Friday, 28 February 2025

क्या ईसा अलैह. ने पालने से कलाम किया था?

 




बाइबिल: मैथ्यू: 1:13-15/2:13-23: यूसुफ उस रात मरियम और यीशु के साथ मिस्र गए और वहाँ तब तक रहे जब तक राजा Herod मर नहीं गया, जो यीशु को मारना चाहता था क्योंकि एक बच्चे के रूप में यीशु उसके शासन के लिए खतरा था, ऐसी भविष्यवाणी की गयी थी। फिर वह उन दोनों के साथ इज़राइल चले गए, लेकिन जब उसने सुना कि Archelaus (Herod का पुत्र) Judea में शासन कर रहा है, तो वह Galilee के जिले में चला गया, और वह Nazareth में जाकर रहने लगा।

[यह यूसुफ का गृहनगर था. यीशु ने अपना बचपन यहीं बिताया और इसीलिए उसे नासरत का यीशु कहा जाता है। यही यीशु का गृहनगर है। नासरत यरूशलेम से 100 किलोमीटर से भी ज़्यादा दूर है. इन बाइबिल के वर्सेज अनुसार सपष्ट लगता है कि इतने लम्बे काल में यीशु बड़े हो चुके थे, लगभग 12 वर्ष]


बाइबिल: ल्यूक: 2: 42-51: जब बालक यीशु 12 वर्ष का था, तो वे त्योहार में गए, जबकि उसके माता-पिता घर लौट रहे थे, वह यरूशलेम में पीछे रह गया, लेकिन वे इस बात से अनजान थे। यह सोचकर कि वह उनके साथ है। फिर वे उसे ढूँढ़ने लगे और यरूशलेम वापस आ गए। उन्होंने उसे मंदिर में शिक्षकों के बीच बैठे, उनकी सुन हुए और उनसे सवाल पूछते हुए पाया। जिसने भी उसे सुना, वह उसकी समझ और उसके जवाबों से हैरान था। यीशु कहा, क्या तुम नहीं जानते थे कि मुझे अपने पिता के घर में होना चाहिए? तब वह उनके साथ नासरत गया।


कुरान 19:27: Then Maryam brought him to her people (अपने परिवार, समुदाय और शहर, यानी नासरत, यरूशलेम नहीं), carrying (tahmiluhu) (गर्भ में धारण किये, लेके, साथ सवार होके) him.

[इस शब्द का अर्थ है गर्भ में रखना, लेके जाना या सवार होना। पहले अर्थ कि मुताबिक ही आम उलेमा इससे यह मुराद लेते हैं कि इस समय, यीशु का जन्म नहीं हुआ था और वो पेट में थे. मगर यह सही नहीं है क्योंकि क्योंकि वो पेट या गोद में नहीं थे बल्कि उनके साथ सवार होक नासरत पहुंचे थे जैसे कि नीचे दी गयी कुरान की आयातों में भी शब्द का अर्थ सवार होना है]


कुरान 17:3: वह (बनी इस्राएल) उनकी संतान थे, जिन्हें नुह के साथ (नौका) में हमने सवार (hamalna) किया था.
कुरान 9:92:
तुम उन को सवार (litahmilahum) (जहद के लिए सवारी का प्रबंध) करो.         


कुरान 19:29: How can we speak to someone who is a child (sabiyyan) in the cradle (mahdi)?

[यह बात मुहावरतन कही गयी है जिसमें पालने से मुराद किसी को दुग्धज़ात नहीं बल्कि छोटा बच्चा या बच्चे समान कहना मुराद होती है। यंहा मतलब यह है कि हम उस व्यक्ति से कैसे बात कर सकते हैं जो अभी पालने में है, बच्चा है, कल पैदा हुआ है, जुमा जुमा चार दिन का है, कल का लौंडा है जैसा कि कई भाषाओं में कहा जाता है.  यंहा बच्चे के लिए जो शब्द आया है, उसका मतलब नाबलिग़ बच्चा भी होता है जैसे कि कुरान में एक और जगह है.]


कुरान 9:12: याहया को बच्चा (sabiyyan) रहते हुए ही (बचपन में ही) निर्णय शक्ति प्रदान करी.

[हज़रत याह्या को काफी कम उम्र में ही हिकमत हासिल हो गयी थी]


कुरान 19.30-31: ईसा ने कहा कि मैं अल्लाह का बंदा हूँ और उसने मुझे किताब दी है और मुझे नबी बनाया है, मुझे बरकत अता करी है, मुझे नमाज़ और ज़कात की ताकीद करी है. 

[जुमलो से साफ़ है कि वो इस वक़्त तक समझदार बच्चे हो चुके थे]


Quran 3:46: He shall speak to the people, in the cradle and in maturity, and of the righteous.
Quran 5:110: How I strengthened you with the holy spirit, you spoke to the people, in the cradle and in maturity.

[यानि वो नाबलिग़ बच्चे कि उम्र में उनसे दीन पर कलाम करेगा और बड़े हो कर भी. अरबी जुबान और काव्य शैली के ऐतबार से इसका मतलब यह भी है कि वह लोगों से बात करेगा, वो लोग चाहे युवा हों, चाहे बूढ़े हों या नेक हों। कुरान के मुताबिक मरियन को पहले ही बता दिया गया था उनका बेटा पैगम्बर होगा. इसी माहौल में यीशु की तरबियत हुई थी और उसी तरह उनकी सलाहियतें क़ायम हुई थी।]

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Quran 19:12: O Yahya (John the Baptizer), hold fast the Scriptures (the Torah). And We gave him wisdom while yet a child.  [ह. याहया को भी बचपन में ही हिकमत दी गयी थी.] 



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