אָנֹכִ֥י אֵל֙ וְאֵ֣ין ע֔וֹד אֱלֹהִ֖ים וְאֶ֥פֶס כָּמֽוֹנִי
जंग से शांति नहीं बल्कि अशांति आती है क्योंकि जंग सिर्फ ज़मीन जीत पाती है पर अमन इंसानों को जीत लेता है। जंग से ज़्यादा अमन सस्ता पड़ता है और इसीलिए अमन क़ायम करना जंग लड़ने से ज़्यादा आसान है क्योंकि जंग की एक क़ीमत होती है जबकि अमन अनमोल होता है। सच बात ये है कि असल जीत जंग में नहीं बल्कि अमन में छुपी होती है। जंगे बच्चों को बड़ा कर देती है और बड़ो को मुर्दा। जंग बुड्ढो के लिए फैसले है और जवानों के लिए मौत। जंगे कभी नहीं बताती की कौन सच्चा है बल्कि वो सिर्फ ये बताती है की कौन बचा है। अगर किसी सवाल का हल जंग है तो वो सवाल ही गलत है क्योंकि जंग से ऐसा कुछ भी हासिल नहीं होता जो हम बिना जंग के हासिल न कर सके। अक्सर कायर लोग अमन से बचने के लिए ही जंग लड़ते है। नास्तिक हो या आस्तिक, हिन्दू हो या मुस्लिम अमन हासिल करना और क़ायम करना हर किसी का हक़ और धर्म है।
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ओ३म् द्यौ: शान्तिरन्तरिक्षं शान्ति:, पृथिवी शान्तिराप:...ओ३म् शान्ति: शान्ति: शान्ति:॥
अर्थात हे परमेश्वर द्युलोक में शांति हो, अंतरिक्ष में शांति हो, पृथ्वी पर शांति हों...ओ३म् शांति शांति शांति भव।
[यजुर्वेद शांतिपाठ मंत्र - सनातन धर्म]
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वह ख़ुदा है..अमन देने वाला; जो ख़ुदा की ख़ुशी चाहते है, उन्हें वह शांति का मार्ग दिखाता है; अगर दो लोग आपस में लड़ रहे हो तो उनमें शांति करवाओ।
[क़ुरान - इस्लाम धर्म]
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सौभाग्यशाली है वो लोग जो शांति फैलाते है, इन्हीं को परमेश्वर की संतानें कहा जाता है।
[बाइबल - ईसाई धर्म]
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अर्थरहित और निर्वाण की अनुभूति से असंबंधित हज़ार शब्दों से वह एक सार्थक शब्द श्रेष्ठ है जिसे सुन कर किसी को शांति मिल जाए।
[धम्मपद - बोद्ध धर्म]
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यंहा एक से बढ़ कर एक अस्त्र और शस्त्र उपलब्ध है परन्तु निरस्तीकरण और अहिंसा से बढ़कर कुछ नहीं है।
[आचारांग सूत्र - जैन धर्म]
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स्वार्थ रहित सेवा के द्वारा ही अनंत शांति प्राप्त होती है।
[श्री गुरुग्रंथ साहिब - सिख धर्म]
● धन्य है शांति स्थापित करने वाले लोग, वही धरती पर आनंद उठायँगे। - स्वामी विवेकानंद।
● सबसे बड़ा संघर्ष अपनी इच्छाओं से और अपने अंदर की बुराइयों से जंग करना है- पैग़म्बर मुहम्मद साहब।
● जंग में सब कुछ खो जाता है जबकि अमन में सब कुछ पा लेते है - पोप फ्रांसिस।
● युद्ध कुरूप है। इसकी प्रकृति त्रासदी और पीड़ा है - दलाई लामा।
● अहिंसा से अधिक शक्तिशाली इस दुनिया में कुछ भी नहीं है - जैन गुरुदेव चित्रभानु
● सबसे बड़ा सुख और स्थायी शांति तभी मिलती है जब कोई अपने भीतर से स्वार्थ को मिटा देता है। - श्री गुरु गोबिंद सिंह।
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वही वह ख़ुदा है...अमन देने वाला..! (Qur’an 59:23)
जो अल्लाह की ख़ुशी चाहते है, अल्लाह उन्हें शांति का मार्ग दिखाता है। (Quran: 5:16).
अगर दो आस्थावान आपस में लड़ रहे हो तो उनमें शांति करवाओ। (Quran 49.9)
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Do you know what is better than charity and fasting and prayer? It is keeping peace and good relations between people, as quarrels and bad feelings destroy mankind. (Hadith)
O people, spread peace, feed the hungry, and pray at night when people are sleeping and you will enter Paradise in peace.” (Sunan Ibn Majah)
Abu Umamah reported: The Messenger of Allah said Whoever made peace between two, Allah gives him for every word the [reward of] freeing a slave.
“The best among you is the one who doesn’t harm others with his tongue and hands.” Prophet Muhammad (peace be upon him)
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Dhammapada Verse 100
Tambadathika Coraghataka Vatthu
"Sahassamapi ce vaca anatthapadasamhita ekam atthapadam seyyo yam sutva upasammati."
Better than a thousand words that are senseless and unconnected with the realization of Nibbana, is a single word of sense, if on hearing it one is calmed.
Chapter 8, The Thousands, 100.
Better than a thousand useless words is one useful word, hearing which one attains peace.
It is better to conquer yourself than to win a thousand battles. Then the victory is yours. It cannot be taken from you, not by angels or by demons, heaven or hell. (Buddha)
A man may conquer a million men in battle but one who conquers himself is, indeed, the greatest of conquerors. (Buddha)
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Lord Mahavira in Acharanga sutra proclaimed "Atthi sattham parenaparam, Natthi asattham parenaparam" i.e. There are weapons superior to each other, but nothing is superior to disarmament or non-violence. It is the selfish and aggressive outlook of an individual or a society that gives birth to war and violence.
Non-injury to all living beings is the only religion.” (first truth of Jainism) “In happiness and suffering, in joy and grief, we should regard all creatures as we regard our own self, and should therefore refrain from inflicting upon others such injury as would appear undesirable to us if inflicted upon ourselves.” “This is the quintessence of wisdom; not to kill anything. All breathing, existing, living sentient creatures should not be slain, nor treated with violence, nor abused, nor tormented, nor driven away. This is the pure unchangeable Law. Therefore, cease to injure living things.” “All living things love their life, desire pleasure and do not like pain; they dislike any injury to themselves; everybody is desirous of life and to every being, his life is very dear.
Yogashastra (Jain Scripture) (c. 500 BCE)
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The Giver of peace is eternally blissful. (Sri Guru Granth Sahib Ji)
Those who serve You find peace. (Guru granth sahib)
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उपवास: स विज्ञेयो न शरीरस्य शोषणम्॥"
(स्क० पु०, वै० मा० मा० १२।३०)
-पापों से उपावृत्त (निवृत्त) होकर जो गुणों के साथ वास किया जाय, उसी को 'उपवास' समझना चाहिये। शरीर को सुखा डालने का नाम 'उपवास' नहीं है।
शरीर शोषणं यत्तत्तप इत्युच्यते बुधैः ।।
अर्थात :- वेदों में जिस प्रकार कहा गया है, व्रत और उपवास के नियम-पालन से शरीर को तपाना ही तप है।
राम नाम को छाडिके राखै करवा चौथि !सो तो हवैगी सूकरी तिन्है राम सो कौथि !!
जो इश्वर के नाम को छोड़कर करवा चौथ का व्रत रखती है , वह मरकर सूकरी बनेगी
[ब्रह्म - ईश्वर के प्रति व्रत रखो]
व्रतं कृणुताग्निर्ब्रह्माग्निर्यज्ञो ।
हे यजमानों, ब्रह्म के प्रति व्रत का पालन करो।
(यजुर्वेद : 4 : 11)
[ख़ुदा - ईश्वर के अनुसार रोज़े रखो]
...कुतिबा अलैकुमुस्सियामु...।
हे आस्थावानों, तुम पर रोज़े अनिवार्य किए गए हैं जैसे तुम से पहले के लोगों पर किए गए थे।
(क़ुरान : 2 : 183)
[नवरात्रि]
व्रतं कृणुत ।
व्रत का पालन करो।
(यजुर्वेद : 4 : 11)
[रमज़ान]
कुतिब अलैकुमुस्सियामु ।
तुम पर रोज़े अनिवार्य किए गए हैं।
(क़ुरान : 2 : 183)
यही शाश्वत धर्म और दीने हनीफ है.
गीता में सनातन धर्म को ही स्वधर्म व स्वभावनियतकर्म कहा गया है और इस्लाम को भी दीने फितरत कहा गया है.
धर्म और दीन समानांतर शब्द है, दोनों का अर्थ है जो धारण करने के और अपनाने के लायक हो. धर्म आचरण को ही ताओ (ताओइज़्म में), हुकुम (सिखइज्म में) कहते है. रिलिजन का अर्थ होता है बांधना, सृष्टा से.
धर्म का सार ब्रह्मसूत्र कहा गया और दीन का जुज़ कालिमा ए खुदा. दोनों का नाम नहीं बदला जो है कि एकं ब्रहम और लाइलाहा. दोने के अर्थ भी नहीं बदले.
छोटा सा ब्र्हम्सुत्र और एविद्वितियम और वादहू लाशरिका लहू.
एकं सद विप्रा, कूल हुव्वलाहू अहद.
आदिग्रंथ - ज़बूरे अव्वलीन.
ऊर्ध्व मुख अरणी -प्रथम ज्ञान, नीचे मुख वाली अरणी - अंतिम ज्ञान।
स्वर्ग -जन्नत, हेवेन, पैराडाइस
नरक - जहनुम, दोज़ख, हेल
बरज़ख - पृतलोक, संध्या, प्रद्यौ
लोक, लोकम, स्थानम - भूलोक, इहलोक - परधाम, देवलोक, परलोक, बैकुंठ.
महाप्रलय (प्राकृत प्रलय) का दिन - क़यामत का दिन - डुमस डे
बदले का दिन - हश्र का दिन - हिअरआफ्टर
अंतिम दिन - आख़िरत का दिन - जजमेंट डे
पुण्य - सवाब, वर्च्यु,
पाप - गुनाह, सिन
मुक्ति का मार्ग, भक्ति, ज्ञान, कर्म. फलाह का रास्ता, तौहीद, आखिरत और रिसालत को मिलाकर अपनाना, यानी Submission, Divine Guidance, Deeds or Acts.
मोक्ष, मुक्ति, निर्वाण, उद्धार, फलाह, निजात, रिडेम्पशन
नमाज़ का असल शब्द है सलाह जिसका अर्थ है जुड़ना, योग का अर्थ है जुड़ना,
सजदा का अर्थ साष्टांग (दण्डवत नहीं),, मत्था टेकना, ऑर्थोडॉक्स प्रोस्ट्रेशन, कराईट बोविंग, पानीपता, णमोकार।
नमाज़, संध्या, उपासना, साधना, योग, विपश्यना, अरदास
कुल 4 संध्या हैं, चौथी संध्या है तुर्य संध्या (मध्यरात्रि में) - पूरी शंकराचार्य अनुसार भी .
प्रमुख्य त्रिकाल संध्या - पूरी शंकराचार्य अनुसार भी (1. प्रातःकाल - सूर्योदय से पूर्व सर्वोत्तम है, 2. मध्यानकाल में, 3. सायंकाल में - सूर्यास्त के समय)
5 बार भजन- पूरी शंकराचार्य अनुसार भी (1. सूर्योदय के पूर्व ब्रह्मुहुर्त में, 2. स्नान के बाद, 3. मध्यानकाल में, 4. सायंकाल में, 5. रात्री में निद्रा से पूर्व ) और 5 वक्त की नमाज़.
वुजू गुसल या स्नान (4 संध्या में से जितनी बार भी भक्त संध्या करें, उससे पूर्व स्नान करना अनिवा है -पूरी शंकराचार्य अनुसार भी)
ब्र्हमुहुर्त और तहज्जुद सामान काल में होते है.
एकेश्वरवाद और तौहीद
रोजा और उपवास
ज़कात और दान दक्षिणा
हज और तीर्थ
बिनासिले 2 कपड़े, बाल मुंडवाना या छोटे, मुंडन, चोटी। नंगे पैर या पंजा खुली हुई, खड़ाऊ पहनते आये है। तवाफ़. परिक्रमा
सत्य, हक़
तथास्तु, अमीन, आमेन
जीवात्मा और रूहे कुद्दुस
आत्मा और रूह
भूत प्रेत और जिन्न
शैतान और कलि
देवता और फ़रिश्ते
यमराज मालाकुल मौत, यमदूत और मुनकर नकीर जो कब्र में सवाल करंगे. नाज़िअत और नाशिअत मौत से संबंधित फ़रिश्ते है को मलाकुल मौत के तहत रहते है।
किरामीन कातिबीन और चित्रगुप्त, नारद और जिब्राईल. या फरिश्ता हबीब जो मुसलमानों को सलाह देने और दुआ करने का काम करते है।
कल्कि और मेहदी
याजूज माजूज और कोक विकोक
अंधकासुर या अंधकआसुर और दज्जाल
इलायास्पद, दारू काबन, नाभा पृथिव्या, नाभि कमल, नाफ़े ज़मीन, मक्तेश्वर
वेदों में इलास्पद नाभा पथ्वी का उल्लेख है, क़ुरान की तरह कोड मैच करता है।
मंदिर द्वार पूर्व में, कब्रे उत्तर दक्षिण में।
वेदों में बिगबैंग का उल्लेख कहा जाता है।
मनुस्मृति में अंडे से ब्रह्मा के जन्म का उल्लेख है।
ब्रह्मा द्वारा अपने शरीरी से स्त्री बनाने का ज़िर्क है।
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अवतार, ऋषि, मनु - प्रोफेट, मैसेंजर.
ईशदूत, संदेष्टा, संदेशवाहक - अम्बिया, पैग़म्बर, नबी, रसूल,
सूथसेयर,सोइश्यान्त - बुद्ध, तीर्थंकर,
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अथर्ववेद में ब्रह्मा इब्राहिम है, अथर्वा इस्माइल है, अंगरिका इसहाक का नाम है। अबिराम भी नाम आया है। अथर्ववेद में पुरूषमेध यज्ञ का भी उल्लेख है।
ब्रह्मा - आदम के लिए इस्तेमाल हुआ है हरिवंश पुराण में।
ब्रह्मा से इब्राहीम बना हो सकता है.
नोहा के बेटे का नाम है शेम, शेम के बेटे का नाम है अरम जिसे रेम भी कहते है.
शेम का वंशज है अब्राहम जो की एब्रम (एब्रम - एक जनजातीय नाम जिसका अर्थ है रेम का एक) नाम है या अब्राह नाम है, हिब्रू में.
एब्रम का अर्थ रेम के वंशज भी होता है. एब्रम के मूल निवास स्थान का नाम है अरम अर्थात रेम की भूमि या स्थान है.
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संस्कृत में आदम की धातु आद्य आज भी पाई जाती है। इसी से आदि शब्द बना है जिसका अर्थ है प्राचीनतम। आदि से आदीं बना है जिसका अर्थ है प्रथम, पिछला या प्राचीनतम। ऐसे ही आदिमयुग, आदिमानव, आदिकाल जैसे शब्द बने। आदीं से आदम शब्द बना है और फिर उससे एडम. हव्वा मतलब जीवन है, शतरूपा का अर्थ है सौ रूपों वाली और ईव नाम इसलिए रखा गया क्यूंकि वह समस्त जीवितों की माता हुई. मनु बना हैं नु से जिसका अर्थ होता हैं नौका. नु से ही न्यूह, नुह और नोहा बने हैं. मनु शब्द से ही मनुष्य और मानव शब्द बने है। मनु के मानने वालों को मानव कहा जाता था। अंग्रेज़ी का मैन शब्द मानव से ही बना है।
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स्वयम्भूमनु, स्वायंभुवमनु, आदमो, महर्षिमनु, आदिपुरुष, आदिपिता, आदम, एडम, आधाम, आदम (सिक्ख), मश्य (पारसी), इज़ानागी (शिंतो) इत्यादि.
शतरूपा, सतरूपा, हव्यवती, आदिमाता, हव्वा, ईव, ख़व्वाह, हव्वा( सिक्ख), मश्यान (पारसी), इज़ानामी (शिंतो) इत्यादि.
रामसेतु - एडम्स ब्रिज है. एडम्स पीक पर एक जोड़ी पाँव के निशान हैं. बुद्ध, मुस्लिम, ईसाई और हिन्दुओ के लिए पवित्र स्थान है. आदम को हिन्द (श्रीलंका - जो उस समय भारत का ही हिस्सा था) में उतारा गया था और ये उनके निशान माने जाते हैं. हिन्दू इसे शिवजी के पांव के निशान मानते है (पुराणों में शिवजी और आदम की कहानी में कई समानता है)। बुद्धिस्ट इसे बुद्ध के पांव के निशान मानते है.
न्यूह या मनु, महामनु, महाराज मनु, वैवस्वत मनु, सप्तऋषि वाले मनु, महाजल प्लावन (महाजल प्रलय) वाले मनु, नौका वाले मनु, मछली वाले मनु, मत्स्यावतार वाले मनु, श्राद्धदेव मनु या सत्यव्रत मनु।
नूह, नोवाह, नोअख़। पारसी धर्म में यीमा। सुमेरियन गाथाओं में ज़ियासुद्र। अक्काडीन महाकाव्य ( सेमेटिक भाषा) में अत्राहासीस। मेसोपोटामिया (बेबिलियोन महाकाव्य या कविता) के गिलगमिश महाकाव्य में उतनापिशटिम। ग्रीक मायथोलॉजी में ड्यूकेलियन इत्यादि.
Yima Kshaeta/Jameshed/Mithra in Mithraism (an offshoot of Zoroastrianism)
मनु एक पदवी या टाइटल है जैसे सीज़र, फेहरो, जार, व्यास या इंद्र। जैसे कई राजा विक्रमादित्य और राजा भोज हुए है, वैसे ही यंहा 14 मनु हुए है. ये 7वें मनु थे. ,मनु की नौका पर केवल 7 नर-नारी ऋषि अनुयायीयों बचे थे और कुरान के मुताबिक थोड़े से लोग बचे थे, जिनसे बाद में धरती पर दुबारा मानव जीवन फैला। इनके समय में वेदों का पुनः परवर्तन हुआ. वैवस्त मनु प्रलय से संवत भी जुड़ा हुआ है। नूह को पहली शरीयत अता की गई थी। यंहा भी मनुविधान या मनुस्मृति को प्रथम नियमावली माना जाता है। तहक़ीक़ से पता लगता है कि नूह यानी वैवस्त मनु भारत के बाशिंदे थे जैसे जातपात, नक्षत्रशास्त्र, देवताओं के नाम, मूर्तिपूजा आदि. तन्नुर से तूफान शुरू हुआ, करेल में, जूदी पर नाव रुकी, जूदी इराक में है, जूदी के पास नेहबंधन जगह है, माहाभारत ने नौका रुकने के स्थान को नौबंधन कहा है.
वैवस्त मनु के बड़े पुत्र इक्षवाकु से क्षत्रिय में दो वंश चले सूर्यवंश और चंद्रवंश चले। अनुमान है कि नूह के दो बेटों हेम या हाम (सूर्य) और सेम या साम (चंद्र) से जो दो वंश चले थे वो यही थे।
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एमिड (बोद्ध), आदिनाथ (जैन), शिवजी (हिन्दू) और आदम में कुछ समानता हैं.
जैन धर्म इन्ही 14 मनु को कुलकर कहा जाता है और अंतिम कुलकर नाभिराज या नाभिराय थे जिनके पुत्र प्रथम जैन तीर्थंकर ऋषभनाथ या आदिनाथ थे। नाभिराज को प्रथम मनु अर्थात स्वयम्भू मनु का पढ़पोता कहा गया है।
सिक्खों के दशम ग्रन्थ में भी मनु नामक राजा का उल्लेख आता है जो 24 अवतारों में से एक है पर ये स्वयम्भू मनु नहीं है बल्कि कोई राजा है जिनका संबध मनुस्मृति से है।
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अबिराम, इब्राहिम, अब्राहम, राम. प्रहलाद - यूसुफ (प्रसंग).
कृष्णा, मूसा, Moses,हेर्कुलिस, अखिलीस, कहन (काला). एक नबी हिन्द में भी है जिनका रंग काला है और नाम कहान है यानी कृष्णा। (कमज़ोर रिवायत)
ईशा, मसी, ईसा, मसीह, Jesus
नराशंस, कल्कि अवतार, महामद, सुश्र्व, कल्किराजा, मैत्री बुद्धा, अंतिम ऋषि, Comfortor, पैराक्लीट, Paraecletus, फ़ारकलीत, स्तवेतएरेता, सोइश्यान्त, Astvast Ereta, Astvat Erat, Soeshyant, वर्कलीतुस, मूनहमन्ना, मूनहामन्ना.
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