एक प्राचीन कथा है जो सनातन धर्म, इस्लाम धर्म, ईसाई धर्म, यहूदी धर्म, पारसी धर्म, पौराणिक दंतकथाओं और विभिन्न प्राचीन सभ्यताओं में समान रूप से पाई जाती है। यानी दुनिया की तीन चौथाई से भी अधिक आबादी इस घटना में विश्वास रखती है। आज वैज्ञानिक और पुरातात्विक रिसर्चों से ये सिद्ध हो चुका है कि इतिहास के किसी कालखंड में, इस कथा में वर्णीत प्रलय जैसी ही, एक महाजल प्रलय आयी थी जिसमें पृथ्वी का एक बड़ा भाग डूब गया था।
कथा ये है कि एक सत्यवान ईश्वरभक्त थे। धरती के एक बड़े भूभाग पर पाप बहुत बढ़ चुका था। ईश्वर के प्रकोप व दंड स्वरूप जलप्रलय के द्वारा समस्त पापीयों का वंहा नाश होने वाला था। ईश्वर ने अपने उस भक्त को बताया कि प्रलय में सब डूब जाएगा इसलिए अपने लिए एक विशाल नौका बनाओ और जब प्रलय आएगी तब उसमें खाद्य सामग्री, अपने निष्ठावान लोग, आवश्यक जीवों और वस्तुओं को लेकर चढ़ जाना। सो उन्होंने एक विशाल नौका का निर्माण किया। प्रलय आई और वे सब नौका में सवार हो गए। धरती जलमग्न हो गई। ईश्वर की कृपा से केवल नौका सवार जीवित बच पाए। फिर नौका एक पर्वत पर जा कर रुकी और जल स्तर घटने लगा। अंत में वे सब भी नीचे उतर आये। इसके बाद धरती पर जीवन फिर से आरंभ हुआ और आगे फैला।
इस महामानव को विभिन्न धर्मों में मिलते जुलते नामों से पुकारा जाता है जैसे:- सनातन धर्म में न्यूह या मनु। इस्लाम धर्म में नूह। ईसाई धर्म में नोवाह। यहूदी धर्म में नोअख़। पारसी धर्म में यीमा या जेम या यम (3000 BC)। वर्तमान इराक के मेसोपोटामिया की सुमेरियन सभ्यता की गाथाओं (epics) जैसे ज़ियासुद्र महाकाव्य (3000 BC) में ज़ियासुद्र, अक्काडीन महाकाव्य (1800 BC) में अत्राहासीस, गिलगमिश महाकाव्य (2100-1200 BC) में उतनापिशटिम। ग्रीक मायथोलॉजी (800-1100 BC) में ड्यूकेलियन (पत्नी का नाम पायरा, प्लेटो ने इसे लगभग 9000s BC के समीप होना माना है) आदि।
सनातनी धर्म ग्रंथो में इनके कुछ अन्य नाम है:- न्यूह, महामनु, महाराज मनु, वैवस्वत मनु, सप्तऋषि वाले मनु, महाजल प्लावन (महाजल प्रलय) वाले मनु, नौका वाले मनु, मछली वाले मनु, मत्स्यावतार वाले मनु, श्राद्धदेव मनु या सत्यव्रत मनु।
इस
महाजलप्रलय से मिलते जुलते कई प्रकार के मिथक व प्रंसग बहुत सी प्राचीन
सभ्यताओं, विभिन्न जनजातियों व देशों में आज भी आसानी से देखे जा सकते है
जैसे:-चीनी पौरणिक कथाओं में Gun-Yu, नॉर्स पौराणिक कथाओं (1000 BCE-100 BC, peak period Viking age 8th–11th cent. AD but written down in 13th cent. AD) में
Bergelmir (gods are called Aesir in it), Waynaboozhoo or Nanabozho from Lac Courte Oreilles, K'iche' or
Maya जलप्रलय मिथक, उत्तरी अमेरिकी मूलनिवासियों की Ojibwa जनजाति में, दक्षिणी
अमेरिका के Muisca लोगों में, ऑस्ट्रेलिया के Aboriginals में, आयरिश लोककथाओं (middle ages) में Ceasair (or Cessair meaning mourn or grief while in Hebrew, Noah comes from the root n-ḥ-m" means to rest, comfort, console), वेल्श, तंजानिया, कोरिया, बर्मा, हवाइन आदि में।
जापानी पौराणिक कथाओं में, मूलनिवासी Ainu का मानना है कि Kamui (एक Kami देवता) ने मिट्टी, लकड़ियों और पानी का उपयोग करके एक विशाल मछली की पीठ पर Ainu का निर्माण किया था।
[विभिन्न ग्रंथो में उपलब्ध इस कथा में समानताएं]
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मनु से मत्स्य ने कहा कि तूफान में यह सब प्रजा बह जायेगी। अमुक वर्ष तूफान आयेगा। तू नाव बनाना और जब तूफान उठे तो तू नाव में बैठ जाना। उसने नाव बनाई। जब तूफान उठा तो वह नाव में बैठ गया। इससे वह उत्तरी पहाड़ तक पहुँच गया। जब जल कम हो जाए तो नीचे उतर आना। अंत वह धीरे धीरे उतरा। तूफान ने सब प्रजा को नष्ट कर दिया। केवल मनु बचा रहा।
[शतपथ ब्राह्मण: 1:8:1]
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प्राचीन काल में महाराज वैवस्वत मनु थे। भगवान बोले कि थोड़े ही समय में यह पृथ्वी जलमग्न हो जाएगी। समस्त जीवों समूहों की रक्षा के लिए नौका का निमार्ण किया गया है। सभी जीवों को नौका में चढ़ा कर उनकी रक्षा करना। तुम और यह नौका ही बचेंगे। प्रलय के उपस्थित होने पर जीवों को नौका पार लाद कर वह स्वयं भी नौका पर बैठ गए।
[मत्स्य पुराण : अध्याय 1-2]
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आज से सातवें दिन तीनों लोक समुद्र में डूब जायँगे। एक नाव उपस्तिथ होगी। तुम सभी प्राणियों, सप्तऋषियों के साथ उस विशाल नौका पर चढ़कर विचरोगे। एकाएक समुद्र पृथ्वी को डुबाता दिखाई पड़ा। नौका उपस्थित हुई। वे चढ़ गए। प्रलय का अंत हुआ। राजा सत्यव्रत ही वैवस्वत मनु हुए थे।
[श्रीमद्भागवत महापुराण : स्कंध 8: अध्याय 24]
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विष्णु ने कहा कि हे वत्स न्यूह, आज से सातवें दिन प्रलय होगी। अपने गण के साथ नाव पर बैठना और जीवन रक्षा करना। उन्होंने एक नौका ली और अपने कुल के लोगों के साथ सभी जीवों को बिठा लिया। चालीस दिनों तक घोर वर्षा हुई। समुद्र सम्मिलित हो गए। समस्त भारत जलमग्न हो गया। महर्षिगण, न्यूह और उनका कुल बच गया।
[भविष्यपुराण: प्रतिसर्गपर्व : भाग 1 : अध्याय 4]
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संसार भ्रष्ट हो गया था। तू एक जलयान बना। मैँ पृथ्वी पर जलप्रलय करूँगा। सब प्राणी मर जांयँगे। अपने परिवार, प्रत्येक जीव जन्तु, प्रत्येक भोज्य पदार्थ जलयान में साथ ले जाना। नूह ने ऐसा ही किया। पृथ्वी पर प्रलय का जल बरसने लगा। पृथ्वी पर वर्षा होती रही। जल पृथ्वी पर प्रबल रहा। जल धीरे धीरे घटने लगा। जल घट गया। जलयान पर्वत पर टिक गया। वे जलयान से बाहर निकल आए। परमेश्वर ने उनसे कहा की धरती को पुनः आबाद कर दो।
[बाइबिल : 1 : अध्याय 6-9]
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तुम नाव बनाओ। निस्संदेह अत्याचारी लोग डूब जायँगे। नूह नाव बनाने लगा। तूफान उबल पड़ा। हमने नूह से कहा हर (आवश्यक उपलब्ध) जानवर का जोड़ा, अपने घरवालों और आस्थावानों को नाव में रख लो। नूह ने कहा कि नाव में सवार हो जाओ। नाव लहरों के बीच चलने लगी। फिर पानी सूख गया। नाव पहाड़ पर जा ठहरी। ऐ नूह उतर जाओ सलामती के साथ।
[क़ुरान: 11: 37-48]
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पुरा राजा मनुर्नाम चीर्णवान विपुलं तप:; भविष्यति जले मग्ना सशैलवनकानना।
प्राचीन काल में महाराज वैवस्वत मनु थे; निष्पाप थोड़े ही समय में यह पृथ्वी जल में निमग्र हो जाएगी।
[मत्स्यपुराण : 1: 12, 30]
मनुरेवैक: परिशिशिषे।
केवल मनु बचा रहा।
[शतपथ ब्राह्मण:1:8:1:6]
वत्स न्यूह श्रृणुष्वेदम प्रलय सप्तमेअहनी।
हे वत्स न्यूह, आज से सातवें दिन प्रलय होगी।
[भविष्यपुराण: प्रतिसर्गपर्व : भाग 1 : अध्याय 4 : 48]
वय यिक़रा अथ शमो नोअख़ लेअमोर।
उसने उसका नाम नूह रखा।
[तनख: उपत्ति : 5 : 29]
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वैसे सिक्खों के दशम ग्रन्थ में भी मनु नामक राजा का उल्लेख आता है जो 24 अवतारों में से एक है पर ये स्वयम्भू मनु नहीं है बल्कि बहुत बहुत बाद कब काल मव आने वाले कोई राजा है जिनका संबध मनुस्मृति से है।
मनु सिमिरितहि प्रचुर जगि करा।
मनु ने मनुस्मृति का जग में प्रचार किया।
[दसम ग्रन्थ: चउबीस अउतार: मनु राजा: 3 : 2]
पंथ कुपंथी सब लगे स्रावग मत भयो दूर।
सभी कुपंथी पंथ पर चल पड़े, श्रावक मत (जैन धर्म) को छोड़ दिया।
[दसम ग्रन्थ: चउबीस अउतार: मनु राजा: 8: 1]
मनु राजा को जगत मो रहियो सुजसु भरपूर।
इसके लिए मनु को पूरे विश्व में भरपूर सम्मान मिला।
[दसम ग्रन्थ: चउबीस अउतार: मनु राजा: 8 : 2]
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ईश्वर एक है और उसका धर्म भी एक है। उसने अपने आदेश, शिक्षाएं, ग्रन्थ और संदेशवाहक विश्व के प्रत्येक भूभाग, प्रत्येक काल और प्रत्येक समुदाय में भेजे। ये शिक्षाएं हमेशा से बुनियादी तौर पर एक ही रही है। पर लोग स्वार्थ के कारण हर स्थान पर भेजे उसके एक ही धर्म में मिलावट करके अपने अलग धर्म बनाते गये इसीलिए आज सभी धर्म एक दूसरे से भिन्न दिखाई देते है। हालांकि उसकी मूलभूत मान्यताओं और सिद्धातों से छेड़छाड़ न कि जा सकी जो आज भी समान दिखाई देते है। गौर से देखने पर सभी धर्मों की शाखाएं एक ईश्वर से और सभी मनुष्यों की जड़े एक ही इंसानी जोड़े से जाकर मिलती है। उसके भेजे अनेकों संदेशवाहक या संदेष्टा भले ही किसी एक स्थान या समुदाय के लिए आये हो पर वो पूरे संसार के लिए आदर्श होते थे। इसीलिए उनमें से कुछ बहुत महत्वपूर्ण संदेशवाहको को संसार के विभिन्न ग्रंथो और सभ्यताओ में आसानी से खोजा जा सकता है जंहा उनके नामों और कथाओं में समानता ही समानता मिलती है। ईश्वर हमेशा से ही हर देश, काल, समुदाय को चेतावनी और नसीहत के तौर पर ऐसे संदेष्टाओं की कथा सुनाता आया है। इसलिए ये कथा भी विभिन्न्न धर्मों और सभ्यताओं में हमारे पूर्वजों द्वारा आगे पहुचाने के कारण आज भी किसी न किसी रूप में जीवित बची हुई है।
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मनु किसी व्यक्ति विशेष का नाम नहीं है बल्कि एक पदवी या टाइटल है जैसे सीज़र, फेहरो, जार, व्यास या इंद्र। जैसे कई राजा विक्रमादित्य और राजा भोज हुए है, वैसे ही यंहा 14 मनु हुए है जैसे स्वयम्भू मनु (प्रथम पुरूष) आदि। यंहा की परंपरा अनुसार इनके साथ नौका पर केवल 7 नर-नारी ऋषि अनुयायीयों बचे थे जिनसे बाद में धरती पर दुबारा मानव जीवन फैला। ग्रंथों के अनुसार इस प्रलय में सभी चारों वर्ण वाले डूब गए थे। इसका अर्थ ये हुआ कि आज सभी उन ऋषियों की संतानें है और सभी वर्ण समाप्त हो गए थे। ये कथा वर्ण व्यवस्था के अंत की घोषणा करती है।
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इस्लामी रिवायतों से पता लगता है कि आदम यानी स्वयम्भू मनु भारत भूभाग (वर्तमान श्रीलंका) में उतारे गए थे। भारतीय और इस्लामी ग्रंथों की तहक़ीक़ से पता लगता है कि नूह यानी वैवस्त मनु भारत के बाशिंदे थे। वैवस्त मनु प्रलय से संवत भी जुड़ा हुआ है। नूह को पहली शरीयत अता की गई थी। यंहा भी मनुविधान या मनुस्मृति को प्रथम नियमावली माना जाता है। हालांकि अधिकतर लोग मनुस्मृति को स्वयम्भू मनु द्वारा रचित मानते है परन्तु इसमे वर्णित विस्तृत समाज और गहन नियमों का जायज़ा लेने पर यह स्पष्ट हो जाता है कि इसका संबध वैवस्त मनु से हो सकता है। जिस प्रकार की मनुस्मृति में विरोधाभासी चीज़ें मिलती है उससे ये अंदाज़ा होता है कि अलग अलग काल और परिस्थितियों में लोग या विभिन्न मनु अपने समाज के अनुसार इसमें अपने अपने नियम और कानून जोड़ते चले गए। ये उसी तरह हो सकता है जैसे विभिन्न पुरणों को व्यास द्वारा रचित माना जाता है और व्यास एक धार्मिक पदवी होती थी जिसे बहुत से लोगों ने ग्रहण किया।
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मनु की कथा 8 पुराणों में आती है जैसे मत्स्य पुराण, श्रीमद्भागवत पुराण, भविष्य पुराण, विष्णु
पुराण, अग्नि पुराण आदि और वेदों में भी इस कथा के बीज मिलते है. ये कथाअन्य ग्रंथों में भी है जैसे शतपथ ब्राह्मण (आरंभिक व विस्तृत), महाभारत आदि.
महाभारत, शांतिपर्व, अध्याय 328 और वायुपुराण, अध्याय 4 में भी इसका उल्लेख बताया जाता है.
Al Beruni - Manu (Brahaman divided himself into Viraj and Manu, Manu was named after Manvanatras and he had two sons Priyavrata and Uttanapada, the bow-legged kings).
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मनु
भारत के प्राचीन साहित्य [ऋग्वेद आदि ] में मनु को मानवजाति का पिता अथवा आदिपुरुष माना गया है। वैवस्वत मनु को शतपथ ब्राह्मण में शासक भी कहा गया है! ऋग्वेद में उल्लेख है कि मनु ने प्रकाश के लिये अग्नि की स्थापना की थी। मनु की कथा जल-प्रलय से जुड़ी हुई है। उत्तरवैदिक साहित्य में यह कथा भिन्न-भिन्न प्रकार से कही गयी है। कहीं - कहीं तो यह कथा इस प्रकार से है कि देवराज के आदेश से मनु को नौका के द्वारा कहीं भेजा गया था, किन्तु इसी बीच जलप्लावन हुआ और अधिकांश धरती डूब गयी, जिसमें देव-सभ्यता जल में समा गयी। मनु नाव में थे और एक मत्स्य के आघात से इनकी नौका हिमालय के नौबंधन नामक शिखर पर जाकर रुक गयी। जलप्लावन की कथा केवल भारतीय-साहित्य में ही नहीं है। यूनानी साहित्य में ड्यूक्लियन की कहानी यही है। बेबीलोनिया के साहित्य में जिसथ्रस की कहानी में ऐसा ही जलप्लावन है! बाइबिल में नूह की कहानी है, जिसमें यह नाव अईट पर्वत पर जा कर रुकती है! कुरान में इस पर्वत का नाम जूदी है। जलप्लावन की कथा किसी न किसी रूप में चीन, ब्रह्मा , असीरिया , न्यूगिनी आदि के पुरा साहित्य में भी है। दक्षिण एशिया की कहानियों में बहुत समानता है। ईसा से ३१०० वर्ष पूर्व जलप्रलय का अनुमान किया गया है। इस कथा को लेकर जयशंकरप्रसाद ने कामायनी नामक महाकाव्य लिखा है ।
भारत के पुराणों में राजाओं की वंशावलियाँ मनु से ही प्रारंभ हुई हैं। लेकिन भारत के पुराणों में मनु एक वैवस्वत ही नहीं हैं। चौदह मनुओं के नाम आते हैं जैसे स्वायंभुव , स्वारोचिष , उत्तम , तामस . रैवत, चाक्षुष , सावर्णि आदि। भारतीय कालगणना में मन्वन्तर का बहुत महत्त्व है! एक मनु एक मन्वन्तर का आदिपुरुष है! इनके अतिरिक्त प्राचेतसमनु भी हैं , जिन्होंने राजनीति पर एक ग्रन्थ लिखा था। एक मनु कृशाश्व ऋषि का पुत्र था। एक मनु लोमपाद राजा का बेटा था! यह यादव था!
वह कौन सा मनु था, जिस मनु ने स्मृति भी लिखी थी, जिसका उल्लेख निरुक्त में है और उसके अनुसार पिता की संपत्ति में पुत्र और पुत्री का समान अधिकार है। लेकिन यह स्मृति यास्क के पहले विद्यमान थी। वर्तमान में उपलब्ध मनुस्मृति किसकी रचना है? वाचिक परंपरा से इसने कब लिखित रूप ग्रहण किया? इसमें प्रक्षिप्त अंश कब-कब जुड़ते रहे? यह प्रामाणिक रूप में नहीं कहा जा सकता, क्योंकि इसमें बहुत बाद के संदर्भ [बुद्ध जिन आ्दि ] जुड़े हुए हैं, यदि यह रचना प्राचीन होती तो ऐसे संदर्भ कहाँ से आ जाते? अनेक विद्वानों का मत तो यह है कि यह तीसरी शताब्दी के आसपास की रचना है, जिसमें यथासमय प्रक्षिप्त अंश भी जुड़ते रहे! रांगेयराघव का तो स्पष्ट मत है कि मनुस्मृति में जो नियम-व्यवस्था मिलती है, वह परवर्तीकाल के किसी मनु की नियम-व्यवस्था का और भी परवर्ती तथा परिवर्तित रूप है, वैवस्वत मनु के नियमों के लिये हमें वेद तथा पौराणिक-कथाओं में प्रतिबिंबित समाज को देखना चाहिये।
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In the Gilgamesh epic, Utnapishtim and his wife are the survivors of the mythological flood, having preserved human and animal life in the great boat he built. The couple were then deified by the god Enlil as a reward for heeding the divine instruction to build an ark.
In Greek legend, Deucalion, the son of Prometheus (the creator of humankind) is the equivalent of Noah. When Zeus, the king of the gods, resolved to destroy all humanity by a flood, Deucalion constructed an ark in which he and his wife rode out the flood and landed on [Mount Parnassus].
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नूह और मनु में समानता और उनका भारत से संबंध
Muhammad, Isa, Musa, Ibrahim,
Nooh
Muslim, Nasara, Yahud, Majus,
Sabeen
Quran, Torah, Injil, Zabur,
Suhuf Ibrahim, Zubure Awalin
NUH, NOAH, MANU WAS THE FIRST TO GET DIVINE DETAILED LAW
...They will go to Noah and say, O Noah, You are the first amongst the messengers (Rasool) of Allah to the people of the
earth, and Allah named you a thankful slave... [Bukhari 3340, 4712, Muslim 194]
The Seven Laws of Noah
(Noahide/Noachian Laws) are a set of universal moral laws which, according to
the Talmud, were given by God as a covenant with Noah and with the sons of
Noah. [Rabbinic compilation Talmud:
Sanhedrin 56A-B and Tosefta: Avodah Zarah 9:4)]
At the beginning of the re-creation of the Universe which would follow
the period of destruction, I shall propagate the
Vedas (again). [Matsya Puran, Chapter 2]
तुम इस वेद रुपी नौका को ग्रहण करके इसपर समस्त जीवों और बीजों को लाद
लेना... इस प्रलय में चारोँ वेद, पुराण, नौका आदि ही बचेंगे... तुम्हारे द्वारा सृष्टि का प्रारंभ होगा. तब मैं
वेदों का (पुनः) प्रवर्तन करूँगा [गीताप्रेस]
उस समय इस वेद नौका को ग्रहण करना और सत्व बीजों को इसमें समरोपित करना...
आपके स्वर्ग के आद्रिकाल में मैं वेदों को प्रवत्त करूँगा.
[प. श्रीराम शर्मा आचार्य]
तुम मेरी इस नाव पर वेदों, जीवों, बीजों को लादकर... तीनों, वेद, सभी पुराण, आदी ही अवशेष रह जायंगे. तब मैं वेदों का प्रवर्तन
करूँगा. [रामप्रताप त्रिपाठी शास्त्री]
In fact the whole earth would be covered with one vast expanse of water,
then get hold of that yonder boat and put the seed of creation and the sacred
Vedas in it... Your-self, the sacred Vedas, the Puranas etc will alone be
saved... At the beginning of the re-creation of the Universe which would follow
the period of destruction, I shall propagate the
Vedas. [BD Basu]
EK AINDA AANE WALE QAUM KA SABSE MAZBOOT IMAAN
The Prophet once said to his Companions: The people with the strongest
faith (Iman) are those who will come after you. They will find pages (the
Qur’an) written, and they will believe in what is in it. When the Companions
asked: “Are they the angels?” He said: “How would they not believe while they
are with their Lord?” They asked: “Are they the Prophets?” He said: “How would
they not believe while revelation comes to them?” They asked: “Are they we (the
Companions)?” He said: “How would you not believe while I am among you? Rather,
the people with the strongest faith are those who will come after you; they
will find the Book written, and they will believe in it.”
NUH KE HAQ MEIN MOHD. SAW. KI UMMAT KI GAWAHI
Noah and his nation will come (on the Day of Resurrection and Allah will
ask (Noah), Did you convey (the Message)? He will reply, Yes, O my Lord. Then
Allah will ask Noah's nation, Did Noah convey My Message to you? They will
reply, No, no prophet came to us. Then Allah will ask Noah, Who will stand a
witness for you? He will reply, Muhammad and his followers (will stand witness
for me). So, I and my followers will stand as witnesses for him (that he
conveyed Allah's Message). [Bukhari 3339, 4487, 7349]