Thursday, 25 July 2024

ओम, उम, कुन शब्द और सृष्टि।


ओम (वेद), उम (बाइबिल), कुन (क़ुरान) शब्द में क्या समानता है?

इन तीनों ही शब्दों के विशेष प्रकार से (लंबा खींचते हुए) उच्चारण में एक प्रभावकारी समान ध्वनि निकलती है जिससे आत्मा, शरीर और सृष्टि में  असाधारण तरंगें पैदा होती हैं। ऐसी अनुभूति योग, ध्यान आदि में आश्चर्यजनक रूप से बहुत लाभकारी होती है। इसमें अंत मे आने वाले अक्षरों की गिनगिनाने की ध्वनि से पैदा होने वाली ताज़गी तो है ही मगर इन शब्दों का अन्य महत्व भी है।

■ उसका (ईश्वर) बोला हुआ (शब्द) रूप ॐ (ओम) है।
His spoken form (word) is Om.
[Yoga Sutras 1:27]
अर्थात ईश्वर की उच्चारित वाणी (सृष्टि के अनादि में) ओम ही थी।
[प्राचीन विद्वानों ने ओम शब्द को ब्रह्मांड की ध्वनि माना है। महर्षि पतंजलि के अनुसार इस शब्द से ही संसार की सभी ध्वनियों और शब्दों का निर्माण हुआ है।]

■ वही है जिसने आकाशों और धरती को उत्पन्न किया है, और जब वह किसी चीज़ को बनाना चाहता है तो उससे केवल यही कहता है कि 'हो जा (कुन)' और वह बन जाती है।
अर्थात ईश्वर ने जब चाहा (सृष्टि के अनादि में) तो उसके इस शब्द से ही रचना आरम्भ हो गई।
[Quran: 2:117]

■ आदि में वचन (उम) था, और वचन (उम) परमेश्वर के साथ था, और वचन (उम) परमेश्वर था।
In the beginning was the Word, and the Word was with God, and the Word was God.
[Bible: John: 1:1]
अर्थात ईश्वर का वह वचन या शब्द ही (सृष्टि के अनादि में) रचने हेतु सब कुछ था, जैसे स्वयं ईश्वर है।
[यह सोचकर भ्रमति नहीं हों कि यंहा शब्द को ईश्वर कहा गया है। निष्पक्ष ईसाई विद्वान भी इसकी ग्रीक भाषा शैली के आधार पर उपरोक्त लिखे अर्थ ही करते हैं।]

बाइबिल के मूल ग्रीक अनुवाद में word के लिए शब्द 'logos' (word, speech) प्रयोग हुआ है। जबकि हिब्रू अनुवाद में इसके लिए 'ha-davar' (the-thing, matter, word, speech) प्रयोग हुआ है। वंही बिबलिकल क्लासिकल सिरिआक (आरमेइक की उपभाषा) अनुवाद (called Peshitta, 5th Cent.) में 'memra/meltha' (word, speech, command) शब्द प्रयोग हुआ है। हालांकि आरमेइक में 'milla/lashon' के भी यही अर्थ हैं। ये सभी ओम या कुन से तुकबंदी नहीं रखते हैं। 

मगर जब हम ओम और कुन शब्दों से मिलते जुलते अर्थ और ध्वनि वाला शब्द आरमेइक/सिरिआक भाषा में ढूंढते हैं तो "אום" (um) मिलता है जिसका मतलब है origin, source या mother (उत्पत्ति के संदर्भ में)। 

यीशु की मूल भाषा आरमेइक थी जो कि आम यहूदी जन की भाषा थी और इसीलिए उन्होंने इसी में अपने अधिकतर उपदेश दिए। धार्मिक ज्ञान की दृष्टि से उन्हें हिब्रू भाषा भी आती थी क्योंकि वह यहूदी क़ौम में आये थे और हिब्रू यहूदी धर्म की भाषा थी। यीशु को शायद ग्रीक भाषा का भी ज्ञान था क्योंकि शासक रोमनों और वंहा मौजूद गैर यहूदी लोगों की यही भाषा थी। ऐसा अनुमान है कि राजकीय भाषा लैटिन की भी उन्हें थोड़ी बहुत जानकारी ज़रूर रही होगी।

गॉस्पेल यीशु के शिष्यों द्वारा यीशु के मृत्यु के 30-40 साल बाद लिखना शुरू करी गई जिसमें यीशु की शिक्षाएं/वाणी थी जो कि रोमन साम्राज्य के लोगों की भाषाओं जैसे ग्रीक, लैटिन में लिखी गई, न कि यीशु की असल भाषा, आरमेइक या हिब्रू में जिसमें उन्होंने वाकई सत्संग दिए। स्पष्ट है कि ग्रीक, लैटिन बाइबिल में यीशु अपनी मातृभाषा में कहे शब्द नहीं हैं और इसीलिये उन्होंने कौन कौन से शब्द वास्तव में आरमेइक या हिब्रू में इस्तेमाल किये, यह 100% प्रमाणिकता से नहीं कहा जा सकता। उनके बोले असल शब्दों का हम बस अंदाज़ा लगा सकते हैं। ऐसा कहा जाता है कि मूल आरमेइक या हिब्रू भाषा में बाइबल (न्यू टेस्टामेंट) वेटिकन के पास गुप्त रूप से सुरक्षित होनी चाहिये। इसी तरह अगर हमें ईसा के शिष्यों की गॉस्पेल मिल रही है तो खुद ईसा की गोस्पिल भी मिलनी चाहिए थी।

अंतः ओम (संस्कृत), उम (आरमेइक), कुन (अरबी) शब्द एक समान अर्थ और ध्वनि रखते हैं और इनका आपस में तो संबध है ही, साथ ही इनमें से कम से कम दो का तो ब्रह्मांड की रचना से स्पष्ट सम्बंध स्थापित हो रहा है।
 
-------------------------------------------
 


 
Meaning of Om.
 
हिन्दू धर्म के शब्द ॐ के कई अर्थ माने जाते हैं।  इसे सबसे प्रभावी मंत्र माना जाया है और इसे मंत्रों का पवित्र निचोड़ भी कहा जाता है।  इसे कई चीजों का प्रतिनिधि भी माना जाता है जैसे धरती, स्वर्गलोक, भुव:, विचार, व्यवहार, वक्तव्य, गुण और वेद आदि। इसे हिन्दू धर्म में प्रार्थना, उपासना आदि के आरंभ और अंत में बोला जाता है। इसे साधना या ध्यान के समय अत्यधिक प्रयोग किया जाता है। मूल रूप से यह ॐ ब्रह्मन का सार है। इसे सम्पूर्ण सृष्टि का सार भी कहा जाता है। इसके अलावा इसे ईश्वर का वाचक या नाम भी माना जाता है, विशेषकर आर्य समाज द्वारा। ओ३म् ईश्वर के मुख से निकलने वाला पहला शब्द भी माना जाता है (जैसे इस्लाम में यह विश्वास है कि ईश्वर द्वारा सृष्टि निर्माण से पहले कुन कहा गया था अर्थात हो जा)। बोद्ध (कुछ समप्रदयों में जैसे तिब्बत, जापान में), जैन (इनमें ॐ पंच परमेष्ठी का संक्षिप्त रूप - अरिहन्त, सिद्ध, आचार्य, उपाध्याय, मुनि) और सिक्ख धर्म ( इक ओंकार) में भी इसका महत्व है। इसका उल्लेख वेद-उपनिषदों में है। 
 
Om is a very energetic sound. It has acoustic and psychological effects on your body and mind when pronounced while meditation. The sound is found in nature manywhere. It first appeard in Vedas.  Arya Samajis say it is the first and personal name of God. No solid proof is there regarding it's meaning. Even arya samjis don't have exact meaning of it. They break this into three letters and then present a meaning of it.  It may be like our  Huroof- Muqataat in Quran.  It may be God's name or one of the names of His qualities. Do not try to compare Sikhism's Om with the Om of Santana Dharam. Sikhs don't like it. They say their Om is different from the one related to Hinduism. However the original of Sikh Om is non other than the Om of Vedas. Om is a supernatural sound that represents the sound of the whole nature. It must  have been from the God. In reality it doesn't have a meaning. The personal sound nature cannot hv a meaning.  This sound is available in islam as well in the word KUN which is related to the Creation of nature (Kun Faya Kun).

क़ुरआन कहता है कि कायनात रब के हुक्म कुन शब्द से पैदा हुई है। वैदिक धर्मी मानते हैं कि यह सृष्टि ऊँ से पैदा हुई है। बाइबिल (यूहन्ना1:1) कहती है कि आदि में शब्द था। कुन की आयत बाइबिल में उत्पत्ति अध्याय 1 में भी देख सकते है। अरबी अक्षरों के मायनें भी होते हैं। जैसे कि अलिफ़ का मतलब हज़ार, ऐन का मतलब आँख और नून का मतलब मछली। क़ुरआन की 68वीं सूरह अलक़लम की शुरूआत नून अक्षर से हुई है। इस सूरह के आख़िर में 48वीं आयत में मछली वाले नबी यूनुस का ज़िक्र आया है और नबी का नाम यूनुस न लेकर उन्हें मछली वाला कहा गया है.  क़ुरान कहता है कि बादल की गरज उसकी तस्बीह करती है (अररअद 13).  सूरह यासीन की आयत नंबर 82 में आया है कि जब अल्लाह किसी चीज़ का इरादा करता है तो उससे कहता है, कुन! (हो जा) और वह हो जाती है।

वैसे लिखित शब्द और शब्द الله‎ में भी काफी समानता हैं जो इन शब्दों के अक्षरों या चिन्हों को थोड़ा घुमा फिरा कर स्थान बदलने पर प्राप्त होती है।  

No comments:

Post a Comment

दर्शन विज्ञान और ईश्वर

   दर्शनशास्त्र की 3 शाखाएँ हैं:- I. तत्वमीमांसा/ तत्वज्ञान (Metaphysics - beyond physics/theory of reality) [तत्व, अस्तित्व, वास्तविकता का ...