● हम टायर पंक्चर बनाने वाले है पर तुम तो दक्षिणा और श्राद्ध से मिली भीख पर जीवन भर गुज़ारा करने वाले है। हम तोंद या कर्मकांड की नही बल्कि, मेहनत की कमा कर खाते है।
हम मदरसो से आते है तो तुम भी तो गुरुकुल, आश्रमों, गुफाओं में पढ़ते हो।
हमारे बुर्के वाली है तो तुम्हारे भी ढूंघट- चुन्नी वाली है।
हमारे में 72 फ़िरके है तो तुम्हारे में 4 वर्ण और 5000 जातियां है।
हम छोटे भाई का पजामा और बड़े भाई का कुर्ता वाले है तो तुम भी तो ऊंची लुंगी और छोटी बंडी वाले हो। शिवजी पशु की खाल की छोटी स्कर्ट, हनुमाम कच्चा पहनते है। रामायण महाभारत काल मे ऊपरी अर्धनग्न रहते थे।
हम शरीयत वाले है तो तुम भी तो खाप और मनुस्मृति वाले हो।
हम 72 हूरों के पिछे है तो तुम भी तो 1008 अप्सराओं या हज़ारो अप्सराओं के पीछे हो।
अगर हम अल तक्किया करते है तो आप भी तो आपद्धर्म करते हो।
भावी देवासुर संग्राम ही गज़वा ए हिन्द जैसा है। बल्कि अखंड भारत के लिए पाक से युध्द करके, उसे जितना और गज़वा के हिन्द समान सा लगता है।
नबी य रसूल भी तो युगऋषि के समान है।
शरीयत ही युगधर्म के समान है।
जिज़िया ही धर्मबलि (महाभारत में) के समान है।
● हमारे हलाला है तो तुम्हारे भी 11 नियोग है और उससे संताने होती है।
एक दूसरे की बीवी के साथ रात को "घट कंचुकी (चक्रपूजा)" खेलते हो।
अश्वमेध यज्ञ के पौराणिक संस्करण में अश्व क्या करता था।
हलाला राक्षस विवाह की तरह नहीं है जो मनुस्मृति, बौध्याना सूत्र, धर्म सूत्रों में आया है।
गंधर्भ विवाह प्रेम मिलन बिना वैदिक रूप अग्नि के भी जायज है आज की भाषा में कहें तो live in relationship.
● हम फिदाईन बनाते है तो तुम भी तो विषकन्या बनाते हो। तमिल हिन्दू टाइगर्स ने सबसे पहले आत्मघाती बनाये थे।
हम जिहादी है तो हिन्दू भी तो धर्मरक्षक, गौरक्षक हो।
हम 5 बच्चे वाले है तो तुम 100 पुत्रों वाले है। ऋग्वेद में 10 बच्चे करने को कहा गया है।
हम 4 शादी वाले है तो तुम 100 पटरानी और 16000 गोपियों वाले हो।
हम कटुवे है तो तुम लिंग व योनि पूजक हो
हम मियां है तो तुम भी तो यज्ञमान (जजमान) हो।
अल्लाह अरबी है तो भगवान भी तुड़वा और संस्कारी है।
हम शांतिदूत है तो तुम भी तो सनातन संस्कृति के धर्म देवदूत हो।
क़ुरान आसमानी किताब है तो वेद भी तो डायनासौर से पुराने ग्रन्थ है।
खुजराहों, अजंता, एलेरो, एलिफेंटा, कामसूत्र किस की अश्लीलता है।
हम गंदे होते है तो तुम भी तो नागसाधु, अघोरी होते हो।
हम मांसाहारी होते है तो तुम भी तो मांसाहारी, अघोरी आदमखोर होते है।
जीन्स पहनने से मना करने वाले और वैलेंटाइन पर गुंडे करते हो और अपने फोनों में गदंगी रखते हो।
तलाक़ शब्द संस्कृत में ही नहीं है तभी तो दहेज प्रथा, भ्रूण हत्या, बाल विवाह, सती प्रथा, विधवा विवाह निषेद्ध, नरबलि प्रथा, देवदासी प्रथा, दासी-सेविका प्रथा, मूलाकरम, घटकंचुकी है
● स्त्री को मां मानते है उसी का बलात्कर कर देते है।
नदी को मां कहते है, उसी में गंदगी डाल देते हो।
धरती को मां कहते हो, उसी की छाती पर मूतते और हगते हो।
भारत को मां कहते हो और उसी की ज़मीन अडानी, अम्बानी को बेच देते हो। धरती का ही खनन करते है। भारत की ही कमाई घोटालों में खा जाते हो।
गाय को मां कहते है, उसे ही गौशाला से बेच देते हो, प्लास्टिक खिलाते हो। उसी का दूध बेचते हो।
अपनी बूढ़ी मां को मां नही कहते हो और उसे वृद्धाश्रम में फेंक आते हो।
● पांच पांडवों ने एक द्रौपदी से विवाह किया था। सूर्य की पुत्री से अश्वनी बंधुओ ने विवाह किया।
ब्रह्मा ने अपनी बेटी से विवाह किया था।
यामी ने अपने भाई यम के साथ संभोग किया था।
परशुराम ने अपनी मां का सिर काट दिया था।
शिव ने आने अपने पुत्र का सिर काट दिया था।
शिव आधा नर, आधा नारी बन गए थे।
● अगर मुस्लिम देशों में गैर मुस्लिमों सुरक्षित नहीं तो भारत के सारे हिन्दू बहुल राज्यों में गैर हिन्दुओ का भी जीना दुशवार कर रखा है जैसे यूपी, एमपी, राजस्थान, गुजरात, झारखंड आदि। नेपाल में अल्पसंखयकों का उत्पीड़न होता है। 'कैलासा' में भी यही होगा।
NRC के कागज़ दिखाना ज़रूरी है तो DNA के कागज़ मांग लो, यूरेशिया से आए लोगों से।
मुस्लिम आक्रमणकारी है तो आर्य भी आक्रमणकारी है।
मुग़लों ने मंदिर तोड़े तो सनातनियों ने भी बोद्धविहार, जैनमंदिर तोड़े।
मुसलमान बाहर से आये तो हूण, शक, कुषाण, पार्थियन भी बाहर से आये।
मुसलमानो ने दूसरे देशों पर हमला किया तो चोलो ने भी किया। श्रीलंका, इंडोननेशिया, मलेशिया आदि पर।
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मुस्लिमो ने भारत को तबाह किया तो आर्य आक्रमण , सिंधु सभ्यता विनाश, बौद्ध सभ्यता, ग्रन्थ, विहार नष्ट, शूद्रों पर अत्याचार किसने किया।
मुसलमानों ने युद्ध थोपे तो महाभारत युध्द, रामायण युध्द, सुर असुर युद्ध, देवासुर संग्राम, देवता राक्षस युद्ध, आर्य अनार्य युध्द हज़ारो सालो से, ब्राह्मण शूद्रों में 5000 सालों से युद्ध, वैष्णव और शैव संप्रदायों में युध्द किसने थोपे।
● शम्बूक का सर काटा, एकलव्य से गुरुदक्षिणा में अंगूठा मंगाना।
हमारे यंहा मुश्रिक शब्द है तो तुम्हारे यंहा भी लोगों को अनार्य कहकर, दास, दस्यु कहके दुत्कारने लगे।
हमारे यंहा काफ़ीर शब्द है तो तुम्हारे यंहा जेंटाइल्स, मलेच्छ, दस्यु, ब्रह्मद्विष: (ईश्वर, वेद विरुद्ध), वेदनिन्दक, नास्तिक शुद्र, असुर, राक्षस, चंडाल, दैत्य, दानव, पिशाच,
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● स्वामी विवेकानंद, स्वामी अग्निवेश, सुरेंद्र कुमार शर्मा अज्ञात, उपेंद्र कुमार बागी जैसे लेखक आपको पसंद नहीं।
सनातन धर्मी दयानन्द के वेद भाष्य क्यों नहीं मानते।
आर्य समाजी 1℅ भी नहीं, क्यों?
वेदों के सैकड़ों भाष्य है और सबकी व्याख्या अलग अलग क्यों।
करोड़ो साल पुराने वेद को मानते है और भाष्य मानते हो 150 साल पुराना।
150 साल पुराना धर्म मानते हो वरना दिखाओ कोई और सम्पूर्ण एकेश्वरवाद पर भाष्य दयानंद से पहले का।
● यम और यामी, जबाला सेविका, ब्रह्मा की बेटी।, परशुराम ने मां का और शिव ने पुत्र का सिर काटा, द्रौपदी के पांच पति, दशरथ की सौ पत्नियां, कृष्ण की सोलह हज़ार रानियां, सीता की शादी के समय 6 साल उम्र।
राम ने गृहस्थ आश्रम क्यों नही अपनाया।
11 बार नियोग करना।
● पहला वेद अधूरा था तभी तो बाकी तीन और उतारने पड़े।
वेदों का ज्ञान क्या अधूरा था जो ब्रह्मण्ड, आरण्यक, उपनिषद लिखने पड़ गए। गीता वेदों का सार क्यों है।
वेदों की 1000 शाखाएं खो क्यों गयी।
वेद श्रुति है तो क्या गारंटी है कि करोड़ो सालों में कंठस्त करने वालों ने मिलावट नहीं कि।
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क़ुरान एक पोएटिक कलाम है। ताकि याद आसानी किया जा सके। सुनने भी आनंद आये। और एक पोएटिक आर्ट तो है ही।
इसमे गूढ़, अलंकृत भाषा, उपमा, एलगोरिकल, मेटाफोरिक, तमसीलि ज़ुबान के इस्तेमाल हुआ है।
जैसे शेर है कि आसमान में छेद होता है। अब हवा में कोई छेद कैसे करेगा।
फला आदमी का फन कुचल दिया। वह कोई सांप थोड़े ही है। जैसा कहते है कि कुत्तों के सर पर पांव। अंधा पढ़ता है यानी ब्रेल लिपि से।
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