Wednesday, 25 June 2025

दाब्बातुलअर्ज़, जुलकरनैन

 


दाब्बातुल अर्ज़

कुरान में एक मखलूक दाब्बातुल अर्ज़ का ज़िक्र दो जगह हैं. 


 1. कुरान 34:14: And when We decreed for Solomon death, nothing indicated to the jinn his death except a creature of the earth (dabbatulardi) eating his stick. But when he fell, it became clear to the jinn that if they had known the unseen, they would not have remained in humiliating punishment. 

[इसे आयात को तम्सीली कहा जाता है. यंहा इससे मुराद दीमक वगैरह जैसे जमीनी कीड़ों से ली जाती है.]


 2. कुरान 27:82: And when the decree of the Hour comes to pass against them, We will bring forth for them a beast from the earth (dabbatanlardi), speaking to them (tukallimuhum) that the people were not certain of Our signs.  

[एक मत अनुसार ज़मीन से निकलना अरबी मुहावरा है जो हिकारत से निकलने के मायनों में इस्तेमाल होता है इसलिए दाब्बतुलअर्ज़ एक ऐसी ही छोटी, मामूली जमात है जो लोगों को क़यामत के वक़्त हक़ बताएगी. दुसरे मत अनुसार यंहा लफ्ज़  तुकल्लिमुहुम इस्तेमाल हुआ है जिससे इसके मायने ये हो जाते हैं कि दाब्बतुलअर्ज़ अपने वजूद से हकाईक बयान करेगा यानी खुदा की आयातों/ निशानियों के बारे में. इन्हीं मायनो में तुकल्लिमुहुम लफ्ज़ कुरान में एक और जगह भी आया है जैसा नीचे बताया गया है.]            


■ 3. कुरान 30:35: Or have We sent down to them an authority, and it speaks (yatakallamu) of what they were associating with Him?

[यंहा भी यतकल्लमु शब्द का प्रयोग किया गया है जिसका मतलब है कि अपने वजूद से हक़ बयान करना. ये इसलिए कहा गया था कि जो लोग खुदा के पैगम्बर की बातें सुनने को तैयार नहीं हैं, उन पर जानवरों को ही गवाही देनी चाहिए। मगर ऐसी नौबत नहीं आई क्योंकि कुरेश ईमान ले आये थे. यानी इसकी तावील यह करी जाती है कि कुरेश के पास खुदा का नबी आया था जो खुदा का कलाम सूना रहा था और वो इसकी बात नहीं मान रहे थे तो कहा गया था कि क्या हम कोई जानवर खड़ा कर दें और वो तुमसे कलाम करें मगर फिर कुरेश ईमान ले आये थे तो ऐसा करने की ज़रुरत नहीं पड़ी. कुरान और रिवायतों से मालूम होता है कि आखरी जमाने में भी लोगों के साथ इसी तरह का मामला होगा और उन पर गवाही के लिए इसी नोईय्य्त का एक दाब्बतुलअर्ज़ ज़मीन से निकाल कर खड़ा कर दिया जायगा जो इसी तरह हक़ वाज़ेह करेगा.


ये आयतें क़ुरैश से मुखातिब हैं और पिछली आयतों (22:71) में कुफ्फार क़यामत और अज़ाब के आने का वक़्त पूछ रहे हैं (यानी क़यामत की निशानियाँ मांग रहे हैं)। मगर अल्लाह उन्हें मोहलत दे रहे हैं और कह रहे हैं कि जब वो वक़्त आएगा तब हमारे लिए मुश्किल न होगा कि ज़मीन से एक जानवर निकाल कर खड़ा कर दें जो गवाह देगा कि तुम मुनकिर थे।

जैसे क़ुरान ने बताया कि जब क़ौमे समुद अज़ाब की निशानियाँ मांगते थे तो ह. सालेह ने एक ऊंटनी को नामज़द कर दिया कि अगर इसको नुकसान पहुंचाया तो अल्लाह का अज़ाब आएगा और फिर ऐसा ही हुआ। 


● एक मत अनुसार क़ुरान में बताए गए इस दाब्बतुलअर्ज़ का हदीसों के दाब्बतुलअर्ज़ से कोई रिश्ता नहीं है। 

रीवायतों में दाब्बतुलअर्ज़ का ज़िक्र क़यामत की अलामतों में शामिल है. क़यामत की 10 अलामतों वाली हदीस में एक अलामत ये बताई गयी है. दूसरी रिवायतों में आता है कि ये अलग अलग जगह से तीन बार निकलेगा, बहुत बड़ा, तेज रफ़्तार और चीखता हुआ होगा, कई जानवरों से मुशाबिहत रखेगा, काफ़िर मोमिनो को पहचान कर मुहर लगा देगा, मुसा की लाठी और सुलेमान की अंगूठी लिए होगा. इन्हें देवमालायें भी माना जाता है. क़यामत के ताल्लुक से इसकी तावील करने में अलग अलग राय हैं. अब तक क़यामत की अलामतों के बारे में दो अलामात (हदीसे जिब्रील की) साबित हो चुकी है तो उन पर हक्मी तौर पर कहा जा सकता है. जो नहीं हुई, उनकी असलियत कैसी होगी, तभी पता लगेगा.  

कुरान ने बताया कि जब क़यामत से पहले सुर (नरसिंघा) फूंका जायगा तो कान फौडू शोर होगा.

इस आख़िरत में आने वाले दाब्बातुलअर्ज़ पर कुछ बड़े तार्किक मौकिफ मिलते हैं:-


1. जैसे पहले ज़मीन से मख्लूक पैदा होती थी, फिर जिस्म से होने लगी। इसलिए ऐसा लगता है कि एक बार फिर से ज़मीन के पेट से एक मख्लूक पैदा
होगी जिसे दाब्बातुल अर्ज़ कहा गया है। ये इस बात कि निशानी होगा कि दुनिया वापिस सिमट रही है। इसके अपने वजूद से यह हक़ बयान हो जायगा.

     
2. ये आर्टिफीशियल इंटेलिजेंस या इससे बनी कोई शय होगी जैसे आज भी बनाई जा रही है. इससे वैज्ञानिक तक डर रहे हैं क्योंकि भविष्य में यह खुद अपनी प्रोगामिंग कंट्रोल कर सकता है. 
दाब्बातुल अर्ज़ से मुराद अपने इरादे से चलने वाली हर चीज़ से ली जाती है.

3. हो सकता है ये किसी हालिया एक्सटिंट (बहुत पुरानों जानवरो के साथ ये मुमकिन नहीं है) हो चुके जानवर को ज़मीन में दबे उसके फॉसिल, DNA से वापिस वजूद में लाने की बात हो जैसे वूली ममूथ या कोई अनजान ऐतिहासिक जानवर। जैसे जुरासिक पार्क फ़िल्म या नॉवेल में दिखाया गया है (हालांकि इनका दुबारा जन्म असंभव है) उसका वापिस आना अक़्ल वालों के लिए खुदा की निशानी ही होगा। वैसे क्या ऐसा भी हो सकता है ये ज़मीन से उठने वाला जानवर, दरअसल ज़मीन से मिले फॉसिल के आधार पर डायनासौर की खोज की ओर सांकेतिक इशारा हो?

[यंहा गौर करने वाली बात ये है कि डायनासौर के फॉसिल 1820s में ही मिलना शुरू हो गए थे मगर इन्हें पूरी में शोहरत और कुबूलियत में जुरासिक पार्क फ़िल्म, 1990s के बाद। अरब दुनिया में तेल 1930s में निकलना शुरू हो गया था मगर 1970s में जाके अरब वर्ल्ड अमीर होना शुरू हुआ और 1990s में इन मुल्कों में इमारतों की प्रतिस्पर्धा शुरू हुई। गुलामी के खात्मे की शुरवात 1920s में ही हो गयी थी मगर UN द्वारा 1940-1950s में आधिकारिक रूप से ख़त्म किया गया मगर फिर भी सभी देशों द्वारा इसे लागू करते करते 1980s तक का समय लग गया। इसी तरह याजूज माजूज क़ौम यानी पश्चिमी क़ौमे भी दुनिया पर कहर ढाती आ रही है। 1500s से व्यापार की आड़ में शुरू हुआ कोलोनियल दौर,  18वीं सदी के अंत व 19वीं सदी के आरम्भ में अपने शबाब पर होते हुए, 1970s में जाके पूरी तरह खत्म हुआ है। फिर बड़े पश्चिमी और पूर्वी देश जैसे अमेरिका, यूरोप, रशिया, जापान, चीन आदि ने देशों या क़ौमों ने दुनिया पर सिक्का चलाया। जैसे क़ुरान के मूताबिक याजूज माजूज का ग़लबा और दाब्बा जानवर क़यामत की निशानी है वैसे ही हदीसे के मूताबिक गुलामी का अंत और अरबियों की ऊंची इमारतों में होड़ भी क़ायमत की निशानी है ]

4. ऐसा भी लगता है ऊपर बताई गयी कुरान की पहली आयत शायद उस वक़्त के मुशरिकों को एक मुहावरतन तम्बी है और हदीसों में क़यामत के वक़्त आने वाले हैवान का अकीदा या तो इसी आयत की बुनियाद से पैदा हुआ (जिसे शायद बाद में ज़मीन से निकलने वाला भी माना जाने लगा इसी बुनियाद पर) या फिर किसी ज़मीन से जुड़े हुए सेल्फ ऑपेर्टेड हथियार/मशीन/तकनीक आदि को तम्सीली तौर पर हैवान कहा गया होगा.


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जुलकर नैन

कुरान में 25 नबियों के नाम बताए गए हैं। कुरान में तीन अस्पष्ट व्यक्ति (संभावित नबी/फरिश्तें/अल्लाह के बन्दे) जैसे खिज़र, लुकमान और जुलकरनैन के नाम भी आते हैं. जुलकरनैन के बारे में सवाल किये जाने पर कुरान ने इनके बारे में कुछ प्रासंगिक महत्वपूर्ण बातें बयान करी थी. पहले सिकंदर को जुलकरनैन माना जाता था। फिर सर सय्यद और अबुल कलाम अज़ाद द्वारा खोसरो (Cyrus the Great, 6th Cent. BC, Persian) के जुलकरनैन मानने पर इस मत को शोहरत मिली. जुलकरनैन (मतलब दो सींग या दो ज़माने वाला) संभवतः साइरस (कुरश/अरब और यहूद में इन्हें इनके लकब जुलकरनैन से पुकारा जाता था) था जो दो सींग वाला मुकुट पहनता था (इसके बनाये गए कदीम बुत और तस्वीर अनुसार). यह Achaemenid साम्राज्य के संस्थापक और Median व Babylon (दो साम्राज्य/सींग) के विजेता थे। जब साइरस ने बेबीलोन पर विजय प्राप्त की, तो यहूदी यहाँ निर्वासन (बेबीलोन की कैद) में थे, जिसे Babylonian Captivity/ Exile कहा जाता है. इसने उन्हें अपने वतन यरूशलेम लौटने और अपने मंदिर का पुनर्निर्माण करने की अनुमति दी। ये बहुत न्यायप्रिय, उदार, शालीन राजा थे, धर्म और सत्ता मामलात में भी. दुनिया का पहला मानवता पर लिखा गया चार्टर, इसी का माना जाता है. इसके cylindrical clay inscription  में Marduk की प्रशंसा की गई है, जो मुख्य बेबीलोनियन देवता थे जिन्होंने खुसरो को राजा बनने के लिए चुना था। हालाँकि, उन्हें ज़ोरोस्ट्रियनियन, एकेश्वरवादी और ईमान वाला माना जाता है. शायद ये ज़र्थ्रुष्ट के पैगम्बर वाले सिलसिले के नबी रहे हों.

कुरान में तारीखी वाक्यात इंसानों के बारे में हैं, ना कि जिन्नात के बारे में. सिर्फ जिन्नों के ही 2 सींग नहीं होते हैं. बादशाही ताजों में भी 2 सींग होते थे. उलेमा ने इन्हें इन्सान ही माना है, कौन सी तारीखी शक्शियत थे, इस पर इख्तेलाफ़ ज़रूर है. इसलिए जुलकरनैन कोई जिन्न नहीं थे. 

साइरस की इरान, ईराक, मिस्र तक इसकी सल्तनत थी. पहले और दुसरे सफ़र की तुलना में साइरस को तीसरे सफर में कोई  मुकाबला सामने नहीं आया इसलिए इसका ज़िक्र भी इतिहास में नहीं मिलता है. बाबिल की फतह के बाद वो कैस्पियन की तरफ तुर्कमेनिस्तान के लिए रवाना हुआ लगता है. इसके बाद पहाड़ी इलाकें शुरू हो जाते हैं जो हिमालय तक पहुच जाते हैं. केस्पियन और ब्लैक सी के बीच के इलाके ही याजूज माजूज का कदीम वतन है. याजूज - माजूज कबाईली लोग थे. ये ईरान पर भी हमला करते थे और नीचे के इलाकों पर भी. पहाड़ो के दर्रों से हमला करते थे. वंहा उसे बेहद जंगली किस्म के लोग मिले जिनसे बातचीत भी मुमकिन नहीं थी. जंहा तक इन्सान आबाद थे, उन किनारों तक वो पहुँच गया. कुरान ने सिर्फ याजूज माजूज को क़यामत की बड़ी निशानी के तौर पर बयान किया है. साइरस ने इनके लिए एक दीवार बनवाई. 

 

■ कुरान 18:83-99: वे तुमसे ज़ुलक़रनैन के विषय में पूछते हैं। कह दो, मैं तुम्हें उसका कुछ वृत्तान्त सुनाता हूँ। हमने उसे धरती में सत्ता प्रदान की थी और उसे हर प्रकार के संसाधन दिए थे। अतएव उसने एक अभियान का आयोजन किया। यहाँ तक कि जब वह सूर्यास्त स्थल तक पहुँचा तो उसे मटमैले काले पानी (a spring of dark mud/hot spring) के एक स्रोत में डूबते हुए पाया और उसके निकट उसे एक क़ौम मिली। हमने कहा, ऐ ज़ुलक़रनैन, तुझे अधिकार है कि चाहे तकलीफ़ पहुँचाए और चाहे उनके साथ अच्छा व्यवहार करे। उसने कहा, जो कोई ज़ुल्म करेगा उसे तो हम दंड देंगे। फिर वह अपने रब की ओर पलटेगा और वह उसे कठोर यातना देगा। किन्तु जो कोई ईमान लाया और अच्छा कर्म किया, उसके लिए तो अच्छा बदला है और हम उसे अपना सहज एवं मृदुल आदेश देंगे। फिर उसने एक और अभियान का आयोजन किया। यहाँ तक कि जब वह सूर्योदय स्थल पर जा पहुँचा तो उसने उसे ऐसे लोगों पर उदित होते पाया जिनके लिए हमने सूर्य के मुक़ाबले में कोई ओट नहीं रखी थी। ऐसा ही हमने किया था और जो कुछ उसके पास था, उसकी हमें पूरी ख़बर थी। उसने फिर एक अभियान का आयोजन किया, यहाँ तक कि जब वह दो पर्वतों के बीच पहुँचा तो उसे उनके इस किनारे कुछ लोग मिले, जो ऐसा लगते थे कि कोई बात नहीं समझ पाते हों। उन्होंने कहा, ऐ ज़ुलक़रनैन, याजूज और माजूज इस भूभाग में उत्पात मचाते हैं। क्या हम तुम्हें कोई खर्च/कर इस काम के लिए दें कि तुम हमारे और उनके बीच एक अवरोध निर्मित कर दो? उसने कहा, मेरे रब ने मुझे जो कुछ अधिकार एवं शक्ति दी है वह उत्तम है। तुम तो बस बल से मेरी सहायता करो। मैं तुम्हारे और उनके बीच एक सुदृढ़ दीवार बनाए देता हूँ। मुझे लोहे के टुकड़े (sheets of iron) ला दो। यहाँ तक कि जब दोनों पर्वतों के बीच के रिक्त स्थान को पाटकर (leveled) बराबर कर दिया तो कहा, धौंको (blow), यहाँ तक कि जब उसे आग कर/बना दिया तो कहा, मुझे पिघला हुआ ताँबा ला दो ताकि मैं उस के ऊपर उँड़ेल दूँ। तो न तो वे (याजूज, माजूज) उस पर चढ़कर (scaleआ सकते थे और न वे उसमें सेंध (penetration) ही लगा सकते थे। उसने कहा, यह मेरे रब की दयालुता है किन्तु जब मेरे रब के वादे का समय आ जाएगा तो वह उसे ढाकर बराबर (level) कर देगा और मेरे रब का वादा सच्चा है। उस दिन हम उनमें से कुछ को छोड़ देंगे कि वे एक-दूसरे पर उठते हुए (मौजों की तरह) आएंगे। और सूर फूँका जाएगा। फिर हम उन सबको एक साथ इकट्ठा करेंगे।

कुरान की आयतों के मुताबिक वो पश्चिम में उस जगह तक पहुंचे जिसके आगे सिर्फ पानी ही पानी था (जंहा सूरज डूबता था). ये पूर्व में भी उस सीमा तक गए जंहा सिर्फ दूर तक धुप ही धुप थी यानि कोई सपाट रेगिस्तान था.

 

■ Bible : Daniel: Chapter 8: में उल्लेख किया गया है कि पैगम्बर दानियाल (खुसरो के समकालीन) ने एक रोया (सोते या जागते हुए इल्हामी ख्वाब) देखा जिसमें उन्होंने एक मेंढे के दो सींग उगते हुए देखे. पहला उगा हुआ सींग छोटा था और बाद में उगा हुआ लम्बा. वो हर दिशा में दौड़ रहा है, मार रहा है, कोई उसे रोक नहीं पा रहा है. फिर जिब्रील ने इनको आके सपने की व्याख्या करी कि वो दो सींग मादी और फारस के देश हैं.

{मगर हम पूरी तरह से इस कहानी पर भरोसा नहीं कर सकते, शायद इसमें मिलावट हुई हो जैसे भविष्यपुराण ने इतिहास को भविष्य बना कर पेश किया है. क्योंकि इस कथा में आगे एक बकरे का ज़िक्र है जो मेंढे को मार देगा और इसे यूनान का राजा बताया गया है अर्थात संभवत सिकंदर. कथा आगे कहती है कि फिर पश्चिम से एक बकरा आया जिसके आँखों के बीच सींग था और वह पैर धरती से छुए बिना ही सारी धरती पर दौड़ गया। बकरे ने  मढ़े के दोनों सींग तोड़ डाले और उसे कुचल दिया। फिर उसका बड़ा सींग टूट गया और फिर उस बड़े सींग की जगह चार सींग और निकल आये जो चारों दिशाओं की ओर मुड़े हुए थे। फिर एक सींग में एक छोटा सींग निकल आया और दक्षिण - पूर्व की ओर बढ़ा। वह सींग बढ़ता ही गया और तारों के शासक अर्थात परमेश्वर के विरूद्ध हो गया। उसने उस शासक को  अर्पित की जाने वाली दैनिक बलियों को रोक दिया और शासक की उपासना किये जाने वाली जगह उजाड़ दिया. जिब्रील नेबताया कि वह बकरा यूनान का राजा है और उसका सींग, वह पहला राजा है। वे चार राज्य, उसके राष्ट्र से प्रकट होंगे. तब वहाँ एक और क्रूर राजा होगा जब पापियों की संख्या बढ़ जायेगी और वह परमेश्वर के पवित्र लोगों को भी नष्ट कर देगा। किन्तु उसका भी अंत कर दिया जायेगा जो किसी मनुष्य द्वारा नहीं होगा।


जुलकरनैन और उनकी दीवार पर 5 मौकिफ

1. पहले मौकिफ तो वही सबसे आम मत है कि ऐसा जादुई तौर पर हुआ था मगर फिर यंहा कई सवाल खड़े होते हैं जैसे इनकी बनायीं गयी दीवार आज तक क्यों नहीं मिल पायी है, खुली ज़मीन में ऐसे कितनी लम्बी दीवार बनायेंगे? दो पहाड़ों के बीच दीवार बना दी तो भी याजूज माजूज घूम कर आ जायेंगे? आज सेटलाईट से ऐसी कोई दीवार या ऐसी फसादी छिपी हुई कौम क्यों नहीं मिल रही है? 

2. इसलिए दुसरे मौकिफ के मुताबिक, कुछ का मानना है कि ये वाकया किसी और दुनिया का है. 

3. तीसरे मौकिफ के मुताबिक जुलकरनैन और इनकी बनायी दीवार दोनों गैर-माद्दी है. जुलकर नैन भी (याजूज, माजूज, दज्जाल की तरह) अलग-अलग दौर के होने चाहिए, आखिर उनके नाम का मतलब 'दो दौर वाला' भी है। कुरान में अल्लाह ने कहा कि वे तुमसे जुलकर नैन (दो दौर वाले) के बारे में सवाल करते हैं. जुलकर नैन के तीसरे सफ़र के बारे में कुरान ने सिम्त/जगह नहीं बताई, जैसे पहले दो सफर की बताई है.

4. चौथे मौकिफ के मुताबिक यह इसी ज़मीन का मामला है जो गैर मामूली (तम्सीली) तरीके से बयान हुआ है. इसलिए हो सकता है कि जुलकरनैन ने किसी क्षेत्र को दोनों कौमों (जो उसके अधीन थीं) में बाँट दिया हो और आर्टिफिशियल भोगोलिक सीमायें ठहरा दी हो जिन्हें पार करने से मुराद दूसरी और शासन, वर्चस्व, फसाद करने की मनाही कर दी गयी हो. 

5. पांचवें मौकिफ के मुताबिक ऐसी ही एक दीवार Darial Pass के पास Caucasus क्षेत्र में पायी जाती थी (निशान अब भी मौजूद है) जो 50 मील लम्बी, 290 फीट ऊँची, 10 फीट चौड़ी थी. इसका श्रेय कई शासकों को दिया जाता था मगर ये साइरस की बनायीं हुई भी मालूम पड़ती है. अब्बासी खलीफा वासित ने इस दीवार की तहकीक के लिए 50 लोगों की एक टीम भेजी थी. साइरस ने इस जगह को भी जीता होगा इसीलिए उसके नाम (साइरस/खुसरो/कुरश) नाम पर वंहा कुछ जगह जैसे दरिया के नाम भी रखे हुए मिलते हैं. ये सबसे मजबूत और तार्किक मत लगता है.


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ऐतिहासिक तौर पर महान साइरस की यात्राएं और दीवार के मायने 

 

पश्चिम की यात्रा: महान साइरस ने राजा Croesus के अधीन Lydia (तुर्की में) पर विजय प्राप्त की और वह Asia Minor (ग्रीक भाषा में Anatolia - तुर्की में जहाँ एशिया और यूरोप मिलते हैं) में Aegean Sea (जिसे मेसोपोटामिया और फारसियों के लिए सूर्यास्त का स्थान माना जाता है) तक पहुँचा था।

पूर्व की यात्रा: महान साइरस ने अपने साम्राज्य का विस्तार पूर्व की ओर Central Asia तक किया, जिसमें गांधार (अफगान-पाक) और बैक्ट्रिया आदि (ताजिक, उज्बेक, कजाक, किर्गिज़) शामिल थे।

संभवतः उत्तर की ओर तीसरी यात्रा: फारसी शासकों द्वारा फारस के लिए Derbent Fortress और Caspian Gates जैसी किलेबंद संरचनाओं का निर्माण करने के बारे में प्राचीन परंपराएँ और किंवदंतियाँ हैं, ताकि Derbent और Darial pass के पास Caucasus क्षेत्र में उत्तरी जनजातियों जैसे कि Scythians, Cimmerians, Massagetae (central Asia के Indo- European- Iranian nomadic groups, जिन्हें यूनानियों/फारसी लोगों द्वारा असभ्य माना जाता था और गोग और मागोग से जोड़ कर पहचाना जाता है) को रोका जा सके. हालाँकि इनका श्रेय Sassanid काल (224-651 ई.) को दिया जाता है परन्तु कुछ किंवदंतियाँ महान साइरस या अन्य प्राचीन फ़ारसी राजाओं को पहले की नींव रखने का श्रेय देती हैं।

फारस (ईरान) में महान साइरस ने अपनी राजधानी Pasargadae में दीवारों, द्वारों और मीनारों के साथ एक रक्षात्मक किलेबंद गढ़ बनाया। इसने Ecbatana, Babylon, Sardis, Uruk और अन्य मेसोपोटामिया शहरों में मौजूदा दीवारों और द्वारों को मजबूत किया। इसने बेबीलोन में (जिसमें वह शांतिपूर्वक घुसा  था) बेहद मजबूत और विशाल दोहरी दीवारें कायम रखीं। इसने मध्य एशिया में Oxus River (Amu Darya) जैसी प्राकृतिक बाधाओं के रूप में पहाड़ी दर्रों, नदियों और साथी ही स्थानीय गठबंधनों का उपयोग किया। इसलिए, उसकी बनायीं हुई दीवार literal रूप में कोई लोहे की दीवार नहीं हो सकती है, बल्कि यह एक सभ्यता को अराजकता से बचाने के उसके प्रयासों का symbolic representation होना चाहिए, शासन, गठबंधन, किलेबंदी द्वारा. हो सकता है ये उसकी बनाई हुई कोई पत्थर की दीवार हो जिसमें लोगे के बने द्वार, रोशनदान, छड़ें, लंगर और तांबे से अंत में लगाये कोट, सीलिंग, शाही प्रतीक हों।

इनके अलावा भी कई अलग अलग कयास हैं जैसे एक ये है कि 14वीं शताब्दी के यात्री इब्न बतूता ने बताया कि यह दीवार चीन के तट पर स्थित Zeitun शहर से साठ दिन की यात्रा की दूरी पर थी, इस पर अनुवादको ने लिखा है कि इब्न बतूता ने चीन की महान दीवार को जुलक़रनैन की दीवार समझ लिया होगा। वैसे भी ये चीन की दीवार (7th cent. BC - 3rd cent. AD) नहीं हो सकती है क्योंकि वो उन्होंने खुद बनायीं और इसे आज पार करा जा सकता है। इसके अलावा चीनी दीवार को स्थापित -पुनर्स्थापित करवाने वाला कोई भी नेक - रहम दिल चीनी राजा ऐसा नहीं मिलता है जिसने पूर्व, पश्चिम में विजय हासिल करी हो (पर शायद इस पर और तहकीक की ज़रूरत है). दूसरा यह है कि Borgia विश्व मानचित्र (जर्मनी में 1430 AD के समीप निर्मित, copper से engraved) में सबसे उत्तर-पूर्वी भाग में याजूज-माजूज को दर्शाते हुए दो किलेबंद/नाकेबंद क्षेत्र मार्क किये हुए मिलते हैं, जिन पर लैटिन भाषा में लिखा है: गोग का प्रांत जिसमें यहूदियों को फारसियों के राजा Artaxerxes के समय में रोके रखा गया था। यह तर्क दिया जा सकता है कि Artaxerxes और Cyrus the Great का सम्मिश्रण इतिहास में किसी समय हुआ होगा। 

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