Tuesday, 24 June 2025

दज्जाल और दज्जालियत

 


 

बाज़ उलेमा का मानना है कि दज्जाल का फितना बिल्कुल ज्यों का त्यों नहीं होगा जैसा हदीसों में बढ़ा-चढ़ा कर बयान हुआ है इसलिए जो करतब वो दिखाएगा वो सिर्फ धोखा होंगे और कुछ नहीं (जैसे जादूगरों ने मुसा के खिलाफ दिखाएँ थे जो आंखों का धोखा और तरकीबें थी)। यानी उसके पास ऐसी लंबी-चौड़ी कुव्वतें नहीं होंगी जैसी हदीसों में बयान की गई हैं. 

जबकि कुछ उलेमा का ऐसा भी मानना रहा है कि दज्जाल का फितना गुजर चुका है (जैसे क़ादियानी फिरके के संस्थापक गुलाम अहमद, बाब धर्म के संस्थापक बाब और बहाई धर्म के संस्थापक बहाउल्लाह वगैरह ने नबूवत के दावे से फ़ितने फैलाए है )। ऐसा माना जाता है कि मसीह दज्जाल कोई भी झूठा हो सकता है जो खुद को खुदा का चुना गया बंदा घोषित करे।

इसके अलावा पहले ज़माने में भी मत रहे हैं जैसे ख्वारिज, मुताज़िला, जहमिया वगैरह जिन्होंने दज्जाल के बारे में रिवायतों को कुबूल नहीं किया है और माना है कि ये रिवायतें कुरान के खिलाफ हैं और ये बनी इस्राएली रिवायतों से आई हैं. सबसे पहले ख़वारिज, मुतज़िला, जाहमिया को दज्जाल की आमद का इनकार करने वाला माना जाता है. जबकि सबसे पहले दज्जाल आने के हक़ में दलाईल देने वालों में इब्ने हिब्बान, अल्लमा इब्ने तहावी, इब्ने हजम इन तीनों को माना जाता है और बाद में इनके दलाईल मानने वालों का तबका बढ़ता गया. आज भी दज्जाल के रायज मौकिफ से इख्तिलाफ करने वाले कई उलेमा हैं जैसे:- मौलना वहीदुद्दीन खान, जावेद गामिदी, मुफ़्ती अबू लेथ अलमलिकी, प्रोफेसर रशीद शाज़, अदनान इब्राहिम, हसन फरहान मलिकी, Atabek Shukurov (UK), Caner Taslaman (Turkey), Mustafa Islamoglu (Turkey). मुफ़्ती कामरान शहजाद भी दज्जाल की तमाम हदीसों और निशानियों पर कई सवाल उठा चुके हैं. 

 

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तीनों इब्राहिमी मजाहीब में आने वाला एक सच्चा और एक झूठा मसीह 


आइये देखते हैं कि तीनों इब्राहिमी मजाहीब में आने वाले एक सच्चे और एक झूठे मसीह के बारे में क्या कहा गया है, क्योंकि दोनों शक्सियत के वाकियात का आपस में रिश्ता और प्रभाव है:-

[यहूद]

मसीह

हिब्रू लफ्ज़ मसीह का लफज़ी मतलब ईसा अलैह. नहीं है (ईसा को यहूद मानते ही नहीं) बल्कि मसीहा या पैगम्बर होता है, इसीलिये ईसा अलैह. को गैर यहूदियों ने परम्परागत तौर पर मसीह पुकारा। हम जानते हैं कि यहूद में हर नबी मसीह कहलाया जाता था. बनी इस्राइल में नस्ल दर नस्ल आ रहे थे. इनमें एक परम्परा थी कि एक नबी दूसरे नबी के सिर का मसह तेल की बूंदें डाल कर करते थे, जो इसकी अलामत होती थी कि अब से नबूवत के सिलसिले, ज़िम्मेदारी को ये आगे लेके जायेंगे। इसलिए एक पैदाइशी नबी की पेशनगोई चली आ रही थी जिसे अल मसीह पुकारा जाता था. यहूद का यकीन था कि ये ह. सुलैमान के वक़्त से छीनी हुई बादशाहत उन्हें वापिस दिलवाएगा, जंगी लीडर होगा जो उन्हें इज़राल में वापिस बसाएगा. ये अल मसीह ह. ईसा ही थे. जब मसीह के साथ इन्होने किसी लश्कर को न पाया तो उन्हें रद्द कर दिया कि ये उनके अल मसीह नहीं है (मदीना के यहूद ने मुहम्मद सल्ल. को भी नबी नहीं माना था जबकि मदीना के अंसार कबीले ने मान लिया था जो यहूदियों से उनके आने वाले नबी की पेशनगोइयां सुनते चले आ रहे थे). इसलिए यहूद आज तक अपने अल मसीह का इंतज़ार कर रहे हैं।


दज्जाल

ओल्ड टेस्टामेंट में ऐसे किसी मसीह दज्जाल का ज़िक्र नहीं है। हालांकि बाद की यहूद रिवायतों में एक Mashiach Sheker (False Masih) या Nevi Sheker (False Prophet) का ज़िक्र है और कुछ ऐसे लोगों का भी ज़िक्र है जिन्होंने मसीह होने के झूठे दावे किए थे। यहूद के लिए ईसा इब्ने मरियम (जिन्हें उनकी रिवायतों में यीशु लिखा गया है) भी एक झूठा मसीह थे (इनके मुताबिक मुहम्मद सल्ल. भी नबी नहीं थे)। इन ग्रंथों में ऐसे ही एक Armilus के आने का ज़िक्र है जिसे शैतान की संतान माना गया है। यानी यहूदीयों का विश्वास है कि मसीह या नबूवत के झूठे दावे वाले लोग आते रहे हैं और ये मान्यता पहले से ही बनी हुई थी।

[सवाल: यहूदी ज़ायोनीस्ट और यहूदी ऑर्थोडॉक्स में अंतर हैं. एक क्रूर हैं और एक संवेदनशील (असल यहूदी) हैं. जब दज्जाल आएगा, वो ज़ायोनीस्ट में से होगा या ऑर्थोडॉक्स में से? ये असल यहूदी, इजराइल के लिए हो रहे खून-खराबे का विरोध कर रहे  हैं. दज्जाल आ कर दुनिया के कोने-कोने में खून-खराबा करेगा. अगर ये यहूदी दज्जाल का भी विरोध करेंगे तो इसका मतलब वो उसे प्रॉमिस्ड मसीह नहीं मानेंगे (झूठा मसीह मानेंगे) और अगर ये उसका विरोध नहीं करेंगे तो इसका मतलब तब तक सारे यहूदी ज़ायोनीस्ट बन चुके होंगे (दज्जाल को सच्चा मसीह मानेगें)?]

 

[नसारा]

मसीह

बाइबिल में यीशु के आने की बात कही गयी है. इसलिए नसारा में मसीह के इंतज़ार है, क्योंकि उनका मानना है कि ईसा को 3 दिन बाद सलीब से उतार लिया गया था। इनके यंहा मुहम्मद सल्ल. के आने की पेशनगोइयां मिलती हैं, मगर इन्होने भी उन्हें नहीं माना जैसे यहूद ने ईसा को नहीं माना. 

[मसला: इसाई रिवायतों में मसीह ने कहा था कि मैं इस नस्ल के रुखसत होने से पहले-पहले आ जाऊंगा, जिसे ईसाइयों ने गलत समझ लिया?]

■ Acts 1:11: This same Jesus, who has been taken from you into heaven, will come back in the same way you have seen him go into heaven (Angels speaking after Jesus’ ascension). 

■ Mark 13:29-31, Luke 21:31-33, Matthew 24:33-35: Even so, when you see these things happening, you know that it (the kingdom of God) is near, right at the door. Truly I tell you, this generation will certainly not pass away until all these things have happened (signs of end times). Heaven and earth will pass away, but my words will never pass away.

■ Luke 21:5-36: (Signs of End Times) Destruction of the Temple (second temple built by Jews after return from Babylonian exile around 516 BC) and Jerusalem will be surrounded by armies (by Gentiles until the times of the Gentiles are fulfilled). There will be wars, earthquakes, famines, betrayal etc. There will be signs in the sun, moon and stars. Heavenly bodies will be shaken. At that time they will see the Son of Man (Jesus) coming in a cloud with power and great glory. When these things begin to take place, stand up and lift up your heads, because your redemption is drawing near. Truly I tell you, this generation will certainly not pass away until all these things have happened. Heaven and earth will pass away, but my words will never pass away. That day will close on you suddenly like a trap. For it will come on all those who live on the face of the whole earth. Pray that you may be able to stand before the Son of Man.

■ Matthew 24:30-31: Then will appear the sign of the Son of Man in heaven. And then all the peoples of the earth will mourn when they see the Son of Man coming on the clouds of heaven, with power and great glory. And he will send his angels with a loud trumpet call and they will gather his elect from the four winds, from one end of the heavens to the other. 

 Daniel 7:13-14: In my vision at night I looked, and there before me was one like a Son of Man, coming with the clouds of heaven. He approached the Ancient of Days and was led into his presence. He was given authority, glory and sovereign power, all nations and peoples of every language worshiped him. His dominion is an everlasting dominion that will not pass away, and his kingdom is one that will never be destroyed.

■ 1 Thessalonians 4:16-17: For the Lord himself will come down from heaven, with a loud command, with the voice of the archangel and with the trumpet call of God, and the dead in Christ will rise first. After that, we who are still alive and are left will be caught up together with them in the clouds to meet the Lord in the air. And so we will be with the Lord forever. 

■ Revelation 1:7-8: Look, he is coming with the clouds and every eye will see him, even those who pierced him and all peoples on earth will mourn because of him. So shall it be! Amen. I am Alpha & Omega, says the Lord God, who is, and who was, and who is to come, the Almighty.


दज्जाल

न्यू टेस्टामेंट में दज्जाल मसीह (Antichrist) का ज़िक्र मिलता है, जो अंत में आना है. मगर बाइबिल अनुसार पहले भी ऐसे दावे करने वाले आते रहें हैं. यीशु को ना मानने वालो को भी Deceiver या Antichrist कहा गया है. मुख्य Antichrist अंत में आयेगा मगर कुछ Deceivers तो ईसाईयत के आरंभ में भी खड़े हो गए थे. Satan के अलावा Antichrist को Bible के Beast और Man of Lawlessness/Sin के साथ जोड़ कर देखा जाता है। यानी ईसाइयत में एक बड़े झूठे मसीह और कई अन्य छोटे झुठे मसीह की भविष्यवाणीयां जम कर मौजूद हैं और इनके यंहा भी ये मान्यता पहले से बनी हुई थी।

■ Matthew 24:4-5: Jesus answered: Watch out that no one deceives you. For many will come in my name, claiming, I am the Messiah, and will deceive many.
■ Mark 13:5-6: Jesus said to them: Watch out that no one deceives you. Many will come in my name, claiming, I am he, and will deceive many.
■ Luke 21:8: He said, Beware that you are not led astray, for many will come in my name and say, I am he and the time is near. Do not go after them.

■ Matthew 24:23-24 & Mark 13:21-22: At that time if anyone says to you, look here is the Messiah or there he is, do not believe it. For false messiahs and false prophets will appear and perform great signs and wonders to deceive, if possible, even the elect (selected ones/ people). 

■ 1 John 2:18: It is the last hour and Antichrist is coming. Even now many antichrists have appeared; from this we know that it is the last hour. 

■ 1 John 4:3: But a spirit that does not confess Jesus is not from God. This is the spirit of Antichrist, which you have heard is coming and now is already in the world.

■ 1 John 2:22: Liar is one who denies that Jesus is the Christ. This is the Antichrist- the one who denies the Father and the Son.

■ 2 John 1:7: For many deceivers have gone out into the world, those who don't acknowledge Jesus Christ as coming in the flesh. This is the Deceiver and Antichrist.

■ Revelation: Chapter 19-20: Then I saw the beast and the kings of the earth and their armies gathered to fight against the one riding the horse and against his army. The beast was caught and with it the false prophet, who had performed in its sight the signs by which he led astray those who had accepted the mark of the beast and those who had worshiped its image… I also saw the souls of those who had been beheaded for their witness to JESUS and for the word of God, and who had not worshiped the beast or its image nor had accepted its mark on their foreheads or hands... The Devil who had led them astray was thrown into the pool of fire and sulfur, where the beast and the False Prophet were.

■ 2 Thessalonians 2:3–4: Don’t let anyone deceive you in any way, for that day will not come until the rebellion occurs and the Man of Lawlessness or Man of Sin (considered Anti-Christ or Beast, he will deceive, oppose truth and claim to be God) is revealed, the man doomed to destruction. He will oppose and will exalt himself over everything that is called God or is worshiped, so that he sets himself up in God’s temple, proclaiming himself to be God.

 

[मुसलमान]

मसीह

मुसलमानों ने ईसा के बारे में एक रोये (इसका ज़िक्र मुवत्ता, बुखारी, मुस्लिम में है) को सच मान लिया है, जिसमें वो काबे का तवाफ़ करते हुए दिखाई दिए थे. ऐसा माना जाता है कि ईसा की वापसी का अकीदा, इसी रिवायत और अहले किताब की रिवायतों की वजह से आगे फैला. इसलिए मुस्लिम भी ह. ईसा के वापिस आने का इन्तेज़ार कर रहे हैं, जो वैसे ही बादशाहत और लश्कर लेके आयेंगे जैसे यहूद मानते हैं। कुरान और हदीस की पहली किताब मुवात्ता इमाम मलिक, ईसा की वापसी का मोहकम तौर पर ज़िक्र नहीं है.


दज्जाल

क़ुरान में दज्जाल का भी ज़िक्र नहीं है मगर हदीसों में ज़रूर है. शियाओं के साहित्य में दज्जाल के ज़िक्र की बात को जाने देते हैं क्योंकि वंहा बहुत गड़बड़ है। मुसलमानों में कहा जाता है कि दज्जाल यहूद में से उठेगा (ये बात मौलाना मौदूदी ने अपनी तफ़्सीर में भी कही है)। नबी के जिस रोये में ईसा को काबा का तवाफ़ करते हुए देखा था, उसी रोये में एक झूठे मसीह को भी काबा का तवाफ़ करते हुए देखा था. 

ऐसा साफ लगता है कि यहूद और नासारा में चली आ रही ऐसी मान्यताओं को ही मुस्लिम ने आगे बढ़ाया। हो सकता है कोई ये दलील दे कि मुस्लिम ने वही आगे बढ़ाया जो मुसलमानों, नासारा और यहूद को अल्लाह की तरफ से मिला है तो इसकी हक़ीक़त जानने के लिए ऐसी हदीसों की तह में जाना पड़ेगा. हदीसों को देखकर ऐसा लगता है जैसे कि रोये वाली बात में धीरे धीरे आगे कई तरह के इजाफे करते हुए, उन्हें इसरा-मेराज वाले वाकये में जोड़ दिया गया है, जंहा पर क़यामत का ज़िक्र हुआ है (Primary to Secondary Books of Ahadith).

■ Bukhari (3438, 3439, 3440, 3441, 5902, 6999, 7026, 7128) & Muslim (171): The Prophet said, I saw myself (when sleeping) near the Kaba last night and a most handsome man with whitish brown, red complexion, combed long hair, reaching earlobes, water was dropping from it and he was performing the Tawaf around the Kaba while he was leaning on (the shoulders of) two men (holding him from two sides). Somebody replied, He is Messiah, son of Mary (tall stature as the people of Az-Zutt). Then I saw another man with red complexion, fat big body, curly hair, blind in the right eye which looked like a protruding out grape. Somebody replied, He is Messiah, Ad-Dajjal. The Prophet said that Ibn Qatan (a man from Bani Al-Mustaliq from Khuzaa who died in the per-lslamic period) resembles him the most.

■ Bukhari (3239, 3394, 3437), Muslim (165, 168), Tirmidhi (3130): The Prophet said, On the night of my Ascension to Heaven, I saw Moses who was light brown in complexion, thin, tall, well built with lank hair, looking like the men of the tribe of Shanua. I saw Jesus who was of average height with while  and red complexion, crisp hair as if he had just come out of a bathroom. I saw Abraham and I resemble prophet Abraham more than any of his offspring does. Then I was given two cups, one containing milk and the other wine. Gabriel said, Drink whichever you like. I took the milk and drank it. Gabriel said, You have accepted what is natural (means true religion Islam) and if you had taken the wine, your followers would have gone astray./ I was shown Malik, the guardian of Fire, and Dajjal amongst the signs.

■ Musnad 3556: The Prophet said: On the night of the Ascension, I met with Abraham, Moses, and Jesus. They mentioned the Day of Judgment and brought it up to Abraham. He said: I have no knowledge of it. Then he brought it up to Moses. He also said: I have no knowledge of it either. Then this matter was brought up to Jesus. He said: No one has the true knowledge of it except Allah. However, my Lord has told me that the Antichrist will appear near the Day of Judgment. I will have two branches. When the Antichrist sees me, he will begin to melt like a castle melts. After that, Allah will destroy him. Even the trees and stones will cry out: O Muslim, there is an infidel hiding under me, come and kill him. Thus will Allah destroy them all. Then the people will return to their cities and homelands. At that time Gog-Magog will emerge, who will be felt as if they are sliding from every height, they will trample all the cities, then Allah will impose death on them until the whole earth will be filled with their stench, then Allah will send rain that will wash away their bodies and throw them into the sea. After that, the mountains will fall and the earth will be stretched like a skin, my Lord has promised me that when these events occur, the example of the Hour will be like a hopeful she-camel whose gestation period has ended and its owner does not know when suddenly it will give birth to a calf during the day or night.

■ Majah 4081: On the night on which the Messenger was taken on the Night Journey (Isra), he met Ibrahim, Musa and Eisa and they discussed the Hour. They started with Ibrahim but he did not have any knowledge of it. Then they asked Musa but he did not have any knowledge of it. Then they asked Eisa and he said: I have been assigned to some tasks before it happens. As for as when it will take place, no one knows that except Allah. Then he mentioned Dajjal and said: I will descend and kill him then the people will return to their own lands and will be confronted with Gog and Magog people, they will not pass by anything but they will spoil it. The people will beseech Allah and I will pray to Allah to kill them. The earth will be filled with their stench and the people will beseech Allah and I will pray to Allah, then the sky will send down rain that will carry them and throw them in the sea. Then the mountains will turn to dust and the earth will be stretched out like a hide. I have been promised that when that happens, the Hour will come upon the people, like a pregnant woman whose family does not know when she will suddenly give birth.

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दज्जाल पर कुरान और कुछ खास अहादीस का जायज़ा

 

1. क़ुरान क्या कहता है?

सबसे पहली बात कि क़ुरान में दज्जाल का ज़िक्र नहीं है, आखिरी दिन के बारे में बयान करने वाली आयतों में भी इसका इशारा तक नहीं है। जबकि याजूज-माजूज, दाबबतूल अर्ज़ वगैरह ज़िक्र मौजूद है। अगर वाकई ये क़यामत की इतनी बड़ी निशानी है तो क़ुरान इस शैतानियत या फ़ितने के ज़िक्र से बिल्कुल खाली क्यों है?


2. बुराई और भलाई की जंग में अल्लाह की सुन्नत

बाद उलेमा का मानना है कि अल्लाह की सुन्नत है कि जब भी बुराई और भलाई की भिंडत हुई है तो अच्छाई पर खड़े अल्लाह वालों को मौज्ज़ात दिए गए हैं, न की बुराई पर खड़े, खुदाई या नवुवत का दावा करने शैतानी लोगों को. जैसे खुदाई दावा करने वाले नमरूद ने मौत और ज़िन्दगी देने का और सूरज को पश्चिम से निकालने का दावा किया मगर इब्राहीम ने उन्हें अल्लाह की आयत से चुप करवा दिया. जैसे फिरोन ने भी खुदाई दावा किया, मुहम्मद. सल्ल ने सामने कई मुर्तद ने नबुअत का दावा किया. इनके पास कोई मजोज़ा नहीं था. बल्कि इनके सामने खड़े नबियों को मौज्जात अता किये गए हैं. इसलिए दज्जाल के पास कोई मौज्ज़ात हो ही नहीं सकते. वो सिर्फ इनका दावा भर सकता है या ऐसे धोखा दे सकता है। इसलिए हदीसों में आये उसके मौजज़ात को या तो सिरे से गलत मनाना पड़ेगा या फिर फ़रेब मानना पड़ेगा। उलेमा इन्हें अक्सर फरेब मानते भी हैं।

 

3. हदीस-ए-जिब्रील

■ बुखारी  50, 4777; मुस्लिम 8; माहज 63, 64, 4044: The Prophet said about the signs of the Last Hour that the slave girl will give birth to her mistress and master (means official abolishment of slavery. Also mean that non Arabs will give birth to Arabs or parents will be like slave to children) and that barefooted, naked, destitute shepherds competing with one another in the construction of tall buildings (Some variations says that they becoming leaders of the people).

[The slavery was official abolished by UN in 1956 and the high rise buildings in Saudi Arabia began appearing in significant numbers from 1970s onward.] 

ये बेहद प्रमाणिक हदीस है. ये साबित हो चुकी है। अगर वाकई ईसा, दज्जाल, मेहदी और अन्य कही जाने वाली अलामतों का रिश्ता क़यामत से होता तो इस हदीस में भी वो बातें ज़रूर कही जानी चाहिए थी.

 

4. तीस दज्जाल वाली हदीस

Hadith: The Last Hour will not come before there come 30 Dajjals (fraudulents), everyone presuming himself that he is an apostle of Allah.

हदीसों में 30 दज्जाल के आने का ज़िक्र है. इसलिए ऐसा माना जाता है कि दावे करने वाले कई दज्जाल आ सकते हैं (जैसे कई शैतान होते हैं) मगर एक सबसे बड़ा दज्जाल (जैसे इब्लीस) होगा जो आखिर में आएगा. यानी बाकी के 29 अपने दौर के दज्जाल थे और संभवत दज्जालों की सीरीज के हिस्सा थे, ऐसा कहा जाता है। 

असल में हदीसों में दज्जाल को लेके इतनी विरोधाभासी चीज़ें (वाक्यात, शक्सियात) दर्ज हो गयी है कि उन्हें जस्टिफाई करने के लिए 30 दज्जाल जैसी तावील ही करी जा सकती है या फिर ये मानना ही पड़ेगा कि नबी ने हर बड़े धोखेबाज़ (मसीहत का दावेदार) को दज्जाल कहा होगा.

ये हदीस 72 फिरकों वाली हदीस की तरह भी हो सकती है, जो प्रैक्टिकली गलत साबित हो चुकी है क्योंकि मुसलमानों में 72 से बहुत ज़्यादा फिरके हो चुके हैं (इसके मायने 72 तरह के या 72 मुख्य फिरके भी लें तो ये भी अनुमान कंही से भी दुरुस्त नहीं लगता है)। 


5. तमीम दारी की हदीस

दज्जाल के बारे में तमीम दारी की हदीस की सनद में कमी है। इस हदीस के मतन को भी बाज़ मुहक्किक ने कुबूल नहीं किया जैसे Rashid Rida (in Tafsir al Manar) and Muhammad ibn Salih al Uthaymeen (in Sharh al Aqeedah al Wasitiyyah). 

इस हदीस में दज्जाल को बढे कद काठी वाला बताया गया जबकि एक दूसरी रिवायत में उसे छोटा बताया गया है. यानी दज्जाल की हदीसों में बहुत विरोधाभास है और ऐसे स्तिथि में इंसान को न ऐसी रिवायतें ना मानने का इख्तियार हासिल है।

ये वाक्य नबी की वफात से बस 2-3 साल पहले हुआ था जबकि नबी ने फ़रमाया था कि 100 साल भी नहीं बीतेंगे और दुनिया में आज ज़िंदा सभी लोग मर चुके होंगे. तो फिर इस हदीस का दज्जाल कैसे बाद तक जिंदा रहेगा. तमीम दारी में बयान हुआ दज्जाल, मुख्य दज्जाल नहीं हो सकता क्योंकि कोई भी इतनी सदियां ज़िंदा नहीं रह सकता। जबकि हदीसों में अल दज्जाल की ज़मीन पर उम्र लगभग 1 साल बताई गई है। हो सकता है कोई ये दलील दी कि ये उसकी सक्रियता का काल है। यानी उम्र वाली हदीस की तावील होगी। 

इस हदीस में मुताबिक़ नबी ने खुतबे में सभी को दज्जाल के बारे में वजाहत कर दी थी पर अगर ये जजीरे वाला असल दज्जाल था तो फिर सहाबा इब्न सय्याद को दज्जाल क्यों मानते थे. इसने अपनी सिफ़तें क़यामत वाले दज्जाल की तरह पेश करी थी. इसलिए एक बार को ये माना जा सकता है कि ये एक आम दज्जाल था और इसलिए तमीम दारी की हदीसों को सिर्फ वो 30 दज्जाल वाली बात ही न्यायोचित ठहरा सकती है.

मगर असल में इस हदीस को समझने से साफ पता लगता है कि ये सिर्फ एक वाकया था और ये कोई अंतिम दज्जाल नहीं था। तमीम दारी पहले इसाई थे और इस वाकये पर उनके पुराने नसारा काईद की छाप भी हो सकती है। इस वाकये में सिर्फ यही बयान हुआ है कि वो किसी जज़ीरे पर गए थे जंहा किसी गिरजा में एक शक्श बंधा हुआ था जो खुद को मसीह (धोखेबाज़) होने का दावा कर रहा था (ऐसे मजनू, दावे करने वाले हमेशा से हर मजहब में रहे हैं, ये शख्स भी बस उसी तरह का एक ज़हनी बीमार था)। तिरमिज़ी में बयान हुआ वाकया असलियत के ज़्यादा करीब लगता है। ऐसा लगता है कि इस वाकये को रावियों ने बढ़ा-चढ़ा कर दर्ज करवा दिया होगा। 

 

■ तिरमीज़ी 2253: नबी ने कहा कि तमीम दारी ने मुझे एक कहानी सुनाई, इससे मुझे खुशी हुई, मैं इसे आपको सुनाना चाहता था। कुछ लोग (फिलिस्तीनी) समुद्र में एक द्वीप पर पहुंचे। वहाँ उन्हें एक जानवर मिला, जिसके बाल लहरा रहे थे। उन्होंने कहा: तुम क्या हो? उसने कहा: मैं अल-जस्साह हूँ। उन्होंने कहा: हमें कुछ समाचार दो। उसने कहा: मैं तुम्हें कोई समाचार नहीं दूंगा, न ही मुझे तुम्हारी कोई खबर चाहिए। लेकिन सबसे दूर के गाँव में जाओ, क्योंकि वहाँ कोई है जो तुम्हें समाचार देगा और तुम्हारी खबर लेगा। इसलिए हम सबसे दूर के गाँव में गए, और वहाँ एक आदमी जंजीरों से बंधा हुआ था। उसने कहा: Zughar के झरने के बारे में बताओ। हमने कहा: यह भरा हुआ बह रहा है। उसने कहा: Al-Buhaira के बारे में बताओ। हमने कहा, यह भरा हुआ बह रहा है। उसने कहा: जॉर्डन और फिलिस्तीन के बीच स्थित Baysan के खजूर के बागों के बारे में बताओ, क्या वे भोजन पैदा करते हैं? हमने कहा: हाँ। उसने कहा: मुझे पैगंबर के बारे में बताओ, क्या उन्हें भेजा गया है? हमने कहा: हाँ। उसने कहा: लोग उसके पास कैसे आए। हमने कहा: जल्दी जल्दी। वह भागने की कोशिश करने के लिए उछला। हमने कहा: तुम क्या हो? उसने कहा: मैं दज्जाल हूँ। इसके बाद पैगंबर ने कहा: वह At-Taibah को छोड़कर सभी भूमियों में प्रवेश करेगा और At-Taibah ही अल-मदीना है।

■ मुस्लिम 2942: ईसाई से मुस्लिम हुए तमीम दारी ने बताया कि वह तीस आदमियों के साथ एक जहाज़ में एक महीने तक समुद्र की लहरों के बीच रहे और एक दिन सूर्यास्त के समय वो एक द्वीप पर पहुंचे। वहाँ एक जानवर (Beast) था जिसके लंबे घने बाल थे और बालों की वजह से वे उसका चेहरा और पीठ पहचानी नहीं जा रही थी। हमने कहा: हाय तुम पर, तुम कौन हो? उसने कहा: मैं अल-जस्सासा हूँ। हमने कहा: अल-जस्सासा क्या है?  उसने कहा: मठ (Monastery) में इस व्यक्ति के पास जाओ क्योंकि वह तुम्हारे बारे में जानने के लिए बहुत उत्सुक है। जब उसने एक व्यक्ति का नाम बताया तो हम डर गए कि कहीं यह कोई शैतान न हो। फिर हम मठ में पहुँच गए और वहाँ एक हृष्ट-पुष्ट व्यक्ति को देखा जिसके हाथ उसकी गर्दन से बंधे थे और उसके दोनों पैरों के बीच टखनों तक लोहे की बेड़ियाँ थीं। हमने कहा: हाय तुम पर, तुम कौन हो? उसने कहा: तुम्हें जल्द ही मेरे बारे में पता चल जाएगा लेकिन मुझे बताओ कि तुम कौन हो। हमने कहा: हम अरब से आये हैं। हम इस डर से तुम्हारे पास आये हैं कि कहीं वह शैतान न हो। उसने कहा: Baisan के खजूर के पेड़ फल देते हैं। हमने कहा: हाँ। उसने कहा: मुझे लगता है कि ये फल नहीं देंगे। उसने कहा: Tabariyya की झील में पानी है? हमने कहा: हाँ। उसने कहा: मुझे लगता है कि यह जल्द ही सूख जाएगी। उसने फिर कहा: Zughar के झरने में पानी है और क्या यह सींचई करता है? हमने कहा: हाँ। उसने कहा: मुझे अनपढ़ नबी के बारे में बताओ, उन्होंने क्या किया है? हमने कहा: वे मदीना में बस गये हैं। उसने कहा: क्या अरब उनके विरुद्ध लड़ते हैं? हमने कहा: हाँ। उसने कहा: वो उनसे कैसे निपटे? हमने उसे बताया कि उन्होंने अपने पड़ोस के लोगों पर विजय प्राप्त कर ली है और वे सभी उनके सामने झुक गये हैं। उसने हमसे कहा: क्या वास्तव में ऐसा हुआ है? हमने कहा: हाँ। उसने कहा: अगर ऐसा है तो उनके लिए बेहतर है कि वे उनकी आज्ञा का पालन करें। मैं दज्जाल हूँ और मुझे जल्द ही बाहर निकलने की अनुमति दी जाएगी, फिर मैं धरती पर यात्रा करूँगा, किसी भी शहर को नहीं छोड़ूँगा जहाँ मैं 40 रातों तक नहीं रहूँगा सिवाय मक्का और मदीना के क्योंकि ये दोनों जगहें मेरे लिए वर्जित क्षेत्र हैं और मैं इनमें से किसी में भी प्रवेश करने का प्रयास नहीं करूँगा। एक फ़रिश्ता अपने हाथ में तलवार लेकर मेरे सामने आएगा और मेरा रास्ता रोक देगा और उस तक जाने वाले हर रास्ते की रक्षा के लिए फ़रिश्ते होंगे। इस पर फिर पैगंबर ने कहा: Taiba (Taybah) ही मदीना है, क्या मैंने तुम्हें ऐसा ही विवरण नहीं बताया है? यह विवरण मुझे पसंद आया, देखो वह (दज्जाल) सीरिया के समुद्र (Mediterranean) या यमन के समुद्र (अरब सागर) में है। पैगंबर ने फिर कहा कि नहीं, इसके विपरीत, वह पूर्व में है, वह पूर्व में है, वह पूर्व में है।

■ दावूद 4328 (जईफ सनद-अल्बानी): एक दिन रसूल ने कहा: जब कुछ लोग समुद्र में नौकायन कर रहे थे, तो उनका भोजन समाप्त हो गया। उन्हें एक द्वीप दिखाई दिया। वे रोटी की तलाश में वंहा गए। उनकी मुलाकात जस्सासा (दज्जाल का जासूस) से हुई। जाबिर इब्न अब्दुल्ला ने अबू सलामा से पूछा: जस्सासा क्या है? उसने उत्तर दिया: एक महिला अपनी त्वचा और सिर के बालों को पीछे खींच रही थी। उसने कहा: इस महल में। उसने बेसन के ताड़ के पेड़ों और ज़ुग़र के झरने के बारे में पूछा। उसने कहा: वह ईसा मसीह का विरोधी है। इब्न सलामा ने मुझसे कहा: इस रिवायत में कुछ और भी है, जो मुझे याद नहीं है। उसने कहा: जाबिर ने गवाही दी कि यह वह था, जो इब्न सय्याद था।


6. सफ इब्न सय्याद के बारे में अहादीस

इब्न सय्याद मदीना का अंसार यहूदी था. जब नबी यंहा आये थे, ये एक बच्चा था और नबी के बाद तक जिया. ये मुस्लमान हो गया था. ये भाग्य बताता था, जो झूठ-सच दोनों निकल जाते थे. इसे दज्जाल माना जाता था. नबीं ने इसे दज्जाल नहीं पुकारा, सिर्फ शक किया. नबी इसकी सच्चाई जानना चाहते थे, छुपके से इसके करीब जाते थे ताकि कुछ सुन सके, इससे सवाल करते थे. लोगों के इल्जामों से तंग आ कर ये ख़ुदकुशी भी करना चाहता था।

इब्ने सय्याद के पास कोई जन्नत, जहन्नुम, बारिश, नदी, आग, पहाड़, मुर्दे ज़िंदा करना वगैरह जैसी ताकतें नहीं थे, मगर फिर भी सहाबा इसे दज्जाल क्यों मानते थे? हालंकि इसके बचाकने पान में नबूवत के दावे के बाद ज़रूर से बहुत से मुर्तादों ने नबूवत के दावे करने का फितना फैलाया है मगर ज़रूरी नहीं वो सभी दावे इससे प्रेरित थे. इसलिए इसे दज्जाल पुकारने को फिर से वो 30 दज्जाल वाली बात ही न्यायोचित ठहरा सकती है. 

■ मुस्लिम (2930, 2931, 169), दावूद, मिश्कातपैगंबर बच्चों के पास से गुज़रे/खेलते हुए पाया. बच्चे आगे बढ़ गए लेकिन इब्न सय्याद (किशोरावस्था) वहीं बैठे रहा. ऐसा लगा कि रसूल को बच्चों के साथ उसका बैठना पसंद नहीं आया. उन्होंने कहा : क्या तुम गवाही देते हो कि मैं अल्लाह के रसूल हूँ. उसने कहा: तुम उम्मियों (गैर यहूदी) के रसूल हो। फिर इब्न सय्यद ने कहा: क्या तुम गवाही देते हो कि मैं ईश्वर का दूत हूँ? पैगंबर ने उसे कसकर पकड़ा/इंकार किया और कहा, मैं ईश्वर और उसके दूतों पर विश्वास करता हूँ। पैगंबर ने पूछा : तुम्हारे पास क्या आता है/ दिखता है/ दिखा/ख़वाब दिखते हैं? उसने कहा: मुझे पानी पर एक सिंहासन दिखाई दे रहा है। रसूल ने बताया कि जो वह देख रहा है वह समुद्र पर इबलीस का सिंहासन है, और पूछा कि और क्या देखा। उसने कहा: मुझे दिखाई दे रहे हैं/देखता हूँ, दो लोग जो सच बोल रहे हैं और एक झूठ बोल रहा है, या दो लोग जो झूठ बोल रहे हैं और एक सच बोल रहा है/जो सच बोलता है और जो झूठ बोलता है, वे मेरे पास आते हैं। पैगंबर ने कहा : तुम भ्रमित हो (वह भ्रमित/चकित है, उसे अकेला छोड़ दो [कुछ हदीसे यंहा ख़तम हैं]फिर रसूल ने कहा: मैंने कुछ मन/हाथ में छुपाया है (आयात: जिस दिन आकाश से धुआं निकलेगा जो स्पष्ट दिखाई देगा. उसने कहा: धुआं/यह धुआं है। रसूल ने कहा: दूर हो जाओ, तुम अपने पद/योग्यता से आगे नहीं जा सकते/जाओगे। उमर ने कहा: मुझे उसका सिर काटने की अनुमति दें। रसूल ने कहा: यदि वह वही (दज्जाल) है, तो तुम उसे मार नहीं पाओगे (अधिकार नहीं दिया जाएगा) और यदि वह नहीं है, तो उसे मारने का कोई मतलब नहीं है [कुछ हदीसे यंहा मुक़म्मल हैं]. एक बार इब्न सय्याद लेटा हुआ था, बड़बड़ाहट कर रहा था. जब उनकी माँ ने पैगंबर को पेड़ों के पीछे छिपे हुए देखा तो कहा की कि यहाँ मुहम्मद हैं. इब्न सईद ने बड़बड़ाना बंद कर दिया. रसुल ने कहा कि ऐसा न होता तो आज इसने सब स्पष्ट कर दिया होता. 

■ मिश्कात 5498इब्न सय्यद ने कहा, लोग दावा करते हैं कि मैं दज्जाल हूँ! क्या तुमने रसूल को कहते नहीं सुना कि उसके कोई बच्चे नहीं होंगे? लेकिन मेरे बच्चे हैं। क्या यह नहीं कहा कि वह काफिर होगा? लेकिन मैं एक मुसलमान हूँ। क्या यह नहीं कहा कि वह मदीना, मक्का में प्रवेश नहीं करेगा? लेकिन मैं मदीना से आया हूँ और मक्का जा रहा हूँ। मैं जानता हूँ कि वह (दज्जाल) कब और कहाँ पैदा हुआ था और वह अभी कहाँ है, और मैं उसके माता-पिता को भी जानता हूँ। ऐसी संदेहनात्मक बात पर इब्न सय्यद को कहा गया: तुम उलझन में रहो! इब्न सय्यद ने बताया कि जब किसी ने उससे पूछा कि क्या वह वो आदमी बनना चाहेगा तो उसने जवाब दिया, अगर मुझे यह प्रस्ताव दिया जाता तो मैं आपत्ति नहीं करता।

■ एक सहाबी ने इब्ने सय्याद को दज्जाल ही कहा था और बताया था कि ह. उमर ने भी ये बात रसूल की मौजुदगी में कही थी और रसूल ने इसका इनकार नहीं किया था। इसी तरह एक सहाबिया ने भी उसके दज्जाल होने पर शक जताया था. 

ऐसा लगता है ये एक मजनू-दीवाना था जो उम्र भर ऐसा रहा. ये देख कर राज़-भाग्य बताता था जो सच भी होता था, जैसे आज भी ये आर्ट पायी जाती है. नबी ने इसकी हकीकत जानना चाही होगी. इसके दिए बेतुके जवाबात से इसके दज्जाल/शैतान होने की बात फ़ैल गयी होगी। इसके अलावा, ये मदीना में यहूद के साथ रहता था और उनसे आने वाले मसीह की कहानियां इसने भी अंसार की तरह सुनी ही होगी। हो सकता है कि मुहाजिर आने से पहले, लोगों से आपसी बातचीत में यह खुद को वही मसीह बताता फिरता हो। क्योंकी ज़हनी बीमार अक्सर बातें सुनके रिपीट करते हैं। इसलिए जब नबी ने खुद को इससे शहादत दिलवाई थी तो इसने भी पलट कर तरीके से कहा था कि अब तुम कहो कि मैं भी अल्लाह का रसूल हूँ (पैगम्बरी का बेवकूफाना और बचकाना दावा जो बाद में मसीहा का दावा भी हो सकता था)। बल्कि इसने एक बार खुद को दज्जाल बनने का मौका मिलने पर भी कोई आपत्ति नहीं जताई थी और कहा था कि ये दज्जाल की ज़ाती जानकारियां भी जानता है।

1. बाज़ विद्वानों ने इसे कोई से भी दज्जाल नहीं माना है। असल में ये एक मेंटली चैलेंज्ड लगता है।

2. ये मुख्य दज्जाल नहीं था बल्कि छोटा दज्जाल था। अल दज्जाल के बारे में बताई गयी अलामतें, इससे नहीं मिलती थी जैसे इसके बच्चे होना और इसका मक्का मदीना में प्रवेश पाना।

3.  अक्सर विद्वान इसे एक आम दज्जाल मानते हैं मगर ये वो भी नहीं था क्योंकि बड़ा हो कर ये मुसलमान हो गया था और दीनी अहकाम अदा करने लगा था। लोगों ने इसे मुनाफिक भी नहीं कहा, बस इसकी बेतुकी बातों के कारण शक करते रहें। इसके व्यवहार से लगता है कि इसका दिमागी संतुलन अंत तक भी ठीक नहीं हुआ था।

4. बाज़ ने इसे एक शैतान (दज्जाल सा) माना है. दूसरे लफ़्ज़ों में कहें तो एक दज्जाली/शैतानी फितरत का इंसान।

[इस तरह तमीम दारी और इब्ने सय्याद के वाक्यों से ये वाज़ेह हो रहा है कि दिमागी संतुलन सही नहीं होने के कारण पैगम्बरी या मसीहियत का दावा करने वालों को दज्जाल का लक़ब दिया जाता था, जिसके मायने झूठे होने के ही हैं। यानी ऐसे लोगों को मुख्य दज्ज्जल ही माना जाता था मगर पूरी शक्सियत दज्जाली नहीं होने के कारण, उन्हें आम दज्जाल भी माना जाता था। मगर यह भी हो सकता है कि बाद या अंत में किसी फरेबी मसीह के आने की भविष्यवाणी को हर ऐसे शख्स पर फिट किया जाता था जिसकी वजह से बहुत से लोग दज्जाल कहलाने लगते थे और इस वजह से 30 दज्जाल वाली तावील वजूद में आई]


7. दज्जाल की उम्र पर हदीस

■ हदीसों में बताया गया है कि दज्जाल 40 दिन रहेगा, जिनमे पहला दिन 1 साल के बराबर होगा, दूसरा दिन 1 महीने के, तीसरा 1 हफ्ते के और बाकी 37 आम दिनों जैसे. 

■ Old Testament: Daniel 7:25: The "Armilus" shall speak great words against the most High, and shall wear out the saints of the most High, and think to change times and laws: and they shall be given into his hand until a time and times and the dividing of time (3.5 years).

■ New Testament: Revelation 13:5: describes the "Beast" from the sea as being given a mouth to speak blasphemies and boastful words, and the authority to act for 42 months.

ऐसा लगता है मुस्लिम रावियों ने इस्राएली रिवायतों में से ही ये 40 दिन की संख्या और इन्हें देवमाला रूप (कोडभाषा) में बयान करना सीखा होगा.

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दज्जाल की निशानियों, अलामतों पर अहादीस का जायज़ा


दज्जाल का ज़िक्र सिर्फ सहीह रिवायतों (जो कम हैं) में देखना चाहिए, क्योंकि बहुत गड़बड़ियां है बाकी जगह. या कम से कम हसन दर्जे की तो होनी ही चाहिए. 

हदीसो में दज्जाल के साथ कई निशानियां साथ बताई जाती हैं. कुछ निशानियाँ तो मानी जा सकती है मगर सभी नहीं. सभी निशानियों को एक साथ देखने पर दज्जाल की शक्सियत अक़ल के म्यार पर खरी नहीं उतरती है. 

जितना कंटेंट इस्लामीक साहित्य में दज्जाल पर है। अगर दज्जाल ने आके यही सच्ची-झूठी पेशनगोईयां (जो इतनी मशहूर हो चुकी हैं) बिल्कुल कदम दर कदम दोहराई तो उससे बड़ा बेवकूफ कोई इंसान नहीं हो सकता। इस तरीक़े से ऐसा इंसान कैसे दुनिया को धोखा देगा?  


1. सबसे अहम हदीस

एक हदीस में एक सहाबी कहते हैं कि लोग दज्जाल के बारे फला फला चीज़ें  (बढ़ा चढ़ा कर)  बयान कर रहे हैं तो नबी ने फ़रमाया कि अल्लाह के यंहा, उसकी इतनी (फला फला काम करने की) औकात ही नहीं है. यानी इज्राएली रिवायतें हर जगह इस मुद्दे पर मुसलामानों में फैल रही थी. 

Bukhari (7122) & Muslim (2939): Narrated Al Mughira bin Shuba asked Prophet: The people say/ allege that Dajjal will have a mountain of bread & mutton and a river of water with him. The Prophet said: No, he is too mean to be allowed such a thing by Allah/ He would be more insignificant in the eye of Allah compared with all this.

2. अतार्किक अहादीस

■ उसका काना, कुबड़ा होना, कफर माथे पर लिखा होना.
[जबकि उसके पास दुनिया के तमाम ज़राए, तकनीक होंगी. वो ये सब चीज़ें से खुद की पहचान क्यों जग ज़ाहिर करवाएगा]

■ दज्जाल येरूशलेम की ओर जायेगा. ईसा उससे वंही Ludd (Lod) गाँव के गेट पर टकराएंगे और उसे यंही मार देंगे.
[सब जान कर भी वो वंहा ईसा के हाथों मरने के लिए क्यों आएगा].

■ मुसनद 14426/ IslamQA: ईसा दज्जाल से कहेंगे, मुझे तुमसे कुछ काम है, तुम मुझसे दूर नहीं जा सकते। फिर वह उसे पकड़ लेंगे और अपने भाले से उसे मार देंगे। 
■ ज्यादातर मुसलमान येरूशलेम में ईसा की आमद में जमा होंगे. ईसा कहेंगे मेरे घूंसे से तू बच नहीं पायेगा.
■ मुस्लिम 2944: दज्जाल के पीछे इस्फ़हान के सत्तर हज़ार यहूदी फ़ारसी शॉल पहने हुए चलेंगे.
[इतनी निशानियां जानकर, कोई बेवकूफ भी इस वाकये को ज्यों का त्यों नहीं दोहराने देगा].

■ मुस्लीम (5239), मिश्कात (5469): आदम से लेके क़यामत तक, दज्जाल से बड़ी तखलीक/मामला कोई नहीं है 
[तो फिर कुरान में होना चाहिए था].

■ दावूद (3763): नबी ने फरमाया कि मैंने तुम्हें दज्जाल के बारे में इतना कुछ बता दिया है कि मुझे डर कि तुम समझ नहीं पाओ.
■ पैगंबर दज्जाल का ज़िक्र कभी ऐसे करते थे कि जैसे वह महत्वहीन हो और कभी ऐसे जैसे बहुत महत्वपूर्ण हो. 
[असल में ये हदीसे बयान करने वालों ने वाकई ऐसा कर दिया है]


■ दज्जाल के आने की अलग अलग जगह बयान हुई हैं जैसे सीरिया-इराक़ के दरम्यान से या खुरासान से।
[उसके स्थान पर बहुत मतभेद हैं. ऐसा बयान करने वालों की वजह से ही हुआ होगा.]


■ इब्ने कथिर: वह लाल या सफेद होगा मतलब सफेद हल्का लाल।  
■ मुस्नद अहमद, तबरानी - इब्ने कथिर: उसका सिर अजगर और पेड़ की शाखाओं जैसा दिखेगा.
■ उसकी एक आंख हरी बोतल और बाहर निकले या लटके हुए किसी अंगूर की तरह होगी. 
[जबकि एक हदीस में उसकी आँख glittering star जैसी बताई गयी हैं. शायद इसकी हुलिए वाली सभी सादी अलामतों को लोगों ने अपने लफ़्ज़ों से ढाल दिया है इसलिए दज्जाल के मुद्दे पर हर चीज़ में यही हुआ लगता है] 

{ये सब परम्पराओं का प्रभाव ही लगता है क्योंकि दज्जाल को एक आँख वाला प्राणी भी दर्शाया जाता है. प्राचीन सभ्यताओं और कथाओं में एक आंख वाले दानव, जाइंट वगैरह का अस्त्तिव रहा है जैसे यूनानी पौराणिक कथाओं में Cyclopes का उल्लेख है.}



3. तावील के लायक अहादीस

■ दज्जाल के यहूदी पैरोंकार पर चट्टान और पेड़ (सिवाए ग़रक़द के पेड़ जो की यहूदियों का पेड़ है) कहेंगे कि ऐ मुस्लमान मेरे पीछे छिपे यहूदी छिपा है, आओ और इन्हें मार डालो.
■ कफर का पढ़े-अनपढ़ दोनों तरह के मोमिन उसे पढ़ पायेंगे. 
■ जब दज्जाल ईसा को देखेंगे तो वह पानी की तरह पिघलने लगेगा.
[ये सभी अजीब बयान हैं. इनकी तावील ही करनी होगी.] 

■ जब दज्जाल आयेगा मदीना के 7 गेट होंगे. (इससे मुराद मदीना के प्रवेश मार्गों लिया जाता है क्योंकि फ़िलहाल कोई गेट नहीं है).
[यानी यंहा भी तावील करनी ही पड़ी है]

■ जो कोई काफ़िर ईसा की खुशबू सुंघेगा वो मर जायगा.

[दज्जाल को खत्म करने आए ईसा अलैह. के बारे में भी ऐसी बहुत सी अजीब बयान हैं, इन बातों को मानने के लिए उनकी तावील ही करनी पड़ेगी।]

 

4. दौरे जदीद के बारे में अहादीस

■ नबी का यह कहना की हर नबी ने उसके बारे में चेताया है.
[
मगर पहले के नबियों की उम्मत क़यामत तक के लिए थी ही नहीं तो फिर उन्होंने अपनी कौमों को आखिर में आने वाले दज्जाल से क्यों डराया जिसका उन्हें समाना ही नहीं करना था? इसका मतलब है कि या तो हर दौर में दज्जाल होता था या फिर हर नबी झूठे मसीहाओं से आगाह करते थे जिसे नबी के वक़्त के दज्जाल नाम से पुकारा गया. शायद ये दौरे जदीद के फितने की तरफ भी ईशारा हो कि एक ऐसा दज्जालियत/धोखेबाजी का वक़्त भी आएगा कयामत के करीब.]


■ Kanz al Ummal 39709: Dajjal will speak with a voice that will be heard in the east and the west.
[अगर वाकई उसकी आवाज़ इतनी तेज हुई तो सबसे पहले वो खुद बेहरा हो जायगा. इसका मतलब यंहा भी तावील करनी होगी और इसे जदीद दौर की मिडिया के ज़रिये अपनी आवाज़ पहुचाना माना जा सकता है]
 

 
■ वो एक लड़के के तलवार से दो टुकड़े कर देगा और फिर वापिस जोड़ के जिंदा कर देगा. उसके पास जन्नत और जहन्नुम दोनों होंगे, पहाड़, नदियाँ, होंगी. साफ और पानी और आग की नदियाँ होंगी. 
[तकनीक से दिखाना]

■ वो बादल की तरह तेज चलेगा, पानी बरसायेगा, सूखा लायेगा, ज़मीन के खाजाने बहार ले आएगा. 
[तकनीक से ही होगा]

■ वह जब गुजरेगा तो उसमें यकीन नहीं करने वाले कबीले के पशु ख़त्म हो जायंगे और यकीन करने वाले कबीले के लिए वह बारिश करवायेगा, खेती उगवायेगा, पशुओं को मोटा-ताज़ा करवाएगा. 
[ये तो आज हो नयी तकनीक अपनाने वाले के साथ हो रहा है, जो नहीं कर रहा वो बर्बाद हो रहे हैं.]

वह मक्का- मदीना में नहीं घुस पायगा.
[कोई नए दौर की चीज़ जिसे यंहा से दूर ही रखा जाएगा]

 

■ उसके जानवर हष्ट-पुष्ट, दूध से भरे  शाम तक वापिस आ जाया करेंगे.
[जैसे डाटा कलेक्शन. 
अगर किसी आलमी या जदीद जंग मायने ले तो टैंक्स, जेटस, फ़ोर्स का वापिस आना]

उसका एक दिन एक साल के बराबर होगा तो वक़्त का अंदाजा लगाकर नमाज़ पढना.
[अंटार्टिका में जीवन की शुरवात. 
अगर कोई आलमी या जदीद जंग मायने ले तो जंगी धुंवे से ढक चुके सूरज के दिनों की ईशारा लगता है]

■ मुस्लिम, रियाद: लोग दज्जाल से भागकर पहाड़ों में शरण लेंगे (People will run away from Dajjal seeking shelter in the mountains).
[दुनिया की चकाचौंध से दूर एकांत में जाना. 
अगर कोई आलमी या जदीद जंग मायने ले तो बमबारी से बचने के लिए बंकरों या बिना रोशनी वाली जगहों पर जाना] 

कुरान में याजूज माजूज के अंत का ज़िक्र नहीं है. हदीसों में कीड़ों से मरने का ज़िक्र है जिसके बाद अल्लाह बारिश भेजगा. इसके बाद बड़े बड़े फल-सब्जियां पैदा होंगी. 
[
यह बातें दज्जाल, याजूज माजूज से जंग और उनके अंत के बाद के बारे में हैं, अगर कोई आलमी या जदीद जंग मायने ले तो बायोलोजिकल हथियार उत्पत्ति. कंटेमिनेशन को तरल दवाइयों, वैक्सीन वगैरह से ठीक करना. मगर ये आज लागू हो चूकी हैं.]  

 

■ बैल का सिर सौ दीनार से भी ज़्यादा प्यारा लगेगा. बैल, घोड़ा बेहद सस्ते में बिकेगा.
[
यह बातें दज्जाल, याजूज माजूज से जंग के दौरान और जंग के बाद के बारे में हैं. मगर ये आज लागू हो चूकी हैं जैसे महंगाई चालु है]

■ सब जीह्रीले प्राणियों का ज़हर ख़त्म हो जाएगा. शेर बच्चों से डर के भाग जाएगा. भेड़िया भेड़ों में रहने लगेगा. पुरे कबीले के खाने-पीने के लायक एक-एक अंगूर-अनार होंगे और एक-एक गाय-भेड़ इतना दूध देंगी. 
[
यह बातें ईसा की जीत, दज्जाल, याजूज माजूज के अंत के बाद के बारे में हैं. मगर ये आज लागू हो चूकी हैं जैसे ज़हर का मुक़म्मल इलाज मौजूद है, जानवर तफरी के लिए पाले जा रहे हैं, शोषक शोषित साथ रहने लगे हैं, पूरा व्यव्यासिकरण हो चूका है.] 

 

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दज्जाल के वजूद पर मौकिफ


1. आम नज़रिया

पहला तो आम मौकिफ ही है कि ये एक माद्दी शक्सियत होगा. इस आम मौकिफ की एक खास तफसील इस तरह है कि क्योंकि बाज़ रिवायतों के मुताबिक़, दज्जाल पर ईमान लाना ज़रूरी है और नबी ने फरमाया है कि हर नबी ने दज्जाल के फितने से डराया है (हदीस का दर्जा?). इसका मतलब है कि हर दौर में दज्जाल होता है. दज्जाल और इब्लीस के अनुयायी हमेशा हर दौर में रहते हैं. हदीसों से वाजेह हैं कि दज्जाल (जैसे इब्लीस) समुन्दर में रहता है. दज्जाल असल में हर दौर में शैतानों के सरदार का नाम है (चाहे वो इब्लीस ही रहा हो या कोई और) जो आखिर में इंसानी शक्ल में निकल खडा होगा. अंत में शैतान माद्द्दी शक्ल में होंगे जैसे दज्जाल (सबका सरबरा), याजूज माजूज (शैतानों - जिन्नात की एक नस्ल) और तब आम जिन्नात भी होंगे. हदीस में लिखा है कि यह मदीना में दाखिल होने के इरादे से पूर्व (ड्रेगन/बरमूडा ट्रायंगल) की तरफ से आएगा. 

अल्लामा सय्यद अब्दुल्लाह तारिक साहब का यही नज़रिया है।

■ Bible: Revelations 20:1-3 & 7-9: I saw an angel come down from heaven, having the key of the bottomless pit and a great chain in his hand. And he laid hold on the dragon, that old serpent, which is the Devil, and Satan, and bound him a thousand years. And cast him into the bottomless pit, and shut him up, and set a seal upon him, that he should deceive the nations no more, till the thousand years should be fulfilled: and after that he must be loosed a little season. When the thousand years are expired, Satan shall be loosed out of his prison. And shall go out to deceive the nations which are in the four quarters of the earth, Gog and Magog, to gather them together to battle: the number of whom is as the sand of the sea. They went up on the breadth of the earth, and compassed the camp of the saints about, and the beloved city: and fire came down from God out of heaven, and devoured them./ फिर आकाश से मैंने एक स्वर्गदूत को नीचे उत्तरते देखा। उसके हाथ में पाताल की चाबी और एक बड़ी सौंकल थी। उसने उस पुराने महासर्प को पकड़ लिया जो दैत्य यानी शैतान है फिर एक हजार वर्ष के लिये उसे सौंकल से बाँध दिया। तब उस स्वर्गदूत ने उसे महागर्त में धकेल कर ताला लगा दिया और उस पर कपाट लगा कर मुहर लगा दी ताकि जब तक हजार साल पूरे न हो जायें वह लोगों को धोखा न दे सके। हजार साल पूरे होने के बाद थोड़े समय के लिये उसे छोड़ा जाना है। फिर एक हज़ार वर्ष पूरे हो चुकने पर शैतान को उसके बंदीगृह से छोड़ दिया जायेगा। और वह समूची धरती पर फैली जातियों को छलने के लिये निकल पड़ेगा। वह गोग और मागोग को छलेगा। वह उन्हें युद्ध के लिये एकत्र करेगा। वे उतने ही अनगिनत होगें जितने समुद्र तट के रेत-कण। शैतान की सेना समूची धरती पर फैल जायेगी और वे संत जनों के डेरे और प्रिय नगरी (ईसाईयों के अनुसार बेतुल मुक़द्दस) को घेर लेंगे। किन्तु आग उतरेगी और उन्हें निगल जाएगी.

[इन्होने इससे दज्जाल मतलब लिया है?]

 

2. तार्किक नज़रिया

अल्लाह के दिखाए रोये को बुनियाद पर नबी पेशनगोईयां करते थे। जो उनकी कौमों में रिवाती तौर पर जारी रहती थी. लोग इनमें झूठे-सच्ची बातें भी शामिल करते थे. बाद में इन्हें ही लोग अपने मुताबिक रिकार्ड्स में दर्ज कर लेते थे.

सारी रिवायतों को साथ देखने पर पता लगता है कि इसका नाम मसीह दज्जाल है। इसे अल मसीह अल दज्जाल यानी धोखेबाज़ मसीह कहा गया है. जैसे अल नबी अल कज़्ज़ाब यानी झूठा नबी होता है. अल का मतलब अहद यानी The होता है. दज्जाल एक एडजेक्टिव है जो नाउन की तरह बात में प्रयोग होने लगा जैसे हूर लफ्ज़ के साथ हुआ. यानी बाद में दज्जाल नाम, अल मसीह अल दज्जाल के लिए खास हो गया. यानि बाद या अंत में आना वाला एक खास मसीह दज्जाल.

आखिरी मसीहा की पेशनगोइयाँ हर मज़हब में मौजूद है और इनकी बुनियाद पाए दावे करने वाले भी आते रहे हैं और आते रहेंगे। इसलिए मुमकिन है कि इन रिवायतों-परम्पराओं के आधार पर कोई फरेबी आइन्दा भी बहुत बड़ा धोखा देने मसीहा बनके आ सकता है.

बड़ा फितना किसी भी दौर में मुमकिन है, इस उम्मत में भी मुमकिन है (जैसे कभी हारूत-मारूत का मामला हुआ था, जब फ़रिश्तें लोगों की आज़माइश के लिए आये थे और उन्हें फ़ितने की चेतावनी देने के बाद भी जो सीखना चाहते थे, उन्हें जादू सिखाते थे, जिससे शौहर-बीवीयों में झगड़े हो जाते थे आदि और यही लोग फिर झूठ कहने लगे कि ह. सुलैमान से उन्होंने जादू सीखा था, जबकि ऐसा नहीं था)।

जावेद अहमद गामिदी साहब का यही नज़रिया है।


3. ऐतिहासिक नज़रिया

तीनों मज़ाहिब में मौजूद इन बातों पर गौर करने पर ऐसा लगता है कि अल दज्जाल मसीह यहूद के लिए कोई झूठा मसीह नहीं होगा बल्कि मसीह ही होगा (क्योंकि उन्हें इसका इंतज़ार हैं) मगर हमारे लिए दज्जाल होगा. मगर ये तो यहूद, ईसाई, मुस्लिम, किसी भी धर्म में आ सकता है क्योंकि तीनों ही क़ौम अपने एक मसीह का बेसब्री से इन्तेज़ार कर रही हैं और हर धर्म में धोखेबाज़ मौजूद हैं और ऐसे क्लेम पहले भी होते रहे हैं। नबी के बाद से ही हर सौ-दो साल में कोई न कोई ये दावा करता ही रहा है.

नबी के दौर के मुसैलमा कज़्ज़ाब, अस्वद अनसी आदि ने ये दावा किया है मगर उन्हें नबी ने दज्जाल नहीं पुकारा यानी ये बाद में आने वालों की बात है। 1979 Mecca Grand Mosque Seizure के दौरान काबा में घुसे अरबी कट्टरवादी गिरोह के सरगना जुहयामन अल ओताय्बी था और इसके साथी मुहम्मद बिन अदुल्लाह कहतानी को इसने मेहदी घोषित किया था (नबी के खानदान से नहीं था हालाँकि दावे किये गए थे) मगर इन दोनों को मार दिया गया था. अहमद क़ादियानी, बाब, बहाई, रशद खलीफा, शकील बिन हनीफ जैसे धोखेबाज़ नबूवत के दावे करते रहे हैं। क्या झूठे मसीहा की भविष्यवाणी इन पर फिट नहीं हो रही?

क्योंकि अधिकतर मुख्य धर्मों में (अब्राहिमी, पारसी, हिन्दूधर्म, बौद्ध, ताओइज़्म) उनके एक बड़े मसीहा के आने की भविष्यवाणी मौजूद रही हैं. हिन्दुधर्म में कल्कि की मान्यता के बारे में यह माना जाता है कि वह विदेशी धर्मीं के आगमन के कारण और उनसे प्रेरणा लेके पैदा हुई. इसलिए मुसलमानों में भी संभवत एक झूठे दज्जाल के आने की भविष्यवाणी ने भी जन्म लिया वरना इन मसीहा के आने का क्या औचित्य रह जायेगा. आखिर मेहदी जैसी इतनी बड़ी शक्सियत ज़मीन पर आयेगी तो कोई दज्जाल जैसी बड़ी शक्सियत भी उनके सामने होनी चाहिए ताकि वो उसका अंत कर सके. 

पहली बार देख कर यही लगता है कि इस्लाम में दज्जाल की कहानी इस्राईली रिवायतों से आई है (जैसे आदम की पसली से हव्वा का निकलना, हव्वा के गुनाह से इंसानियत का जन्म, सांप रुपी इब्लीस सशैतान वगैरह कहानियाँ आई हैं).


4. आध्यात्मिक नज़रिया

असल में दज्जाल का उदय याजूज-माजूज के उदय की ही एक्सप्लेनेशन या एक्स्टेंशन है। दज्जाल एक संज्ञा (noun) है, जो एक गुण (सिफ़त) को दर्शाता है। इसका अर्थ है, महान षड्यंत्रकारी और धोखेबाज़। क़ियामत के करीब, नबी ने याजूज-माजूज के उदय को दज्जाल कहा है।  याजूज-माजूज की संतान पश्चिमी राष्ट्र हैं, वे एक ऐसा समाज हैं जो धोखे (धर्म से विरक्ती) पर आधारित है। इसी आधार पर नबी ने इन्हें दज्जाल यानी महान धोखेबाज़ घोषित किया था। दज्जाल की एक खूबी यह है कि उसकी एक आँख खराब है। यह पश्चिमी देशों का मनुष्य के आध्यात्मिक क्षेत्र से दूर होना ओर भौतिक क्षेत्र की ओर मुड़ने का संकेत है। यानी इंसान के जीवन का केवल सांसारिक पक्ष को देखना, रूहानी नहीं. इसी तरह पश्चिम में सूरज का उगना भी संभवतः पश्चिमी देशों के राजनीतिक उत्थान की ओर संकेत है। दज्जाल के एक हाथ में जन्नत और एक में जहन्नुम होगी, ये एक तमसील है जैसे खवाबो में तमसील होती है।

दज्जाल शब्द बना है दजल से जिसका मतलब होता है धोखा देना. इसलिए बाज़ उलेमा दज्जाल या दज्जालियत को metaphorical और scientific age का  phenomenon मानते हैं और इसे global warming - Climate Change से जोड़ कर देखते हैं. यानी दज्जाल असल में जदीद दौर का ज़िक्र है, जब लोगों में रूहानियत गायब हो कर उन पर शैतानियात हावी हो जाएगी.

दज्जाल एक phenomena (कोई सच्चाई या घटना जो पूरी तरह समझ में न आए) है. पहले भी धोखे देने वाले यानि दज्जाल और मार्गदर्शित करने वाले यानी मेहदी होते थे. मगर आज इतने ज़राए मौजूद है कि पूरी दुनिया को धोखे देने वाले और मार्गदर्शित करने वाले आलमी सतह पर हो सकते हैं. मटेरियलिजम पहले इतना नहीं था जितना आज के विज्ञान, तकनीक और सुचना के दौर में हो गया है, इसलिए यह दज्जाल है. ये दौर रेनेसा युग से शुरू हुआ और डार्विन, मार्क्स, फ्रायड के समय में ऊंचाई छूना शुरू हुआ. 

एक तरह से देखीं तो दज्जाल यानि बुराई और मेहदी यानी अच्छाई, जैसे पारसी धर्म में ये दोनों कुव्वतें होती हैं. आखिरकार ये तो सब मानते हैं कि दज्जाल इंसानियत को गुमराह करेगा और उनके लिए एक इम्तिहान होगा। बाज़ अहादीस में दज्जाल को अल्लाह के दुशमन नाम से पुकारा गया है. 

मौलाना वाहिद्दुदीन खां साहब का यही नज़रिया था।


5. वैज्ञानिक नज़रिया

कुछ लोग दज्जाल को किसी शक्सियत की बजाय उसे धोखे, गुमराही के टूल जैसे Camera (दज्जाल की एक आंख की तरह) और Artificial Intelligence (भ्रम, फितना फ़ैलाने का बायस) से मिलाकर समझने की कोशिश करते हैं. कुछ विद्वानों के अनुसार ये हदीसे उस वक़्त का ज़िक्र कर रही हैं जब Virtuality और Reality को अलग अलग करते हुए पहचानना मुश्किल हो जायेगा। 

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