Saturday, 20 June 2020

वेद-क़ुरान में समान मंत्र और विराट-परम पुरुष

  
   




        *📗📔 वेद-----कुरआन 📗📔*

                    📔 *वेद* 📔
 *अग्निः प्रातः सवते पात्वस्मान् वैश्चानरो विश्वकृद विश्वशंभुः।*
" सब मनुष्यों के प्रिय, जगदुत्पादक, सबके कल्याणकारी परमेश्वर प्रातः काल की उपासना में हमारी रक्षा करें।"
                         *अथर्ववेद 6: 47: 1*

                 📗 *_कुरआन_* 📗
*व कुरआनल्-फ़ज़ि इन्-न क़ुरआनल्-फ़ज़ि का-न मश्हूदा*
" और फज्र ( प्रातः काल) में कुरआन की पाबंदी करो क्यो की प्रातःकालीन कुरआन (विशेषकर)  साक्ष्य होता है।"
                       *कुरआन 17: 78*

                    📔 *वेद* 📔
 *ज्यायस्वन्तश्चित्तिनो मा वि यौष्ट संराधयन्तः सधुराश्चरन्तः। अन्यो अन्यस्मै वल्गू वदन्त एत सध्रीचीनान् वः संमनस्कृणोमि।।*
" तुम बड़ोंका मान रखने वाले, उत्तम चित्त वाले, मित्रता पूर्वक एकजुट होकर चलते हुए छिन्न-भिन्न न हो, परस्पर सुन्दर वचन कहते हुए आओ। मै तुम्हे एक मन व गति वाले करता हुँ।
                    *अथर्ववेद 3: 30: 5*

                  📗 *कुरआन* 📗
 *व क़ूलू लिन्नासि हुसना*
" और लोगों से मधुर वाणी बोलो"
                         *कुरआन 2: 83*
 *वअतसिमू बिहब्लिल्लाहि जमीअँव्-व ला तफ़र्रक़ू*
" सब एकजुट होकर अल्लाह की रस्सी को पकड लो और परस्पर टुकडे, टुकडे मत हो जाओ।"
                    *कुरआन 3: 103*

       *📗📔 वेद-----कुरआन 📗📔*
              
                 📔 *वेद* 📔
 *अन्धंतमः प्रविशन्ति येअसंभूतिमुपासते।*
 *ततो भूय अइव ते तमो य अ उ अम्भूत्यां रताः।।*
" जो असंभूति ( अर्थात प्रकृति रुप जड पदार्थ , नैसर्गिक उदाहरणः पेड, नदी, सुर्य, चंद्र , आदि) की उपासना करते हैं वे घोर अंधकार ( अन्धन्तम नामक नरक ) मैं प्रविष्ट होते हैं। और जो सम्भूति ( जड पदार्थ व प्रकृति से  भिन्न सृष्टि, कृत्रिम उदाहरणः कुर्सी, हाथ से बनायी हुयी हर चीज आदि) में रमण करते हैं वे उससे भी अधिक अन्धकार में पडते है।"
                      *यजुर्वेद 40: 9*

                  📗 *कुरआन* 📗
 *क़ुल अ-तअ-बुदू-न मिन् दुनिल्लाहि मा ला यम्लिकु लकुम्  ज़्रररँव्-व ला नफ़्अन् वल्लाहु हुवस्समीऊल्-अलीम। क़ुल या अहलल्-किताबि ला तग्लू फ़ी दीनीकुम गैरल्हक्कि व ला तत्तबिऊ अह्म-अ क़ौमिन् क़द् ज़ल्लू मिन् क़ब्लु व अज़ल्लु कसीरँव्-व ज़ल्लू अन् सवा-इस्सबील।*
" इनसे कहो कि क्या तुम अल्लाह को छोडकर उसकी उपासना करते हो जो न तुम्हारे नुकसान का अधिकार रखता है और न लाभ का, जबकि सब की सुनने वाला और सब कुछ जानने वाला तो एक परमेश्वर ही है। कहो कि हे पूर्व ग्रन्थवालो, अपने धर्म में असत्य अतिशयोक्ति न करो और उनका अनुसरण न करो जो तुम से पूर्व स्वयं पथभ्रष्ट हुए और अनेकों को भटकाया व सदमार्ग से दूर निकल गये।"
                   *कुरआन 5: 76, 77*

                    📔 *वेद* 📔
 *तस्य वयं हेडिसि मापि भूम सुमृडीके अस्य सुमतो स्याम।*
" हम उस ( परमेश्वर ) के क्रोध में कभी न होवें, उसकी करुणा और सुमति में बने रहें
                       *अथर्ववेद 7: 20: 3*
                     📗 *कुरआन* 📗
 *क़ा-ल अज़ाबी उसीबु बिहि मन् अशाउ व रहमती वसि-अत् क़ुल्-ल शैइन्*
" प्रभु ने फरमाया, दण्ड तो मैं जिसे चाहता हुँ देता हुँ किन्तु मेरी करुणा , हर वस्तु पर व्यापक हैं।"
                     *कुरआन 7: 156*

             *📗📔 वेद---- कुरआन 📗📔*

                     📔 *वेद* 📔
 *य एक इ त्तमुष्ठु हि कृष्टीनां विचर्षणि:।*
" जो मनुष्यों को देखने वाला एक ही है उसी की स्तुति करो।"
                        *ॠगवेद 6: 45: 16*

                      📗 *कुरआन* 📗
 *हु-वल्लाहुल्लज़ी ला इला-ह इल्ला हु-व आलिमुल्-ग़ैबि वश्शहादति*
" वह अल्लाह ( एक परमेश्वर) ही है जिसके अतिरिक्त कोईउपास्य नहीं, अदृश्य व प्रत्यक्ष सब वस्तुओं को जानने वाला।"
                       *कुरआन 59: 22*

                      📔 *वेद* 📔
 *मा चिदन्यद्वि शंसत सखायों मा रिषण्य।*
 " हे मित्रों परमेश्वर के अतिरिक्त किसी अन्य की उपासना न करो तो तुम्हारी हिंसा न होंगी।"
                         *ॠगवेद 8: 1: 1*

                    *📗 कुरआन 📗*
 *अल्ला तअ-बुदू इल्लल्ला-ह इन्नी अख़ाफु अलैकुम् अज़ा-ब यौमिन् अलीम*
" तुम एक अल्लाह के सिवाय किसी अन्य की बन्दिगी न करो अन्यथा मुझे डर है कि तुम पर एक दिन पीड़ाजनक प्रकोप आएंगा।"
                    *कुरआन 11: 26*

         *📗📔 वेद---- कुरआन 📗📔*

                    *📔 वेद 📔*
 *सहृदयं सांमनस्यनविद्वेषं कृणोमि वः। अन्यो अन्यमभि हर्यत वत्सं जातमिवाघ्न्या।।*
" मैं तुम्हारे लिए हार्दिक एकता, एकमनता और द्वेष रहित भाव (निर्धारित) करता हुँ, परस्पर प्रेम रखो जैसे गौ अपने बछडे से (प्रेम करती है)।"
                  *अथर्ववेद 3: 30: 1*

                    *📗 कुरआन 📗*
 *व-ला तस्तविल्-ह-स-नतुँव्व- लस्सय्यिअतु इद्फ़अ-बिल्लती हि-य अहसनु फ़-इज़ल्लज़ी बै-न-क व बैनहू अदावतुन् क-अन्नहू वलिय्युन् हमीम*
" भलाई और बुराई एक समान नहीं है। तुम बुराई का जवाब उत्तम भलाई से दो। इस प्रकार तुम्हारे तथा दूसरे के बीच यदि दुश्मनी भी थी तो वह तुम्हारा घनिष्ठ मित्र हो जाएंगा।"
                   *कुरआन 41: 34*

                   *📔 वेद 📔*
 *अनुब्रतः पितुः पुत्रो माता भवतु संमनाः।*
 "पुत्र पिता का अनुगत हो और माता के साथ एक मन वाला हो"
                   *अथर्ववेद 3: 30: 2*

                  *📗 कुरआन 📗*
 *वबिल्- वालिदैनि इहसानन् इम्मा यब्लुगन्-न इन्दकल्-कि-ब-र अ-हदुहुमा अव् किलाहुमा फ़ला तक़ुल्लहुमा उफ़्फ़िँव्-व ला तन्हर्हुमा व क़ुल्लहुमा कौलन् करीमा*
" माता पिता के साथ अच्छा व्यवहार करो। यदि तुम्हारे पास उनमें से क़ोई एक या दोनों वृध्दावस्था में रहें तो उन्हें उफ़ तक न कहो और उन्हें झिडक कर जवाब न दो बल्कि उनसे आदरपूर्वक बात करो।"
                       *कुरआन 17: 23*

        *📗📔 वेद----कुरआन📗📔*

                  📔 *वेद* 📔
 *मा भ्राता भ्रातरं द्विक्षन्मा स्वसारमुत स्वसा। सम्यग्चः सव्रता भूत्वा वाचं वदत भद्रया।।*
" भाई, भाई से और बहन, बहन से द्वेष न करें। एक मन और गति वाले होकर मंगलमय बात करें।"
                     *अथर्ववेद 3: 30: 3*

                    *📗 कुरआन 📗*
 *या अय्युहल्लज़ी-न आ-मनू ला यस्ख़र् क़ौमुम्मिन-क़ौमिन् असा अँय्यकू-न ख़ैरम्मिन्हुम् व ला निसाउम्मिन् निसाइन् असा अँय्यकू-न ख़ैरम्मिन्हुन्-न व ला तल्मिज़ू अन्फ़ु-सकुम् व ला तनाबज़ू बिल्-अल्क़ाबि। बिअ-सल्इस्मुल्फ़ुसूकु बअ-दल्-ईमानि व मल्लम् यतुब फ़-उलाइ-क हुमुज़्ज़ालिमून*
" हे ईमान वालो! कोई वर्ग अन्य वर्ग का मजाक न उडाए, हो सकता है कि वे उन (मजाक उडाने वालों से) से बेहतर हों। और न स्त्रियाँ अन्य स्त्रियों का मजाक उडाएँ, कदाचित वे उन मजाक उडाने वाली से स्त्रियों से बेहतर हों। परस्पर एक दुसरे को तीखे शब्द न कहो और न एक दुसरे को बुरी उपाधि दें। आस्था के बाद इन घोर पाप कर्मों में नाम कमाना बहुत बुरा है और बाज न आए वे अन्यायी हैं।"
                        *कुरआन 49: 11*

                      *📔 वेद 📔*
 *जाया पत्ये मधुतीं वाचं वदतु शन्तिवाम्।*
" पत्नी पति से मीठी मधुर वाणी बोलने वाली हो।"
                    *अथर्ववेद 3: 30: 2*

                      *📗 कुरआन 📗*
 *व मिन् आयातिही अन् ख़-ल-क़कुम मिन् अन्फ़ुसिकुम् अज़्वाजल्लि-तस्कुनू  इलैहा व ज-अ-ल बैनकुम् मवद्दतँव् व रहमतन्*
" उस परमेश्वर की निशानियों में से एक यह है कि तुम्हारे लिए तुम्हीं में से जोडे बनाए ताकि तुम उनके पास सुकून प्राप्त करों और तुम्हारे बीच परस्पर प्रेम व करुणा उत्पन्न कर दी।"
                       *कुरआन 30: 21*

    📗📔 *वेद* --- *कुरआन* 📗📔

                 📔 *वेद* 📔
 *माधमन्त्रं विन्दते अप्रचेताः सत्यं ब्रवीमि वध इत्स तस्य।  नार्यमणं पुष्यति नो सखायं केवलाधो भवति केवलादी।।*
" मूर्ख बिना परिश्रम अन्न (धनादि) कमाता है। सत्य कहता हूँ कि वह उसका विनाश ही है। न तो वह सन्तों को खिलाता है और  न मित्र को। अकेला खाने वाला केवल पाप का भक्षण करता है।"
                     *ॠगवेद 10: 117: 6*

                    📗 *कुरआन* 📗
 *यम्हुक़ुल्लाहुर्रिबा व युर्बिस्स-दक़ाति वल्लाहु ला युहिब्बु कुल्-ल कफ़्फ़ारिन असीम*
" अल्लाह ब्याज को विनाशकारी (बेबरकत)  बनाता है और दान में बरकत देता है और अल्लाह किसी अकृतज्ञ पाप के भोगी को पसन्द नही करता।"
                     *कुरआन 2: 276*

                      📔 *वेद* 📔
 *तस्य ते भक्तिवासः स्यामः*
" ( हे परमेश्वर) हम तेरे ही भक्त हों।"
                     *अथर्ववेद 6: 79: 3*

                    📗 *कुरआन* 📗
 *इय्या-क नअबूदु व इय्या-क नस्तईन*
" ( हे परमेश्वर ) हम तेरी ही बंदगी करते हैं और तुझ ही से मदद मांगते है।"
                      *कुरआन 1: 4*

        *📗📔 वेद----कुरआन📗📔*

                  📔 *वेद* 📔
 *पवमान ॠतं बृहच्छुक्रं ज्योतिरजीजनत्।*
" पावक विधान ने अति उज्वल ज्योती को  जन्म दिया और काले अंधकार को नष्ट किया।"
                   *ॠगवेद 9: 66: 24*

                  📗 *कुरआन* 📗
 *किताबुन् अन्ज़ल्नाहु इलै-क लितुख़्रिजन्ना-स मिनज़्ज़ुलुमाति*
 *इलन्नूरि*
" एक ग्रंथ है, जिसे हमने तुम्हारी ओर अवतरित किया है ताकि तुम लोगों को अंधियारों से निकालकर प्रकाश में ले जाए
                     *कुरआन 14: 1*

                      📔 *वेद* 📔
 *इन्द्रं मित्रं वरुणमग्निमाहु रथो दिव्यः स सुपर्णो गरुत्मान। एकं सद्विपा बहुधा वदन्त्यग्निं यमं मातरिश्वानमाहुः।।*
" वह (ईश्वर ही) इन्द्र, मित्र, वरुण एवं आकाश में गरुत्मान है (वही) अग्नि, यम, और मातरिश्वा है। विद्वान जन एक ब्रह्म को ( ही ) अनेक नामों से पुकारते हैं।।
                   *ॠगवेद 1: 164: 46*

                📗 *कुरआन* 📗
 *अल्मलिकुल्- कुद्दूसुस्सलामुल्-मुअमिनुल्-मुहैमिनुल्- अज़ीज़ुल्-जब्बारल्-मु- तकब्बिरु सुबहानल्लाहि अम्मा युश् रिकून हुवल्लाहुल्-ख़ालिक़ुल्- बारिउल्- मुसव्विरु लहुल्-अस्माउल- हुस्ना*
" वह मालिक, कुद्दूस, सलाम, मोमिन, मुहैमिन, अज़ीज़, जब्बार और मुतकब्बिर है। पवित्र है अल्लाह उनसे जिन को यह लोग उसके साझी ठहरा रहे है। वही अल्लाह ख़ालिक , बारी और मुसव्विर है। यह सब उसी एक के अच्छे-अच्छे नाम है।
                   *कुरआन 59: 23, 24*

     *📗📔 वेद----कुरआन📗📔*

               *📔 वेद 📔*
 *स एष एक एकवृदेक एव।*
 " वह आप एक अकेला वर्तमान, एक ही है।"
                *अथर्ववेद 13: 4: 12*

                  *📗 कुरआन 📗*
 *क़ुल हुवल्लाहु अहद् अल्लाहुस्समद*
" कहो कि वह अल्लाह एक है, उसे किसी के साथ की आवश्यकता नही।"
                      *कुरआन 112: 1: 2*

                     *📔 वेद 📔*
 *भुवनस्य यस्पतिरेक एव नस्मयो विक्ष्वीडयः।*
" सब ब्रम्हाण्ड का वह एक ही स्वामी सभीं प्रजाओं द्वारा सिर झुकाने व उपासना करने योग्य हैं।"
                      *अथर्ववेद 2: 2: 1* 

                   *📗 कुरआन 📗* 
 *रब्बुस्समावाति वल्अर्ज़ि व मा बै-नहुमा फअ-बुद्हु वस्तबिर् लिइबादतिही हल् तअ-लमु लहू समिय्या* 
" वह आकाशों का व पृथ्वी व इनके बीच जो कुछ है, सब का प्रभु है, तुम उसी की बन्दगी करो और उसी की बन्दगी पर जमे रहो, क्या तुम्हारे ज्ञान मे उसका कोई तुल्य है? "
                       *कुरआन 19: 65*

       *📗📔 वेद--- कुरआन 📗📔*

                   *📔 वेद 📔*
 *उदीष्व्र नार्यभि जीवलोकं गतासुमेतमुप शेष एहि। हस्त ग्राभस्य दिधिषोस्तवेदं पत्युर्जनित्वमभि सं बभूय।।*
" हे ( विधवा ) नारी, जीवित समाज की ओर उठकर चल। इस मृतक के सहारे तु पढी है। आ अब अपना हाथ ग्रस्थ करने वाले वीर्यदाता (नये) पति सतान को यथावत प्राप्त हो।।"
                  *अथर्ववेद 18: 3: 2*

                   *📗 कुरआन 📗*
 *फ़ इज़ा ब-लग्-न अ-ज-लहुन्-न फ़ला जुना-ह अलैकुम् फ़ीमा फ़-अल्-न फ़ी अन्फुसिहिन्-न बिल्मअरुफ़ि*
" फिर जब उन विधवाओं की इद्दत ( शोक अवधि ) पूरी हो जाए तो जो कुछ स्वयः अपने मामले में भले तरीके से वे करे ( अर्थात पुनर्विवाह करें ) तुम पर क़ोई दोष नहीं।"
                      *कुरआन 2: 234*

                     *📔 वेद 📗*
 *इन्द्र क्रतुं न आ भर पिता पुत्रेभ्यो यथा। शिक्षा णो अस्मिन् पुरुहूत यामनि जीवा ज्योतिरशीमहि।।*
" ( परमेश्वर) इस मार्ग में हमें शिक्षा दे। हम जीते हुए प्रकाश को पायें।।"
                       *अथर्ववेद 18: 3: 67*

                   *📗कुरआन 📗*
 *युअतिल्-हिक्म-त मँय्यशा-उ व मँय्युअतल्-हिक्म-त फ़क़द ऊति-य ख़ैरन् कसीरन् व मा यज़्ज़क्करु इल्ला उलुल् - अल्बाब*
" वह अल्लाह जिस को चाहता है विवेक प्रदान करता है और जिसे विवेक प्राप्त हो गया उस का बडा कल्याण हो गया किन्तु इन बातों से केवल वही सीख लेते हैं जो बुद्धिजीवी हैं।"
                     *कुरआन 2: 269*

     *📗📔 वेद----कुरआन 📗📔*

                  *📔 वेद 📔*
 *ब्रह्मा भूमिर्विहिता ब्रह्म धौरुत्तरा हिता। ब्रह्मे दमूर्ध्व तिर्यक् चान्तरिक्ष व्यचो हितम्।।*
" ब्रह्म द्वारा ही इस पृथ्वी की रचना की गयी और ब्रह्म द्वारा ही धौ लोक ऊंचा धरा गया और ब्रह्म ही ने ऊपर सब और विस्तृत अंतरिक्ष की रचना की है।"
                   *अथर्ववेद 10: 2: 25*

                  *📗 कुरआन 📗*
 *व-लइन्-सअल्तहुम् मन् ख़-लक़स्समावाति वल्-अर्-ज़ व सख़्ख़रश्शम्-स वल्क-म-र लयक़ूलुन्नल्लाहु फ़-अन्ना युअ-फ़कून*
" यदि तुम उन ( न मानने वालों) से प्रश्न करो की पृथ्वी एवं अंतरिक्ष को किस ने उत्पन्न किया और सूर्य और चन्द्रमा को  किस ने नियंत्रित किया है तो वे भी अवश्य यही कहेंगे कि अल्लाह ने। फिर ये किधर धोका खा रहे है?"
                     *कुरआन 29 : 61*

                       *📔 वेद 📔*
 *तस्याम् सर्वा नक्षत्रा वशे चन्द्रमसा सह*
" चन्द्रमा सहित यह सब नक्षत्र उसी के वश में है।"
                  *अथर्ववेद 13: 4: 28*

                    *📗 कुरआन 📗*
 *व श्शम्-स वल्-क़-म-र वन्नुजू -म मुसख़्ख़रातिम्-बिअम्रिही*
" उसी ने पैदा किये सूर्य चांद और तारे, (ये) सब उस के आदेश के अधीन है।"
                      *कुरआन 7: 54*

       📗📔 *वेद* -- *कुरआन* 📗📔

                     📔 *वेद* 📔
 *सइद् भोजो यो गृहवे ददात्यन्न कामाय चरते कृशाय। अरमस्मै भवति यामहुमा उतापरीषु कृणुते सखायम।।*
" जो निर्धनों और अभाव से पीड़ितों की सहायता के लिए दान करता है उसका भला होता है, उसके शत्रु भी उसके मित्र बन जाते हैं।"
                  *ॠगवेद 10: 117: 3*

                  📗 *कुरआन* 📗
 *अल्लज़ी-न युन्फ़िकू-न फ़िस्सर्रा-इ वज़्ज़र्रा-इ वल्काज़िमीनल्-गै-ज़ वल्आफ़ी-न अनिन्नासि वल्लाहु युहिब्बुल्-मुहसिनीन*
" यह वे लोग हैं जो समृद्धी एवं निर्धनता प्रत्येक अवस्था में खर्च करते रहते है, और क्रोध को रोकने वाले है, और लोगों को क्षमा करने वाले है, और अल्लाह उपकार करने वालों से प्रेम करता है।"
                      *कुरआन 3: 134*

                   📔 *वेद* 📔
 *य आधायं चकमानय पित्वो अन्नवान्त्सन् सफितायो पजरग्भुषे। स्थिरंमनः कृष्णुते सेवते पुरोतो चित् स मर्डितारं न विन्दते।।*
" जो दुर्बल, अन्न के चाहने वाले, दरिद्रता से पीडित को, अन्न होते हुए भी सहायता नही देता उसको कष्ट आने पर कोई सुख नहीं मिलता।"
                  *ॠगवेद 10: 117: 2*

                   📗 *कुरआन* 📗
 *फ़-ज़ालिकल्लज़ी यदुअ-उल-यतीम व ला यहुज़्ज़ु अला तआमिल्-मिस्कीन फवैलुल्-लिल्मुसल्लीन*
" वही तो है जो अनाथ को धक्के देता है और निराश्रित को खाना खिलाने पर नहीं उकसाता। सो तबाही है ऐसे नमाज़ियों के लिए।"
               *कुरआन 107: 2, 3, 4*

       📗📔 *वेद* --- *कुरआन* 📗📔

                 📔 *वेद* 📔
 *यो नः पिता जनिता यो विधाता धामाति वेद भुवनानि विश्वा।*
" जो हमारा पालक एवं उत्पन्न करने वाला हैं, जो विधाता है वही जगत के सब स्थानों  और लोकों को जानता है।"
                   *ॠगवेद 10: 82: 3*

                   📗 *कुरआन* 📗
 *अम्मँय्यब्दउल्-ख़ल्-क़ सुम्-म युईदुहू व मँय्यर्ज़ुक़ुकुम् मिनस्समा-इ वल्अर्ज़ि*
" कौन है वह जो सृष्टि का प्रारंभ करता है और फिर उसे लौटाता है? और कौन तुम को आकाश और पृथ्वी से जीविका देता है?"
                      *कुरआन 27: 64*

 *क़ुल ला य्अ-लमु मन् फिस्समावाति वल् अर्ज़िल् ग़ैबि इल्लल्लाहु।*
" इनसे कहो कि अल्लाह के सिवाय आकाशों व पृथ्वी में कोई ढकी छिपी बातों का ज्ञान नहीं रखता।"
                          *कुरआन 27: 65*

                       📔 *वेद* 📔
 *सविता यन्त्रैः पृथिवीमरम्णा दस्कम्भने सविता द्ध्यामदृंहत्।*
" परमेश्वर ने अपने यंत्रों से पृथ्वी को नियन्त्रित किया और सहारे के बिना आकाश को अधर में स्थापित किया।"
                     *ॠगवेद 10: 144: 1*

                    📗 *कुरआन* 📗
 *ख़-लक़स्समावाति बिग़ैरि अ-मदिन् तरौनहा व अल्क़ा फिल् अर्ज़ि खासि-य अन् तमी-द बिकुम्*
" उसने आकाशों को पैदा किया बिना ऐसे स्तंभों के जिन्हें तुम देख सको और पृथ्वी में पर्वत स्थापित कर दिए ताकि वह तुम सहित असन्तुलित न हो जाए••"
                         *कुरआन 31: 10*
 
       📗📔 *वेद* -- *कुरआन* 📗📔

                  📔 *वेद* 📔
 *श्रध्दां प्रातर्हवामहे श्रध्दां मध्यंदिनं परि। श्रध्दां सूर्यस्य जिम्रुचि श्रध्दे श्रध्दापयेह नः।।*
" श्रध्दा का हम प्रातः कालमे, श्रध्दा का दिन के मध्य में, और सूर्य के अस्त होने पर  आव्हान  करते हैं। हे श्रध्दे! हमें लोक में श्रध्दा युक्त करे।।"
                    *ॠगवेद 10: 151: 5*

                      📗 *कुरआन* 📗
 *व सब्बिह बिहम्दि रब्बि-क क़ब्-ल तुलूइश-शम्सि व क़ब्-ल गुरुबिहा व मिन् आनाइल्लैलि फ़-सब्बिह व अत्राफ़न्नहारि ल-अल्ल-क तर्ज़ा।*
" सूर्योदय एवं सूर्यास्त से पूर्व अपने प्रभु की प्रशंसा व स्तुति करो और रात में तथा दोपहर में दोनों सिरों पर स्तुति करो, कदाचित तुम सम्पन्न होंगे।"
                     *कुरआन 20: 130*

                       📔 *वेद* 📔
 *यत् कि चेदं वरुण दैव्ये जने अभिद्रोहं मनुष्याशाश्चरामसि। अचित्ति यत् तव धर्मा युयोपिम मा नस्तस्मादेनसो देव रीरिषः।।*
" हे परमेश्वर हम मनुष्य जो कुछ भी अपराध आप (परमेश्वर) का करते है और अनजाने में जो हम धर्म के विरुद्ध करते हैं उन पापों के कारण हम को दण्ड न दीजीए।"
                *ॠगवेद 7: 89: 5*

                 📗 *कुरआन* 📗
 *रब्बना ला तुआख़िज़्ना इन्नसीना अव् अख़्तअना*
" हे हमारे प्रभु हम से भुल चुक हो जाए या हम से गलती हो जाए तो आप (ऐसी त्रुटियों पर) हमारी पकड मत कीजीए।"
                        *कुरआन 2: 286*

        📗📔 *वेद* -- *कुरआन* 📗📔
  
* अवनो वृजिना शिशी हि*
*" (हे परमेश्वर) आप हमारे पापों को (हम से ) दूर कीजिए।
                   *ॠगवेद 10: 105: 8*

                     📗 *कुरआन* 📗
 *रब्बना फग़्फिर्लना ज़ुनुबना व कफ़्फ़िर अन्ना सय्यिआतिना।*
" हे हमारे प्रभु! हमारे पापों पर हमें क्षमा कर और हमारी बुराईयों को हम से दूर कर
                       *कुरआन 3: 193*

                       📔 *वेद* 📔
 *न भोजा मम्रुर्न न्यर्थमीयुर्न रिष्यन्ति न व्यथन्ते ह भोजाः।*
 *इदं यिद्वश्वं भुवनं स्वश्चैतत्सर्व दक्षिणैभ्यो ददाति।*
" दानशील लोग अमर हो जाते है, वे न तो बर्बाद होते है और न दुःख, क्लेश, भय से पीडित होते हैं। दान इन दाताओं को इस विश्व एवं स्वर्ग लोक ( की सुविधाए) प्रदान करता है।।"
                   *ॠगवेद 10: 107: 8*
 
                   📗 *कुरआन* 📗
 *अल्लज़ी-न युन्फ़िकू-न अमवालहुम् बिल्लैलि वन्नहारि सिर् रँव्-व अलानी-यतन् फ़ लहुम् अज्रुहुम् इन्-द रब्बिहिम् व ला ख़ौफ़ुन् अलैहिम् व ला हुम् यहज़नून*
" जो लोग अपना धन रात-दिन खुल कर या छिपे तौरपर दान में खर्च करते हैं उनका बदला उनके प्रभु के जिम्मे हैं और उनके लिए (इस लोक व परलोक में) न क़ोई भय होंगा और न कोई शोक।"
                     *कुरआन 2: 274*

      📗📔 *वेद* -- *कुरआन* 📗📔

                    📔 *वेद* 📗
 *स्वयं यजस्व स्वयं जुषस्व*
" तु ही कर्म कर और तु ही उसका फल भोग।"
               *यजुर्वेद 3: 15*

                📗 *कुरआन* 📗
 *अल्ला तज़िरु वाज़िरतुँव्विज्-र उख् रा*
" और यह कि कोई बोझ उठानेवाला किसी दुसरे का बोझ नही उठाएंगा।"
                  *कुरआन 53: 38*

                   📔 *वेद* 📔
 *क्रत्वः समहदीनता प्रतीपं जगमा शुचे मृळा सुक्षत्र मृळय।।*
" हे सर्वशक्तिमान परमेश्वर हम अपनी अज्ञानता से पथभ्रष्ट होते है। हम पर कृपा करें।
                  *ॠगवेद 7: 89: 3*

                  📗 *कुरआन* 📗
 *इन्नल्ला-ह ला यज़्लिमुन्ना-स शैअँव्-वलाकिन्नन्ना-स अन्फ़ुसहुम् यज़्लिमून*
" निसंदेह अल्लाह मनुष्यों पर कुछ ज़ुल्म नहीं करता किन्तु लोग स्वयं अपने आप पर ज़ुल्म करते है।"
                     *कुरआन 10: 44*

                    📔 *वेद* 📔
 *क्वेलाधो भवति केवलादी*
" जो अपनी कमाई अकेला खाता है वह पाप खाता है।"
                   *ॠगवेद 10: 117: 6*

                   📗 *कुरआन* 📗
 *लन्तनालुल्बिर्र हत्ता तुन्फ़िकू मिम्मा तुहिब्बून*
" तुम नेकी के दरजे को नही पहुँच सकते जब तक कि अपनी उन चीजों में से न खर्च करो जो तुम्हें प्रिय हैं।"
                   *कुरआन 3: 92*

      📗📔 *वेद*-- *कुरआन* 📗📔

                    📔 *वेद* 📔
 *उत त्वः पश्यन्त ददर्श वाचमुत त्वः श्रण्वन्न श्रुणोत्ये नाम्।*
" बुद्धि हीन लोग ग्रंथ देखते हुए नही देखते और सुनते हुए नही सुनते।"
                     *ॠगवेद 10: 71: 4*

                 📗 *कुरआन* 📗
 *वलहुम् अअ-युनुन् ला-युब्सिरु-न बिहा व लहुम् आज़ानुल्-ला यस्मऊ-न बिहा उलाइ-क कल्-अन्आमि बल हुम् अज़ल्लु*
" और उन के पास आँखे है वे उनसे देखते नही और उनके पास कान है वे उनसे सुनते नहीं, वे पशुओं की तरह है।"
                   *कुरआन 7: 179*

                    📔 *वेद* 📔
 *महेचन त्वामाद्रवः पराशुल्काय देयाम्। न सहस्त्राय नायुताय बज्रि वो न शताय शतामध।।*
" हे सदाशक्तिमान परमेश्वर तु इतना मुल्यवान है कि मै तुझको किसी शुल्क के लिए भी नही छोड सकता। न हजारों के लिए न अरबों के लिए और न सैंकडो सांसारिक भोगों के लिए।।"
                      *ॠगवेद 8: 1: 5*

                 📗 *कुरआन* 📗
 *व ला तश्तरु बि आयाती स-म-नन् क़लीला*
" और थोडे से मूल्य पर मेरी " *आयतों* " को बेच न डालो।"
                      *कुरआन 2: 41*

     📗📔 *वेद* -- *कुरआन* 📗📔

                     📔 *वेद* 📔
 *यो मारयती प्राणयति यस्मात प्राणन्ति भुवानानि विश्वा ।*
" जो परमेश्वर मारता है और प्राण प्रदान करता है और जिस (की कृपा) से सभी जीव जीवीत रहते है।"
                 *अथर्ववेद 13: 3: 3*

               📗 *कुरआन* 📗
 *अल्लाहुल्लज़ी ख़-ल-क़कुम् सुम्-म र-ज़-क़कुम् सुम्-म युमीतुकुम् सुम्-म युह्-यीकुम्*
" अल्लाह ही है जिस ने तुम्हे पैदा किया फिर उसने तुम्हे रोजी दी, फिर तुम्हें मौत देता है, फिर तुम्हे जीवित करेंगा।"
                     *कुरआन 30: 40*

                    📔 *वेद* 📔
 *दृष्टवा रुपे व्याकरोत्सत्या नृते प्रजापतिः।*
*अश्रध्दा मनृतो अदधाच्छध्दाँ सत्ये प्रजापतिः।।*
" परमेश्वर ने सत्य और मिथ्या के रुप को अपनी ज्ञान दृष्टि से अलग अलग कर दिया और आदेश दिया कि सत्य मे आस्था लाओ और मिथ्या को ठुकरा दो।"
                    *यजुर्वेद 19: 77*

                  📗 *कुरआन* 📗
 *क़द् तबय्यनर्रुश्दु मिनल्गय्यि फ़ मँय्यक्फुर बित्तागूति व युअमिम्-बिल्लाहि फ़-क़दिस्तम्-स-क बिल्-उर्वतिल्-वुस्क़ा*
" सद् मार्ग, को गुमराही से अलग स्पष्ट कर दिया गया तो अब जो कोई दानव को ठुकरा दे और अल्लाह पर आस्था ले आए उसने बड़ा प्रबल सहारा थाम लिया।"
                     *कुरआन 2: 256*

      📗📔 *वेद* -- *कुरआन* 📗📔

                      📔 *वेद* 📔
 *अधः पश्यस्व मोपरि सन्तरां पादकौ हर! मा ते काशप्लकौ दृशन स्त्री हि ब्रह्मा वभूविथ।।*
" (जब) स्त्री ही पुरुष बन गयी हो ( अर्थात  जब पुरुष के समान घर से निकले तो ) नीचे देख, ऊपर नही। दोनों पावों को समेटकर चल कि तेरे निम्नांग नज़र न आएं।"
                 *ॠगवेद 8: 33: 19*

                  📗 *कुरआन* 📗
 *व कुल्लिल्-मुअमिनाति यग्ज़ुज्न मिन् अब्सारिहिन्-न व यह फ़ज्-न फ़ुरुजहुन्-न वलां युब्दी-न ज़ी-न-तहुन्-न*
" ईमानवाली स्त्रियों से कहो कि वे अपनी निगाहें नीची रखे और अपनी लज्जा इन्द्रियों की रक्षा करे और अपना श्रृंगार न दिखाएं सिवाय उसके जितना ज़ाहिर हो ही जाता है और अपनी सीनों पर अपनी ओढनियों के आँचल डाले रहे।"
                   *कुरआन 24: 31*

                      📔 *वेद* 📔
 *असुर्य्या नाम ते लोका अन्धेन तमसा वृताः। ताँस्ते प्रेत्यापि गच्छन्ति ये के चात्महनो जनाः।।*
" जो मनुष्य जीते हुए अपनी आत्मा का हनन करते है वे मरने के पीछे अंधकारमय असुरों के लोक को जाते है।"
                      *यजुर्वेद 40: 3*

                   📗 *कुरआन* 📗
 *वला तफ्तूलू अन्फुसकुम*
" अपने प्राणों को हलाकत में न डालो।"
                       *कुरआन 4: 29*
   
      📔📗 *वेद* - *कुरआन* 📗📔

                    📔 *वेद* 📔
 *न यस्य ध्यावापृथिवी अनु व्यचो न सिन्धवो रजसो अन्तमानशुः।*
*नोत स्ववृष्टिं मदें अस्य युध्यत एको अन्यच् चकृषे विश्वमानुषक्।।*
" न पृथ्वी और आकाश उस परमेश्वर की व्यापक्ता की सीमा को पा सकते और न अन्य ग्रह, और न आकाश से बरसने वाली वर्षा। उस एक के सिवाय कोई दुसरा इस जगत पर सामर्थ्य नही रखता।।"
                     *ॠगवेद 1: 52: 14*

                    📗 *कुरआन* 📗
 *वलाहीतु-न बिशैइम्मिन् इल्मिही इल्ला बिमा शा-अ वसि-अ कुर्सिय्युहुस्समावाति वल्अर्ज*
" और वे लोग उसके ज्ञान के किसी भाग का व्यापक आभास नही कर सकते सिवाय उतने के जो वह स्वयं चाहे। उसका सामर्थ्य आकाशों और पृथ्वी पर विस्तृत है
                          *कुरआन 2: 255*

 *व युनज़्ज़िलुल्-गैस*
" और वही वर्षा उतारता है।
                         *कुरआन 31: 134*

                    📔 *वेद* 📔
 *वेद नाव समुद्रियः*
" वह समुद्र की नौकाओं को जानता है।"
                       *ॠगवेद 1: 25: 7*

                    📗 *कुरआन* 📗
 *अ-लम् त-र अन्नल्फुल्-क तजी फिल्बहिर बिनिअ-मतिल्लाहि*
" क्या तुम नही देखते कि अल्लाह ही के वरदान से नौका समुद्र में चलती है।"
                       *कुरआन 31: 31*

                *📔 वेद - कुरआन 📗*

                     📔📔 वेद 📔📔
 *यदंग दाशुशेत्वमग्ने भद्रं करिष्यसि त्वेत तत् सत्यमंगिरः*
" हे परमेश्वर! आप सदाचारी को अच्छा फल देते है, यह आपकी सद्प्रवृत्ति है।
                  *ॠगवेद 1 : 1 : 6*

                  📗 *कुरआन* 📗
 *निअ-मतम्-मिन् ईन्दिना कजालि-क नज्जी मन् श-कर*
" यह हमारी ओर से एक वरदान है कि हम कृतज्ञ को ऐसा ही अच्छा बदला देते है। "
                   *कुरआन 54 : 35*

                📔 *वेद* 📔
 *ॠतस्य पंथा नमसा विवासेत*
 " मनुष्य सत्य के मार्ग पर विनम्रता पूर्वक चले।"
                  *ॠगवेद 10 : 31 :2*

                   📗 *कुरआन* 📗
 *इन्नल्ला-ह ला युहिब्बु मनू का-न मुख्तालन् फख् रा*
" अल्लाह ऐसों को मित्र नही रखता जो घमंडी और अहंकारी है।"
                   *कुरआन 4 : 36*

                  📔 *वेद* 📔
 *यो विश्वामि वि पश्यति भुवना संच पश्यति।*
" वह ईश्वर सारे जगत को भली प्रकार जानता है।"
                 *ॠगवेद 10 : 187 : 4*

                 📗 *कुरआन* 📗
 *वल्लाहु यअ-लमु मा फिस्समावाति व मा फिल्अर्जि वल्लाहु बिकुल्लि शैइन अलीम*
" और अल्लाह आसमानों और धरती में जो कुछ है, उसे जानता है, अल्लाह हर वस्तु का ज्ञान रखता है।"
                 *कुरआन 49 : 16*

             *📔 वेद - कुरआन 📗*

                     📔 *वेद* 📔
 *यस्तिष्ठति चरति यश्च वज्वति यो निलायं चरति यः प्रतंकम।*
*द्वौ संनिषद्य यन्मन्त्रयेते राजातद् वेद वरुणस्तृतीयः ।*
" जो खडा होता है, चलता है, जो धोखा देता है, जो छिपता फिरता है, जो दुसरे को कष्ट पहुंचाता है, जो दो मनुष्य खुफिया बात करते है, तीसरा ईश्वर इन सबको जानता है।"
                  *अथर्ववेद 4:16 : 2*
 
                     📗 *कुरआन* 📗
 *यअ- लमु सिर्रकुम् व जह-रकुम् व यअ - लमु मा तक्सिबून्*
" वह तुम्हारी छिपी और खुली और जो कुछ भी तुम ( अपने कर्मोद्वारा) कमाते हो उन सब बातोंको जानता है।"
                     *कुरआन 6 : 3*
                  
                      📔 *वेद* 📔
 *विश्वस्य मिषतो वशी*
" वह सब प्राणियों को वश मे रखता है।
                       *ॠगवेद 10: 190: 2*

                     📗 *कुरआन* 📗
 *व हुवल्काहिरु फौ-क इबादिही*
" वह अपने बन्दोंपर छाया हुआ है।
                       *कुरआन 6 : 18*
 
                        📔 *वेद* 📔
 *प्रजा पतिर्जनयति प्रजा इमा*
 " परमेश्वर इन सब सृष्टियों को उत्पन्न करता है।"
                       *अथर्ववेद 7 : 19 : 1*

                       📗 *कुरआन* 📗
*व ख-ल-क कुल्- ल शैइन्*
" उसने ही हर वस्तु को पैदा किया।"
                      *कुरआन 25 : 2*

             *📔 वेद -- कुरआन 📗*

                    📔 *वेद* 📔
 *यह एक इद् विदयतेवसु मर्ताय दाशुषे*
 " जो ( परमेश्वर ) एक है (वह) ही दानशील मनुष्य को बहुत प्रकार जीविका देता है।"
               *( 1: 84: 7)*

                 📗 *कुरआन* 📗
 *व अन्फिकू खैरल् - लिअन्फुसिकुम*
" निर्धनोंपर खर्च करो इसमे तुम्हारा अपना कल्याण है।"
                   *कुरआन 64: 16*

 *इन् तुक्रिजुल्ला-ह कर्जन् ह-स- नय्युँजाइ-फहू लकुम् व यग्फिर् लकुम्*
 " यदि अल्लाह को तुम अच्छी प्रकार कर्ज दोंगे तो वह उसे तुम्हारे लीए बढाता चला जाएंगा।"
                    *कुरआन 64 : 17*

                       📔 *वेद* 📔
 *न तस्य प्रतिमा अस्ति*
 " उस परमेश्वर की कोई प्रतिमा नही है।"
                         *यजुर्वेद 32 : 3*

                          📗 *कुरआन* 📗
 *लै - स कमिस्लिही शैउन्*
" कोई वस्तु उसके समरुप नही है।"
                          *कुरआन 42 :11*

                           📔 *वेद* 📔
 *यस्येमा: प्रदिशः*
" यह सब दिशाएं उसकी है।"
                          *ॠगवेद10:121:4*

                           📗 *कुरआन* 📗 
 * व लिल्लाहिल् - मशरिकु वल् मगरिबू*
" पूरब भी अल्लाह ही का है, और पश्चिम भी।"
                           *कुरआन 2:115*

       📗📔 *वेद* - *कुरआन* 📗📔

                   📔 *वेद* 📔
 *सविता पश्चातात् सविता पुरस्तात् सवितोत्तरात्तात् सविता धरात्तात्*
" संसार का सृष्टा आगे, पीछे, ऊपर, नीचे सब जगह है।"
                   *ॠगवेद10:36:14*

 *विश्वतश्चक्षुरुत विश्वतोमुखो*
" परमेश्वर के नेत्र हर ओर है, उसका मुख हर तरफ है।"
                     *ॠगवेद10:81:3*
 
                      📗 *कुरआन* 📗
 *फ- ऐ-नमा तुवल्लू फ-सम्-म वज्हुल्लहि इन्नल्ला-ह वासिउन् अलीम*       
 " सो तुम जिधर भी मुँह करो उधर ही अल्लाह का रुख है, निःसंदेह अल्लाह सर्व विस्तृत और जानने वाला है।"
                         *कुरआन 2 : 115*

                        📔 *वेद* 📔
 *अध्दा देव महां असि*
" ईश्वर निश्चय ही महान है।"
                       *अथर्ववेद20:58:3*

                      📗 *कुरआन* 📗
 *कबीरुल्-मु-त-आल*
" परमेश्वर सबसे बडा और आलीशान है।"
                         *कुरआन 13: 9*

                      📔 *वेद* 📔
 *अदब्धानि वरुणस्य व्रतानि*
" ईश्वर के विधान नही बदलते।"
                        *ॠगवेद 1:24:10*

                      📗 *कुरआन* 📗
 *ला तब्दी-ल लिकलिमातिल्लाहि*
 " अल्लाह की बातों मे कोई परिवर्तन नहीं हुआ करता।"
                       *कुरआन 10 : 64*

        📔📗 *वेद* - *कुरआन*📔📔
            
                     📔 *वेद* 📔

*न किरस्य प्रभिनन्ति व्रतानि*
" ईश्वर के नियम कोई नही बदल सकता।"
                     *अथर्ववेद 18:1:5*

                      📗 *कुरआन* 📗
 *व लन् तजि-द लिसुन्नतिल्लाहि तब्दीला*
" और तुम ईश्वर के विधान मे क़ोई परिवर्तन नही पाओंगै।"
                        *कुरआन 48 : 23*

                          📔 *वेद* 📔
 *इमे चित् तव मन्यवे वे पेते भियसा मही यदिन्द्र वजिन्नोजसा वृत्रं मरुत्वाँ अवधीरर्चन्ननु स्वराज्यम्।।*
" हे परमेश्वर ये लोक तेरे प्रताप से कांपते है। तु अपनी प्रताड़ना से दुष्कर्मी को मारता है और सत् कर्मी के लिए अपने राज्यमे सत्कार करता हुआ सुख प्रदान करता है।
                      *ॠगवेद1: 80: 11*

                       📗 *कुरआन* 📗
 *व लिल्लाहि माफिस्समावाति व मा फिल्अर्जि लि-यज्जि-यल्लजी-न असाऊ बिमा अमिलू व यज्जि -यल्लजी- न अह- सनू बिल्हुस्ना*
" और आसमानों और जमीन में जो कुछ भी है अल्लाह की सम्पत्ति है ताकि जिन्होंने बुरे कर्म किये उन्हे बुरा बदला दे और सदाचारियोंको अच्छा बदला दे।
                      *कुरआन 53: 31*

                      📔 *वेद*📔
*सर्व तद् राजा वरुणो विचष्टे यदन्तरा रोदसी यत् परस्तात्*
" जो आकाश और पृथ्वी के बीच है या जो कुछ उससे परे है उसे ईश्वर देखता है।"
                      *अथर्ववेद4:16:5*

 *यअ-लमु मा यलिजु फिलअर्जि व मा यख् रुजु मिन्हा व मा यन्जिलु मिनस्मा-इ व मा यअ-रुजु फीहा*
" वह हर उस चीज को जानता है जो धरती में दाखिल होती है और जो उसमें से निकलती है और उसे भी जो आसमान से उतरती है और जो वापस उसमें चढती है।"
                        *कुरआन 57: 4*

      📔📗 *वेद* - *कुरआन* 📗📔

                   📔 *वेद* 📔
 *नू नव्यसे नवीयसे सूक् ताय साधया पथः। प्रत्नवद रोचया रुचः।।*
" तु दिन-प्रतिदिन नए और उससे भी नुतनतर सुभाषित के लिए रास्ता बना और उस रास्ते को ऐसा प्रकाशमय बना जैसे तुझसे पहले ॠषी बनाते आए है।"
                    *ॠगवेद 9: 9: 8*

                       📗 *कुरआन* 📗
 *व लाकीन् तस्दीकल्लजी बै-न यदैहि व तफ्सीलल्-किताबि ला रै-ब फीहि मिर्रब्बिल-आलमीन*
" •••• बल्कि यह कुरआन तो जो कुछ इससे पहले आ चुका उसका पुष्टिकर्ता है और ( पीछले) ईश्वरीय ग्रंथोंका विस्तार है। इसमे कोई संदेह नही •••। सारे संसार के रब की ओर से है।"
                        *कुरआन 10:37*

                         📔 *वेद* 📔
*पतिर्बभूथासमो जनानामेको विश्वस्य भवनस्य राजा।*
" वह मनुष्योंका स्वामी है जिसके समान कोई नही, सब लोकोंका एकमात्र शासक है।"
                     *ॠगवेद 6:36:4*

                     📗 *कुरआन* 📗
 *जलिकुमुल्लाहु रब्बुकुम् लहुल्मुल्कु ला इला-ह इल्ला हु-व*
" वही अल्लाह तुम सब का स्वामी है, संपुर्ण राज्य उसी का है, कोई पूज्य उसके सिवा नही।"
                      *कुरआन 37:6*

             📔📗 *वेद* - *कुरआन*📔📗

                      📔📔 *वेद* 📔📔
 *वेद वातस्य वत्त्रनिमुरोॠष्वस्य बृहतः।*
*वेदा ये अध्यासते।।*
"वह सब ओर फैले हुए वायु के गुणवान रास्तों को जानता है और उन सब चीजों को जानता है जो उस ( वायु ) पर आश्रित है।"
                     *ॠगवेद 1: 25: 9*

                     📗 *कुरआन* 📗
 *व हुवल्लजी अर्सलर्रिया-ह  बुश्रम्-बै-न यदैय् रह्मतिहि*
" और वही है जो अपनी करुणा से पहले शुभ सुचना के रुप में हवाओं को भेजता है। "
                    *कुरआन 25: 48*

                     📔 *वेद* 📔
   *होतारं सत्ययजं रोदस्योरुत्तान हस्ता नमसा विवासेत।*
" पूजनीय, आकाश और पृथ्वी को सत्य के मार्ग से चलाने वाले परमेश्वर से विनम्रता पूर्वक हाथ उपर उठाकर प्रार्थना करो।"
                    *ॠगवेद 6:16:46*

                    📗 *कुरआन* 📗
 *उद्ऊ रब्बकुम् तजरुर् अव्वँ खुफ्यतन् इन्नहू ला युहिब्बुल-मुअ-तदीन*
" तुम अपने पालनहार से विनम्रता पूर्वक चुपके-चुपके प्रार्थना किया करो। निसन्देह  वह सीमा-उल्लंघन करने वालों को पसन्द नही करता।"
                       *कुरआन 7: 55*

         📗📔 *वेद* - *कुरआन*📗📔

                       📔 *वेद* 📔
 *एकं सद्विप्रा बहुधा वदन्त्यग्निं यमं मातरिश्वानमाहुः।*
" वही अग्नि, यम और मातरिश्वा है, उस एक ब्रह्म को विद्वान अनेक नामोंसे पुकारते हैं।"
                   *ॠगवेद 1: 164: 46*

                     📗 *कुरआन* 📗
 *कुलिद्उल्ला-ह अविद्उर्रह् मा-न अय्यम्-मा तद्ऊ फ-लहुल् अस्मा-उल्-हुस्ना*
" कह दो, की तुम अल्लाह कह कर पुकारो या रहमान कह कर पुकारो, उसे जो भी कह कर पुकारो, उसके सभी अच्छे नाम हैं।"
                     *कुरआन 17: 110*

                     📔 *वेद* 📔
 *तस्य ते भक्तिवांसः स्याम*
" हे प्रभु! हम तेरे ही भक्त हो।"
                   *अथर्ववेद 6: 79: 3*

                 📗 *कुरआन* 📗
 *इय्या-क नअबूदु व इय्या-क नस्त्ईन*
" हे रब! हम तेरी ही बन्दगी करते है और तुझ से ही मदद माँगते है।"
                   *कुरआन 1: 4*

                      📔 *वेद* 📔
 *तमेव विद्वान नबिभाय मृत्योः*
" तुम्ही को जान लेने पर मनुष्य मृत्यु से नही डरता।"
                   *अथर्ववेद 10: 8: 44*

                   📗 *कुरआन* 📗
 *कुल इन् कानत् लकुमुद्दारुल-आखिरतु इन्दल्लाहि खालि-स-तम्-मिन्द्निन्नसि फ-तमन्नवुल्-मौ-त इन् कुन्तुम् सादिकीन*
" कहो! अल्लाह के यहाँ  यदि सचमुच परलोक का घर, सारे लोगों को छोडकर केवल तुम्हारे ही लिए है तो मृत्यु की कामना करो, यदि तुम सच्चे हो।"
                    *कुरआन 2: 94*

                     📔 *वेद* 📔
 *सं श्रुतेन गमेमहि*
" हम ब्रह्मज्ञान से युक्त हों।"
                    *अथर्ववेद 1: 1: 4*

                    📗 *कुरआन* 📗
 *व कुल् रब्बि जिद्नी इल्मा*
" कहो हे रब मेरे ज्ञान में वृद्धि कर।"
                     *कुरआन 20: 114*

       📔📗 *वेद* - *कुरआन*📔📗
                  📔 *वेद* 📔
 *जनं मनुजातं*
" सब मनु की संतान है।"
                   *ॠगवेद 1: 45: 1*

                 📗 *कुरआन* 📗
 *इन्ना ख-लक्नाकुम् मिन् ज-करिँव्-व उन्सा*
"हमने तुम सब को एक पुरुष और स्त्री से पैदा किया।"
                   *कुरआन 49: 13*

                 📔 *वेद* 📔
 *सुगा ॠतस्य पन्थाः*
" सत्य का मार्ग सरल है।"
                   *ॠगवेद 8: 31: 13*

                   📗 *कुरआन* 📗
 *मा अन्जल्ना अलैकल्- कुर् आ-न लितश्का*
" हमने कुरआन तुम्हे कठिनाई में डालने के लिए नही उतारा।"
                   *कुरआन 20:2*

                     📔 *वेद* 📔   
*ॠतस्य पन्था न तरन्ति दुष्कृतः*
" सत्य के मार्ग को दुष्कर्मी पार नही कर पाते।"
                    *ॠगवेद 9: 73: 6*

                    📗 *कुरआन* 📗 
 *व इँय्यरौ सबीलुर्रश्दि ला यत्तखिजूहु सबीला*
" यदि वे (दुष्कर्मी) सद् मार्ग दे भी ले तो भी वे उसे मार्ग  नही बनाएंगे।"
                       *कुरआन 7: 146*

        📗📔 *वेद* - *कुरआन* 📗📔
                    📔 *वेद* 📔
 *न ॠते श्रान्तस्य सख्याय देवाः*
" बिना परिश्रम किए देवों की मैत्री नही मिलती।"
                   *ॠगवेद 4: 33: 11*

                     📗 *कुरआन* 📗
 *अम् हसिब्तुम् अन् तद्खुलुल्जन्न- त व लम्मा यमिल्लाहुल्लजी- न जाहदू मिन्कुम व यअ- लमस्साबिरीन*
" क्या तुमने यह समझ रखा है कि स्वर्ग में प्रवेश करोंगे जब की अल्लाह ने अभी उन्हे तुम में से विभाजित ही नही किया जिन्होने परिश्रम किया और जो अडिग रहनेवाले हैं।"
                         *कुरआन 3: 142*

                       📔 *वेद* 📔
 *शंनः कुरु प्रजाभ्यः*
" प्रभु! हमारी संतान का कल्याण करो।"
                     *यजुर्वेद 36: 22*

                       📗 *कुरआन* 📗
 *व अस्लिह ली फी जुर्रियती*
" हे प्रभु! मेरे लिए मेरी सन्तान में भलाई रख दे।"
                     *कुरआन 46: 15*

                      📔 *वेद* 📔
 *त्वंनो अन्तम उत त्राता*
" तु हमसे अत्यंत समीप और रक्षक है।"
                      *ॠगवेद 5: 24: 1*

                     📗 *कुरआन* 📗
 *व नह् नु अक्रबु इलैहि मिन् हब्लिल्-वरीद*
" और हम तो उस (इन्सान) की श्वास नली से भी अधिक उसके निकट हैं।"
                     *कुरआन 50: 16*


        ✏️ *वेद* *व* *कुरआन* 🖍️

               📔📔 *वेद* 📔📔
 *देवा*यद्यज्ञं तन्वाना*अबध्नन्** *पुरुषं* *पशुम्* ।* 
" प्रजापति के प्राण रुप देवताओंने पुरुष को मानसिक यज्ञ के अनुष्ठान कालमे वरण किया।"
                 ( *ॠगवेद* 10: 90 : 15 )

                  📗 *कुरआन* 📗
   *व* *इज* *कुल्ना* *लिल्* - *मलाइकतिस्जुदु* *लिआ*- *द* - *म*
" याद रहे की जब हमने फरिश्तोसे ( आत्मा लोक मे ) कहा की (प्रथम पुरुष) आदम के आगे झुक जाओ।
                 (  **कुरआन**2:84) 

                   📔📔वेद 📔📔
 *बृहस्पते* *प्रथम* *वाचो* *अग्रंयत्प्रैरत* *नामधेयं* *दधाना* :  
"बृहस्पति ने सबसे पहले पदार्थो का नामकरण किया, जो प्रेरणा करते हैं वह समस्त वाणियों का अग्र है।
                ( *ऋग्वेद* 10:71:1 )

                 📗📗 *कुरआन* 📗📗
 *व* *अल्ल* - *म* *आदमल्* *अस्मा* - *अ* *कुल्लहा* 
" और परमेश्वर ने (सबसे पहले आत्मा लोक में पहले मनुष्य ) आदम को सभी नामों का ज्ञान दिया।
                       (  **कुरआन**2:31)

           🌲🌲 *वेद*- *कुरआन*🌲🌲

                     📔📔 *वेद*📔📔

 *द्विता* *विविव्रे* *सनजा* *सनीडे* *अयास्यः* *स्तवमानेभिरकैः* ।
 *भगो* न *मेने* *परमे* *व्योमन्नधारयद्* *रोदसी* *सुदंसाः*।।
 " ऋषियों द्वारा स्तुत्य परमेश्वर ने परस्पर जुडे हुए प्राचीन आकाश और पृथ्वी को पृथक किया। फिर उत्तम कर्म वाले ने सुर्य के समान उन दोनोंको स्थित किया । "
          ( *ऋग्वेद* 1:62:7)

           📗📗कुरआन 📗📗

 *अ* - *वलम्* *य* - *रल्लजी* - *न* *क* - *फरु* *अन्नस्समावाति* *वल्अर्*-*ज* *का* - *नता* *र*- *त*- *कन्* *फ* - *फतक्नाहुमा*।
" क्या इन्कार करनेवालोंने नहीं देख लिया की यह आकाश और धरती पहले परस्पर जुडे हुए थे फिर हमने उन्हे पृथक-पृथक किया। "
       ( *कुरआन* 21:30)

           📔 *वेद*- *कुरआन*📗

                    📔 *वेद* 📔
 *अन्वार* *भेथामनुसरं* *भेथामेतं* *लोकं* श्र *द्* *दधानाः* *सचन्ते* ।
" श्रध्दा वाले लोग परलोक का ध्यान रखते हुए सत्कर्मों को निरन्तर मिलकर करते रहें।"
              *अथर्ववेद* 6: 122: 3 

                📗 *कुरआन* 📗
 *अ* - *रजीतुम्*  *बिल* - *हयातिद्* *दुन्या* *मिनल्* *आखिरति* *फ* - *मा* *मताउल* - *हयातिद्* *दुन्या* *फिल्आखिरति इल्ला कलील।* 
" क्या तुम इस  लोक के जीवन हि पर राजी  हो गए हो ? इस लोक की सामग्री परलोक की अपेक्षा में बहुत थोडी है ।"
             *कुरआन* 9 : 38 

                      📔 *वेद* 📔
 *यत्रानन्दाश्* *च* *मोदाश्* *च* *मुदः* *प्रमुद* *आसते* ।  *कामस्य* *यत्राप्ताः* *कामास्तत्र* *माममृत* *कुधी* •••॥
"  आनन्द और स्नेह जहाँ वर्तमान रहते है जहां सभी कामनाएं इच्छा होते ही पुर्ण हो जाती है उसी अमर लोक में मुझे निवास दो " 
          ( *ॠगवेद* 9 : 113: 11 )

                    📗 *कुरआन* 📗
 *वफीहा* *मा* *तश्तहीहिल्* - *अन्फुसु* *व* *त* - *लज्* *जुल्* - *अअ* - *युनु* *व* *अन्तुम* *फीहा* *खालिदून ।*
" स्वर्ग मे हर वह चीज होंगी आत्माएं जिसे चाहे आंखे जिससे लज्जत पाएं । और तुम उसमे सदैव रहोंगे ।
                    (  *कुरआन*  43:71  )

            📔 *वेद* - *कुरआन* 📗

                     📔 *वेद* 📔
 *इन्द्र* *क्रतुं* *न* *आ* *भर*
" हे परमेश्वर तु हमे तत्वदर्शिता से भर दे। "
 
              *अथर्ववेद* 18: 3: 67

                    📗 *कुरआन* 📗
 *युअतिल्* - *हिक्म* - *त* *मँय्यशा* -  उ
" वह ईश्वर जिसे चाहता है तत्वदर्शिता प्रदान करता है । "
                   *कुरआन* 2: 269 
  
                     📔  *वेद*  📔
 *मही* *देवस्य* *सवितुः* *परिष्टुतिः*
इस संसार के बनाने वाले  के लिए स्तुति है
                   *ॠगवेद* 5: 81: 1 

                    📗 *कुरआन*  📗
 *अल्* *हम्दु* *लिल्लाहि* *रब्बिल* *आलमीन*
" स्तुतियोंका पात्र अल्लाह ही है, जो सब संसारोंका प्रभु है । "
                   *कुरआन* 1 : 1 

                     📒 *वेद* 📒
 *वसुर्दयामान*
" जो देनेवाला और दयावान है ।"
                     *ॠगवेद* 3: 34 : 1

                     📗 *कुरआन* 📗
 *अर्* *रहमा* *निर्* *रहीम*
" जो असीम कृपावान और दयावान है । "
                       *कुरआन* 1: 2

       *📔📔वेद - कुरआन 📗📗*

                    📔 *वेद* 📔
*नय सुपथा राये अस्मान*
 " हमको हमारे कल्याणके लीए सद् मार्ग पर ले चल।
                *यजुर्वेद ,  40:16*

                  📗 *कुरआन* 📗
 *इह् दिनस्- सिरातल्मुस्तकीम*
 " हे परमेश्वर हमारा सीधे रास्तेकी ओर मार्गदर्शन कर।

                    📔 *वेद* 📔
 *महो दिवः पृथिव्याश्च सम्राट*
 " वह परमेश्वर महान आकाश लोकों व पृथ्वी का सम्राट है।"
  *नः भवत्विद्रं ऊती*
 " वह ईश्वर हमारी सहायता करे।
                 *ॠगवेद 1: 100: 1*

                   📗 *कुरआन* 📗
*अलम् तअ - लम् अन्नल्ला- ह लहूमुल्कुस्समावाति वल्अर्जि व मा लकुम् मिन् दुनिल्लाहि मिव्वलिय्यिँव -व ला नसीर*
 " क्या तुम नही जानते की आकाशों और पृथ्वी का साम्राज्य अल्लाह ही के लीए है। और अल्लाह के सिवाय तुम्हारा कोई मित्र और सहायक नही।"
                       *कुरआन 2: 107*
 
                      📔 *वेद* 📔 
 *अहोरात्राणि विदघद् विश्वस्य मिषतो वशी*
 " समस्त सृष्टि पर सामर्थ्य रखनेवाले स्वामी ने दिन और रात का भेद स्थापित किया।
                       *ॠगवेद 10: 190: 2*

                  📗 *कुरआन* 📗
 *अलम् त- र अन्नल्ला-ह यूलिजुल्लै-ल फिन्नहारि व यूलिजुन्नहा-र फिल्लैलि व सख्खरश्शम्-स वल्- क-म-र कुल्लुँय्यज्री इला अ-ज-लिम्मुसम्मा*
 " क्या तुम नही की देखते की अल्लाह रात को दिन मे प्रविष्ट करता है और  उस ने सुर्य और चन्द्रमा को वश मे कर रखा है। प्रत्येक एक निर्धारित अवधि तक चलेंगा।"
                         *कुरआन* *31:29*

            *📗📔 वेद----कुरआन 📗📔*

                     📔 *वेद* 📔
 *अवशसा निःशसा यत् पराशसोपारिम जाग्रतो यत् स्वपन्तः।*
" जो पाप, विश्वासघात, घृणा या अपवाद से और जो पाप जागते या सोते हुए हमने किए है, हे परमेश्वर उन सभी अप्रिय दुष्कर्मों को हम से दूर कर दे।"
                    *अथर्ववेद 6: 45: 2*

                     *📗 कुरआन 📗*
 *रब्बना फ़गफ़िर् लना ज़ुनूबना व कफ़्फ़िर अन्ना सय्यिआतिना व तवफ़्फ़ना म-अल्-अबरार*
" हे हमारे प्रभु, जो पाप हमसे हुए है उन्हें क्षमा कर दे, जो दोष हम में है उन्हें दूर कर दे और हमें भले लोगों के साथ उठा।"
                      *कुरआन 3: 193*

      *📗📔 वेद---- कुरआन 📗📔*

                  📔 *वेद* 📔
 *यस्येमे हिमवन्तो महित्वा यस्य समुद्रं रसया सहाहुं:।  यस्येमा: प्रदिशो यस्य बाहु कस्मै देवाय हविषा विधेम।।*
" हिम से ढके पर्वत जिस की महिमा कहतें हैं, नदियों सहित समुद्र जिस की महिमा कहते हैं, समस्त दिशाएं विसकी भुजाएं (समान) हैं (उसके अतिरिक्त) हम किस देव की भक्ति पूर्वक उपासना करें।"
                  *ॠगवेद 10: 121: 4*

                   📗 *कुरआन* 📗
 *अम्मन् ज-अलल् अर्-ज़ क़रारँव्-व ज-अ-ल ख़िला-लहा अन्हारँव्-व-ज-अ-ल लहा रवासि-य व ज-अ-ल बैनल्-बहरैनि हाजिज़न् अ इलाहूम् -मअल्लाहि बल् अक्सरुहुम ला यअ-लमून*
" वह कौन है जिस ने धरती को (मानव का) ठिकाना बनाया और उस में नदियाँ बहाईं। और उस में पर्वत के खूंटे गाडे और दो समुद्रों के बीच (अदृष्य) आवरण बनाए। क्या एक अल्लाह के साथ कोई अन्य पूज्य भी (इन कर्मों मे उसका साझी) है? किन्तु फिर भी अधिकतर लोग अज्ञानी (बने हुए) हैं।
                    *कुरआन 27: 61*

                       📔 *वेद* 📔
 *यो देवष्वधि देव एक आसीत्।*
" जे समस्त देवों का एक देव है।"
                      *ॠगवेद 10: 121: 8*

                      📗 *कुरआन* 📗
 *उलाइकल्लजी-न यद्ऊ-न यब्तगू-न इला रब्बिहिमुल-वसी-ल-त।*
" जिन (देवों) का यह लोग आव्हान करते है वे तो स्वयं अपने प्रभु की ओर माध्यम की तलाश में हैं।"
                      *कुरआन 17: 57*

                      📔 *वेद* 📔
 *नाब्रह्मा यज्ञ ॠधग्जोषति त्वे।*
" ब्रह्म तत्व से हीन यज्ञ तुझे ( हे परमेश्वर) तनिक भी नहीं भाता है।"
                      *ॠगवेद 10: 105: 8*

                     📗 *कुरआन* 📗
 *फ़वैलुल्- लिल्मुसल्ली-नल्लज़ी-न हुम् अन् सलातिहिम् साहून् अल्लज़ी-न हुम् युराऊन*
" उन नमाज़ियों पर जो अपनी नमाज़ों की ओर से भुल में पडें हैं। वे जो (नमाज के नाम पर) मात्र दिखलावा करतें हैं।"
                   *कुरआन 107: 4, 5, 6*

          💫💫 *वेद* - *कुरआन* 💫💫
 
             📔📔    *वेद*📔📔
 *वेदाहमेतं* *पुरुषं **महान्तमादित्यवर्ण* *तमसः* *परस्तात्* ।
मै उस महानतम पुरुष को जानता हु (जो) सूर्य रुप दीप्तिमान है, अंधकार को परास्त करनेवाला है।
                    *या* 
अहमद वेद (ब्रह्मज्ञान) है, महानतम पुरुष है,सुर्यरुप दीप्तिमान,अंधकार को परास्त करनेवाला है।
      *यजुर्वेद* *31* : *18* 

          📒📒 *कुरआन*  📒📒
 *या* *अय्युहन्नबियु* *इन्ना* *अर्सल्ना* - *क* *शाहिदँव* - *व* *मुबश्शिरँव्* - *व***नजीरा* व *दाईयन्**इलल्लाहि**बिइज्निहि* व *सिराजम्*- *मुनीरा*।
हे ईशदूत हमने तुम्हे गवाही देनेवाला और शुभ सुचना देनेवाला और सचेत करनेवाला और अल्लाह के हुक्मसे उसकी ओर बुलानेवाला दीप्तिमान सुर्यरुप बनाकर भेजा है।
      *कुरआन* 33:45:46

 *व* *युखरिजूहुम्* *मिनज्जुलुमाति* *इलन्नूरि* *बिइज्निही* 
वह अल्लाह के हुक्मसे उन्हे अन्धेंरोसे निकालकर उजाले की ओर लाता है।
          *कुरआन* 5:16

       💫💫 वेद 💫💫
(1) यस्तन्न वेद किम्रचा करिष्यति।
" जो उस ब्रम्ह को नही जानता वह वेद से क्या करेंगा।
    ( ॠगवेद 1:164:39)

            📔📔कुरआन 📔📔
(1) युजिल्लु बिही कसीरव्- व यह् दी बिही कसीरा व मा युजिल्लु बिही इल्लल-फासिकीन ।
" वह अल्लाह इसी (कुरआन) द्वारा अनेकों को पथभ्रष्ट पाता है और इससे वह अनेकों को मार्गदर्शन करता है और इससे पथभ्रष्ट वह केवल उन्हीको पाता है जो अवज्ञाकारी है।
    ( कुरआन 2:26)

           💫वेद💫
(02) समानं मन्त्रमभि मन्त्रये वः
"" मै सबको समान मन्त्र से अभिमन्त्रित करता हु।
  (ॠगवेद 10:191:3)

            📔कुरआन 📔
कुल याअहलल् किताबि तआलौ इलाकलिमतिन् सवा -इम्-बैनना व बैनकुम्।
  " कहो की हे पूर्व ग्रन्थवालो ! हमारे और तुम्हारे बीच जो समान मन्त्र है, उसकी ओर आओ।
  ( कुरआन 3:64 )

                💫 वेद 💫
(03) वयं देवानां सुमतौ स्याम।
" हम सत् पुरुषों की शुभ मति मे रहें।
      (अथर्ववेद 6:47:2)

                    📔कुरआन 📔
(03) व अदखिल्नी बिरह्मति- क फी इबादिकस्-सालिहीन।
  " प्रभोवर! अपनी कृपा से मुझे अपने सत् पुरुषों मे दाखिल कर"
   ( कुरआन। 27:19)

            💫सनातन धर्म 💫

 हम सब जानते है की इस समग्र ब्रम्हाण्ड कि रचना के पीछे परम सर्वशक्तिमान परब्रह्म, अल्लाह या गाॅड की योजना कार्यरत है। ब्रम्हाण्ड मे एक संवादिता या हारमोनी नजर आती है तथा उसी परम शक्ती- अल्लाह - परब्रह्म के जो सनातन - शास्वत नियम है उन्हीं से यह ब्रम्हाण्ड संचालित हो रहा है।हमे भी अपने जीवनमे संवादिता -हारमोनी लानी हो और इस विश्व समाज को एक विश्व कुटुंब बनाना हो तो उसी एक अल्लाह -परब्रह्म के जो सनातन शास्वत नियम , हमारे मूल धर्म ग्रंथोंमे है , उनका निष्पक्ष भाव से न केवल अध्ययन करना होगा बल्कि उन्हें अपने विचार , वाणी और व्यवहार मे भी लाना होंगा।
       इस्लाम का यह दावा है की वह सनातन धर्म ( अरबी भाषामे दीन-ए-कय्यिम ) है। इस्लामी परंपरा के अनुसार प्रथम ईश-दूत ह॰ आदम भारत मे उतारे गये। जाहिर है की ईश धर्म ग्रंथोंकी शृंखला का पहला संस्करण भी इसी देशमे आया जहासे ईशदूतोंकी (पैगंबरोंकी) श्रृंखला का अन्तिम संस्करण कुरआन यह बताता है की :
 ⛺ " नि:सन्देह यही ( कुरआन) आदि ग्रंथों (वेदों) मे (भी) है। " ⛺

               📔सनातन धर्म 📔    

📚 " निसन्देह यही ( कुरआन) आदि ग्रंथों ( वेदों ) मे (भी ) है। "
* ( कुरआन 26: 196)

 विश्व के इन दो महान धर्मों सनातन धर्म और इस्लाम का तुलनात्मक अध्ययन कुरआन के इस दावे को अक्षरशः सिध्द करता नजर आता है। प्रस्तुत लेखिका मे ईश-वाणी के दो पवित्र संस्करणो वेद और कुरआन की समानताओं की एक झलक दर्शाई गयी है। आशा है, धार्मिक उन्माद के इस समय मे यह प्रयास शान्ती पैगाम की एक ज्योती जलाएगा। हमे विश्वास है की अज्ञात समय पूर्व मानवजाति को मिलनेवाली वेदवाणी और उसके एक लम्बे अन्तराल के बाद अवतरित होनेवाले कुरॢआन मे ये अद् भूत समानताएं किसी भी सुलझे हुए मस्तिष्क को यह सोचनेपर मजबूर कर देंगी की इन दोनों वाणियों का मुख्य स्त्रोत एक है-- एक अल्लाह -परब्रह्म

(From the book 'Shanti Paigham')
 
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वेदो की कुछ मौलिक शिक्षायें..

1. हे भगवन ! हम सत्य का पालन करे, झूठ के पास भी न जावे। (ऋग्वेद ८।६२।१२)
2. उत्तम मति, उत्तम कृति और उत्तम उक्ति ( वचन) का सदा मानवसमाज में स्थान होना चाहिए। (ऋग्वेद १०।१९१।१-४)
3. सभा (राज्यसभा)और समिति (राजा को सलाह देने वाली समिति )  प्रजापति (ईश्वर) की पुत्री के सामान हैं। इनमे बैठने पर सत्य और उचित ही सम्मति देनी चाहिए। (अथर्ववेद ७।१२।१)
4. ऋत (शाश्वत सत्य) की प्रकाश रश्मियाँ पूर्ण हैं। ऋत का ज्ञान बुरे कर्मो से बचाता है। (ऋग्वेद ४।२३।८)
5. इन्द्रियां परमेश्वर को नहीं प्राप्त कर सकती हैं। (यजुर्वेद  ४०।४)
6. प्रजा के पालक परमेश्वर ने सत्य और असत्य के स्वरुप का भेद कर सत्य में श्रद्धा और असत्य में अश्रद्धा धारण करने का उपदेश किया है। (यजुर्वेद  १९।७७)
7. अपने ज्ञान और कर्म से मनुष्य परमेश्वर का भक्त बनता है और इन्ही से दुर्गणों से भी दूर रहता है। (ऋग्वेद ५।४५।११)
8. कुटिल कर्म अथवा उलटे कर्म का नाम ही पाप है। (ऋग्वेद १।१८९।१)
9. हमारा मन सदा उत्तम विचारों वाला ही हो। (यजुर्वेद ३४।१)
10. अतपस्वी मनुष्य कच्ची बुद्धि का होता है अतः वह उस परमेश्वर को नहीं प्राप्त कर सकता है। (ऋग्वेद ९।८३।१)
11. यह शरीर अंत में भस्म हो जाने वाला है। हे जीवात्मन ! तू अपना, अपने कर्म और ओ३म का स्मरण कर। (यजुर्वेद  ४०।१५)
12. सत्य, बृहत (बड़े उद्देश्य), ऋत (शाश्वत सत्य), उग्र (तेजस्विता अधृष्यता), तपस ( उद्देश्य सहित परिश्रम) , दीक्षा (महान कार्य का संकल्प), ब्रह्म (वेद ज्ञान) और यज्ञ ( विद्वानो का सम्मान व संगति) ये सब  पृथ्वी को (सामाजिक सुख शांति को) धारण करते हैं।
13. मनुष्य बनो और उत्तम संतानो को उत्पन्न करो। (ऋग्वेद १०।११४।१०)
14. बहुत संतानो वाला दुःख को प्राप्त होता है। (ऋग्वेद १।१६४।३२)
15. आत्मघाती अंधकारमय लोको को प्राप्त होता है। (यजु० ४०।३)
16. सब दिशाए हमारे लिए मित्रवत होवे। (अथर्ववेद १९।५।६)
17. ब्रह्मचर्य और तप से विद्वान लोग अकालमृत्यु को पार करते हैं।
18. अपने कानो से हम सदा अच्छी वस्तु सुने, आँखों से अच्छी ही वस्तु को देखे, सदा हष्ट पुष्ट शरीर से स्तुति करे और समस्त आयु उत्तम कर्म के लिए ही हो। (यजुर्वेद २५।२१)
19. उत्तम कर्म करने वालो का किया हुआ उत्तम कर्म हमारे लिए कल्याणकारी हो। (ऋ० ७।९५।४)
 
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वर्क दिवाली कार्ड में वैदिक मंत्र में 'उस महानतम पुरुष' और कुरानी आयत में 'वह ईश्वर के आदेश से' का उल्लेख?

वर्क दिवाली कार्ड पर वेदों का मंत्र है ईश्वर के बारे में नहीं है बल्कि परम आत्मा के बारे में हैं और कुरान की आयत पैगंबर के बारे में है. ये बेसिक चीज़ नहीं है बहुत गहरी है, 99% लोग फेल हो जाएंगे इसे बताने या समझने में  क्योंकि इसके बारे में आमतौर पर कंही बताया नहीं जाता. मंत्र में लिखा है 'उस महानतम पुरुष' और आयत में लिखा है 'वह ईश्वर के आदेश से'। असल में दोनों आयतें एक ही को इशारा कर रही हैं. क्योंकि यूजर्वेद में इस अध्याय (जो कि पुरुष और उसकी विशेषताओं के बारे में है) में पहले परम पुरूष का ज़िक्र है (जो कि निराकार परमेश्वर है, अधिकतर वेद विद्वान या भाष्यकार परम पुरुष से ईश्वर ही मुराद लेते हैं।), फिर आगे मंत्र बताते हैं कि परम पुरूष से विराट पुरूष उपजा (जो परमात्मा/तखलीक़े अव्वल है) और जो ईश्वर का भौतिक स्वरूप था (वैदिक धर्मानुसार) और इसी से वर्ण (आगे अध्याय में उल्लेख), वेद, सृष्टि आदि उत्पन्न हुए। इस अध्याय में क्योंकि दोनों पुरुषों का ज़िक्र हैं इसलिए कुछ भाष्यकारों ने थोड़ा मिक्स्ड अप कर दिया है। हालांकि पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य अपने वेदार्थ में दोनों को स्पष्ट रूप से अलग लेके चलते हैं और इस मंत्र में बताते हैं कि इस विराट पुरुष (परम आत्मा/तखलीक़े अव्वल - परमात्मा का शाब्दिक अर्थ ईश्वर नहीं ही बल्की सृष्टि की प्रथम आत्मा है यानी ईश्वर ने जो सबसे पहले रचना बनाई। तखलीके अव्वल ईश्वर नहीं है. परम पुरूष ईश्वर है।) को जानने से मोक्ष का मार्ग मिलता है या प्राप्ति होती है। जबकि दूसरे सनातनी विद्वानों ने परम और विराट दोनों को एक ही मान लिया है, थोड़े से अंतर के साथ। स्वामी दयानंद ने भी यही किया है और विराट, परम आदि शब्द को केवल विशेषण माना है (स्वामी जी वेदों में आये हर पुरुष शब्द से ईश्वर अर्थ लेते हैं जैसे पुरुषम -स्वस्वरुप से सर्वत्र पूर्ण परमात्मा)। हालांकि कार्ड पर लिखे मंत्र, आयतअनुसार, तखलीक़े अव्वल और नबी के बीच का संबंध समझाना एक अलग टास्क है। यानी क़ुरान की आयत नबी के बारे में है। और वेद का मंत्र विराट पुरुष यानी तखलीके अव्वल या रूह ए अव्वल के बारे में जिसे आम तौर पर मुहम्मद सल्ल. का रूहानी वजूद यानि हक़ीक़ते अहमदी बताया जाता है। इस मंत्र में उसी विराट पुरुष को महानतम पुरुष भी पुकारा गया है. वैसे पुरुष शब्द उषा से नहीं बना है जैसा आम तौर आज पर माना जाता है. य्कोंकी वेदों के शब्दार्थ या व्युत्पत्ति के लिए निरुक्त और निघंटु जैसे अति प्राचीन शब्दकोश ग्रंथों की ओर जाया जाता है और उनमें (वेद के) पुरुष की परिभाषा अलग है. ये मंत्र राम के बारे में नहीं है क्योंकि  राम का ज़िक्र वेदो नहीं है और ना हो सकता है, वो बाद के हैं. कहने को ये बात (राम जी के बारे में मंत्र) आम हिंदू भाईओं से कहीं जा सकती है, उन्हें अच्छा भी लगेगा, क्योंकि उन्हें इतना ज्ञान नहीं है. मगर कोई ज्ञानी मिल गया तो बहस कर सकता है, फिर बात को बदलना या घुमाना पड़ेगा. इसलिए इसे वेदों में महापुरुषों के गुणों के ज़िक्र से जोड़कर समझाना बेहतर है और फिर कहना चाहिए जिनमें से रामजी थे.
 

1 comment:

  1. भाईसाहब मुझे हिन्दू धर्म से कोई दुश्मनी नहीं है। बल्कि मैं तो मानता हूं कि हिन्दू भाइयों से अधिक आज तक कोई क़ौम सहिष्णु नहीं रही है। पर आज शायद उनमें में दूसरे धर्म वालो की तरह कट्टरता बढ़ रही है। कट्टरता किसी भी धर्मवालों की हो निंदनीय है। हिन्दू धर्म किसी धर्म का नाम नहीं है। वास्तविक धर्म सनातन धर्म है और मैं स्वयं सनातन धर्म का अनुयायी हूँ। वह सनातन धर्म जो मानवता के आरंभ से चालू है। ईश्वर ने एक ही धर्म और धर्म ग्रंथ लोगों को अलग अलग समय और अलग अलग स्थानों पर दिया। लोग अपने अपने फायदों के लिए धर्म और धार्मिक ग्रंथो में मिलावट करते गए जिसके कारण इतने सारे धर्म दिखाई देते है। हमें लोगो की इस मिलावट से दूर करना है और उन्हें समझना है कि ये मनुष्य का हस्तक्षेप है। हमे सभी को वापिस सनातन धर्म पर लाना है अर्थात केवेल एक नीरकार ईश्वर की उपासना करनी है, उसके भेजे महापुरुषों के दिखाए मार्ग पर चलना है और अपने कर्म सही करके स्वर में जाना है। जब सभी लोग ईश्वर के सत्य धर्म पर आ जायँगे तो। संसार मे सतयुग आ जायेगा और भारत दुबारा से विश्वगरू बन जाएगा।

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