Friday, 5 June 2020

हिन्दू धर्म के त्रिदेव, भगवान, धर्मपुरुष आदि। राम-अब्राहम व कृष्ण-मूसा

 

Trimurti, Shiva/Rudra, Krishna, Rama, Sita

त्रिमूति

विभिन्न पुराणों में शिव, सदाशिव, शंकर आदि के जन्म की विभिन्न कथाओं के कारण हिन्दुओ में इनके जन्म पर भ्रम है। आमतौर पर मोटे मोटे तौर पर ये समझ आता है कि:-

शिव निराकर ईश्वर है। सदाशिव ही परम ब्रह्म है जिन्हें ईश्वर कहा जाता है जो निराकर है। सदाशिव ईश्वर महा आत्मा है। सदाशिव गुणातीत माने गए हैं।

सदाशिव ने शक्ति को उत्पन्न किया। शिवपुराण के अनुसार सदाशिव और पराशक्ति अम्बिक से ही शंकर, विष्णु और अंत में ब्रह्मा का जन्म हुआ है। इसी शक्ति से ये तीनों प्रकट हुए है। वह शक्ति ही कालरूप सदाशिव की पत्नी दुर्गा है। इस शक्ति को ही प्रकृति, सर्वेश्वरी, अष्टांगदेवी, त्रिदेवजननी, जगतजननी भी कहते है। ये पार्वती और सती नहीं है। इसस शक्ति ने ही लक्ष्मी, सावित्री, पार्वती के रूप में जन्म लिया।

शंकर या महेश या महादेव पार्वती के पति है। ब्रह्मा, विष्णु और रुद्र इन देवताओं में गुण हैं। सदाशिव कहते है कि रुद्र और महेश मेरे समान ही है।

ब्रह्म से सदाशिव उत्पन्न हुए और सदाशिव से दुर्गा। सदाशिव और दुर्गा से विष्णु, ब्रह्मा, रुद्र और महेशवर उत्पन्न हुए। ब्रह्मा और विष्णु की लड़ाई पर सदाशिव काल ब्रह्म ने कहा कि तुम 3 मेरे ही अंश हो।

एक अन्य पुराण में ऋषिओं द्वारा प्रश्न करने पर शंकर या महादेव (या शिव) ने बताया कि उनके पिता ब्रह्मा है और दादा विष्णु और परदादा स्वयं शिव है।

देवीमहापुराण नारदजी ने पिता ब्रह्मा से पूछा कि आप 3 में से सृष्टिकर्ता कौन है और आपके माता पिता कौन है। उन्होंने कहा देवी दुर्गा और शिव स्वरूप ब्रह्मा ने 3 को जन्म दिया।

शिवपुराण के अनुसार ब्रह्माजी अपने पुत्र नारदजी से कहते हैं कि विष्णु को उत्पन्न करने के बाद सदाशिव और शक्ति ने मुझे उत्पन्न किया और विष्णु के नाभि कमल में डाल दिया। इस प्रकार उस कमल से पुत्र के रूप में मेरा जन्म हुआ। विष्णु ने स्वयं को ब्रह्मा का पिता कहा है क्योंकि विष्णु की नाभि से ब्रह्मा का जन्म हुआ था।

जंहा शंकर का जन्म हुआ उसे शिवलोक या काशी कहते है जो मोक्ष का स्थान है।
काल रूपी सदाशिव कहते हैं कि सर्वप्रथम मेरे मुख से ओंकार अर्थात 'ॐ' प्रकट हुआ। ओंकार वाचक है, मैं वाच्य हूं और यह मंत्र मेरा स्वरूप ही है।

ये बात तो सत्य है कि त्रिमूति में मुख्यता शिव को ही सबसे पहला और बड़ा माना जाता है। पर शिवपुराण के अनुसार, शिव को स्वयंभू माना गया है जबकि विष्णुपुराण के अनुसार विष्णु स्वयंभू हैं. शिवपुराण के अनुसार, जब शिव अपने टखने पर अमृत मल रहे थे तब उससे विष्णु पैदा हुए जबकि विष्णुपुराण के अनुसार विष्णु के माथे के तेज से शिव उत्पन्न हुए। शायद ये सब विष्णु और शैव संप्रदयाओं के कारण है।


 




Shiva ya Rudra.

All the names of Deities in Vedas are basically the names of the qualities of God because they are also the names of his blessings showered upon humankind like Indra, Surya, Varun etc. But as the qualities' names of God such as Khaliq is kept children's name in Muslims. Similarly, there were persons in Vaidik Period and post to it, whose names were on the names of qualities of God, like Indira etc.

Not Shiva, but Rudra appears in Vedas, as a quality of God which was made a separate Deity with passage of time. In other words, Rudra is a Vedik deity which is an basically an attribute to a part of the trinity power of Almighty God.

Shiva as a personality was a non Aryan. He was a Shudra King. Later on when both Arya and Anarya traditions mixed with each other, Brahmans merged Shiva with Rudra. Basically, he became a Deity in post vedik period. 

A long list of evidence and history is there of being him an Anarya. Unka skin color dark hai. Unki body par Hiran ki khaal hai. Unke gale me Saanp hai. Unka pehla ghar shamshan hai. Saand unki sawari hai. Bhang, Nashe ka sevan unse hi juda hua hai. Ye sab Anaryo ki pehchan thi jaisa granth khete hai. Isi Shiva ko baad me devta bana diya gaya. 

In the past, several Mahapurans were written, almost 6 among them were directly related to the Shiv or his praising.  Jis Shiv par puran likhe gaye hai, aisa lagta hai ki wo bhi sambhavta ek aur vyakti tha jise baad me Shiv as Anarya King aur Rudra as God quality se jod diya gaya.  Because there are also some features and incidents of Shiva in Puranas that are similar to those of Adam.

Rudra ka arth hai dukh door karne wala hai Ya rulane wala. Shiv ka arth hai destroyer ya nash karne wala. Shiv ka arth Sabka Kalyan ya mangal karne wala bhi hota hai. Kuch vidvan kehte hai ki shabd Shiv usi root word se bana hai jisse ishwar bana he yaani Ish ya Ishan jiska matlab hai Shasan karne wala.  Shankar ka matlab hota hai Sada dharm yukt karm karne wala. Brahma matlab sabse bada Sarv janak yani paida kane wala. Vishnu matlab sab jagah vyapak, sarv vyapak.


Kehta hai ki Shiv ka Guru ji ka bhi koi Guru hai. Shiv ko sabse bada bhagwan kehte heh.  Maheshwar, Mahakal, Mahadev etc. He is also called Pashupati. Adhikatar aam log Shiv se upar kisi ko nahi mante.  Trinity me bhi sabse bada Shiv ko batate hai.  लगभग सभी पुराण यही कहते हैं कि ब्रह्मा से पहले सृष्टि मे केवल शिव और विष्णु ही थे! 

Manyata hai ki Shiv ji jis din teesri aankh kholenge, praly aa jayegi. Shivji baithe hue hai Shrishti ka Sanghar karne ke liye hai. Waise sabhi dharam qyamat ke baare me kehte hai aur Science bhi kehti hai ki big bang ka expansion wapis simat jayega ek din.

भगवान शिव का एक परिवार था। पार्वती पत्नी थी और गणपति पुत्र। शिव विष्णु ब्रह्मा सब भगवान मनुष्य थे। सतयुग में शंकर, त्रेता में राम और द्वापर में कृष्ण हुए.

महर्षि कृष्णद्वैपायन व्यास द्वारा केवल महाभारत की रचना हुई। फिर व्यासपीठ की रचना हुई जिसमें पुराण लेखेकों और प्रवचनकर्ताओं को व्यास कहा जाने लगा। यह पीठ आज भी कार्यरत है। 
 
पुराणों में उस समय के महापुरुषों जैसे ब्रह्मा, विष्णु, महेश आदि की कहानियां है। आधुनिक पुराणों में संतोषी पुराण लिखा गया जिसमें संतोषी माता को गणेश की पुत्री बताया गया।


Krishana

Just like Shiv, Krishan was an Anarya King living on the bank of Yamuna with his 10000 followers. He was the biggest enemy of Indra of Vedas and  was against the Aryans domination. It is in Rigved.  

Krishana may be prophet Moses. Lots of similarities are there. It found written that there is an unauthentic Hadith that SAW once said that there was a prophet in India, his color was black and his name was Kahan (that is like Krishan or Kanhiya).

Ram

Two times Name Rama is mentioned in Vedas but both are different personalities as kings and have nothing to do with Shree Ram.  Even some part of Ram's life matches with the Abraham A.S life.  Even some events of Bhakt Prahalad's life are similar to Abraham's which is Holika dahan story.  Moreover, a small part of Ram's story is similar to Prophet Yusuf's story. 

Sita

Sita word is also mentioned in Vedas but as furrowing. Since Princess Sita was found while using furrow in the fields, she was given name Sita. However she was also called Janaki as she was the daughter of Raja Janak and Maithili as she was the princess of Mithila.


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कई बार ऐसा लगता है कि राम-अब्राहम और कृष्ण-मूसा को अगर ऐतिहासिक रूप से एक साबित कर दिया जाए (शक्सियतें एक ही हैं) तो आने वाले वक़्त में दो धर्मों के एक साथ आने या करीब आने का बहुत बड़ा टर्निंग पॉइंट हो सकता है। क्योंकि इतिहासकार, लिंग्विस्टिक्स, एंथ्रोपोलॉजिस्ट, आर्कियोलॉजिस्ट अब बहुत बड़े और न्यूट्रल लेवल पर इन चीज़ों पर काम कर रहे हैं। बस आम मुसलमान और आम हिंदू इन्हें जल्दी से मानने को तैयार नहीं हैं। यहां तक ​​कि सभी इंसानी सभ्यताएं (जिन्होंने अलग-अलग पौराणिक कथाएं और धर्म बनाए) इतिहास में किसी न किसी समय एक-दूसरे से प्रेरित या जुड़ी हुई थीं। भविष्य में बहुत कुछ नया सामने आने वाला है। मैं इन पॉइंट्स पर हमेशा मज़बूत था और सबूतों के साथ ज़्यादा डिटेल में था। मैं 2019 से इस टॉपिक पर पढ़ रहा हूँ और तभी से मुझे यकीन हो गया है। इसीलिए मैं डॉ. झुनझुनवाला और डॉ. जावेद जमील के टच में हूँ, जिन्हें इन सब्जेक्ट पर लिखने वाला पहला माना जाता है। मैंने 2019 में अल्लामा साहब से इस टॉपिक पर समानताओं और डॉ. झुनझुनवाला की किताब के बारे में पूछा था। अल्लामा साहब कई वजहों से इन समानताओं पर ज़्यादा यकीन या पक्ष में नहीं थे। मेरी जानकारी और समझ के हिसाब से, आर्य लोग अब्राहम को जानते थे और उनकी कहानी को बोलकर आगे बढ़ा रहे थे। जब वे भारत आए, तो यह यहाँ भी सदियों तक चलता रहा। इसीलिए अब्राहम और राम की कहानी अलग-अलग वर्जन के साथ चलती रही। बौद्धधर्म में, इसे सबसे पहले बुद्ध के बाद लिखा गया था। फिर वाल्मीकि ने 2000 साल पहले कहानी का अपना पोएटिक वर्जन लिखा। ईसा और शंकराचार्य ऐतिहासिक रूप से एक नहीं हो सकते, टाइमलाइन बहुत दूर है। ईसा और बुद्ध में भी कई समानताएँ हैं जबकि दोनों अलग अलग ऐतिहासिक शक्सियत हैं मगर इससे साफ़ है कि कहानियाँ आपस में मिक्स हो जाती हैं। यही मुसा-कृष्ण की कहानी के साथ भी हुआ है। कृष्ण की कहानी में ग्रीक मान्यताएँ भी मिली-जुली हुई हैं। रामायण और महाभारत में कई चीज़ें ग्रीक माइथोलॉजी से आई हैं। उसकी वजह है, हिंदू मान्यताएँ (रामायण और महाभारत को हज़ारों साल पुराना माना जाता है)। अगर न्यूट्रल इतिहासकार और भाषा विज्ञान के मुताबिक देखें तो रामायण और महाभारत 2000 साल से बहुत अधिक पुरानी नहीं है। जब हम ऐसे चलते हैं तो राम -कृष्ण की कहानियों का समय और सच्चाई साफ़ हो जाती है।
 



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