24.32: और ईमानवाली स्त्रियों से कह दो कि वे भी अपनी निगाहें बचाकर रखें और अपने गुप्तांगों की रक्षा करें। और अपने शृंगार प्रकट न करें, सिवाय उसके जो उनमें खुला रहता है। और अपने सीनों (वक्षस्थल) पर अपने दुपट्टे डाल रहें और अपना शृंगार किसी पर ज़ाहिर न करें सिवाय अपने पतियों के या अपने बापों के या अपने पतियों के बापों के या अपने बेटों के या अपने पतियों के बेटों के या अपने भाइयों के या अपने भतीजों के या अपने भांजों के या मेल-जोल कीस्त्रियों के या जो उनकी अपनी मिल्कियत में हो उनके, या उन अधीनस्थ पुरुषों के जो उस अवस्था को पार कर चुके हों जिससें स्त्री की ज़रूरत होती है, या उन बच्चों के जो स्त्रियों के परदे की बातों से परिचित न हों। और स्त्रियाँ अपने पाँव धरती पर मारकर न चलें कि अपना जो शृंगार छिपा रखा हो, वह मालूम हो जाए। ऐ ईमानवालो! तुम सब मिलकर अल्लाह से तौबा करो, ताकि तुम्हें सफलता प्राप्त हो
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पर्दा
लोग बुर्के को कोई दीन का कोई पैमाना मानते ही क्यों हैं? बुर्के, निकाब का न इस्लाम से कोई लेना देना है और न ही इस्लामिक संस्कृति से। क़ुरान जिसकी तालीम देता है वो हिजाब है और हिजाब सिर्फ कपड़ो से ही संबंधित चीज़ नहीं है। ये अपने पूरे व्यक्तित्व में ढालने वाली एक हया से सम्बंधित हिदायत है। हमारी औरतें वो तो वैसे ही रहती हैं जैसे नबी के वक़्त में तमाम मुस्लिम औरतें रहती थी। आप के घर की औरतें काला टेंट डाल के बाहर निकलती है तो उसका इस्लाम से कोई लेना देना थोड़ी है। बुर्के से अच्छा है कब्रों में चिनवा दो जो कोई ज़रा सा भी न देख पाए। मर्द खुले सांड की तरह जंहा मर्ज़ी घूमे। ये है आपका इस्लाम? क्यों इस्लाम की अपनी जहालत की वजज भद्द पिटवा रहे हो? बिना दलील के ही करना है, तो फिर आपके घरों के मर्दो को भी बुरका पहनना चाहिए।
मैं तो हदीसों को मानता हूँ, मगर क़ुरान और सुन्नत से नीचे। वैसे तमाम मुहद्दिसो ने 5 लाख से भी ज़्यादा हदीसों को ठुकराया है और उन्हें जो तहक़ीक़ में ठीक लगी उसे अपनाया। क्या यह भी मुन्करे हदीस हैं?
हुलिए पर फोकस कर रहे हैं जबकी इस्लाम का फोकस कर्मो पर है। वो भी उस हुलिये पर जो इस्लाम में बुनियादी तौर पर है ही नहीं। टोपी इस्लाम का हुकुम नहीं है. नकाब सभी औरतें के लिए नहीं है। हिजाब, कुरान में ऐसा नहीं है जैसा हम सर ढकने वाला मानते हैं। अल्लाह का अज़ाब या भारत में मुस्लिमों से नफ़रत का असली कारण हमारा हुलिया नहीं हमारी बद्ददीनी है। परदे के आलवा कयामत तक करना ही है तो बहुत से अहद है करने वाले.
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कल्चरल तौर पर औरतों के साथ हाथ मिलाना या गले लगाना
कल्चरल तौर पर औरतों के साथ हाथ मिलाने में कोई हर्ज़ नहीं है जब तक आपकी ज़हनियत पाक़ है। हाथ मिलाने के पीछे मक़सद व्यभिचार है तो फिर गुनाह है।
क़ुरान और हदीसों में कंही नहीं कहा गया है कि औरतों से हाथ मिलाना मना है। नबी ने एक हदीस में कहा कि वो औरतों से हाथ नहीं मिलाते थे। आपने यह नही कहा कि ये मेरे या सबके लिए ममनू है। हाथ मिलाने और बयत करने में फ़र्क़ होता है, बयत में लंबे वक्त तक हाथ मज़बूती से थामना होता है।
यानी ये आप का एक ज़ाती तरीका था क्योंकी आप एक नबी, मज़हबी रहनुमा, सियायी लीडर, समाज सुधारक थे। ऐसे लोगों को आज भी ऐसे मामलात से दूरी बना के रखते ताकि किसी भी तरह की साजिश, स्केंडल के ज़रा से भी इल्ज़ाम, इमकानात जड़ से खत्म कर जा सके।
एक हदीस में नामेहरम औरतों को न छूने की हिदायत दी गयी है और एक में कहा गया है कि हाथ भी ज़िना करते हैं। दोनों हदीसे बदकारी, ज़िना के तौर पर छूने के बारे में हैं, न कि कल्चरल या ज़रूरतन।
बेहतर है कि औरतों से हाथ न मिलाया जाय, मगर बेहतर का ऑपोज़िट ममनू नहीं होता। यानी इससे हाथ मिलाना हराम या नाजयज़ नहीं हो जाता।
ज़रूरत पड़ने पर जिसे मिलाना है, मिला सकता है, अपने हुदूद में रहकर। क्योंकी बाज़ वक़्त न हाथ मिलाने पर अजीब सी सिचुएशन हो जाती है। जंहा कल्चरल है वंहा तो मिलाना पड़ता ही है। वैसे बचना बेहतर है। बाकी वसवसे किसी भी तरह से आ सकते हैं।
यही नियम औरत को छुने के बारे में (जैसे ग्रीटिंग के वक़्त कल्चरल तौर पर गले मिलना) ध्यान रखे जायेंगे. हम जानते हैं कि मेडिकल ज़रूरतों या जान के खतरों में मर्दों द्वारा औरतों को छूने में आम तौर पर किसी को ऐतराज़ नहीं है. नबी का अमल और तालीम यही थी कि आप किसी भी ममनू अमल की तरफ ले जाने वाली ज़रा सी संभावना को भी पहले दर्जे में ख़तम कर देते थे. इसीलिए आपने मर्द और औरत को अकेले साथ होने को भी मना किया था क्योंकि किसी तीसरे के बगैर शैतान के बीच में आने की संभावना बढ़ जाती है. इसलिए देवर-भाभी के मेलजोल पर नबी ने इसे मौत कहा था, क्योंकि इस रिश्तें में अमूमन घर में ही संपर्क, मेलजोल बिना तकल्लुफ़ हो जाता है.
नियत पीछे से साफ हो मगर आगे काम गलत हो जाये तो अल्लाह पीछे से नहीं पकड़ता। नियत पीछे से ही गलत थी और आगे काम भी गलत हो गया तो अल्लाह पीछे से आगे तक की पूरी पकड़ करेगा।
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