Thursday, 21 January 2021

क्या इस्लाम तलवार से फैला है। मुग़ल व राजपुताना विवाह।


स्वामी विवेकानंद जी किताब Selected Works of Swami Vivekanand, Vol.3,12th edition, 1979. p.294 में स्वामी जी ने इस सोच को की भारत मे इसलाम तलवार से फैला है को एक पागलपन बताया है, और लिखा है की "भारत में मुस्लिम विजय ने उत्पीड़ित, गरीब मनुष्यों को आजादी का जायका दिया था। इसीलिए इस देश की आबादी का पांचवां हिस्सा मुसलमान हो गया। यह सब तलवार के जोर से नहीं हुआ। तलवार और विध्वंस के जरिये हिंदुओं का इस्लाम में धर्मांतरण हुआ, यह सोचना पागलपन के सिवाय और कुछ नहीं है।"

अरब में 1400 सालों से मुसलानों का राज है पर फिर भी वंहा आज 1.4 करोड़ कॉप्टिक क्रिस्चन रहते है जो पीढ़ियों से ईसाई है, कैसे?। क्योंकि इनको धर्म मानने की छूट थी। भारत में लगभग 700 साल साल मुसलमानों का राज रहा, कंही कम कंही ज़्यादा पर फिर भी आज भारत की लगभग 85% जनसँख्या गैर मुस्लिम है, कैसे?। क्योंकि जबरन धर्मान्तरण नही करवाया गया। जिसके पास इतनी बड़ी शक्ति हो और वो लोगों को जबरदस्ती मुसलमान बनाने लग जाते तो अवश्य ही ये 85% का आंकड़ा बहुत कम होता। इंडोनेशिया और मलेशिया में करोड़ो मुसलमान रहते है, वंहा कभी कोई मुसलमानी फौज आक्रमण करने नहीं गयी, फिर कैसे वंहा इतने मुस्लिम हुए? क्योंकि ये लोग मुसलमान बने इस्लाम की शिक्षाएं देख कर। इस्लाम पिछले कई दशकों से दुनिया मे सबसे तेजी से फैलने वाला मज़हब बना हुआ जबकि इस्लामोफोबिया अपने चरम है तब भी।

इस्लाम और क़ुरान धर्म के मामले में किसी भी ज़बरदस्ती से सख्त मना करता है। साथ ही हिंसा का भी बिल्कुल समर्थन नहीं करता है। केवल शांति और न्याय स्थापित करने के लिए लड़ाई की आज्ञा देता है जैसे गीता में अधर्म का नाश करने के लिए हिंसा और युध्द की आज्ञा दी गयी है।
 

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अकबर के वक़्त मुग़लों की हिन्दूओ से कुल 34 शादियां हुईं थीं,  जहांगीर के वक़्त 7, शाहजहां के वक़्त 4 और औरंगज़ेब के वक़्त मुग़ल शासकों की हिंदुओ से कुल 8 शादियां हुईं।  1562 से लेकर 1707 तक यानी औरंगज़ेब की मौत तक मुग़ल शासकों ने कई हिन्दू शासकों के साथ वैवाहिक रिश्ते बनाये थें. 

- 1562- राजा भारमल की बेटी से अकबर की शादी (कछवाहा-अंबेर)
- 1570- राय कल्याण सिंह की भतीजी से अकबर की शादी (राठौर-बीकानेर)
- 1570- मालदेव की बेटी रुक्मावती का अकबर से विवाह (राठौर-जोधपुर)
- 1573 - नगरकोट के राजा जयचंद की बेटी से अकबर की शादी (नगरकोट)
- 1577- डूंगरपुर के रावल की बेटी से अकबर का विवाह (गहलोत-डूंगरपुर)
- 1581- केशवदास की बेटी की अकबर से शादी (राठौर-मोरता)
- 1584- भगवंत दास की बेटी से राजकुमार सलीम (जहांगीर) की शादी (कछवाहा-आंबेर)
- 1587- जोधपुर के मोटा राजा की बेटी से जहांगीर का विवाह (राठौर-जोधपुर) जिससे शाहजहां पैदा हुआ।
- 1595- रायमल की बेटी से अकबर के बेटे दानियाल का विवाह (राठौर-जोधपुर)
- 1608- राजा जगत सिंह की बेटी से जहांगीर की शादी (कछवाहा-आंबेर)
- 1609- रामचंद्र बुंदेला की बेटी से जहांगीर का विवाह (बुंदेला, ओरछा)
- 1624- राजा गजसिंह की बहन से जहांगीर के बेटे राजकुमार परवेज की शादी (राठौर-जोधपुर)
- 1654- राजा अमर सिंह की बेटी से दाराशिकोह के बेटे सुलेमान की शादी (राठौर-नागौर)
- 1661- किशनगढ़ के राजा रूपसिंह राठौर की बेटी से औरंगज़ेब के बेटे मो. मुअज़्ज़म की शादी (राठौर-किशनगढ़)
- 1678- राजा जयसिंह के बेटे कीरत सिंह की बेटी से औरंगज़ेब के बेटे मो. आज़म की शादी (कछवाहा-आंबेर)
- 1681- अमरचंद की बेटी औरंगज़ेब के बेटे कामबख्श की शादी (शेखावत-मनोहरपुर)
- जहांगीर की मां मरियम उज़ ज़मानी यानी जोधाबाई राजपूत महिला थी.
 
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औरंगजेब
 
इतिहास में बड़ी सख्सियतों के साथ अक्सर यही होता है आया, खासतौर पर उनके जाने के कई सालों या सदियों बाद। ऐसी हर हशक्सियत को उसकी मेरिट पर देखने की बजाय, अपने अपने चश्मे लगा कर देखा जाता है। औरंगजेब के केस में यह धर्म और सियासत के आधार पर हुआ। हिन्दू, मुस्लिम दोनों ने अपने अपने अनुसार देखा। इतिहास अंकन में अंग्रेज़ो का भी दखल रहा। नतीजन एक ही इंसान की अलग अलग शख्सियत सामने आई। कोई दूसरे के प्रमाण मानने को तैयार नहीं। कोई भी इंसान अपने समय, माहौल से प्रभावित हुए बिना काम नहीं करता। औरंगज़ेब भी धार्मिक, सियायी, सामाजिक, आर्थिक पक्षों के साथ अपने राज को चलाने वाला कुशल बादशाह था। यही वजह है कि उसके फैसले मुस्लिम, इस्लाम, हिंदू धर्म और हिंदुओं के  समर्थन और खिलाफ़ दोनों तरह से मिलते हैं, जिन्हें लोग अपनी अपनी सोच, समझ के मुताबिक देखते हैं। न वो इस्लाम का नुमाइंदा था और न ही हिन्दू धर्म का विरोधी। वो एक कुशल, ताकतवर शासक था, जिसका पहला मक़सद था अपना राज सही तरह चलाना। वो वही करता आ रहा था जो उसकी जगह हर कुशल शासक करता। उसके अच्छे, बुरे सभी फैसले उसकी राजसत्ता के अनुसार थे. 
 

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