आर्य समाजियों और सनातन धर्मियों से हुई बहस के कुछ अंश।
क़ुरान को आसमानी किताब कहके उपहास करना।
वेद को भी आसमानी किताब क्यों नही कहते है। आसमानी नहीं तो आकाशीय ही कह दो। क्योंकि वो भी ईश्वर ने उतारे है। उनका अवतरण भी तो 4 ऋषियों पर हुआ था। इसलिए एक को आसमानी कहना और दूसरे को नहीं कहना दोहरे चरित्र उदाहरण है।
हिन्दू ग्रंथों में मुग़लों ने मिलावट कर दी।
प्राचीन काल मे ग्रन्थ कंठस्थ किए जाते थे जो केवल ब्राह्मण करते थे । अन्य वर्ण वालों को तो मत्रं सुनने तक कि मनाही थी, उच्चारण करना तो बहुत दूर रहा। दुनिया को वेदो की शक्ल तब देखना तब नसीब हुई जब मैक्स म्युलर ने 19वीं सदी में साम दाम दंड भेद का प्रयोग करके ब्राह्मणों से वेद निकाल कर इनका अनुवाद पेश किया। इसलिये मिलावट करने वाले अवश्य अंदर के लोग थे। अगर मिलावट हुई तो ब्राह्मणों ने ही की है क्योंकि अन्य लोगों को तो इनका ज्ञान भी नहीं था। अंदर वाले ही लंका या दुर्ग ढहाते है, बाहर वाले नहीं।
मुस्लिम आक्रमणकारी और मुग़ल लुटेरे थे।
औरंगज़ेब की बात करने का यंहा कोई औचित्य नहीं क्योंकि आप हिन्दू धर्म पर चर्चा करने आये थे। धर्म पर जवाब देने की बजाए राजनीती और इतिहास की बात छेड़ दी। इतिहास, राजपाट, सत्ता और राजनीति अलग विषय है। और ये दो धारी विषय है। इन पर अलग से बात करनी चाहिए।
मुस्लिम बनाओ, उड़ने वाला गधा, धरती चपटी, हo आयशा की आयु, आसमान पर खुदा का तख्त जैसे प्रश्न।
यजुर्वेद अध्याय 2 मंत्र 1 कहता है कि सभी को वैदिक बनाओ। क़ुरान भी लोगों को एक निराकर ईश्वर का आस्तिक बननने को कहता है। उड़ने वाली गधी इस्लाम का मत नहीं है पर उड़ने वाले मोर वाहन और पुष्पक विमान को
सनातनी और आर्य सामजी दोनों मानते है। क़ुरान ने धरती को कभी चपटी नही कहा। पर वेदो ने धरती को चपटी कहा है और चार किनारों वाली कहा है, देखिए ऋग्वेद 10.58.3. हज़रत आएशा की शादी 9 नहीं बल्कि 19 साल में हुई थी पर रामायण बताती है क सीता मैय्या की आयु केवल 6 वर्ष थी जब उनका विवाह हुआ था। क़ुरान कभी नहीं कहता है कि खुदा सातवे आसमान पर है। पर अथर्ववेद अवश्य 4.1.6 में कहता है की जगत उत्पत्ति से पूर्व ईश्वर सोया हुआ सा था। ये कैसा वैदिक ईश्वर हुआ जो सोता है, ऐसा ईश्वर केवेल असत्य वैदिक मान्यताओं में ही हो सकता है।
हलाला पर उपहास करना।
हालाला पर सवाल उठाने वाले नियोग के बारे में बताए। हिन्दू धर्म और ग्रंथों में एक स्त्री सन्ताएं उत्पत्ति के लिए 11 मर्दों से संभोग कर सकती है। इसको नियोग कहते है। जिसका पति विदेश गया हो तो वह नियोग कर ले, ऐसा नारद स्मृति श्लोक 98/99/100 में लिखा है। सत्यार्थ प्रकाश में दयानंद सरस्वती जी कहते है कि विदेश गए पति की पत्नी नियोग कर संतान उत्पन्न कर सकती है और वो संतान पति की संपत्ति का भी अधिकारी होगा। यानी पति मर जाए तो दूसरा विवाह न करो नियोग करो और फिर 100 कौरवों की तरह बच्चे करो।
मांसाहार पर कुतर्क।
मांसहार और जीव हत्या दुनिया का हर व्यक्ति करता है। वेद, रामायण, महाभारत, स्मृतियां हर जगह मांसहार का उल्लेख है। अगर खून न निकले तो क्या जीव खा सकते है जैसे कोई भी छोटा जीव सीधे पेट मे निगल जाना। अगर जीव फड़फड़ाये नहीं तो क्या जीव खा सकते है जैसे बेहोश करके जीव को मारना। दर्द तो पेड़ पौधों को भी होता है क्योंकि पेड़ पौधों में भी मानव की तरह ही सेंसेस होती है। मांसाहार से जीव का वंश समाप्त हो जाता है तो पेड़ के फल अपनी वंशवृद्धि में सक्षम है फिद उन्हें खा कर उनका वंश क्यो समाप्त करते हो। जो भी जीव सामान्यतः खाये जाते है आज तक उन का अस्तित्व खतरे में नहीं पड़ा है। बल्कि उनकी संख्या और पालन में अधिक वृद्धि हुई है। क्योंकि उनका सम्बंध भोजन और व्यवसाय से जुड़ा हुआ है। जड़ चेतन सिद्धांत जो ग्रंथो में लिखा है, वो हज़ारो साल पुराना है और फैल हो चुका है। आज विज्ञान का युग है। विज्ञान के द्वारा हम जान चूके है कि पेड़ पौधों में भी चेतन है। बकरे की जगह सुवर भी खाओ, ऐसा कहने वाले ये बताए कि आप पड़ोस में विवाह कर सकते हो तो आप अपने गौत्र में भी कर लो, वंहा क्या परेशानी है। वंहा इसलिए नही करते क्योंकि नियम है। बिना हलाल करे या बिना अल्लाह का नाम पढ़े जानवर को क़ुरबान करके भी देखो, ऐसा कहने वाले ये बताए कि बीवी मंत्र पढ़ने और फेरे लेने के बाद ही बनती है या इसके बिना ही बन जाती है।
महावीर, सिद्धार्थ, जीसस, मुहम्मद सहाब सभी धर्मों के प्रवर्तक है जिनसे ये धर्म शुरू हुए और इनके ग्रन्थ भी। पर हिन्दू धर्म का कोई प्रवर्तक नहीं। अगर ये न होते तो ये धर्म भी न होते।
जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर ऋषभनाथ है, महावीर स्वामी तो अंतिम है। बोद्ध धर्म के प्रथम बुद्ध तण्हङ्करं है, सिद्धार्थ गौतम अंतिम है। ईसाई धर्म के प्रथम प्रोफेट, एडम है, ईसा मसीह अंतिम है। इस्लाम के प्रथम पैग़म्बर आदम है, मुहम्मद साहब अंतिम है।
और रही बात सनातन धर्म की तो उसके मूल ग्रँथ वेद है। आर्य समाजियों का मानना है कि 4 ऋषियों, अग्नि, वायु, आदित्य और अंगिरा पर इनका अवतरण हुआ, वो भी सृष्टि के बिल्कुल आरंभ में 1 अरब 96 करोड़ वर्ष पूर्व। यानी अगर वो 4 न होते तो क्या आपका धर्म होता? ये धर्म के प्रवर्तक नहीं हुए तो फिर क्या हुए।
इस्लाम को शांति का धर्म नहीं कहना चाहिए क्योंकि लोग दाड़ी रखके, टोपी लगाके, अल्लाहु अकबर कहके जान से मार देते है।
"Nazi Party" used 'Swastika' as their symbol while violencing. Has Swastika any connection with Hinduism? If yes, then why people like you proclaiming Hinduism as the Ahinsak dharma?
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ये Dr. ZN को देख कर आर्य समाजियों का शुरू किया हुआ चलन है कि अरबी के रटटे मार लो (बहुत सी सच्ची- झूठी किताबो से) गलत या सही, और इस्लाम पर हमला करो, जो पिछले 10/15 साल में गैर आर्य समाजियों ने भी शूरू कर दिया है।
सनातन धर्म किसी विशेष धर्म का नाम नहीं है, बल्कि एक गुण या सिफत है। इसका नाम वैदिक धर्म नाम ज़रूर है। सनातन धर्म शब्द वेदों में आया ही नहीं है। खींचा तानी करके लोग सिद्ध करने की कोशिश करते हैं।
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