अल तकिय्या शब्दो के जो अर्थ आम तौर पर बताये जाते हैं, ये क़ुरान में ऐसे ही नहीं है और जो इससे जोड़ कर देखा जाता है, वंहा भी इसका अर्थ ऐसा बिल्कुल नहीं है। अल तकिय्या शब्द एक स्तिथि का नाम है, जो इंसानों की बनाई हुई है। इसका अर्थ है जब आपके धर्म या किसी संबंधित आधार पर आप पर जुल्म किए जाए, या सताया जाए या आपकी जान - माल आदि को खतरा हो तो आप अपने धर्म - इस्लाम को छिपा कर वंहा रह सकते हैं। यानि चोरी छिपे अपने धर्म का पालन करते रहें, धर्म रहित न हो जाये डर से. स्पष्ट है कि जान है तो धर्म है, यही ईश्वर का आदेश है। जब माहौल अच्छा हो जाये तो खुल कर पालन करने लगिए। आज भी कुछ लोग इसे करते है जब मजबूरी होती है।
शिया लोगो ने इस रेलक्सशेसन का काफी इस्तमाल किया है और उन्ही से इसे जोड़कर देखा जाता है.
और ये सिर्फ धर्म में ही क्यों, हर विचारधारा के लोगों को माहौल विरुद्ध मिलने पर ऐसा करना पड़ता है। इंसान की समझ, बुद्धि, तर्क, अनुभव यही समर्थन करते हैं कि ऐसी छूट जीवन में मिलनी ही चाहिए, धर्म हो या कोई और क्षेत्र। ये वैसा ही जैसे कोई भारतीय सैनिक जासूसी करने पाक जाये और वो कुछ समय के लिए अपनी इडेंटटी छिपा कर, खुद को पाकिस्तानियो में मिला ले और पकड़े जाने पर खुद को भारत से पल्ला झाड़ कर अपनी जान बचाये और खतरा टलने पर बाद भले खुल कर सामने आ जाये।
जो हिन्दू भाई ये कहते हैं कि क़ुरान में इसका आदेश है या मुस्लिम इसके अंतर्गत दिखावा करते हैं, या ये धोखेबाज़ी है। उन्हें अपने धर्म का ही ज्ञान नहीं है। हिन्दू धर्म में भी ये व्यवस्था है जिसे "आपद्धर्म" कहा गया है। विभिन्न ग्रंथों में इसका उल्लेख और आदेश है। यानी आपातकाल या आपदा की स्थिति में अपने धर्म को छिपा कर व्यवहार करना। दुसरो पर उठने वाली हर उंगली अपनी तरफ पहले इशारा करती है। न जाने दूसरे धर्म के प्रति नफरत फैलाने वाले लोग कब अपने गिरेबान में पहले झांकेंगे?
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हज सब्सिडी लगभग 1960 से दी जा रही थी। 2012 में सुप्रीम कोर्ट ने इसे 2022 तक चरण बद्ध तरीके से बंद करने का आदेश दिया जो घटाते सब्सिडी अमाउंट घटाते घटाते 2018 में बंद कर दी गई।
आखिर बार 2017 में जब ये दी गयी तो लगभग 525 करोड़ थी और सरकारी सब्सिडी लेने वाले हाजियों की संख्या 1.25 लाख थी (यानी लगभग 40 हज़ार प्रति व्यक्ति)। इस वक्त इंडियन एयरलाइन दिल्ली, मुम्बई, कोलकाता से सऊदी तक का टिकट 65-90 हज़ार के बीच चार्ज कर रही थे। जबकि दूसरी एयरलाइन्स में यह 35 हज़ार का टिकट था। बसब्सिडी बंद होने के बाद इंडियन एयरलाइन के हज टिकट सीधा 20 हज़ार कम हो गए थे।
2010s में सरकार ने सबसे अधिक 850 करोड़ की सब्सिडी दी थी मगर सरकारी हाजी लगभग 1.25 ही थे। यानी पर हेड 68 हज़ार। इस समय इंडियन एयरलाइन्स लगभग 90 हज़ार -1 लाख टिकट के चार्ज कर रही थी। जबकि प्राइवेट एयरलाइन्स 30-40 हज़ार। इस वक़्त 2-3 लाख में हज हो रहा था। 2025 में आज बिना सब्सिडी के सरकार 4 लाख ले रही है।
सऊदी सरकार एक तरफ का फ्यूल भी फ्री देती थी। कुछ अन्य बेनिफिट भी दे रही थी। किसी भी ट्रिप में हवाई जहाज़ की कमाई का 25% सिर्फ फ्यूल में खर्च हो जाता है। अगर आज भी साल भर के लाखों लोगों के एयर टिकट का कॉन्ट्रैक्ट किसी प्राइवेट एयरलाइन को दिया जाए तो 25% डिस्काउंट आसानी सी मिल जायेगा।
इंडियन एयरलाइन का जितना भी घाटा था उसका लगभग 20% सब्सिडी भरपाई कर रही थी। इसी वजह से 2022 में इंडियन एयरलाइन को टाटा ने खरीद लिया।
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