Thursday, 22 January 2026

दर्शन विज्ञान और ईश्वर

  

दर्शनशास्त्र की 3 शाखाएँ हैं:-


I. तत्वमीमांसा/ तत्वज्ञान (Metaphysics- beyond physics/theory of reality) [तत्व, अस्तित्व, वास्तविकता का अध्ययन] या सत्तामीमांसा/अस्तित्वमीमांसा (Ontology) [सत्ता, Being-होने, का अध्ययन] जो तत्वमीमांसा के सामान और अंतर्गत ही है. इस शाखा के 3 भाग हैं:-

(1) सृष्टि मीमांसा (Cosmology)

(2) ईश मीमांसा (Theology) अर्थात ईश्वर पर 3 प्रकार के विचार हैं:-

(i) Atheism

(ii) Agnosticism

(iii) Theism. इसमें ईश्वर का स्वरुप:-

(a) One-ism/Non-Dualism:- 

(अ) सगुण (Personalistic) है जैसे अब्रहिमिक धर्मों और भक्ति परम्परा में [इंसानी गुणों वाला]
(ब) निर्गुण (Impersonalistic)  जैसे अद्वैत वेदांत में [एक सार्वभौमिक शक्ति, सिद्धांत, चेतना जैसे में ब्रह्मन,ना कि इंसानी गुणों जैसा]
(स) तटस्थेश्वरवाद (Deism): ईश्वर सृष्टि को बना कर गौण हो गया है और अंत में फिर से अगगौण हो जायेगा. ईश्वर सृष्टि में घडी की तरह चाबी भरके अलग हो गया और ये अपने आप चल रही है. 

Voltaire (1694–1778), Rousseau (1712–1778), Benjamin Franklin (US founders, 1706-1790) को Diestic माना जाता है.

प्रकृतिवादी (Naturalist): ईश्वर कोई अलग सत्ता नहीं होना बल्कि  ब्रह्मांड, प्रकृति के अंदर ही मौजूद होना या अपने बनाये प्राकृतिक नियमों के दायरे में ही काम करना है/ये भौतिक संसार ही वास्तविक संसार है/प्रकृति ही अंतिम सत्य है/संसार अपने आप चलता रहता है]. नियतिवादी (Deterministic): घटनाएं, नतीजे पहले से तय, ईश्वर की मर्ज़ी या पूर्व जानकारी के अनुसार,  प्राकृतिक नियमों के कारण, लेकिन स्वतंत्र इच्छा मर्ज़ी भ्रम नहीं है बल्कि इन तय कारणों को समझने और स्वीकार करने से पैदा होती है, ना कि बिना किसी कारण के चुनाव करने से।

(b) Dualism:-

(c) Polytheism:- 

(अ) सर्वेश्वरवाद (Pantheism) [सब  ईश्वर है और ईश्वर सब है], 
(ब) सर्वेश्वरवाद समावेशी (Panentheism) [ईश्वर सब में है और सब ईश्वर में है]

(3) मनोविज्ञान (Psychology of  Mind/Soul): Psyche का अर्थ आत्मा है इसलिए इसका आरम्भ Science of the Soul के रूप में हुआ था लेकिन अब ये आधुनिक व्यवहार, मन, चेतना का वैज्ञानिक अध्ययन है जो आत्मा को consciousness, identity, and spirituality [connecting with something greater for meaning, sacredness, peace] के रूप में समझता है.

II. ज्ञानमीमांसा (Epistemology- Science/Theory of knowledge): यह ज्ञान की प्रकृति, सीमाओं का अध्ययन है. इसमें प्रत्यक्ष अनुमान, उपमान, शब्द आदि जैसे प्रमाण है. इसमें Rationalism (logic/reasoning/बुद्धिवाद-बुद्धि से ज्ञान प्राप्त होता है), Empiricism (प्रत्यक्ष इन्द्रिय ज्ञान/अनुभव से ज्ञान प्राप्त होता है/ by Descartes/Locke), Criticism/Critical Theory (समीक्षावाद/ ज्ञान के लिए बुद्धि और अनुभव दोनों द्वारा समीक्षा आवश्यक - by Kant), Intutionism (अंतःप्रज्ञावाद - बौद्धिक ज्ञान के विरोधियों ने अंतर्ज्ञान को साधन माना), Skepticism (संदेह करना जब तक  प्रमाण न हो), Mysticism (रहस्यवाद- परमतत्व रहस्मय है जो जानाना भी एक रहस्य है), Pragmatism (ज्ञान का मूल्य व्यावहारिक परिणाम से मापा जाना), जैसी विधियां भी हैं.  

III. मूल्यमीमांस/शास्त्र (Axiology). यह मूल्य और आदर्शों का अध्ययन है और इसके 2 भाग हैं:-

(1) नितिमिमांसा (Ethics- morality and values): शुभ–अशुभ, नैतिक-अनैतिक, सही–गलत कर्मों. जो अच्छे परिणाम देता है, वही नैतिक है (Consequentialism/ Utilitarianism), कर्म का नैतिकता कर्तव्य, नियम से तय होता है, परिणाम से नहीं। (Deontology - Kant), नीति का केंद्र कर्म नहीं, बल्कि चरित्र है (Virtue Ethics).

(2) सौंदर्यमीमांसा (Aesthetics-beauty and art): देखने वाले पर निर्भर (subjectivism), वस्तु में निहित (Objectivism), संस्कृति और संदर्भ पर निर्भर (Culturism/ Contextualism) 

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◆ अस्तित्ववाद (Existentialism): अस्तित्व क्या है? मनुष्य होने का अर्थ क्या है? स्वतंत्रता, चयन, प्रामाणिकता (authenticity) क्या हैं?

◆ सिनिकवाद/निंदकवाद (Cynicism) और स्टोइकवाद (Stoicism/बैरागी) दोनों प्राचीन यूनानी दर्शन हैं जो सादगी, प्रकृति के अनुसार जीवन जीने और बाहरी चीज़ों के प्रति अजुड़ाव पर जोर देते हैं. निंदकवाद सामाजिक मानदंडों को पूरी तरह से अस्वीकार करता है, जबकि स्टोइकवाद तर्क और सद्गुण के माध्यम से समाज के भीतर सामंजस्य स्थापित करने पर ध्यान केंद्रित करता है. निंदक 'कुछ भी नहीं' इच्छा रखते हैं, जबकि स्टोइक हर परिस्थिति में शांत और संयमित रहना सीखते हैं, जिसमें बाहरी चीज़ों को नियंत्रित करने के बजाय अपनी प्रतिक्रियाओं पर ध्यान केंद्रित किया जाता है.

◆ Dystheism: एक विश्वास है कि ईश्वर पूरी तरह से अच्छा नहीं है बल्कि बुरा, उदासीन, या नैतिक रूप से दोधारी हो सकता है.

◆ Realism: (यथार्थवाद/वस्तुस्वतंत्रवाद) दुनिया और वस्तुएँ हमारी सोच या विश्वास से स्वतंत्र रूप से अस्तित्व में हैं। चीज़ें, प्रॉपर्टीज़, नंबर, आकार  मौजूद हैं, चाहे हम उनके बारे में सोचें या नहीं।

◆ Electicism: यूनानी लोग दार्शनिकों के मतभेदों पर झगड़ने की बजाय उनका संग्रह करते थे और जिस जिस के जो जो मत अच्छे लगते थे, उन्हें अपने जीवन के लिए चुन लेते थे. 

◆ सोफिस्ट यूनानी समुदाय शिक्षकों का वर्ग था जो फीस के बदले विभिन्न ज्ञान सीखाने का कार्य करते थे. 

◆ In Greek philosophy and mythology, deus creatus (created god) is God made by humans and deus humanoid (humanoid god) is God imagined like humans.

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सार्वभौमिक सत्य (Universal Truth) की मूल प्रकृति/ स्वरूप:-

(1) भौतिकवाद (Materialism)/ पदार्थवाद: वह भौतिक है. भौतिक से ही चेतना जन्म लेती है क्योंकि भौतिक तत्वों के उपयुक्त मिश्रण से ही चेतना पैदा होती है. जैसे भौतिक दिमाग से ही अभौतिक चेतना जन्म लेती है. जैसे भौतिक  कंप्यूटर (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) से चेतना जन्म लेती है. इसके अनुयायी हैं, चार्वाक, मार्क्स व एंजेल्स.

(2) आदर्शवाद, प्रत्यवाद (Idealism)/ आध्यात्मवाद (Spiritualism)/ चेतना (Conscience): वह चेतन  है. शरीर और चेतना दोनों अलग हैं. इनके विद्वान है शंकराचार्य, हीगेल. इन दोनों का मत है कि जैसे सपने में चेतना नहीं होती बल्कि सब कुछ भौतिक स्तर पर हो रहा होता है क्योंकि महसूस भी हो रहा होता है, वैसे ही ईश्वर के चिंतन, विचार में सृष्टि चल रही है, सपना टूटते ही प्रलय हो जायगी.

(3) तटस्थतावाद (Neutralism)/ निरपेक्षवाद: वह इन दोनों में से कोई भी नहीं है. 

(4) द्वैतवाद (Dualism): वह भौतिक (materialistic) और चेतना (conscience) दोनों है. Descartes का Interactionism कहता है कि अगर पदार्थ और चेतना एक-दूसरे से पूरी तरह अलग होते तो उनके बीच सपर्क संभव ही नहीं होता [उसने कहा कि I think therefore I am].

भारतीय दर्शन में सत्य की प्रकृति को समझने के लिए वर्गीकरण:-


(1) बहुतत्ववाद (Pluralism): पूर्व मीमांसा, न्याय, वैशेषिक दर्शन इसी में आते हैं. 

(2) एकतत्ववाद/ अद्वैतवाद (Monism): उत्तर मीमांसा या वेदांत दर्शन इसी में आता है (संतुष्टिदायक क्योंकि क्योंकि केंद्रित, लोकप्रिय, तार्किक और स्वाभाविक).

(3) द्वैतवाद (Dualism) [गहराई में अद्वैतवाद ही]: सांख्य व योग दर्शन इसी में आते हैं (यह पदार्थ [प्रकृति] और चेतना/विचार/भावना [पुरुष] का संगम है और पदार्थ चेतना-जीवन पैदा नहीं कर सकता).


सार्वभौमिक सत्य की  प्रकृति और भारतीय/पाश्चात्य दर्शन:-

Pluralism Materialism: Charvaka [केवल भौतिक तत्त्व वास्तविक]
Pluralism Idealism:  Leibniz (Monadology) [असंख्य स्वतंत्र चेतन सत्ता-Monad]
Pluralism Neutralism: William Jones, Bertrand Russell [मूल तत्त्व न भौतिक न चेतन]
Pluralism Dualism: Buddha [पदार्थ-चेतन अस्थायी/क्षणिक], Jain [जीव-अजीव अनेक], Mimansa, Nyay/Vaisheshik
Monism Materialism: Thales [जल  मूल तत्त्व] 
Monism Idealism:  Aadi Shankracharya [ब्रह्म एकमात्र सत्य]
Monism Neutralism: Spinoza [Mind, Matter एक ही Substance के गुण ]
Monism Dualism: XXX
Dualism Materialism: XXX
Dualism Idealism: XXX
Dualism Neutralism: XXX
Dualism Dualism: --- 

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◆ Thales (624–546 BC) is considered the first philosopher in West for seeking naturalistic explanations for the world, moving away from myths. He was one of the Seven Sages of Ancient Greece. For Thales, the ultimate matter is water. Anaximander was his disciple. He contrary argued that the ultimate matter should be boundless/eternal. Further, Anaximenes was his disciple. They together was called Milesian School of Greek Philosophy. 

◆ Xenophanes (570–475 BCE) proposed a radical, non-anthropomorphic conception of the divine, often described as a formless, single, supreme God. He was a pioneer in criticizing the traditional Greek view of gods as human-like, flawed, and multiple Gods.

◆ Pythagoras (532 BC), mathematician and philosopher

◆ एम्पेडोकल्स (Empedocles,  490-430 BC) ने चार्वाक की तरह दुनिया के लिए भौतिकवादी या प्राकृतिक स्पष्टीकरण दिए और यह सिद्धांत दिया कि सभी पदार्थ चार मौलिक, शाश्वत तत्वों से बने हैं: पृथ्वी, जल, वायु और अग्नि ।

◆ Socrates (469-399 BC) is  acclaimed as the father of Western philosophy. His disciple was Plato, whose Republic is world famous book and Plato's disciple was Aristotle.

सुकरात का दर्शन  व्यवहार, नैतिकता और बौद्धिकता पर था. प्लेटो का मानना ​​था कि सृष्टि के चरम तत्व दो हैं, good और matter. अच्छाई का स्वरूप वास्तविकता का सबसे ऊँचा सिद्धांत है और पदार्थ निराकार है. ब्रह्मांड एक तर्कसंगत डेमियर्ज द्वारा व्यवस्थित है - इनमें से किसी को भी वह ईश्वर नहीं कहता। जबकि अरस्तु ने कहा ये दो चरम तत्त्व, matterऔर (उसकी) form  हैं. 

यूनानी दर्शन ही यूरोपीय दर्शन था. अरस्तु का मानना था कि सृष्टि में सारा परिवर्तन उद्देश्य की तरफ गति है. ईसाइयत के बाद दर्शन में धर्म प्रभाव भी चलता रहा और St. Augustine (354-430), St. Thomas Aquinas जैसे दार्शनिक भी हुए. मगर फिर बेकन (Francis Bacon, 1561 – 1626) ने सबसे पहले  Aristotle के तर्कशास्त्र (Deduction) को अस्वीकार करेक  आधुनिक अनुभववाद (Empiricism) को जन्म दिया. इससे पहले दार्शनिक धर्म +दर्शन के समन्वय में विचार रखते थे. इसने धर्म से स्वतंत्र दर्शन रखा. 

◆ डेकार्ट (Descartes, 1596 – 1650) आये और उन्हें Father of Modern Philosophy कहा गया। डेकार्ट का मानना था कि सृष्टि में जो कुछ हो रहा है सब प्राकृतिक नियमों अनुसार हो रहा है और आयोजन का कोई हस्तक्षेप नहीं है. बेकन और डेकार्ट ईश्वर के अस्तित्व को स्वीकार करते हैं. डेकार्ट ने चरम द्रव्य को ultimate/supreme substance कहा. इनको Sceptic माना जाता है पर वह उनका माध्यम भर था, वो असल में एक Rationalist थे.

देकार्त का ईश्वर सृष्टि से बाहर है और सृष्टि से को सम्बन्ध नहीं रखता जबकि स्पिनोज़ा के ईश्वर में ही सृष्टि और सृष्टि में ही ईश्वर है.  

◆ लॉक (Locke, 1632–1704) — आधुनिक Father of Empiricism) माने जाते हैं। ईश्वर के अस्तित्व को स्वीकार करते हैं.

◆ स्पिनोज़ा (Spinoza, 1632–1677/Jew-boycotted) ने Monism यानि ईश्वर-प्रकृति को एक और Mind–Body को एक ही Substance माना. इसने देकार्त के मत की कमियों को सुधार कर अपना दर्शन बनाया. 

◆ लाइबनिज़ (Leibniz, 1646–1716) ने Monads (नाम ब्रूनो से लिया) का सिद्धांत दिया जो ब्रह्मांड की  अदृश्य, आत्मिक, अटूट,  स्वतंत्र, मूल इकाइयां हैं जिनके बीच  ईश्वर ने पहले से तय तालमेल बनाया है। लाइबनिज़ का मानना था कि सब कुछ होता तो उद्देश्य पूर्ति के लिए मगर परमात्मा इसके लिए प्राकृतिक नियमों को प्रयोग करता है.  

◆ बर्कले (Berkeley, 1685–1753) एक दार्शनिक, बिशप और नास्तिक भौतिकवाद का विरोधी था. इसने लॉक की कमियों को सुधार कर अपना दर्शन बनाया.

◆ ह्यूम (Hume, 1711–1776) एक संदेहवादी (Skeptical) दार्शनिक थे।

◆ कांट (Kant, 1724–1804) सबसे प्रभावशाली आधुनिक जर्मन दार्शनिक थे। Kant said: We do not create the world, we structure or build it. कांट: आँखों पर चश्मा (फ़िल्टर/मन) लगा है, हम  उस चश्मे के बिना दुनिया को नहीं देख सकते. दार्शनिक विवेचना में दो मार्ग प्रसिद्ध हुए, विवेकवाद (स्पिनोज़ा, लाइबनिज़ द्वारा उंचाई तक पंहुचाना) और अनुभववाद (ह्यूम द्वारा उंचाई तक पंहुचाना). कांट ने तीसरा मार्ग चुना  Critical Philosophy/Criticism/Critique का. Kant believed in God as a moral necessity, not as a provable object.

◆ हीगल (Hegel, 1770–1831) एक जर्मन दार्शनिक था और उसके अनुसार ईश्वर व्यक्तिगत नहीं, बल्कि चेतना में प्रकट होने वाला Absolute Spirit/ Reason है, जो मानने की नहीं, बल्कि समझे जाने की प्रक्रिया है और वह चर्च कि बजाय दर्शन में जीवित है. ईश्वर सर्व्यापक होते हुए भी निरपेक्ष सत्ता है. हीगल और शंकर एक ही विचार वाले हैं, केवल अंतर ये है कि हीगल अनुसार सृष्टि वास्तविक है और शंकर अनुसार भ्रम. 

◆ जेम्स मार्टिन्यू (James Martineau, 1805–1900) ने अपनी किताब 'द स्टडी ऑफ़ रिलिजन' ने एथिकल बुनियादों पर ईश्वर के अस्तित्व के लिए तर्क दिए हैं. 

◆ नीत्शे (Nietzsche, 1844-1900) का मत था कि God is dead, जिसकी अर्थ था कि समाज में इसाई विश्वासों का खत्म हो चूका है. इस घोषणा के कारण समाज में शून्यवाद (Nihilism) का खतरा पैदा हुआ, जहाँ जीवन का कोई अर्थ नहीं रह गया.

 James Watt (1736–1819), Hermann Lotze (1817–1881), William James (1842–1910), James Ward (1843–1925), Pringle Pattison (1856-1931) believed in God.

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Dante (1265-1321) was a Italian poet, writer, philosopher.
Voltaire (1694-1778) was a writer and philosopher
Rousseau (1712–1778) was a French philosopher.

Friedrich Engels (1820-1895) was a German philosopher.
Bertrand Russell (1872-1965)
Jean Paul Sartre (1905–1980) was a French philosopher in existentialism.

Archimedes (287–212 BC) was a Greek mathematician, scientist, engineer, astronomer.
Fibonacci (1170–1250), an Italian mathematician.

Copernicus (1473-1543), first to say earth moves around sun
Martin Luther (1483-1546) was a German priest, theologian, author.
Bruno (1548-1600), burned to death for the same concept and anti christian beliefs. He said that God is the Monad of monads (conscious atoms).
Gallileo (1564-1642)
Campanella (1568–1639) was deeply religious, believing in God as the ultimate source of being.
Kepler (1571-1630)

Pascal (1623–1662) was a French mathematician, scientist, philosopher, Catholic.
Newton (1642-1727)

Adam Smith (1723-1790) was a Scottish economist and philosopher 
Charles Darwin (1809-1882)
Herbert Spencer (1820-1903), a philosopher, psychologist, scientist originated the expression "survival of the fittest" after reading Charles Darwin.
Karl Marx (1818-1883)

Leo Tolstoy (1828-1910), a Russian writer
Sigmund Freud (1856-1939) 

Al-Kindi (801–873) is considered as father of Arab philosophy and was a mathematician, physician.
Al-Farabi is credited as the first Muslim who presented philosophy as a coherent system in the Islamic world.
Al-Razi, a Persian physician, philosopher and alchemist. 
Ibn Sabin was an Sufi philosopher, the last philosopher of the Andalus in the west land of Islamic world.
Ibn Khaldun was an Arab scholar, historian, philosopher, and sociologist.
Abbas ibn Firnas
Al-Biruni
Ibn Sina
Omar Khayyam was a Persian poet and polymath, 
Ibn Rushd was an Andalusian polymath and jurist 

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दर्शन विज्ञान और ईश्वर

   दर्शनशास्त्र की 3 शाखाएँ हैं:- I. तत्वमीमांसा/ तत्वज्ञान (Metaphysics - beyond physics/theory of reality) [तत्व, अस्तित्व, वास्तविकता का ...