बाबा साहब अंबेडकर और मुहम्मद साहब जयंती
बाबा साहब अंबेडकर और मुहम्मद साहब
आज बाबा साहब अम्बेडकर की जयंती है। तमाम देशवासियों को इस अवसर पर शुभकामनाएं।
बाबा साहब अम्बेडकर जयंती की सभी को शुभकामनाएं। बाबा साहब ने भारत के संविधान का निर्माण किया जो विश्व मे सबसे बड़ा संविधान है। जिसमें सभी लोगों को बराबरी का दर्जा दिया। जातिव्यवस्था का खात्मा किया। औरतों को अधिकार दिलवाए। लोगों को मनपसन्द धर्म मानने और उसके प्रचार प्रसार की छूट दी। वो जीवन भर अलग अलग धर्मों के कट्टरवादियों से लड़ते रहे मगर अंत में भारत को उदारता की राह पर अग्रसर करके छोड़ा।
मुहम्मद साहब भी जब अरब में पैदा हुए थे तो मक्का में धर्म के नाम पर बिज़नेस चलाया जा रहा था। अंधविश्वास जड़ों में जमा हुआ था। उन्होंने इन धर्मिक पेशवाओं के खिलाफ आवाज़ उठाना शुरू की तो उन्होंने मुहम्मद साहब पर बहुत ज़ुल्म किए, मारा पीटा गया, हत्या के प्रयास हुए। यंहा तक कि आपको दूसरे शहर मदीना में जा कर बसना पड़ा। यंही पर मुहम्मद सहाब ने मदीना वासियों के लिए एक चार्टर लिखवाया जिसे आज दुनिया का सबसे पहला प्योर डेमोक्रेटिक कॉन्स्टिट्यूशन माना जाता है, जिसमें मदीना के तमाम समुदायों के लोगों के अधिकारों, कर्तव्यों, नियमों, कानूनों को डॉक्यूमेंट किया गया। इससे पहले संविधान या तो किसी राजा के थोपे नियम होते थे या किसी लेखक की किताब के रूप में होते थे या फिर धर्मिक ग्रंथ के रूप में।
खैर लगभग 2 दशकों तक अत्याचार सहने के बाद भी मुहम्मद साहब डटे रहे और शोषण करने वाली व्यस्था का खात्मा कर, लोगों को ईश्वर और नेकी की ओर बुलाया। गुलामों को मालिकों के बराबर दर्जा दिलवाया। औरतों को जायदात में हक़ और वोटिंग राइट दिलवाया। बच्चियों को पैदा होते ही मार दिए जाने की कुप्रथा को बंद करवाया। सभी इंसानों को भाई-भाई बताया औए कहा कि किसी अरबी को किसी गैर अरबी पर कोई फ़ज़ीलत नही। रंग के आधार पर कोई ऊंचा नीचा नहीं। अगर कोई चीज़ है जो इंसान को ऊंचा उठाती है तो वो है उसके कर्म। इस्लाम का संदेश लोगों को दिया और कहा जिसे मानना हो माने, चाहें न माने। ऐसी शिक्षाओं को देख कर लगभग कुछ ही दशक में अधिकतर अरबवासी मुस्लिम बन गए। हिंदुस्तान इस्लाम आने के बाद जाति व्यवस्था से परेशान अनेकों लोग मुस्लिम बन गए। पूरे विश्व में यही सिलसिला चलता रहा और आज मुस्लिम विश्व की दूसरी सबसे बड़ी जनसँख्या है। इस्लाम का मतलब है, अपनी सभी इच्छाओं को उस ईश्वर के अधीन करके शांति प्राप्त करना।
तो आज बाबा साहब और मुहम्मद साहब दोनों को याद करने का और उनका धन्यवाद करने का अवसर है।
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गणतंत्र दिवस पर संदेश।
गण का मतलब होता है लोग और तंत्र का मतलब होता है व्यवस्था। यानी गणतंत्र का मतलब हुआ लोगों द्वारा स्थापित शासन। आज ही के दिन भारतीय संविधान को पूरी तरह से लागू किया गया था। संविधान वो कानून होता है जिस पर एक देश चलता है। यह देश की आत्मा है। संविधान की प्रारूप समीति के अध्यक्ष, बाबा साहब अंबेडकर ने कहा था कि कोई संविधान कितना अच्छा क्यों न हो, वो बुरा बन जायगा अगर उस पर अमल करने वाले लोग बुरे हो तो और इसी तरह कोई संविधान कितना बुरा क्यों न हो अगर उस पर अमल करने वाले लोग अच्छे हो तो वो एक अच्छा संविधान साबित हो जायगा। यानी अगर लोग सही है तो सब सही चलेगा। इसलिए हमें स्वयं की बुराईयां ख़तम करना सबसे ज़्यादा ज़रूरी है। जैसे हम यंहा अपने बुरे कार्य के लिए कानून के सामने जावाबदेह हैं, उसी तरह हम वंहा अपने हर बुरे कार्य के लिए ईश्वर के सामने जवावदेह हैं। यंहा तो जुगाड़ या सेटिंग से किसी तरह बच जाते हैं पर वंहा नहीं बच सकते. आज़ादी से अब तक देश ने बहुत विकास कर किया है पर कुछ कमियां भी है। मगर नागरिकों के रूप में हमारी भी ज़िम्मेदारी बनती है कि हम अपने कर्तव्य और जिम्मेदारियां निभाएं। हर काम दूसरों पर नहीं छोड़ा जा सकता। समाज में जितना हो सके अपनी सेवायें दें। समाज सेवा ही देश सेवा है। करुणा, रहमत और कंपेशन के कार्य करे। साथ ही देश वासियों के बीच में समानता, एकता बढ़ाने और नफरत को ख़त्म करने के लिए कार्य करें। आइये हमारे साथ मिलकर सेवा और ख़िदमत के काम करें। जय हिंद जय भारत। OR सलाम, आदाब, नमस्कार, जयहिंद. सबसे पहले मैं आप सभी को और तमाम देशवासियों को गणतंत्र दिवस की मुबारकबाद और शुभकामनये देता हूँ. इसके साथ ही आप सभी का स्वागात करता हूँ और दिल से धन्यवाद देता हूँ कि आप यंहा अपना समय निकाल कर आये. मेरा नाम वसीम है. हम वर्क नाम की संस्था से हैं. हम एक सामाजिक सेवा करने वाली संस्था है. जैसा कि आप जानते हैं कि भारत में 3 National Festivals या पर्व है. गांधी जयंती, स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस. भारत को आज़ादी दिलाने में गाँधी जी बहुतबड़ा योगदान रहा. 15 August को हम आजाद हुए इसलिए उसे स्वतंत्रता दिवस कहा जाता है. इसी तरह 26 January के दिन भारत में संविधान पूरी तरह से लागू किया गया था सो इसे गणतंत्र दिवस कहते है. गण का मतलब होता है लोग और तंत्र का मतलब होता है व्यवस्था. यानी गणतंत्र का मतलब हुआ लोगों द्वारा स्थापित शासन. भारत के एक Republic Democratic Country है. Republic यानी पब्लिक के द्वारा स्थापित system और Democracyयानी of the People, by the People and for the People.अभी हमें जो गान गया उसे संविधान ने ही राष्ट्रगान घोषित किया था. संविधान देश की आत्मा होता है. संविधान का मतलब होता है वो कानून या लॉ जिस पर देश चलेगा. India का Constitution तैयार करने के लिए बनी Constituent Assembly की Drafting Committee के Chairman the Dr. Bhimrao Ambedkar Sahab. Baba Sahab ने संविधान पर कहा था कि कोई भी संविधान कितना भी अच्छा क्यों न हो, वो बुरा बन जायगा अगर उस पर अमल करने वाले लोग बुरे हो तो और इसी तरह कोई भी संविधान कितना भी बुरा क्यों न हो अगर उस पर अमल करने वाले लोग अच्छे तो वो एक अच्छा संविधान साबित हो जायगा. यानी अगर लोग अच्छे हुए तो कानून सही से चलेगा और लोग बुरे हुए तो क़ानून बेकार साबित होगा. इसलिए खुद में से बुराई ख़तम करना सबसे ज़रूरी है. जैसे इस दुनिया में अपने बुरे कार्यो के लिए कानून के सामने जावाबदेह हैं, उसी तरह हर बुरे कार्यों के लिए वंहा उस ईश्वर के सामने जवावदेह हैं. यंहा तो जुगाड़ से बच जाते हैं, वंहा नहीं बच सकते. आज़ादी को लगभग 75 साल हो चुके हैं और देश ने बहतु तरक्की और विकास कर किया है. चाहे वो Infrastrucuture, Economy, Health, Poverty, Education. बहुत सी जगह सरकारें वैसे काम नहीं कर पायी जो उन्हें करना चाहिए था. मगर नागरिकों के रूप में हमारी भी ज़िम्मेदारी बनती है कि हम अपने कर्तव्य और जिम्मेदारियां निभाए. समाज में जितना हो सके अपनी सेवायें दें, समाज सेवा ही देश सेवा है. रहमत, करुणा और कम्पशन के कार्य करें. समाज में समानता, एकता, प्रेम बढ़ाने के लिए कार्य करें. भारत जब आज़ाद हुआ था तो उसका भविष्य सुरक्षित करने के लिए ही संविधान बनाया गया था. हमें अपने भविष्य को सुनहरा बनाने के लिए हमेशा कोशिश करनी चाहिए.
हर देश का भविष्य होते हैं उसके युवा और उसके बच्चे. गरीब बेसहारा बच्चों को अच्छी शिक्षा देना, अच्छी सुविधायें देना बहुत ज़रूरी है. इनके साथ साथ उनके बचपन में उनकी मासूमियत बनाए रखना और उनको खुशियों के पल देना भी उतना ही ज़रूरी है. इसलिए आज यंहा हमने education with fun तहत बच्चों के लिए एक play area बनाया है. इसके साथ ही उनके लिए drawing competition और refreshment का इंतज़ाम भी किया गया. हमारी ओर से ये हमारे भविष्य और बच्चो के लिए छोटी से कोशिश की है. बस इसी के साथ मैं अपनी बात ख़तम करता हूँ. आप सभी की इस ज़िन्दगी और उस ज़िन्दगी में कामयाबी मिले. जय हिन्द जय भारत. आइये हमारे साथ समाज सेवा के काम करिए. हम ने समाज और देश को एकजुट करने के लिए कुछ सिधात या नारे बनाए हैं जो इस तरह है. दो शब्द.
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स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं।
आजादी का अमृत महोत्सव
मानव जाति का इतिहास मनुष्यों की दासता का एक अंतहीन विवरण है। राजा-महाराजाओं से लेकर ज़मीदार-साहूकारों की ज़ंजीरों में जकड़ी मानवता कभी स्वतंत्र नहीं रही। केवल दासता की जज़ीरों के रंग-रूप बदलते रहे हैं। इस ज़ंजीर की एक कड़ी 15 अगस्त 1947 को टूटी। हम अंग्रेज़ों की बेड़ियों से तो आजाद हो गए मगर अनैतिकता व असभ्यता के चुंगल में फँसते चले गए। सांसारिक लोभ व माया ने हमें अपने नियंत्रण में लेके अपना दास बना लिया है। हमारी भोग-विलास की इच्छाएँ हम पर राज करने लगी। आज सभी ईर्ष्या व स्वार्थ के अधीन हो चुके हैं। हम दूसरों की दासता से निकलकर अपने अंदर की बुराइयों की दासता में आ चुके हैं। यह भी मनुष्यों द्वारा जन्म दी गई एक प्रकार की दासता है। हमें इससे भी स्वतंत्र होना पड़ेगा।
जब तक हम केवल स्वयं को और अपने जीवन को ही सर्वाधिक प्राथमिकता देते रहेंगे, तब तक ये स्वयं की दासता ऐसे ही बढ़ती जाएगी। इसलिए हम सही अर्थों में आजाद तभी हो सकेंगे जब हम प्रत्येक प्रकार की सांसारिक दासता की जंजीरों को तोड़ेंगे और उस सर्वोच्चय शक्ति की दासता को ग्रहण करेंगे जिसका पूरी सृष्टि पर स्वामित्व है। जब समाज ईश्वरीय दासता को पूरी तरह स्वीकार करता है तो समाज से बुराइयाँ समाप्त हो जाती हैं। सांसारिक लाभ की बजाए पारलौकिक लाभ को दृष्टि में रख कर किए किए गए सत्कर्म मानवता के लिए हितकारी होते हैं। स्वयं सुधार ही समाज सुधार की ओर अग्रसर करता है।
सत्य प्रत्येक आदर्श समाज की नींव होतय है। इसीलिए ऐसे समाज को सतयुग कहा जाता है। इस सतयुग को लाने के लिए सत्य को अपनाना होगा। सतयुगी समाज के निर्माण के लिए भारत की धरती से उपयुक्त और भारतीयों से अधिक सक्षम अन्य कोई नहीं है। जिसकी सनातन सभ्यता के मूल संस्कार ही "वसुधैव कुटुम्बकम'' और ''सर्वे भवन्तु सुखिनः" जैसी कल्याणकारी शिक्षाओं पर आधारित है। इसी भाव के साथ भारत को फिर से विश्वगुरु और अखंड-भारत बनाया जा सकता है। हमें सत्य, सेवा व करूणा के साथ तब तक कार्य करना होगा जब तक की मानवता एक न हो जाए।
आइये, हम सब इस स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर उस स्वतंत्रता को प्राप्त करने का संकल्प लें जो मनुष्य को सांसारिक दासता से आजाद करके ईश्वर का सच्चा दास बना दे।
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