राय रखना और कहना अब एक सामान्य बात हो चुकी हैं।
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【Decoding this Prediction of Newton on 2060】
● Psalm 90:4: For a thousand years in thy sight are but as yesterday when it is past, and as a watch in the night.
(This verse expresses that time is different for God compared to humans as a thousand years for humans is just a day for God.)
● 2 Peter 3:8: But, beloved, be not ignorant of this one thing, that one day is with the Lord as a thousand years, and a thousand years as one day."
(It also emphasizes the same thing, particularly regarding prophecy and the return of Christ.)
● Numbers 14:34: After the number of the days in which ye searched the land, even forty days, each day for a year, shall ye bear your iniquities, even forty years, and ye shall know my breach of promise.
(This verse supports the "day-year principle", where God assigns one prophetic day as one literal year. This verse is about Israelites when they left Egypt for Canaan, the promised land)
● Ezekiel 4:5-6: For I have laid upon thee the years of their iniquity, according to the number of the days, three hundred and ninety days: so shalt thou bear the iniquity of the house of Israel; And when thou hast accomplished them, lie again on thy right side, and thou shalt bear the iniquity of the house of Judah forty days: I have appointed thee each day for a year.
(Here Ezekiel’s prophetic actions symbolize historical time in years.)
[Ezekiel was a prophet to the Israelites (both Judah and Israel) during the Babylonian exile. Ezekiel was commanded by God to warn the Israelites of the coming destruction of Jerusalem and their prolonged punishment due to their sins. He had to lie on his side for 390 days, representing the years of the people's sins for the House of Israel (Northern Kingdom). It symbolized the period of Israel’s rebellion and punishment (possibly from King Jeroboam's idolatry until the fall of Samaria in 722 BC). Then he lay on his right side for 40 days, representing the years of sin for the House of Judah (Southern Kingdom). It symbolized Judah’s sins and coming exile (often connected to the destruction of the First Temple in 586 BC)]
● Daniel 7:25: And he shall speak great words against the most High, and shall wear out the saints of the most High, and think to change times and laws: and they shall be given into his hand until a time and times and the dividing of time.
(The verse describes a figure who will oppose God, persecute believers, and change laws and times. Most of the Christians believe that this verse is related to prophecies about the Messiah, Antichrist and the end times.)
{Many scholars, including Isaac Newton, used this to interpret "a time (1 year) + times (2 years) + dividing of time or half a time (1/2 year)" (so total 3.5 years) as 1,260 days (3.5 × 360, a biblical year consists 360 days) which make it 1260 years as per Prophetic day-year principle. Newton started counting from the year 800 AD, when the Holy Roman Empire was established (this was the base for his calculation and the result may vary if we change the base year). Adding 1,260 years to 800 AD gave him the year 2060. He did not claim the world would end but rather believed it would mark a new divine order or era, a spiritual and historical shift, a turning point or transformation in human civilization, possibly involving the Second Coming of Christ. Newton was an unorthodox Christian and relied on biblical prophecies for these calculations.}
[The Jewish lunar calendar has about 354 days per year, which means 3.5 years is 1,239 days as per Jewish understanding. However some other Christian scholars believe that this verse refers to 3.5 literal years (equal to 42 months or 1,260 days) which fits with similar end-times prophecies in Revelation 11:2-3, 12:6, 13:5, where 42 months or 1,260 days time period is mentioned. Some connect this period to the reign of the Antichrist during a final 7 year tribulation, with the last half (3.5 years) being the Great Tribulation. Some historians and Jews scholars believe this prophecy was fulfilled in the reign of Antiochus IV Epiphanes, a Greek king who outlawed Jewish practices, desecrated the Temple, persecuted the Jews and forced Greek worship around 165 BC which lasted around 3.5 years, ending with the Maccabean Revolt and the rededication of the Temple. Some Protestant like Martin Luther saw this as Roman emperors persecuting Christians (Nero, Domitian, etc.) and the Pope as corrupt and changing times laws. This led to the interpretation that 1,260 years represent the period of church corruption and persecution, often from 538 AD to 1798 AD. Some scholars see this as a symbolic expression representing an incomplete or interrupted period of suffering or as a temporary period of hardship before God’s kingdom is fully established.]
आसान शब्दों में कहूँ तो इस भविष्यवाणी के लिए बाइबिल के एक वर्स को आधार बनाया गया है। इस में एक अत्याचारी व्यक्ति के अत्याचारी शासन की अवधि बताई गई है जिसके बाद एक बदलाव आएगा। ये घटना हो चुकी है या आइंदा होगी, हमें पता नहीं। इस अवधि को तय करने के लिए अलग अलग मानक चुने गए हैं जो हर विद्वान के अनुसार अलग अलग हो सकते हैं और जिसकी वजह से परिणाम भी अलग अलग होंगे। न्यूटन ने जो मानक चुने हैं, उनमें कई सवाल उठ रहे हैं, इसलिए ये भविष्यवाणी गलत लग रही है। न्यूटन महान वैज्ञानिक था मगर धर्मिक तौर पर उसकी यह रिसर्च गलत लग रही है। इसलिए यही लग रहा है कि शायद ये उसकी लिखी गयी बात हो भी नहीं जैसा दुनिया भर में दावा किया जा रहा है।
ये ओल्ड टेस्टामेंट से है मगर ये शब्द आरमेइक में हैं क्योंकि बेबीलोन से निष्काषन (6 Cent BC) के बाद तब बहुत से यहूदियों में यही आम भाषा थी। इसमें जो शब्द (iddan) टाइम के लिए आया है, उसका अर्थ, a set or specific period, an appointed time, a season, an age, an era, a year होता है। बिना कोई संख्या के साथ अगर ये शब्द बहुवचन में लिखा है तो इसका मतलब 2 भी होता है और आगे जो शब्द (pelag) विभाजित के लिये आया है, उसका मतलब आधा ही होता है। इसलिए यह कहना उचित होगा कि ये संख्या तो 3.5 ही हो सकती है। परंतु इस वर्स में time को 3.5 इंसान के दिन (यह संख्या बहुत कम दिन हैं), 3.5 इंसान के साल, 3.5 प्रोफट के दिन (यानी 3.5 इंसान के साल), 3.5 प्रोफेट के साल (1260 इंसान के साल, इतना लंबा कोई शासक नहीं जी सकता), 3.5 ईश्वर के दिन (3500 साल, ये भी असम्भव है) से मिलाकर देखेंगे तो 3.5 साल वाला ऑप्शन ही सही लग रहा है।