उलेमा
इल्म रखने वाला आलिम है चाहे इल्म कोई भी हो। उलेमा पर 2 हदीसें है। पहली में कहा गया कि मेरी उम्मत के उलेमा बानी इस्रायल के अम्बिया के मिसल/वारिस है। दूसरी में कहा गया कि उलेमा के कलम की स्याही शहीद के खून से बढ़कर है। दोनों रिवायतें कमज़ोर है हालांकि दोनों का मुद्दा या थीम बिल्कुक दुरुस्त है क्योंकि ये उलेमा इंसानों और आने वाली पीढ़ियों के लिए ऐसे ही काम करते है।
यंहा कहे गए उलेमा का मतकब मदरसों में पढ़े आलिम या डिग्री वाले आलिम नही बल्कि कोई भी इल्मे दीन रखने वाला शख्स है जिसने किसी भी तरह इल्म हासिल किया हो।
क़ुरान में 2 जगह उलेमा लफ्ज़ आया है। एक जगह बनी इसराइल के लिए आलीमों के लिए। दूसरी जगह अल्लाह के बंदों के लिए। दूसरी जगह (35:28) की में इल्म रखने वालों की बात कही गयी है। इसी आयात और इसकी पिछली आयत में बारिश, आसमान, पैदावार, पहाड़, इंसान, दरिदों, चरिंदों और इनके रंगों की बात कही गई है। इससे ये मतलब भी लिया जाता है कि दुनिया की इस तरह की फ़ील्ड में इल्म रखने वालों का यंहा ज़िक्र है।
इल्म
Knowledge is a collection of facts, information and skills.
इस्लाम इल्म को कैसे डिफाइन करता है। इस्लाम कहता है कि इल्म सिर्फ एक लर्निंग नही है बल्कि एक लाइट है जिससे अल्लाह बंदों के दिलो को भर देता है।
जैसे अंधेरे को सिर्फ रोशनी मिटा सकती है। वैसे ही जहालत को इल्म मिटा सकता है। अज्ञानता को ज्ञान दूर कर सकता है और ignorance को knowldge.
माखज़ की बुनियाद पर इल्म को 2 हिस्सो में बांटा गया है। एक Revealed knowledge यानी वाहिय का इल्म जैसे इल्हानी किताबें। दूसरा Acquired knowledge यानी तजुर्बों से सीखा गया इल्म जैसे साइंस। क्योंकि साइंस भी एक इल्म ही तो है।
Science is the knowledge obtained through observation and experiment.
नेचर की बुनियाद पर इल्म को 2 हिस्सों में बांटा गया है। एक इल्मे नाफ़े जो नफा बक्श हो यानी benficial. दूसरा इल्मे गैर नाफ़े जो नुकसानदायक हो यानी harmful. दीन और दुनिया ने इल्मे नाफ़े को ही तरजीह दी है।
एक आम इंसान ये मानता है कि एक इल्मे दीन है और दूसरा इल्मे दुनिया। अल्लाह और क़ुरान ने कभी इल्म को तक़सीम नही किया। इस्लाम ने दोनों को एक ही समझा और उसे हासिल करने की तालीम दी।
क़ुरान में इल्म लफ्ज़ 167 से भी ज़्यादा बार आया है। हदीसो में पूरे के पूरे बाबा यानी चैप्टर है इल्म के ऊपर। इस्लाम में पढ़ने पढ़ाने और इल्म हासिल करने को इतनी अहमियत दी गयी। इल्म हासिल करना मर्द औरते पर फ़र्ज़ है।
क़ुरान की पहली आयत जो नाज़िल हुई असक पहला अल्फाक्स ही पढ़ने और इल्म हासिल करने पर ज़ोर देता है। जो सुराः अलक: में है कि इक़रा बिसमी रब्बिका अल्लज़ी ख़ल्क़। पढ़ो अपने रब के नाम से। इल्म के बारे में आगे क़ुरान सूरह उज़ ज़ुमुर में कहता है कि इल्म वाले बैगर इल्म वाले बराबर नही हो सकते।
एक रिवायत है कि रसूलुल्लाह ने फरमाया कि इल्म हासिल करने को चीन भी जाना पड़े तो जाओ। एक हदीस में आप जे फरमाया, तलबूल इलमु फ़रीज़तुन अला कुल्ली मुस्लिम। इल्म हासिल करना हर मुसलमान पर फ़र्ज़ है।
सहीह बुखारी की हदीस है कि नबी ने फरमाया की जो कोई इल्म हासिल करने की राह में निकलता है अल्लाह उसके लिए जन्नत तक एक आसान राह बना देता है। सहीह मुस्लिम की हदीस है कि मरने वाले को सिर्फ 3 चीजें सवाब पहुँचती रहती है। चैरिटी यानी नेक औलाद, सवाबे जरिया, इल्म जिससे लोग फायदा उठाते रहे।
I came to Messenger of Allah while he was delivering a Khutbah and said: O Messenger of Allah, a stranger (meaning himself) has come to inquire about his Deen. He is quite ignorant about his Deen. Messenger of Allah interrupted his Khutbah and turned to me. Then a chair was brought for him and he sat on it. He started instructing me what Allah had taught him. Then he resumed his Khutbah and completed it.
[Muslim, Riyadas Salihin 606]
[Muslim, Riyadas Salihin 606]
क़ुरान का मीडियम अरबी है पर क़ुरान का subject अरबी नही है। क़ुरान में बेशुमार उलूम है। It talkes about various fields of knowledge. जिसकी जो फील्ड है, वो इससे अपनी फील्ड की इल्म ले सकता है। चाहे वो डॉक्टर, साइंटिस्ट, इंजीनियर, सिकोलोगिस्ट, फिलॉसफर, लॉ मेकर हो या सोशल रिफॉर्मर।
क़ुरान में 6 हज़ार में से 1 हज़ार आयते साइंस से related है। Quran is not a book of Science but a book Signs. जो आपको उन बातों कजे बारे में बताती है जो रूहानी और जिस्मानी फायदा पहुंचाती है।
क़ुरान ने जिस फील्ड के बारे में भी कुछ कानून रखे वो साइंटिफिकली 100% सही साबित हुई अब तक। चाहे वो कोई फील्ड हो जैसे zoology, embryology, astrology, geology, hydrology, oceanology, physiology, botany, medicine etc. इसलिये ये कहना बिल्कुल लॉजिकल है जिन बातों पर अभी तक रिसर्च नही हुई है वो भी साबित होंगी एक दिन।
दुनिया मे कोई किताब ऐसे नही जो 100 साल में पुरानी obslete हो जाती है, उन्हें updation की ज़रूरत पड़ती है। पर क़ुरान ज़माने के साथ चलता जा रहा है। क़ुरान की एक भी ऐसी बात अनसाइंटिफिक नही साबित हुई है। बल्कि नई नहीं डिस्कवरी को लोग अक्सर क़ुरान में लिखी पाते है या उसकी तरफ इशारा करते पाते है।
इस्लामिक गोल्डन ऐज (8-14वीं सदी) में दीन वालों ने क़ुरान पर गौरों फिक्र करी और आगे बढ़ते चले गए। जिसकी वज़ह से साइंस और टेक्नोलॉजि ने बहुत तरक्की की। और जब गौर फिक्र छोड़ दी तो पीछे होते चके गये। इल्म को 2 भागों में तक़सीम कर दिया गया।
इल्मे दीन वाले क़ुरान प्रिंट, तफ़्सीर, हदीस, फ़िक़्ह, मसले मसाइल लिख गए जिनसे फायदा उठाया जा रहा है, इसलिए उन्हें सवाब मिलता रहेगा। जिन लोगो ने समझा कि दुनिया का इल्म भी हासिल करके उसके ज़रिए कुछ दुनिया के लिए कर जाए। उनके ज़रिए की गई ईजाद से फायदा उठाया जा रहा है इसलिए उन्हें भी उसका सवाब मिलता रहेगा। जैसे मेडिकल साइंस, हंडीकैपेड इकविपमेंट्स, गाड़ियों, फोन, कानून बना कर लोगो को फायदा पहुंचा गए। स्कूल कॉलेज खोल गए। जैसे सईद अहमद खान अलीगढ़ यूनिवर्सिटी बना गए, मौलाना आज़ाद तालीम में मैदान में काम कर गए। जामिया, हमदर्द, उस्मानिया जैसी पढ़ाई की यूनिवर्सिटी अच्छे लोग बना गए।
इसलिए लोग पढ़ कर कुछ बने तो मुसलमानों के नाम रोशन होगा, लोगो के काम आए तो इस्लाम का पैगाम फैलेगा।। जो भी काम करो, जॉब, बिजिनेस, पर लोगो के साथ अच्छा सुलकु करना। उनकी मदद करना, उनको फायदा पहुंचाना है ताकि की वो कहे की मुसलामन इतने अच्छे काम करते है।
मुसलमानों का इल्म।
गोल्डन एरा में दुनिया मे टॉप 132 साइंटिस्ट्स थे। 121 मुस्लिम थे। बाकी 11 भी इस्लामिक यूनिवर्सिटी से पढ़े थे।
Quran talks about Bigbang theory in a nutshell. Indication towards Higgs Boson, fingerprints, Skin receptors, Embryology stages जिसे प्रोफेसर कीथ मूर ने ईश्वरीय ज्ञान कहा। Quran has Mathematical miracles in it.
●Word Month is mentioned 12 times in Quran.
● Word Day is mentioned 365 times in Quran.
● Mard aur Aurat bhi 23, 23 baar aaya hai.
[The 23rd chromosome is the main element that determines the gender.] (क्रोमोजोम- 46) 23 pair of chemosome in humans.
● Ibn al Haytham - developed the field of optics and made first pin hole camera. Word camera is from arabic Kamra which means Darker room. He showed how to project and capture images in 11th century.
●Jabir ibn Hayyam or Geber - perfected distillation process.
Alcohol is derived from word Algul in Arabic which means Evil Spirit. He distilled alcohol. He is Called Father of Chemistry.
● Al Zahrawi - father of modern surgery, made first syringe, surgical hook, surgical needle, bone cutter etc in 8th Century.
●Ali Ibn Sina or Avicenna - One of the greatest Mathematicians
●Al khawrizmi - farher of Algebra, algorithm.
● Al Thusi - father of trigonometry
● Md al Idrisi - created first map in 1154 century. It was just up side down.
● Abbas ibn Firnas - flew himself for a few moments in 875 with a flying machine like bird.
● Ibn Nafis - He mentioned Blood circulation 800 years back, before William Harvey.
● Ismail al Jazari - credited for Elephant clock.
● Merriam al Astrulabia - accurated Astrolabes.
● Al Khindi - He said first that All laws are not absolute but relative before Einstein.
● Al Zahrini.
●Al Biruni
● 3 brothers, Muhammad, Ahmad, Hasan Shakir calculated surface area at red sea which approx. equal as calculated by modern science.
● First world higher university that provides degrees foundes by a Lady named Fatima Al Fihri in 859 in Morocco.
● America me Muslim 900 AD se reh rahe the.
● Made Cofee. It was very popular in Yemen in 14th Century. Catholics authorities denounced it as Muslim drink.
● Arabic numeral world wide spread after decimal invented.
● Binoculars
● Windmills
● Cheese
● Toothbrush
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