Saturday, 24 September 2022

मुहम्मद साहब के नबी होने के तार्किक प्रमाण और घटनाएं

 


मुहम्मद साहब के नेक, सच्चा और नबी होने के तार्किक प्रमाण और घटनाएं।  नबी की दूरंदेशी, भविष्यवाणीयां और चमत्कार।  उनके अंतिम नबी और पुत्र मृत्यु के पीछे के कारण.

 

नबी और कुरान की कही एक एक बात सच साबित हुई.

 

मुहम्मद साहब ने पहले ही दिन से आने वाले वक्त में क्या होने वाला है, किस काम का क्या नतीजा निकलेगा, कौन क्या करेगा जैसी अनेकों संकेत देते हुए चले जो लफ्ज़ ब लफ्ज़ सही साबित होती गए जैसे:-

 

■   कुरान की 111वें अध्याय सुरह अल मसअद (तब्बत यद्दा अबी लहन्बिव वत्त्ब) में अल्लाह ने फरमाया है कि अबु लहब के दोनों हाथ टूट गए, उसका माल उसके काम न आया, वो जहन्नुम में जलाया जायगा, उसकी बीवी के साथ भी ऐसा ही मामला होगा, उसके गले भी रस्सी का फंदा है.  यानी कुरान ने उसके बर्बाद होने की पेशंगोयी की थी.  जैसे आज भी हाथ टूटने की बद्दुआ दी जाती है या कहावत कही जाती है जिसका अर्थ बर्बाद होने से या बेकाम आदि होने से होता है।  यह सुरह मक्की है और 622 AD में नाजिल हुए थी.  अबु लहब से मुशरिक और मक्क्वासी कहते थे कि तुम ईमान ले आओ और मुस्लिम बन जाओ. तुम्हारे ऐसा करते ही यह मुहम्मद सल्ल. जो तुम्हारे बारे (अल्लाह की तरफ से भविष्यवाणी) में ऐसी बात कह रहा है, इससे वो गलत साबित हो जायगी, उसकी नबूवत भी और उसकी अल्लाह की किताब भी.  अबु लहब चाहता तो एक पल में इस्लाम कुबुल करके अल्लाह और नबी को गलत साबित कर सकता. मगर उसने ऐसा नहीं किया. क्योंकि ऐसा होना ही नहीं था। अल्लाह को मालूम है कि कौन क्या करेगा। इसीलिए अल्लाह ने ये बात नबी के ज़रिए बता दी गई जो क़ुरान में दर्ज हुई।  यंहा तक की अबु लहब की मृत्यु 624 AD में हो गयी और वो कुफ्र की हालत में ही मरा. यह प्रमाण है की कुरान और नबी दोनों सच्चे है और अल्लाह की तरफ से है.

■ कुरान (30:2-4) ने कहा कि निकटतम भूमि में रूमी (rumu) पराजित हो चुके हैं लेकिन वे अपनी हार के बाद, कुछ वर्षों (sinina) में वापिस विजय प्राप्त करेंगे और उस दिन ईमान वाले खुशी मनाएँगे। इस वक़्त दरअसल रोमन - बाईजेनटाईन (अहले किताब) फारसी साम्राज्य द्वारा तबाह कर दिए गए थे (613-614 AD में ). मगर कुरान (613 AD) ने कहा कि वो जल्दी फिर से उभरेंगे और उस दिन ईमान वाले ख़ुशी मनाएँगे (अहले किताब होने, फारसियो द्वारा अपनी तहज़ीब पर घमंड करने और नबी पर विश्वास पुख्ता होने के नाते). इसका भविष्यवाणी का मक्का वासी यकीन नहीं कर रहे थे क्योंकि क्योंकि हेराक्लियस ने साम्राज्य के विघटन की घोषणा कर दी थी और हर कोई बाईजेनटाईन को मृत्युशैया पर देख रहा था। इसलिए, पैगंबर के विरोधियों ने कुरान की इस भविष्यवाणी का मज़ाक उड़ाया। मगर ऐसा ही हुआ और वो जीते (622-628 AD में प्रथम और अंतिम विजय).

 ■  क़ुरान की आयतें अलग अलग समय में 23 साल में नाजिल हुई। मगर नबी की ज़िंदगी के आखिरी साल में आयतों को उनके संदर्भ और प्रसंग अनुसार एक नए सीकवेन्स में रखा गया। कुछ आयतें किसी सूरह की शुरुवात में, किसी के अंत में और किसी के बीच में रखा गया। इन सभी जगह कुरानिक आयतों में एक रब्त, लय, ताल, हमहांगी है। अगर ये किसी इंसान का कलाम होती तो इनको 23 साल पर बाद जब इस तरह रेसीक्वेंस करा जाता तो वो इस तरह फिट ही नहीं होती। इस रीसीक्वेंसिंग न उन्हें बेजोड़ बना देना, यह किसी इंसान का काम हो ही नहीं सकता।


■ क़ुरान में आये 19 और 7 के कोड्स भी यही साबित करते हैं कि ये इंसानी दिमाग से परे की चीज़ है।

 

■   मुहम्मद साहब फतह मक्का से पहले लगभग 20 साल तक तब्लीग करते रहे और कहते रहे कि एक अल्लाह को मान लो, उसके खिलाफ न जाओ, उसकी बात न ठुकाराओ, उसका अज़ाब आएगा और तुम सब बर्बाद हो जाओगे, अभी भी वक़्त है ईमान ले आओ. उन्होंने पहले दिन से ही लोगों को ये कहा कि मेरी बात मान लो,  मैं सच कह रहा हूं, मुझे झुठा मानने वाले बर्बाद और असफल हो जाएंगे, यही अल्लाह हुकुम है, इस्लाम को यंहा आना है, एकेश्वरवाद छा जाना है, वक्त रहते संभल जाओ।  उन्होंने अमल की बुनियाद पर मक्कावासीयों के तख्ता पलट होने की भविष्यवाणी की। उनके दुश्मन उनकी बातें  सुनके हंसी उडाते थे कि ये मुहमम्द तो जागते हुए ख्वाब देखता है। और फिर आखिर यही हुआ। अल्लाह और नबी का इंकार करने वाले बर्बाद हो गए, उनकी जड़े उखड गयी, उनका बनाया हुआ बातिल निजाम ढेह गया. इनके हाथो से सत्ता भी गयी और रसूख भी। आखिरत का अजाब तो बचा है ही। इसके अलावा उन्होने अल्लाह और सत्य को स्वीकारने वालों के लिए भी कहा की आखिरत और इस ज़िंदगी में तुम ही कामयाब होंगे, दुनिया तुम्हारे कदमों मे होगी और तुम ही सबसे ऊपर होगे। ये भी हुआ।  उनकी कही एक एक बात सच साबित हुई.  ये सब बातें कुरान में लिखी हुई है की आपने किस तरह, किन अल्फाज़ में लोगों को ऐसे पैगाम पहुचायें।  और कुछ ही समय में कुरान की कही बातें एकदम सही साबित हुईं।


■   फतह मक्का से पहले जब मुस्लिम एक बड़ी ताकत भी नहीं बने थे, उन्होंने फारसरोममिस्र आदि बेहद बड़े और ताक़तवर राज्यों के ज़ुल्म पसंद बादशाहों को खत लिख कर उन्हें भी यही संदेश दिया कि सत्य स्वीकार कर लो वरना तुम्हारा राज्ये तो रहंगे तो मगर तुम्हारी हुक्मरानी नहीं। कुछ साल बाद यही हुआ और एक रेगिस्तान की छोटी सी ताकत रहित कौम ने आधी दुनिया की धरती को जीत लिया और लोग इस्लाम से मुतासिर होते हुए इस्लाम अपनाते हुए चले गए. अगर नबी झूठे होते या उन्हें भविष्य में होने वाले वाक्यात का इतना यकीन नहीं होता तो वो ये खत फतह मक्का के बाद या बेहद ताकतवर क़ौम हो जाने के बाद लिखते।

 

■   मुहम्मद साहब के माँ और बाप बचपन में ही रुखसत हो गए थे.  आपके दादा अबु मुतल्लिब भी जल्द ही इन्तेकाल कर गए थे.  आपकी परवरिश करने वाले चाचा अबु तालिब भी मुहम्मद नबूवत मिलनेके कुछ अरसे बाद ही चल बसे थे.  यानि की आपका कोई सरपरस्त आपके साथ ज़्यादा नहीं रह सका.  मुहम्मद साहब खुद भी पढ़े लिखे नहीं थे.  इसके बावजूद आपका इल्म, दूरंदेशी, हिकमत इतनी थी जिसका कोई दूसरा सानी नहीं हुआ.   ये गुण इसका प्रमाण है की यह सब आपने दुनिया से नहीं बल्कि दुनिया बनाने वाले से हासिल किये है.

■  कुरान में ह. युसूफ के वक़्त के हाकिम को मलिक और ह. मुसा के वक़्त के हाकीम को फिरोन लिखा गया है क्योंकि फिरोन लफ्ज़ बाद में इस्तेमाल में आया था. सातवीं शताब्दी में जब कुरान अवतरित हुआ, तब अरब में यह मिस्र के बारे में इतना बारीक ज्ञान ज्ञात नहीं हो सकता था, ये तो हमें आज मालूम पड़ता है। ये कुरान का मोजज़ा है. नबी को ये ज्ञान कोई इंसान नहीं दे सकता था.     

 

मुहम्मद साहब के सच्चे होने के प्रमाण.


■   एक बार मक्का में नबी एक पहाड़ी पर चढ़ कर बोले, ऐ लोगों अगर मैं कहूँ कि पहाड़ी के इस ओर एक फौज तुम पर हमलावर होने को तैयार खड़ी है तो क्या तुम मुझ पर यकीन करोगे.  लोगों ने कहा कि बेशक क्यूंकि हमने तुम्हे हमेशा सच्चा पाया है.  तो नबी ने कहा कि मेरी बात मानों मैं अल्लाह का रसूल हूँ और तुम्हें आगाह करता हूँ, अल्लाह के उस अजाब से जो तुम्हारे सामने खड़ा है.  नरक की आग से बचो.  अल्लाह से  डरो.  अल्लाह एक है और सिर्फ उसी की इबादत करो. फिर यही हुआ और अज़ाब आया.  यह प्रमाण है कि आप जैसे नबूवत से पहले सच बोलते थे, वैसे ही नबूवत के बाद भी सच ही बोलते थे. कभी झूठ न बोलने वाला इंसान क्यों ऐसी कोई झूठ बात बार बार बोलेगा कि लोग उसे पागल, सनकी, शायर, जादूगर वगैरह कहने लगे और उसकी ज़िन्दगी इस झूठ की वजह से लगभग 20 साल तक परेशानियों से भर गयी.  यह बात कोई झूठ नहीं बल्कि सच ही हो सकती है. सत्य के लिए ही इन्सान अपना सब कुछ न्योछावर कर सकता है.   

 

■   नबी पर जब पहली वही आई थी तो आप इतना डर गए थे की गारे हीरा से निकल कर जब अपने घर पहुंचे तो गर्मी के मौसम में भी काँप रहे थे. जिब्राएल से मुलाकात की वजह से आपका दिल पहली बार ऐसे अजीब वाकया पेश आने की वजह से खौफज़दा हो गया था. ह. खदीजा ने आप पर कम्बल डाल दिया और कहा की आपको कुछ नहीं होगा क्यूंकि आप तो मजूलूमों की, गरीबो की मदद करते हो. इसके बाद कई दिनों तक आप गारे हीरा में नही गए.   यह वाकया यहूदी लेखक लेजली हज़ेलटन ने भी अपनी किताब में लिखा है. इतने दिनों से आप गार में अकेले जा रहे थे, चिंतन करते थे, मनन करते थे.  अगर नबी जूठे  होते तो एक दिन गार से निकलते ही कहते कि मुझसे मिलना फरिशता आया था, मुझे ज्ञान देकर गया है और मैं अब खुदा का नुमाइंदा हूँ इसलिए मेरा हुकुम सुनो. पर आपसे नहीं किया बल्कि बिलकुल नेचुरल रेएक्शन दिया.  यह आपके सच्चे और नबी होने का प्रमाण है. इसका अर्थ है कि न तो वह बनावटी थे, न ही पाखंडी और न ही धोखेबाज़.


● नबी के जब बेटे की बचपन में ही मौत हो गयी थी तो उसी दिन सूर्यग्रहण हुआ। लोगों ने इसे उसी दुख की निशानी माना। इस पर आपने लोगों को समझाया कि इसका किसी को मौत से लेना देना नहीं है बल्कि यह तुम्हारे रब की निशानियों में से एक है यानी प्रकृति का एक भौतिक नियम है। अगर आप धोखेबाज़ या झूठे होते तो लोगों को बेवकूफ बना देते यह कह कर की हां यह मेरी वजह से हुआ है। 


पैगंबर ने दुनिया के अंत के बारे कुछ संकेत दिए थे कि ये कब करीब होगा. हदीसे जेब्रील में आपने कहा था कि जब गुलाम लड़की अपनी मालिक को जन्म देगी (अर्थात दासता का आधिकारिक उन्मूलन, जो लगभग आधी सदी पहले हो चूका है) और नंगे पांव रहने चरवाहे ऊंची इमारतों के निर्माण में एक दूसरे के साथ प्रतिस्पर्धा करेंगे (ये भी आधी सदी पहले शुरु हो चुका है)। क्या 1400 साल पहले कोई दासता के खात्मे और ऊँची इमारतो के मुकाबले के बारे में सोच सकता था. आपकी और भी कई भविष्यवानियाँ सच हो चुकी है.         

 

नबी की जुबान से निकली बात पर दुश्मनों तक को पूरा यकीन होता था। 3 वाकयात:

अबू लहब के बेटे उतयबा ने नबी से बहुत मुंह जोरी करी और फिर आप पर थूका जो आप पर नहीं पड़ा और आखिर में नबी को औल फ़ौल बकता हुआ चला गया। इस पर नबी ने कहा कि अल्लाह तुझ पर अपने कुत्तों में से एक कुत्ता मुसल्लत कर देगा। अबू लहब ने जब यह सुना तो वो थरथरा गया कि ऐसा ही होगा। दोनों बाप बेटे और काफिला शाम के तिजारती सफर पर गए और रात को जंगले में ठहरे। अबू लहब को यह बात याद थी इसलिए उसने सबसे कहा कि सोते हुए एक घेरा बना कर मेरे बेटे को बीच में सुला दो ताकि उसकी हिफाजत हो सके, क्योंकि मुहम्मद ने यह बात कही थी। लोगों ने ऐसा ही किया और जागना शुरू कर दिया मगर फिर सभी को नींद आ गई और तभी एक शेर आया  और किनारों वालों को छोड़कर बीच में छलांग लगा दी और उसके बेटे की गर्दन तोड़ दी।  इसके बाद अबू लहब यही कहता फिरता था कि मुहम्मद ने मक्का बैठकर मेरे बेटे को वहा मरवा दिया।

उबई  बिन खलफ ने एक बार मुहम्मद साहब को कहा कि मैं तुम्हारा कतल कर दूंगा। इस पर नबी ने कहा कि इसके उलट तुम मेरे हाथों मारे जाओगे। जंगे उहद में नबी ने एक नेज़ा उबई की तरफ फेंका जो उसके गले पर खराश डालता हुआ गया। उबई  ने चिल्लाना शुरू कर दिया कि मुहम्मद ने मुझे कतल कर दिया। लोगों ने समझाने की कोशिश करी मगर वो यही कहते कहते बेहोश हो गया कि  मुहम्मद ने ऐसा कहा था और जब उसे होश आया तब भी यही चिल्लाता हुआ उठा और दहशत में मर गया।

उबई  बिन खलफ के भाई उमयया बिन खलफ को साद बिन माज ने बता रखा था कि मुहम्मद सल्ल. ने एक बार कहा था कि उमयया मुसलमानों के हाथों मार जाएगा। जंगे बदर में जब मक्का से लोग निकले तो उमयया भी जंग की तैयारी कर रहा था तो उसकी बीवी ने उससे पूछा कि तुम्हें याद नहीं मुहम्मद ने क्या कहा था। उसने कहा कि सब याद है इसीलिए मैं एक सबसे तेज ऊंट खरीद कर रखा है, थोड़ी दूर तक जाऊंगा और फिर सबको छोड़ अपने ऊंट उसके साथ भाग जाऊंगा। यानि दोनों को यकीन था कि ऐसा होगा।


1 दूरंदेशी वाकया:

सन  6 हिजरी में नबी ने ख्वाब देखा और उसकी वजह से 1400 साहबा को लेके उमराह करने के लिए मक्का निकले, रास्ते में ही मक्का वालों ने उन्हें रोक दिया। सुलह (सुलह हुदबिया) के लिए मुसलमानों की ओर से हज़रत उसमान को भेजा गया कि मक्का वालों को समझाओ कि मुसलमान लड़ने के लिए नहीं सिर्फ उमराह करने के लिए आयें हैं। उस्मान को आने में देर हो गई इसलिए खबर उड़ गई कि उन्हें शहीद कर दिया गया। उस वक़्त भी अंबेसडर को मारना गलत माना जाता था। नबी ने सभी मुसल्मानो को इकट्ठा करके कहा कि मुझसे बयत करो कि सब जान देने की बयत करो क्योंकि अब लड़ाई होगी और उसमें जान भी जानी हो तो पीछे नहीं हटेंगे। सब ने बयत करी सिवाय एक मुनाफिक के (कुरान में इस बयत का जिक्र है कि अल्लाह उनसे राजी हो गया जिन्होंने बयत करी, इसे बयत ए रिज़्वान कहा जाता है)।  नबी ने बाँया हाथ आगे किया और फिर अपने दाएं हाथ को रख कर कहा कि यह उस्मान का हाथ है, अब उस्मान की भी बयत हो गई। यानि अपने हाथ को उस्मान का हाथ बना दिया, ये गायबाना बयत थी। ये लोगों को बताने के लिए था कि उस्मान जिंदा है। ये लोगों के लिए एक इम्तिहान था और नबी को इसका इल्म भी था कि उस्मान जिंदा है तभी तो उनके बदले बयत करी।


पराये लोग-दुशमन तक नबी के सत्य बोलने, अच्छे चरित्र, सद्गुणों के गवाह थे.

 

नबी के दुश्मन तक उनको सच्चा और नेक व्यक्ति मानते थे जो कभी झूठ नहीं बोलता, कभी फरेब नहीं करता. वे उनकी कही बातों को सच मानते थे. मगर इंकार सिर्फ इसलिए करते थे क्योंकि इकरार करने पर उनका बनाया हुआ ज़ुल्म का निजाम ख़तम हो जाएगा. 

 

■    शाहे मिस्र ने जब आपके दुशमन अबु सुफियान को अपने दरबार में बुलाकर उससे नबी के बारे में सवाल किये तो अबु सुफियान ने मौत के डर से सब सच सच बोला.  कुछ सवाल ये थे कि: क्या उनके खानदान में कोई बादशाह हुआ है? क्या तुम्हारे यंहा पहले किसी ने नबूवत का दावा किया है? क्या उन्होंने नबूवत से पहले कभी झूठ बोला है? क्या उनकी बुद्धि, विवेक और समझ में क्या कोई दोष है? क्या वो अपने किये हुए वादे तोड़ते हैं? अबु सुफियान ने सभी के का जवाब न में दिए.  फिर बादशाह ने कहा कि अगर कोई उनके पूर्वजों में राजा हुआ होता तो  हम यह कह सकते थे कि उन्हें राज पाट की चाह है, मगर ऐसा नहीं है. बादशाह ने आगे कहा कि इससे पहले वंहा किसी ने नबूवत का दावा नहीं किया है सो वो किसी की नक़ल नहीं कर रहे हैं.  इसके बाद कहा कि जिसने पहले कभी झूठ नहीं बोला वो अब भी झूठ नहीं बोलेगा, क्योंकि उनके चरित्र में कोई दोष भी नहीं हैं इसलिए वो  व्यक्ति सच्चे है और ईश्वर के  दूत हैं.  बादशाह से ऐसी बातें सुन कर अबु सुफियान को बहुत अचम्भा हुआ और कुछ वक़्त बाद ईमान लाया. फिर यह वाकया उन्होंने बार बार बयान किया कि उस दिन क्या क्या सवाल जवाब हुए थे. आइन्दा जंगों में अबु सुफियान ने मुस्लिमों के हौसलों को अपने तकवे और दीनी इल्म से बढ़ाया और जंगे जितवाई.

 

■   एक बार जंगे उहद में एक मुशरिक के गले से छूता हुआ तीर खरोंच देते हुए निकल गया.  मगर वो आदमी सिर्फ देहशत में ही मर गया, इस इम्प्रेशन में कि मुहम्मद सल्ल. ने कहा था कि तुम्हारा अंत तय है. 

 

■   डेढ़ हज़ार साल पहले पूरी दुनिया में गुलामी आम थी. अरब में भी गुलाम बेचे और ख़रीदे जाते थे.  एक बार गुलामों के व्यापारियों ने एक बच्चे को अगवाह करके बेच दिया था.  वो बच्चा हज़रत खदीजा के खानदान वालों ने खरीद लिया था. जब मुहम्मद साहब की ह. खदीजा से शादी हुई तो उन्होंने इस गुलाम को तोहफे में आपकी खिदमत में पेश कर दिया था. इस गुलाम का नाम ज़ैद बिन हारिस था.  मुहम्मद साहब इनका बहुत ख्याल रखते हैं और इनसे बहुत लगाव रखते थे.  बाद में बहुत सालों के बाद जब ज़ैद के घरवाले उन्हने ढूढ़ते ढूंढते हुए आते है तो वो ज़ैद को पहचान लेते है, ज़ैद भी उन्हें पहचान लेते है क्यूंकि याददाश्त में पुराने नैनो नक्श अभी भी बैठे होते है.  एक दुसरे को देख कर सभी बहुत रोते है.  फिर घरवाले मुहम्मद साहब से ज़ैद को वापिस खरीदने के लिए मुंह मांगी रकम देने की पेशकश रखते हैं.  मुहम्मद साहब कहते हैं अगर ज़ैद आपके साथ जाना चाहे तो बेशक ऐसे ही ले जाइए. ह. ज़ैद ने कहा और मुहम्मद साहब को छोड़ कर जाने से मना कर दिया. बहुत कोशिश के बाद भी ज़ैद ने कहा कि वो मुहम्मद साहब की खिदमत में ही रहेंगे.  घरवालों को मजबूरन उन्हें वहीँ छोड़ना पड़ा मगर ये फैसला हुआ की घरवाले और ज़ैद मिलते जुलते रहंगे.  ह. ज़ैद का ऐसा व्यवहार देख कर मुहम्मद साहब बहुत खुश हुए और लोगों क बुलाकर कहा की आज से यह मेरा बेटा है और मेरी वसीयत का हकदार.  यह वाक्य नबूवत मिलने से पहले का है. साथ ही यह आपकी नेक दिली और रहमत की निशानी है. जो लोग मुहम्मद साहब के चरित्र पर झूठे इलज़ाम लगते हैं, उनके लिए यह जवाब है.

■  नबी को अपने मकसद से हट जाने के लिए बड़े से बड़े ऑफर किये गए जैसे अपना एक इलाका लो, सरदारी ले लो, दौलत से लेके औरत हर चीज़ जो चाहिए वो ले लो. मगर आपने कुछ भी नहीं लिया और अपने काम में लगे रहे।

 

मुहम्मद साहब की दूरंदेशी और भविष्यवाणीयां।

 

■   ताइफ़ में जब उन्हें अल्लाह का पैग़ाम देने पर पत्थरों से मार मार कर लहू लुहान किया गया तो उन्होंने अल्लाह की तरफ से भेजे गए फ़रिश्ते को उन पर पहाड़ गिराने की बजाए यह कहा कि नहीं इनकी आने वाली नसलें ईमान लाएंगी और ये हुआ भी।

 

■   खंदक की जंग में जब नबी ने एक अटूट चट्टान पर 3 वार करके उसे तोड़ा तो उसमें से 3 बार चिंगारी निकली थी जिस पर नबी ने मुस्कुरा कर साहाबा को कहा कि अल्लाह ने तुम्हे सीरिया, पर्शिया और यमन पर फतह दी है। कुछ वक्त बाद यही हुआ।

■ एक सहाबी ने एक बार मुहम्मद साहब के हक़ में, गवाह न होने के बावजूद, गवाही दी थी क्योंकि वो अच्छी तरह जानते थे कि नबी झूठ कभी नहीं बोलते थे। उन्होंने बाद में नबी से कहा कि मुझे आपकी बातों पर इतना यकीन है कि मैं आख़िरत पर ईमान लेके आया हूँ, फिर ये तो दुनियावी बातें हैं। इस नबी ने कहा खुश होकर कहा था कि आज से तुम्हारी गवाही 2 के बराबर शुमार होगी। नबी के जाने के बाद जब क़ुरान के लिखिति नुस्खें ढूंढे जा रहे थे तो एक नुस्खे के साथ 2 लोगों की गवाही चाहिये होती थी कि यह नबी का ही लिखवाया हुआ है। ऐसे ही एक नक्शा उन सहाबी के पास निकला था और कोई दूसरा गवाह मौजूद नहीं था। इस पर उन सहाबी ने सबको याद दिलवाया कि मेरी गवाही नबी ने 2 लोगो के बराबर ठहराई थी।


आखिरी नबी के होने के प्रमाण

 

ज्ञात इतिहास से पता चलता है कि बाज़ वक़्त नबी के बेटा भी नबी होता था.  मगर मुहम्मद साहब के तीन बेटे पैदा हुए और तीनों बचपन में ही फौत हो गये थे.  वैसे ही जैसे उनके अभिवाहक भी अधिक न जी सके। उनकी केवल बेटियां जी सकी। बेटो से अधिक पैदा भी बेटियां हुई। खुदा को आपके बेटों के ज़रिये आपकी नस्लें बढ़ाना मंज़ूर नहीं था.  क्या हुआ होता अगर उनका एक भी बेटा ज़िंदा रह गया होता उनके बाद? क्या उनके बेटे के हाथ मे बागडोर आती? क्या उन्हें भी नबी मान लिया जाता? ऐसे बहुत से प्रश्न है जिन पर अल्लाह ने पूर्ण विराम लगा दिया.  इस तरह उनके बेटे की नबूवत आदि या उनके आखिरी नबी होने पर उठने वाले प्रश्नों को जड़ से खत्म कर दिया। आपके आखिरी नबी होने का ये भी एक संकेत था की बस अब न तो कोई नबी हो सकता और न ही आपका वारिस. 

 

अंतिम नबी क्यों? उनके बाद कोई नबी क्यों नहीं?

 
हर चीज़ की एक शुरुवात होती है और एक अंत। जो आरम्भ हुआ है वो समाप्त भी होगा। दुनिया में मानवता की शुरआत में अगर पहला नबी आ रहा है तो दुनिया मे मानवता के अंत मे आखिरी भी आयेगा। कम से कम एक बार तो ईश्वर अपना संदेश पूर्ण रुप से स्थापित करेगा पूरी मानवता के लिये। वैसे भी अगर कोई मार्किट बंद होने वाली तो हर कंपनी उसमे अपने प्रोडक्ट भेजना बंद कर देती है बल्कि वपिस भी मंगवा लेती है क्यूंकि अब इसका फायदा नहीं होने वाला।

 

नबी के चमत्कार


इतिहास हदीस के बराबर प्रामाणिक नहीं मानी जाएगा. वैसे इतिहास यानी तारीख और सीराह मगहज़ी (बायोग्राफी) में सच भी बहुत होता है बस उनकी सनद  (चैन ऑफ नरेशन) आदि उतनी शक्तिशाली नही होती। जैसे क़ुरान हदीसो से अधिक प्रमाणिक माना जाता है बल्कि सबसे अधिक मगर वैसे तारीख को नहीं माना जाता। ऐसे 300 से अधिक चमत्कारों को पुराने और नए विद्वान मुहम्मद साहब के नबी या दिव्य होने प्रमाणों में जगह जगह रखते है। वैसे इतिहास गवाह है कि धार्मिक महापुरुषों के साथ ऐसे चमत्कारी वाकये अक्से उनके ग्रंथो में या उनके अनुयायियों की बातों में उप्लब्ध होते है जिससे ईसा, महावीर, बुद्ध, राम, कृष्ण आदि कोई अछूता नही।

 

प्रश्न-उत्तर:  

मूसा और हाथ वाली बात शायद ईसाई और यहूदी ग्रन्थों या बाइबिल में होगीमुझे नहीं लगता क़ुरान में है। हो सकता है ये कोई प्राचीन कहावत हो। अरब मिस्र या इब्राहिमिक मज़हबों में कहावत समान होना कोई अचंभे की बात नहीं। ये फिरौन और अबु लहब दोनो के लिए इस्तेमाल हो सकती है। क़ुरान में और दूसरे धर्म ग्रंथों में भूतकाल में बात कही जाती है जो भविष्यवाणी के लिए प्रयोग होती है।

 

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