Friday, 3 May 2024

परिचय, प्रार्थना, समापन (रीडिफाइंड सत्संग-भाग 2)

 

 

नारे, सिद्धांत, लोगो, नाम आदि 

{इन्हें अच्छे से परिभाषित कीजिये। इसमें पूरे भाषण का निचोड़ आ जाएगा।}
 
मारे नारे मानवता, समाज, देश, स्वयं सुधार और धर्म की बात करते है. ये हमारी विचारधार और उद्देश्य दोनों प्रदर्शित करते हैं। इसके साथ साथ हमारे नारे विभिन्न संप्रदायों और समुदायों के बीच पुल बनाने का कार्य करते हैं और लोगों को समानताओं पर लेकर आते हैं ताकि देश और समाज में एकता पैदा हो सके। हम युग परिवर्तन, सतयुग आगमन, भारत विश्वगुरु, अखंड भारत निर्माण हेतु कार्य करते हैं. सबके अपने तरीके होते हैं, हमारे पास भी एक कारगर तरीका है भारत को विश्वगुरु और अखंड भारत बनाने का.
 

हमारे नारे:

हमारा पूज्य - एक परमेश्वर: 
सतयुग में सत यानी सत्य होगा। सत्य उसे कहते हैं जो सबके लिए समान हो और जो कभी न बदले। इसीलिए ईश्वर को इस सृष्टि का परम सत्य कहा जाता है। क्योंकि वह भी सबके लिए समान है और कभी नहीं बदलता। इसलिए ईश्वर को अपनाने से ही सतयुग होगा। सभी आस्तिक धर्म वाले एक निराकार ईश्वर में पहले से ही विश्वास करते हैं। उनके लिए इस आधार पर एक होना तो बेहद आसान है। सबको ईश्वर के सिद्धांत पर लाना आसान है क्यूंकि ये पहले से ही सभी के धर्म की मूल मान्यता है। गांधी जी की प्रार्थना सभा में यह विवाद हो गया कि उसे अल्लाह कहे  या ईश्वर। फिर फैसला हुआ कि मौन प्रार्थना होगी।

 
हमारी जाती - मानव परिवार:
सम्पूर्ण मानव जाती एक और बराबर है। न कोई किसी से छोटा-बड़ा नहीं है। न जात-पात का भेद है और न धर्म-आस्था का। समस्त धरती एक परिवार है। सभी आस्तिक और नास्तिक इस बात पर एकमत होंगे। ईश्वर ने प्रकृति में और दुनिया में प्रत्येक व्यक्ति के लिए दाने, पानी का प्रबंध किया है। जिसको जितनी आवश्यकता है उतना खोज ले। पर मनुष्यों ने उन पर अपना कब्जा जमा जमा कर, दूसरों के लिए उनकी आर्टिफिशियल शॉर्टेज पैदा कर दी है। प्रकृति ईश्वर की वह रचना है जो ईश्वर की तरह ही न दिखाई देते हुए भी मनुष्यों को समान रूप से हर वह चीज़ उपलब्ध कराती है जिसके बिना जीवन संभव ही नहीं है। 
 
 
हमारा सपना - अखण्ड भारत:  
हर भारतीय धर्म में भारत की विस्तृत भूमि का उल्लेख मौजूद है। पूरे अखंड भारत में उनके धर्म का विस्तार था। आज तीनों देशों के अल्पसंख्यक दुखी होने का दावा करते हैं, तो तीनों को मिलाकर इस समस्या का हल किया जा सकता है। नफरत के आधार पर टूटे हुए देशों को प्रेम के आधार पर जोड़ा जा सकता है। हमें अपनी पुरानी गलतियां मालूम है इसलिए अब दुबारा वही गलती नहीं करनी है बल्कि गलती सुधारनी है। सारी दुनिया एक हो और कोई सीमाएँ न हों हम यह चाहते हैं। भले ही सीमाएं हटे न हटे, मगर एक होने कि बुनियाद तो पड़े।
 
 

हमारा गौरव - हिंदुस्तान: 
पूरी मानवता के लिए भारत दिव्य भूमि है। आज फिर से भारत की धरती को हमनें पापों से भर दिया है और इसलिए इसे वापिस पापमुक्त बनाना है। जहा इंसान जन्म लेता है, वहा से उसे लगाव होता है, चाहे मोहल्ला हो या शहर। भारत की धरती हमें खिलाती-पिलाती है, यह माँ के समान है। इसलिए अपने देश से प्रेम होना नेचुरल बात है। अगर किसी को ये प्रेम नहीं है तो इसका मतलब है कि वो नेचर से कट गए हैं।

{वतन से मुहब्बत को ईमान का हिस्सा कहा जाता है. ईमान का हो या न हो मगर फितरत का हिस्सा ज़रूर है. तिरमीजी के हदीस है कि मक्का छोड़ने से पहले आपने बेहद दुःख प्रकट किया था अपने वतन के लिए. इमाम ज़हबी ने लिखा है कि नबी को अपने वतन से बहुत मोहब्बत थी. इमाम इब्ने हज़ार अस्कलानी ने फतह उल बारी में  लिखा है कि नबी को अपने वतन के लिए बेहद मुहब्बत और तड़प थी.}

 
 
हमारा संकल्प - युग परिवर्तन: 
हम बदलेंगे युग बदलेगा, हम सुधरेंगे युग सुधरेगा. 
बस यही सोच रख कर जीवन जीना है। स्वयं सुधार से ही समाज सुधार संभव है।
 

{कुरान कहता है हर हज़ार साल में अल्लाह का अम्र बदलता है और नया निजाम आता है. अखीरी बार ऐसा 1500 कमरी साल पहले हुआ था जब नबी आये थे. अबु दावूद की हदीस में कहा गया है की नबी की उम्मत को 500 साल की एक्स्टेंशन मिलेगी. सो कुल मिला कर ये  1500 साल 2026 में पुरे हो रहे है. यही युग परिवर्त है यानि सतयुग आगमन जो कि दौरे जाहिलिया के बाद दौरे हक़ आना ही है।}

 

 
सतयुग जब शुरू होगा - भारत विश्वगुरु होगा: 
सतयुग किसी एक समुदाय, वर्ग के लिए नहीं आएगा। सतयुग सभी धर्म और संप्रदाय के मिलकर कर सुधार और काम करने के कारण ही आएग। सभी को साथ आना होगा, सभी को साथ लेना होगा। हिन्दू, मुस्लिम, सिक्ख, इसाई, बोद्ध, जैनी सभी की भागीदारी से ही सतयुग आ पायेगा. {मुस्लिम की मदद के बिना सतयुग नहीं आ सकता}.  सत, सत्य, सत्यता (honesty), सत्यनिष्ठा (integrity), चरित्र, नैतिकता से ही भारत विश्वगुरु होगा। 

सभ्य लोगों के आगे हर कोई हाथ जोड़ता है। जब हम सत्य वाले होंगे तो गुरु अपने आप हो जायँगे। सच्चा गुरु वो होता है जो शिष्यों में भेदभाव नहीं करता और जो कमज़ोर विद्यार्थियों पर ज़्यादा मेहनत करता है ताकि वो भी बराबर आ जाये. ऐसे ही जब एक समुदाय, दूसरे समुदाय को दबाने की बजाय उठाने में मदद करेगा तब भारत विश्वगुरु बनेगा।
 
हम बदलेंगे, युग बदलेगा।  हम सुधरेंगे, युग सुधरेगा।
सतयुग के हैं दो आधार - प्रेम और परपोकार
करुणा के आधार पर, होगा भारत विश्वगुरु, सतयुग की राह पर, होगा भारत धर्मगुरु.
 
 
हमारे सिद्धांत : 
सेवा, सहयोग, शांति, एकता, ज्ञान, न्याय व करुणा। इन्हीं को आधार बना कर हम कार्य करते हैं।
 
 

हमारा लोगो: 
ये पेड़ W है जो W___ का पहला letter है। शुरु में दुनिया में एक ईश्वर का एक ही धर्म था। जड़ अब भी एक है। लेकिन लोगों ने आज अलग अलग Culture और फलसफे अपना लिए हैं। हमें Interfaith Understanding के लिए तब तक वर्क करना है जब तक दोबारा धर्म एक ना हो जाए।
 
[ये चिन्ह एक पेड़ है। इस पेड़ की एक जड़ है। जड़ से पेड़ पनपा और उस पर अलग अलग फल/फूल लग गए। वैसे ही सभी ईश्वरीय धर्मों की जड़ एक है जिससे अलग अलग धर्म निकले हैं. जबकि एक पेड़ पर एक जैसे फल/फूल ही निकलते हैं. इसलिए हमें सभी को एक करने और सभी के लिए कार्य करने की कोशिश करनी है।]
 
 
हमारा नाम: 
हमारे नाम का अर्थ ही है वर्क यानि काम करना। समाज के लिए काम करना। हम लोगों की सहायता करते हैं, समाज सेवा करते हैं और धार्मिक एकता के लिए कार्य करते हैं।  
 
ये पुरे विश्व (World), सभी धर्मों (Religions) और उनके ज्ञान (Knowledge) की बात करता है. 
 
हमारा हिन्दी में नाम हैं विकास: विश्व कल्याण आगम संस्थान। जैसा कि नाम से पता लग रहा है जो पूरे विश्व के कल्याण हेतु आगे रहे।  
 

हमारा उर्दू में नाम है: معتمرعالَمِایمانودانش (معاد)

अन्य भाषाओं के नाम समय के साथ खो गए और अंग्रेजी वाला नाम इस्तेमाल में जारी रहा {These titles faded away with time. Only the English name continued in usage.}
 
{Registered. 36 years. Self Contribution, No Donation, Join first. WWW. In 10 Countries, 15 States, Approx. 250 (125 Prominent) Districts. 10K (1K sincere) Volunteers. 40 Janta Rasoi. 50+ Projects. 150+ Activities. Maulana & Allama. Compassion Culture}
 
-------------------------------------------------------------------------------

श्वास अभ्यास/ध्यान/ प्रार्थना - सतयुग के लिए 


ईश्वरभक्त  ऋषि- मुनियों ने हमारे आध्यात्मिक, शारीरिक उत्थान के लिए अनेकों अनमोल चीज़ें सिखाई है। उनमें से एक है, ध्यान व योग। योग का अर्थ होता है जुड़ना। ईश्वर से जुड़ने का माध्यम प्रार्थना है. उससे प्रार्थना करें। हमें बनाने वाले के लिए प्रतिदिन कुछ समय निकालें। जिस प्रकार मां- बाप के समीप बैठ कर, उन्हें अच्छा लगता है, वैसे ही ईश्वर को याद करने पर उसे अच्छा लगता है और हमारे मन को भी शांति मिलती है। जिस प्रकार पूजा- उपासना से पहले जगह साफ करते है, उसी प्रकार ईश्वर को याद करने से पहले मन को साफ करें। दुनिया की मोह-माया और भाग- दौड़ को भूल कर उस ईश्वर को आंख बंद कर के एकांत में याद करें। उसकी प्रशंसा करे, धन्यवाद करें, उससे क्षमा मांगे और उससे ही सहायता मांगे। आपको अनुभव होगा कि वह हमारे बेहद निकट है। इससे आप अपने अंदर एक शक्ति का अनुभव करेंगें जो आपको ईश्वर केन्द्रित जीवन जीने के लिए प्रेरित करती रहेगी। यह अनुभूति ही सतयुग के आगमन के लिए निर्णायक भूमिका निभाएगी।
 

[यह मन, मस्तिष्क को केन्द्रित, स्थिर करने में सहायता करता है और इससे थकान भी दूर होती है. असल में यह हम नहीं करवा सकते, ये तो आपको ही करना होगा। हम केवल मार्ग दिखा सकते हैं, चलना आपको स्वयं होगा.]

कई लोग खड़े हो तो जिससे बात करनी होती है, उसका नाम लेना पड़ता हैं, या उसकी और देख कर बात करनी पड़ती है, पहले उससे जा कर नमस्ते करते हैं। किसी से संपर्क साधना हो तो पहले उसका नंबर डाइल किया जाता है। इसी तरह जिससे बात करने जा रहे हो पहले उसे ध्यान में ले आइए। कोशिश करोगे तो वह निराकार भी ध्यान में आएगा. पहले ईश्वर के बारे में सोचे फिर शुरू करें।
 
जैसे किसी जगह अंधेरे में अकेले निकलते हुए डर लगता है मगर कोई इंसान या बच्चा भी साथ हो तो डर कम हो जाता है, जबकि बच्चे का तो खूद ख्याल रखने की जरूरत होती है। उसी तरह वो जो सर्वशक्तिशाली है अगर उसके हमारे साथ होने का एहसास हो गया तो इस जीवन में से सारे भय, डर, शंकाएं दूर हो जायगी.
 
 
{पहले ही कह दें कि शोर हुआ तो यह सही तरह से नहीं हो पाएगा। कोई डिस्टर्ब न करें. दुसरो का ध्यान न भटकाएं. भले कोई न करे मगर दूसरों को करने दें. पूछें कि क्या इतना सा भी नहीं कर सकते, क्या थोड़ी देर शांत भी नहीं रह सकते, जो गंभीरता से करेगे, केवल उन्हें ही फायदा होगा।}

{पहले ही ईश्वर पर बात करे लें ताकि ताकि लोग तैयार हो कि किससे जुड़ने जा रहे है. इसके लिए पहले सही माहौल बनाए. ये करवाते हुए कुछ साथी आखें खोले रखें और सब पर निगाह बनाए रखे।  ये साफ सुथरी, खुली जगह में, समूह के लिए और 10 मिनट के लिए बढ़िया है. सकारात्मकता बनायें रखे. किसी भी चीज का खंडन करने की जरूरत नहीं। एकेश्वरवाद, परलोकवाद ज़्यादा रखे मगर गहराई में न जाए. इसके माध्यम से Subconscious Mind तक मुख्य बात पहुचाएं. श्वास को अनुलोम विलोम न कहें. स्वर्ग नरक की बजाय अनंत सुख, अनंत दुख, अनंत जीवन जैसे शब्द इस्तेमाल करें. मंत्र प्रयोग न करें। उचित लगे तो थोड़े से मंत्र रख सकते हैं। ॐ, गायत्री मंत्र आदि से शुरू कर सकते हैं। पहले थोड़ी देर श्वास अभ्यास करवाएं और फिर ध्यान. ये संभव न हो तो सीधा प्रार्थना करवाएं मगर प्रार्थना की शुरवात या अंत में थोड़ी देर मौन रहें या गहरी सांस दिलवाएं}


श्वास:
पूरी दुनिया में पोलूशन के कारण ऑक्सीजन कम हो गयी है. जितनी हमें ज़रूरत होती है, हम उससे कम ऑक्सीजन ले रहे हैं। फेंफडों को कम हवा की आदत पड़ गयी है इसलिए महसूस नहीं होता जबकि फेफड़ों को ज़्यादा हवा की ज़रूरत है.

कोरोना काल ने हमें बताया कि प्राकृतिक तौर पर फ्री मिलने वाली हवा कितनी कीमती है। तब सभी हवा के लिए ऑक्सीजन सिलिंडर ढूंढते फिर रहे थे. ऑक्सीजन हज़ारो रुपये की बेची गयी। अगर हमारी हवा साफ सुथरी होती और हमारा फेफड़े शक्तिशाली होते तो कोरोना काल में इतनी मृत्यु न होती

[यह श्वास के लिए आसन (मुद्रा) करने का सही समय और जगह नहीं. बहुत से यंहा नहीं कर पायंगे पर आप थोड़ी देर करके यंहा सीख सकते हैं. आइये इसलिय हम श्वास अभ्यास कर लेते है ताकि आप घरों पर जाकर रोज़ ये काम कर सके है और अपने शरीर निरोगी रख सके। हमारा शरीर स्वस्थ हो तो आधी बीमारियां तो वैसे ही दूर हो जायंगी.]

Deep Breathing से शरू करें. ऐसा 20 बार करें. कहें कि सोचो अंदर जाने वाली वायु से शुद्दी आ रही है और बाहर जाने वाली से भीतर की गंदगी बाहर जा रही है. वही है जो यह श्वास दे रहा है, जब रोक लेगा तो मृत्यु आ जाएगी।


ध्यान:
अपनी धड़कन को सुनिए, ये समझिए कि यह हमारे अंदर की आवाज है, बल्कि ये उसकी ही आवाज है। महसूस करो कि वो हमें देख रहा है, वो हमारे सबसे निकट है. ईश्वर की रचना के बारे में सोचिये, इस ब्रह्माण्ड के बारे में सोचिये.
 


प्रार्थना/मौन:
आइए अब अंत में हम केवल कुछ क्षणों के लिए ईश्वर से प्राथना करते है. उसके निकट जाने का, उससे सम्पर्क साधने  प्रयास करते है। कोई आँखें बंद करना या हाथ जोड़ना चाहे तो कर ले। आप चाहे तो मेरी बात दोहरा सकते हैं या शांत रह कर सुन भी सकते हैं. इस प्रार्थना से ईश्वर करें कि हमारे मन, विचार, एक दूसरे से मिल जाए।


Pattern:
[हाथ जोड़ कर कुछ क्षण मौन रहे। फातिहा या किसी दुवा का शुद्ध हिंदी अनुवाद, गायत्री मंत्र या कोई श्लोक वैगरह पढ़े. फिर कुछ वाक्यों में ईश्वर की प्रशंसा करे. फिर हर कृपा के लिए उस का धन्यवाद करे। फिर हर गलती, पाप के लिए क्षमा मांगे।  फिर उससे सहायता मांगे।  प्राथना में उस मोहल्ले के निवासियों, वहा मौजूद ऑडियंस के लिए और सभी इंसानों के लिए, कॉमन जनरल प्रोब्लमस, आम आदमी की रोज़मर्रा परेशानियों के लिए दुआ करे। समानता, तौहीद, आखिरत और रीसालत (STAR) से संबन्धित दुवाए करें। युग परिवर्तन, सतयुग, विश्वगुरु, अखंड भारत (Slogans, principles, logo, name) आदि के लिए दुवा करे. अंत में सन्देश में जो कमी रह गयी हो, उसे दूर करने की और बात को दिलों में उतरने और फैलने की भी दुआ करें.]
 
हे ईश्वर हमारे सारे अपराधो,पापों को क्षमा कर दे. हमारे सारे कष्टों, रोगों को दूर कर दे. हम सबको रोज़ी रोटी, काम धंधा दे. हमारे बच्चो का भविष्य बेहतर बना, हमारी बेटियों के अच्छी जगह विवाह करवा, हमें माँ बाप की सेवा करने वाला बना. हमें अच्छा इन्सान बना. पूरी दुनिया में शांति बना। यंहा उपलब्ध लोगों और इस मोहल्ले की सारी परेशानियां समाप्त कर दे. तू एक और निराकार है, हमें तेरी पूजा, उपासना करने वाले बना. हमें अच्छे कर्म करने वाला बना, और बुरे कर्मों से बचा ताकि हमें नरक अग्नि से बच सके और स्वर्ग के सुख भोग सके. हम तेरे दूतों, संदेशवाहकों, संदेष्टाओं के दिखाए मार्ग पर चले और उनके जैसे गुण अपना लें.
 
-------------------------------------------------------------------------------
 
समापन 

कहने को बहुत कुछ है मगर बात लम्बी हो जायगी इसलिए बस इसी के साथ मैं अपनी वाणी को विराम देता हूँ और आप सब से आज्ञा चाहता हूँ।  अब आपका ये कर्तव्य है कि इस संदेश पर कार्य करें और दूसरों तक भी इस संदेश को पहुंचाइए और आगे बढ़ाइएहर जगह हम नहीं जा सकते, आप आने घरों, रिक्षेतदारों, दोस्तों, जानकारों तक ये बात पहुंचाए और इस पुण्य कार्य में योगदान करिए। रास्ता जाने वाले की ज़िम्मेदारी होती है कि वो भटके हुए को सही रास्ता बनाए. हमें हमारे कल्याण, उद्धार का मार्ग पता लग गया है तो यह मार्ग दूसरों को भी दिखाएं। यह चैन मार्केटिंग सिस्टम की तरह काम करता हैं। हर आदमी अगले तीन आदमी को समझाए, उसका पुण्य चकवृद्धि की तरह दोगुना, चौगुना होता चला जाएगा। 
  

सत्संग सुनने और समय देने के लिए धन्यवाद।  

कुछ गलत कहने के लिए क्षमा अवश्य मांगिए। 
 
फिर नारे कहलवाएँ। 
 
फिर आज्ञा लेके वंहा पोस्टर लगा दें. पोस्टर लगाने के लिए कहें कि ये पोस्टर और नारे आपको हमार सन्देश याद दिलाते रहंगे जैसे आप मोबाइल का अलार्म कितना भी सनूज़ कर दो बार बार बज कर आपको उठा ही देता है। उसी तरह ये आपको जगाते रहेंगे। 

अंत में अगर उचित लगे तो किसी को ब्रोशर/पेंफ्लेट/लीफलेट/फ्लायर/कार्ड्स दे सकते है. 

लोगो से हाथ मिलाये, गले मिले और विदा लें.

-------------------------------------------------------------------------------

 
सतयुग और विश्वगुरु से संबधित मंत्र और श्लोक
  
राघवश्चापि धर्मात्मा प्राप्य राज्यमनुत्तमम् ।
ईजे बह‌विधैर्यज्ञैः स सुतभातृ बान्धवः ||
एक सर्वोत्तम राज्य प्राप्त कर के धर्मात्मा राम ने अपने पुत्रों और संबंधियों सहित कई प्रकार के यज्ञों द्वारा सर्वशक्तिमान को प्रसन्न किया।
(वाल्मीकि रामायण 6:128:98)

दैहिक दैविक भौतिक तापा। राम राज नहिं काहुहि ब्यापा॥
सब नर करहिं परस्पर प्रीती। चलहिं स्वधर्म निरत श्रुति नीती॥
रामराज्य में दैहिक, दैविक और भौतिक ताप किसी को नहीं व्यापते। सब मनुष्य परस्पर प्रेम करते हैं और वेदों में बताई हुई नीति (मर्यादा) में तत्पर रहकर अपने-अपने धर्म का पालन करते हैं.
(रामचरितमानस 20:1)
 
सत्यं ब्रूयात् प्रियं ब्रूयात् , न ब्रूयात् सत्यम् अप्रियम् । प्रियं च नानृतम् ब्रूयात् , एष धर्मः सनातन: ॥
सत्य बोलना चाहिये, प्रिय बोलना चाहिये, सत्य किन्तु अप्रिय नहीं बोलना चाहिये । प्रिय किन्तु असत्य नहीं बोलना चाहिये; यही सनातन धर्म है।
(मनु० 4 : 138)

सत्यमेव जयते नानृतं।
सत्य की ही सदैव विजय होती है, असत्य की नहीं।
(मुण्डकोपनिषद् 3:1:6)

सत्यं ब्रह्म सनातनम अर्थात सदा रहने वाला परमेश्वर ही सत्य है।
(शांतिपर्व महाभारत 162.5)
 
सत्यं धर्मस्तपो योग अर्थात सत्य ही धर्म है, सत्य ही तप है और सत्य ही योग है।
(शांतिपर्व महाभारत 162.5)

सद्भाव: सत्यमुच्यते अर्थात सत्ता या वास्तविकता को ही सत्य कहते है।
(शांतिपर्व महाभारत 299.45)

यद्भूतहितमत्यंत तत् सत्यम् अर्थात जो वाक्य सभी प्राणियों के लिये अत्यंत हितकारी हो वही सत्य है।
(वनपर्व महाभारत 209.4)

एतद्देशप्रसूतस्य सकाशादग्रजन्मनः। स्वं स्वं चरित्रं शिक्षेरन्पृथिव्यां सर्वमानवाः।।
इस देश में जन्में ज्ञानियों से संसार के सभी मनुष्य चरित्र व आचरण सीखें।
(मनुस्मृति : 2 : 20)
 
भारत: जगद्गुरू आसीत तथा परमेश्वरस्य कृप्या अग्रे अपि भवेत एव।
भारत जगतगुरु था और परमेश्वर की कृपा से हम फिर होंगे।
 
 
शेर और कविता। 

कोशिश करने वालों की हार नहीं होती।

मन के हारे हार है। मन के जीते जीत।

हार हो जाती है जब मान लिया जाता है। जीत तब होती है जब ठान लिया जाता है।

लोग कहते हैं कि ज़माना सब को बदल देता है, असल इंसान वो है, जो ज़माने को बदल देता है।  

कौन कहता है कि आसमान में सूराख़ नहीं हो सकता। एक पत्थर तो तबीअत से उछालो यारो। 

 
मज़हब नहीं सीखाता आपस में बैर करना..
ईश्वर अल्लाह तेरो नाम..

-------------------------------------------------------------------------------
 

[Prayer Mantra/Duwa]

 

फातिहा:  सम्पूर्ण प्रशंसा केवल उस ईश्वर के लिए है जो इस सृष्टि का पालनहार है। जो अत्यंत दयावान और कृपा करने वाला है। जो उस दिन का स्वामी है जिस दिन हमारे लिए स्वर्ग और नर्क का निर्णय किया जायेगा। हे ईश्वर हम केवल तेरी उपासना करते हैं और तुझसे ही सहायता मांगते है। हमें सत्य का मार्ग दिखा और उस पर चला। वह मार्ग जिस पर चलकर लोगों की कल्याण हुआ। हमें उस मार्ग से बचा जिस पर लोग भटक जाते हैं कर अंधकार में चले जाते है, तेरा प्रकोप झेलते हैं।

 

अत्तहियात:  प्रत्येक जीवन प्रदान करने वाली गुणों, कृपाओं और शुद्धियों का स्रोत ईश्वर है। ईशदूत पर शांति, कृपा और आशीर्वाद हो। हम सभी ईश्वर के भक्तगणों पर भी शांति हो। हम साक्षी है कि महामद ईशदूत हैं।

 

दरूद:  हे ईश्वर कृपा कर और दया कर महामद और परिवार पर जैसे कि तूने पहले की अबराम पर और कुटुम्ब पर। निःसंदेह तू प्रशंसा के योग्य है और यशस्वी तेजस्वी है।

 

दुआ:  हे ईश्वर हमें  इहलोक और परलोक की सभी अच्छाई, भलाई और सुविधाएं प्रदान कर और नरकाग्नि से बचा।

 

क़ुनूत:  हे ईश्वर, हम तुझसे सहायत चाहते हैं और क्षमा मांगते हैं। तुझे में विशवास करते हैं और तुझ पर ही निर्भर करते हैं।  तेरी प्रशंसा करते हैं और तेरा आभार व्यक्त करते हैं। हम तुझे स्वीकारते हैं और उसकी संगति छोड़ते हैं जो तेरा निरादर करता हो। हम तेरी ही उपासना करते हैं और साष्टांग करते है। हम तेरी सेवा में सदैव तत्पर हैं। हम तेरी दया की आशा करते हैं और तेरे दंड से बचने को आश्रय चाहते है।

 

कुर्सी: ईश्वर के अतिरिक्त कोई प्रभू नहीं है। वह अमर है। उसे न निद्रा आती है और न ही ऊंघ। आकाश और पृथ्वी में सब उसी का है। उसकी अनुमति के बिना कोई हस्तक्षेप नहीं कर सकता। वो दृश्य अदृश्य सबको देखता है। वो जिसे चाहे, वही ज्ञान पाता है। उसका शासन धरती और आकाश को घेरे हुए है जिनकी रक्षा उसके लिए तुच्छ कार्य है। वह उच्चतम और महानतम है।

 

सामानो मंत्र समिति: समानी। समानम मन: सह चित्तमेषाम।

समानं  मंत्रमभि मंत्रये व: समानेम वो हविषा जुहोमि।

हम सब का मंत्र, स्तुतियां समान हों। हमारे मन और चित्त समान हो। मैं एक ही मंत्र से तुम सबको अभिमंत्रित करता हूँ। एक ही हवि से तुम्हारा हवन करता हूँ।

 

समानी प्रपा सहवोऽन्भागः।

तुम्हारा पीने का स्थान एक हो, तुम्हारे अन्न का भाग भी साथ साथ हो। और मिलजुल कर उस प्रभु का पुजन  करो।

 

सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामयाः। सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मा कश्चिद् दुःखभाग्भवेत्॥

हे ईश्वर, सभी सुखी होवें, सभी रोगमुक्त रहें, सभी मंगलमय घटनाओं के साक्षी बनें और किसी को भी दुःख का भागी न बनना पड़े!

 

ओ३म् द्यौ: शान्तिरन्तरिक्षं शान्ति:, पृथिवी शान्तिराप:...ओ३म् शान्ति: शान्ति: शान्ति:॥

अर्थात हे परमेश्वर द्युलोक में शांति हो, अंतरिक्ष में शांति हो, पृथ्वी पर शांति हों...ओ३म् शांति शांति शांति भव।

 

असतो मा सद्गमय।तमसो मा ज्योतिर्गमय।

मुझे असत्य से सत्य की ओर ले चलो। मुझे अन्धकार से प्रकाश की ओर ले चलो। मुझे मृत्यु से अमरता की ओर ले चलो.

--------------------------------------------

 
करुणा कार्यों में बातचीत 

संस्था का परिचय और कार्य बताने का उद्देश्य है, कि हमें देख कर लोगों के मन में जन मानस की सामाज सेवा और दुसरो के प्रति करुणा की भावना बढे। ऐसा कहते हैं न कि खरबूजा खरबूजे को देख कर रंग बदलता है. आपने हमारे नारों से क्या सीखा क्या अप बता पायंगे?
 

 


No comments:

Post a Comment

दर्शन विज्ञान और ईश्वर

   दर्शनशास्त्र की 3 शाखाएँ हैं:- I. तत्वमीमांसा/ तत्वज्ञान (Metaphysics - beyond physics/theory of reality) [तत्व, अस्तित्व, वास्तविकता का ...