हमने कभी उम्मे किर्फ़ा के बारे में नही सुना, पर ये पढ़ा है कि नबी सल्ल० ने अपने प्रिय चाचा हम्ज़ा रज़ि० का कलेजा चबा जाने वाली महिला हिन्द को भी माफ़ कर दिया था।
हमने क़ाब बिन अशरफ़ का ज़िक्र नही सुना, लेकिन ये कई जगह सुना पढ़ा कि नबी सल्ल० ने उन लोगों के लिए भी बेहतरी की दुआ की जिन लोगों ने नबी सल्ल० को पत्थर मार मार कर लहूलुहान कर डाला था
हमने बनु क़ुरैज़ा के वाकये से इस्लाम में कोई नियम बनाए जाने की बात कभी नहीं पढ़ी, लेकिन फ़तह ए मक्का के दिन मुसलमानों ने उन तमाम मूर्तिपूजकों को आम माफ़ी दे दी थी जिन्होंने इस्लाम स्वीकारने के कारण अनेकों मुस्लिमों को भयंकर यातनाएं दीं और कई गरीब मुस्लिमों की हत्या तक कर दी थी।
हमें बताया जाता है कि मुहम्मफ साहब ने गुलाम मारिया किबतिया का ईस्तमाल किया। जबकि ये नहीं बताया जाता की मारिया किबतिया जो एक ग़ुलाम थी और एक और गुलाम लड़की को मिस्र के बादशाह ने मुहम्मद साहब को ख़िदमत के लिए दिया था क्योंकि उस वक़्त ग़ुलाम भी गिफ्ट करे जाते है। हुज़ूर ने एक ग़ुलाम किसी को ख़िदमत के लिए दे दी और दूसरी को अपने पास ही रहने दिया। असल में इस्लाम द्वारा जो ग़ुलामों के साथ व्यवहार करना था, उसी का मुज़ाहायरा लोगों को दिखाना था ताकि वो देखें और खुद भी करने के लिए मुतासिर हो।
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