Thursday, 6 June 2024

मानव प्रजाति की उत्पत्ति (भाग 1-वैज्ञानिक दृष्टिकोण)


विकासवाद के सिद्धांत के बाद मुस्लिम धर्मशास्त्रियों और विद्वानों ने तीन तरह से प्रतिक्रिया दी। एक समूह का मानना ​​है कि विकासवाद का सिद्धांत इस्लाम की शिक्षाओं से पूरी तरह असंगत और विरोधाभासी है। दूसरा समूह सिद्धांत के कुछ हिस्से को इस्लाम से जोड़ता है। तीसरा समूह सिद्धांत को स्वीकार करता है।
 
 
विज्ञान यह बताता है कि लगभग 13.8 अरब साल पहले बिग बैंग धमाके से सृष्टि का निर्माण होना शुरू हुआ और 4.5 अरब साल पहले पृथ्वी ग्रह की उत्पत्ति हुई। एक थ्योरी के अनुसार पृथ्वी पर पहले से ही गैस और डस्ट क्लाउड के रूप में पानी मौजूद था मगर एक दूसरी थ्योरी के अनुसार 4 अरब साल पहले पृथ्वी का अधिकतर पानी किसी बाहरी एस्टरॉयड या कॉमट के ज़रिए आया। जो भी कारण रहा हो मगर आज से 3.8 अरब साल पहले पृथ्वी की पूरी धरती पानी में डूबी हुई थी। फिर 3 अरब साल पहले पृथ्वी की भूमि उभरना शुरू हुई और अंत में 1 अरब साल पहले पानी से बाहर निकल आई। लगभग 33 करोड़ साल पहले Pangaea, the super continent (सातों महाद्वीपों का मिला हुआ भूभाग) ने अपना आकार लिया। 20 करोड़ साल पहले यह टूट कर अलग होना शुरू हुआ और फिर अंत में 5 करोड़ साल पहले तक यह आखिरी बार टूट कर काफी हद तक वर्तमान महाद्वीपों के रूप में ढल गया।
 
ऐसा माना जाता है कि जब धरती पर पानी ही पानी था तब यानी तकरीबन 4 अरब साल पहले पानी के अंदर सबसे पहला living & non living के बीच का एक organism पैदा हुआ जिसे first universal common ancestor (the probability of creation of life in a non living things is 10^50 means 1 followed by 50 Zero) कहा जाता है। हम जानते हैं कि हर जीवित प्राणी के शरीर का सबसे बड़ा घटक पानी है। ये organism असल में कुछ elements थे जिनसे एक molecule बना और जो एक cell भी नहीं था। मगर यह खुद को replicate कर सकता था। 3.8 अरब साल पहले यह एक half living cell बन गया यानी सभी सजीवों का last common ancestor जैसे फंगा, बैक्टीरिया, पेड़-पौधों, जानवर आदि सभी का। इसमें वो 355 genes मौजूद थी जो आज भी हर सजीव में उपलब्ध हैं। इंसान के genome में 20-25 हज़ार genes होते हैं। 2.2 अरब साल पहले बैक्टीरिया बनने शुरू हुए और बाद में ये एलगाई, फंगाई, प्लांट और अनमिल किंगडम में बंट गए। 90 करोड़ साल पहले multi cell or multi cellular organism यानी एक साथ cells survive करना शुरू हुए। 

55 करोड़ साल पहले सभी जानवरों का एक common ancestor (Ikaria Wariootia) यानी एक worm हुआ। 48 करोड़ साल पहले सर्वप्रथम spine सहित एक तरह की मछली हुई। फिर 37 करोड़ साल पहले एक समुद्री जीव हुआ जिसने पानी के बाहर आना-जाना शुरू किया। 36 करोड़ साल पहले समुद्री और ज़मीनी यानि दोनों जगह रहने वाले जीव पैदा हुए जैसे मेंढक, कछुवे, मगरमच्छ आदि। इसके बाद छिपकलियां, सांप आदि हुए। 

इनसे ही फिर 23 करोड़ साल पहले डायनासौर निकले। 22 करोड़ साल पहले सबसे पहला चूहे जैसा मैमल हुआ। इसके बाद इसी के जैसा एक जीव हुआ जो मैमल होने के बावजूद अंडे दिया करता था। ऐसा माना जाता है कि 6.5 करोड़ साल पहले एस्टरॉयड ने डायनासौर को खत्म कर दिया जिससे मैमल के लिए इवॉल्व होना आसान हो गया। सभी मैमल का एक common ancestor था जो ज़मीन पर रहता था और जिससे निकले कुछ जीव वापिस पानी में रहने के लिए चले गए जैसे व्हेल और डॉल्फिन जो कि मैमल हैं।

मैमल में बच्चें 3 तरह से बनते हैं, कोख में, पाउच में, अंडे में।  4 करोड़ साल पहले दक्षिणी अमेरिका, अंटार्टिका (जो तब जंगल था) और ऑस्ट्रेलिया अलग हुए जो पहले एकसाथ जुड़े हुए थे। इसी समय ही हिमालय भी उभरा था। इसलिए पाउच वाले जीव सिर्फ ऑस्ट्रेलिया में पाए जाते हैं क्योंकि ऑस्ट्रेलिया बिल्कुल अलग हो गया था जबकि दक्षिण अमेरिका के घने जंगलों में बाकी जानवरों के साथ इनका सरवाईव करना और अंटार्टिका का बर्फ से ढक जाना, इन्हें वंहा ज़िंदा रहने के लिए भारी पड़ा।



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एवोल्यूशन केवल एक प्रकार से नहीं बल्कि प्राकृतिक तौर पर हर संभव प्रकार से हुआ। आंशिक एवोल्यूशन या छोटे स्तर पर आज भी जारी है। विज्ञान common ancestor की थ्योरी में विश्वास रखता है। आज विज्ञान fossils, DNA, behavioral pattern के आधार पर यह मानता है कि इंसान Hominin से विकसित हुए हैं, न कि सीधा सीधा Primates से। केवल इंसान ही है जो भाषा और जटिल औज़ार प्रयोग कर सकता है। जैसे जैसे Hominin का विकास होता गया, इनके brains बड़े होते चले गए जिससे इनकी बुद्धिमता बढ़ती चली गई। इसके साथ ही इनके चेहरे भी कम robust होते चले गए जिससे ये इंसानी शक्ल लेते चले गए। ऐसे ही इनके शरीर का विकास भी हुआ।



सबसे पहले कुछ बातों को वर्गीकरण करके समझ लेते हैं:-


 
★ Apes: ये हैं gorillas, bonobos, orangutans, chimpanzees (giant ape) और gibbons, siamangs (small ape). ये चीज़ें पकड़ने के लिए पैरों का इस्तेमाल कर सकते हैं जबकि इंसान इसे इतने कुशल तरीक़े से नहीं कर सकता।

Primates: इसमें आते हैं lemurs, lorises, apes, monkeys. बंदरो की तरह दिखते और रहते हैं। ये सबसे प्राचीन हैं। यह इंसान के relative माने जाते हैं, न कि पूर्वज। 

★ Anthropoid: इसमें लुप्त हो चुके और अभी उपलब्ध सभी बंदर नुमा प्रजातियां (apes, monkeys etc) आती हैं।



★ Hominoid/Hominoidea: इसमें सभी apes जैसे great apes (बड़े आकार वाले), lesser apes (छोटे आकार वाले) + humans आते हैं. इनकी पूंछ नहीं होती है और दो पैरों पर चलते हैं।

★ Hominid/Hominidae: इसमें केवल great apes + hominin and humans आते हैं। इस ग्रुप में giant ape और उनके लुप्त हो चुके पूर्वज हैं। ये सभी बड़े दिमाग, दो पैरों पर चलने वाले, औजारों के इस्तेमाल करने की क्षमता रखने वाले हैं. 
इनकी पुंछ नहीं होती, समान ब्लड ग्रुप्स होते हैं। 

★ Hominin: इस ग्रुप के अंदर सभी Homo sapiens और उनके लुप्त हो चुके सभी पूर्वज आते हैं। इनको ही modern human का direct ancestor माना जाता है। इनमें फिर genus homo जन्में जो इंसान के सबसे करीबी relative हुए
 
Genus Homo/Homo Genus: इसमें आते हैं, habilis, eractus, neanderthals, denisovans, sapiens etc.





अब बात करते हैं उन प्राणियों की, विज्ञान मतानुसार जंहा से मानव की उत्पत्ति का संबंध बनता है।


● Treeshrews यह 6.5 करोड़ साल पहले tree dwelling squirrel like mammal यानि पेड़ पर रहने वाला चार पैरों वाला स्तनधारी जानवर था जो कीड़े, फल, पत्ते खाता था। संभवत यह फल आदि खाने की चाह में पेड़ों पर चढ़ा था।


● Aegyptopithecus: 3 करोड़ साल पहले।

इससे लगभग 2.5 करोड़ लाख साल पहले दो शाखाएँ निकली:-

∆ Hominoid lineage: जिसमें humans और apes आते हैं, दो पैरों पर चलने और बिना पूंछ वाले।
∆ Cercopithecoid lineage: जिसमें बंदर, लंगूर, बबून आते हैं, चार पैरों पर चलने और पूंछ वाले।


●  Proconsul: यह 2.3-1.4 करोड़ साल पहले था जिसकी पूंछ नहीं थी। इनमें से कुछ ने दो पैरों पर मशक्कत के साथ थोड़ी सी दूरी तक चलना शुरू किया और धरती पर कदम रखें। संभवतः इसीलिये इनकी पूंछ भी गायब हुई क्योंकि पूंछ की ज़रूरत तो पेड़ों पर थी और ज़मीन पर वह एक परेशानी बन रही थी। ये  humans और apes के पूर्वज थे। इन्हें इंसान का सबसे प्राचीनतम पूर्वज माना जाता है।


● Sahelanthropus: पेड़ों पर रहने वाली प्रजातियों में से यह प्रजाति लगभग 70-60 लाख साल पहले अफ्रीका में सर्वप्रथम दो पैरों पर सीधा खड़े होकर पूरी तरह चलने में सफल हो पाई जिसके कारण इन्होंने अपने हाथ अन्य कामों के लिए प्रयोग करना शुरू किये। ये हमेशा दो पैरों पर नहीं चलते थे हालांकि हम यह स्पष्ट नहीं जान पाए हैं कि ये जमीन पर रहते थे या पेड़ पर या फिर दोनों जगह पर आमतौर पर इनको  humans और chimpanzee का पूर्वज माना जाता है।



 
इसके बाद इनसे अलग अलग प्रजातियां निकलती गयी जैसे:-

¶ Ardipithecus: 58-44 लाख साल पहले अफ्रीका में। इनमें Ramidus, Kadabba जैसी उपप्रजातियाँ आती हैं। यह सबसे पहले पूरी तरह दो पैरों पर चलने वाले बने पर ये जमीन पर बहुत धीमे थे। फल आदि इकट्ठा करके खाते थे, जोड़ा बना कर रहते थे और बच्चों को दोनों साथ पालते थे। शायद यही इंसानी खानदान की पहली शूरवात थी।



¶ Australopithecus: 40-20 लाख साल पहले अफ्रीका में। इनमें Africanus, Afarensis, Anamensis जैसी उपप्रजातियाँ आती हैं। 

इनमें Australopithecus Africanus (African Ape-man) 39-29 लाख वर्ष पूर्व थे जो सोशल ग्रुप में रहते थे। इन्होंने सबसे पहले धरती यानि जमीन को अपना पूरी तरह घर बनाया। ये पूरी तरह से दो पैरों पर चलने वाले थे। दो पैरों पर खड़े हो जाने के कारण इनके शरीर नसों और हड्डियों में हुआ परिवर्तन सबसे महत्वपूर्ण था। इन्होंने धारधार हथियारों का इस्तेमाल शुरू किया मगर इन्हें वो ख़ुद नहीं बनाते थे बल्कि प्राकृतिक तौर पर मिलने वाले शार्प ऑब्जेक्ट्स हथियार की तरह इस्तेमाल करते थे। ये गिरोह बना कर रहते थे और पौधे, जड़ इत्यादि भी खाते थे। यह सर्वहारी थे और इंसान के पूर्वज माने जाते हैं।



• Lucy: यह एक आरंभिक australopithecine ढांचा है, जो इथियोपिया में पाए गए पहले hominin fossils में से एक है और 3.2 मिलियन वर्ष पुराना है। उसका कंकाल 40% पूर्ण है। वह अब तक ज्ञात सबसे पूर्ण early hominin थी। यह कोई बंदर नहीं बल्कि एक होमिनिन थी। वह दो पैरों पर चलने वाली और सीधी थी। उसका कद आरंभिक होमिनिड्स में minor sexual dimorphism (स्त्री पुरुष शारीरिक बनावट में, यौनांग से अलग दिखने वाले अंतर) का संकेत देता है।



¶ Paranthrous: 27-12 लाख साल पहले अफ्रीका में। इनमें Boisei, Robustus, Aethiopicus जैसी उपप्रजातियाँ आती हैं। यह शाकाहारी थे जिसकी वजह से इनके teeth, jaws बड़े थे और ये robust facial features के थे। ये सोशल ग्रुप में रहते थे। ये इंसानी शाखा से अलग शाखा थी जो लुप्त हो गयी





अभी तक प्राप्त जीवाश्म के आधार पर स्पष्ट है कि इस धरती पर बहुत सी Genus Homo प्रजातियां (लगभग 14, संख्या पर मतभेद हैं) रही हैं जो मूल रूप से शिकारी थी जैसे:-
 

■  Homo Habilis: 24-14 लाख साल पहले यह अफ्रीका में एक प्राचीनतम species थी. इन्होंने सर्वप्रथम stone tools प्रयोग किये और इसीलिए इन्हें handyman कहा जाता है। इन्होंने सबसे पहले पत्थरों, हड्डी आदि के औजारों को बनाना और उनका इस्तेमाल करना शुरू किया। इनकी ऊंचाई 3-4 फ़ीट होती थी। शिकार से ज़्यादा मरे पाए गए जानवरों का माँस या दूसरे जानवरों से छीन कर माँस खाते थे। ये बॉन मैरो खाते तो इनके दिमाग के आकार भी बड़े होना शुरू हुए। इनकी कोई भाषा (सांकेतिक आदि) थी या नहीं, अभी तक अज्ञात है।

●  Homo Rudolfensis: यह लगभग 24-19 लाख साल पहले थे। यह इंसान के direct ancestor नहीं थे बल्कि एक अलग शाखा बन गए थे।

●  Homo Antecessor: यह लगभग 12-8 लाख साल पहले थे। यह भी इंसान के direct ancestor नहीं थे और अलग शाखा बन गए थे।


■  Homo Erectus/Ergaster: ये 19 लाख - 1.5 लाख साल पहले तक और सर्वप्रथम Africa छोड़ने वाली species थी जो एशिया और यूरोप पहुंचे थे।  Habilis को Eractus के पूर्वज माना जाता है. ये पूरी तरह से सीधा खड़ा होकर चलते थे। इनके हाथ पांव से छोटे थे और काफी हद तक इंसानों जैसा शरीरिक संतुलन था, साथ ही बढ़िया सामुहिक शिकारी भी थे। इन्होंने सर्वप्रथम शिकार करके मांस खाना आरंभ किया। ये मांस को सुखा कर सुरक्षित रख लेते थे। इनके शरीर को भरपूर प्रोटीन मिलने से इनके दिमाग बड़े होने शुरू हुए। प्राकृतिक आग का संरक्षित रखते थे और बाद में यानी लगभग 10 लाख साल पहले इन्होंने आग जलाना भी सीख लिया था। इन्होंने लगभग 5 लाख साल पहले मांस को आग पर जला कर खाना शुरू किया जिससे इनके दिमाग बड़े और दांत, आंतें छोटी होती गई। समाज बना कर आपसी समझ से जीवन बिताते थे और टूटी फूटी भाषा में संवाद करते थे यानी एक proto language ज़रूर थी। इन्हें sapiens का पूर्वज और करीबी रिश्तेदार माना जाता है।



● Homo Greorgicus: ये 18 लाख साल पहले तक थे। इनका जीवाश्म जॉर्जिया में पाया गया है। ये अफ्रीका से बाहर जाने वाली शुरआती प्रजातियों में से एक थी। कुछ वैज्ञानिक इन्हें eractus से ही निकली एक उपप्रजाति मानते हैं। 


● Homo Heidelbergensis: ये 8-2 लाख साल पहले थे। माना जाता है कि इनमें से ही Denisovans, Neanderthals, Homo Sapiens का एक Common Ancestor Africa में 8-6 लाख साल पहले रहा करता था जिससे ये तीनों निकले होंगे और दुनिया में अलग अलग Species के रूप में विकसित हो गए होंगे। ये साधरण shelter बनाकर रहते थे।


●  Homo Denisovans: ये 4 लाख - 30 हजार साल पहले Asia और Europe में थे. इन्होंने Neanderthals & Sapiens के साथ interbreeding करी। Denisovans के कुछ DNA अंश (6%) पापुआ न्यू गिनी से फ़िजी आईलैंड और ऑस्ट्रेलिया आदि भूभाग के लोगों में पाए गए हैं यानि इनका और Modern Humans में सम्पर्क रहा है। ये औजार निर्माता थे और आवासों का निर्माण भी करते थे। ये समाज बना कर रहते थे। इनके बरियल सबसे पहले के हैं। ससाइबेरिया की एक गुफा से इनके अवशेष मिले थे। कुछ लोग यह मानते हैं कि ये Sapiens से अलग एक प्रजाति है और कुछ यह मानते हैं कि ये Neanderthals की ही एक उपप्रजाति है। ये इंसानों के cousins माने जाते हैं।


●  Homo Neanderthals/lensis: ये 4 लाख - 40 हजार साल पहले Europe और West Asia में थे। ये सैपियंस से पहले ही मिडल ईस्ट पहुँच चुके थे और उनसे बुद्धि और शारीरिक तौर पर अधिक सक्षम थे। इनके शवों से मिले सबूतों से लगता है कि इनके कुछ रीति रिवाज थे। इनकी और सैपियंस की इंटेरबरीडिंग हुई थी और इतने बड़े स्तर पर हुई कि शायद इसी कारण से ये लुप्त हो गए। इसीलिए अफ्रीका से बाहर के वासीयों को अपने जींस (जीनोम) का 2% भाग इन्हीं से मिला है। ये ठंडे प्रदेशों में रहते थे और नजदीक से शिकार करके खाते थे। ये पेंटिंग, पंखों से आभूषण बनाते थे। समाज मे रहते थे। निएंडरथलस कभी कभी अपने ही लोगों का मांस भी खाते थे। ये पूरी तरह नहीं बोल नहीं सकते थे, सिर्फ कुछ आवाज़ें ही निकाल सकते थे यानी ये बोलने सुनने की क्षमता रखते थे और मुर्दा को दफनाते थे। ये इंसानों के close relatives, cousins माने जाते हैं।


■ Homo Sapiens/Modern Humans: ये 3 लाख साल पहले Africa में उभरे और फिर प्युर विश्व में फैल गए। लगभग 70-50 हजार साल पहले इन्होंने अफ्रीका से एशिया की धरती पर कदम रखा था। लगभग 45000 साल पहले तक ये पूरे यूरोप और वेस्ट एशिया में फैल चुके थे। Eractus को Sapiens के पूर्वज माना जाता है।
 
Homo Sapiens आरंभ से ही मूलभूत तौर पर Modern Human की तरह ही थे मगर समय, जलवायु आदि के साथ और बेहतर विकसित होते हुए इनमें थोड़ा-बहुत बदलाव भी आया है। आरंभ में इनका दिमाग 1200-1400 क्यूबिक सेंटीमीटर होता था और अब सामान्यत 1250-1350 होता है। आधुनिक मानव के मस्तिष्क का पूर्ण आकार लगभग 3-1 लाख वर्ष पहले प्राप्त हुआ था। वैसे मॉडर्न होमो सैपियंस को ही प्योर मॉडर्न हुमन माना जाता है। इन्हें दो भागों में भी बांटा जाता है यानी archaic homo sapiens (1.5 लाख साल से पहले वाले) and modern homo sapiens (1.5 लाख साल पहले से)

इसका सबसे पुराना fossils 3 लाख साल पुराना मोरोको से मिला है जिसमें प्राचीन और आधुनिक दोनों इंसानी फीचर मौजूद हैं। जबकि इथोपिया से प्योर मॉडर्न हुमन के 1.95-1.60 लाख साल पुराने Fossils मिले हैं जो पूरी तरह से मॉडर्न एनाटोमिकल फीचर रखते हैं जैसे ऊंचा-गोल ब्रैनकेस और ठुड्डी। यानि बाद में यह species अधिक से अधिक इंसानी रूप लेती चली गई। होमो सेपीएन्स की सबसे पुरानी burial, एक लाख साल पुरानी, इसराईल में मिली है जिसमें कुछ रिवाजों के द्वारा मौत व उसके बाद के जीवन की ओर संकेत किया गया है।

यह neanderthals से जेनेटिक तौर पर भिन्न Species है और दोनों में Interbreeding होती रही है। 40 हजार साल तक Sapiens और Neanderthals एक साथ Europe और Asia में विचरण कर रहे थे। Denisovans, Neanderthals, Sapiens तीनों प्रजातियाँ एक साथ एक समय पर अस्तित्व में रही हैं।  

निएंडरथल और सेपीएन्स के बीच 1 लाख साल से अधिक वर्षों तक युद्ध चला था। ये पहले से ही यूरोप, मध्य पूर्व और एशिया में स्थापित थे। इन्होंने अफ्रीका से हो रहे मानव प्रवास को काफी हद तक विलंबित किया मगर अंत में कुशल हथियारों और रणनीति के कारण मानवों ने इन्हें हरा दिया।

इनमें पहले से कई गुना अधिक रीज़निंग गुण, एब्सट्रेक्ट आर्ट और थिंकिंग पाई गई है। इन गुणों के पैदा होने के पीछे इनके द्वारा खाया जाने वाला एक विशेष मशरूम को माना जाता है जिससे इनके दिमाग बेहद ज्यादा विकसित हुए। 40-10 हजार साल पहले इन्होंने कुशल औज़ार बनाने और मिट्टी, लकड़ी, खालों की मदद से रहने के लिए मजबूत शेल्टर बनाना सीख लिए थे। इन्होंने अपनी सारी कमियों को अपने कुशल औजारों से दूर कर लिया। दसियों हजार साल पुरानी इनकी बनाई कलाकृतियाँ (artifacts), cave paintings, burial rituals यह इशारा करते हैं इनके कुछ धार्मिक या आध्यात्मिक विश्वास भी थे। इन्होंने कुंबो को बनाना और चलाना शुरू किया और इस सामाजिक परिवर्तन के पीछे सबसे बड़ा कारण धर्म को माना जाता है। समान आस्था या विश्वास होने के कारण सभी सैपियंस एक दूसरे के करीब आते गए और Neanderthals के खिलाफ भिड़ खड़े हुए।

Genus Homo में केवल यही ज़िंदा रह पाए और बाकी सब लुप्त हो गए। आज के सभी मानव इनके वंशज हैं।
 


उपरोक्त के अलावा भी कई अन्य Species रही हैं। कुछ अन्य कम महत्पूर्ण प्रजातियां जो Homo Sapiens से भिन्न हैं:-


●  Homo Naledi: ये 3.35-2.36 लाख साल पहले Africa में थे। इन्होंने ही सबसे पहले अपने मृतकों को दफनाया और गुफा की दीवारों पर चित्र बनाये जो पहले केवल सेपीएन्स और निएंडरथल (जो इनके बाद हुए) द्वारा ही किए जाते पाए गए थे। इनके द्वारा अवशेषों को गुफाओं में एक खास तरीके से दफनाया जाता था, जिसमें शवों को मोड़कर मिट्टी से ढक दिया गया था और गुफाओं की दीवारों पर काफी कुछ उकेरा भी जाता था। ये गुफाएं 2.41-3.35 वर्ष पुरानी है।

●  Homo Juluensis: ये बिलकुल अभी पायी गयी प्रजाति है जो चीन, क्रोया, जापान आदि में 3 लाख-50 हजार साल पहले रहते थे। 
 

 


 
●  Homo Floresiensis/Hobbits: ये 1 लाख - 50 हजार साल पहले तक इंडोनेशिया में रह रहे थे। यह बौने मानव की एक प्रजाति थी और एक नई प्रजाति के रूप में घोषित की गई है। पुरानी डेटिंग तकनीक के कारण इनके जीवाश्म का काल 12 हजार वर्ष पुराना बताया गया था जिसे अब नाकार दिया गया है. ये आधुनिक मनुष्यों के समकालीन (contemporary) थे। इनके छोटे रूप में विकसित होते चले जाने कि वजह यह मानी जाती कि जब ये इन द्वीपों पर पहुंचे तो यंहा भोजन बेहद कम उपलब्ध था और इसके कारण बड़े शरीर वालों का सर्वाइव करना मुश्किल होता था जिससे छोटे शरीर वाले अधिक सक्षमता से रह पाते थे।  ये इंसानों के cousins माने जाते हैं।



अब कुछ दूसरे प्रमाणों और तथ्यों पर नजर डालते हैं।

 
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विज्ञान इन प्रमाणों के आधार पर इंसानी नस्ल के बारे में इतना कुछ जान चुका है कि धार्मिक लोगों द्वारा वैज्ञानिकों के सभी के सभी तथ्यों को ठुकराना अज्ञानता और बेवकूफी है। इनमें से अधिकतर तथ्य वैज्ञानिक तौर पर ज्यों के त्यों सिद्ध किये जा चुके हैं और कुछ तथ्य अनुमान पर आधारित है (जैसे एक प्रजाति से दूसरी प्रजाति में स्थानांतरण होना)। क्योंकि रीसर्च जारी है इसलिए अभी बहुत कुछ जानना बाकी है और नए फोसिल के आधार पर इन तथ्यों में बदलाव भी हो सकते हैं। मगर इन प्रजातियों के अस्तित्व पर अब कोई प्रश्न करना गलत होगा। हालांकि इनके क्षेत्र, काल, इंटरबरीडिंग आदि जैसी सेकण्डरी बातों में नई फाइन्डिंगस के आधार पर बदलाव हो सकते हैं। 
 
Evolution theory में अब तक एक नस्ल से दूसरी नस्ल में जाने का साइन्सी मेकेनिज़्म नहीं मिल पाया है। यानि mutation का mechanism अभी तक दरयाफ्त नहीं हो पाया है कि कैसे एक species दूसरी species में बदल गई। यह सिर्फ claim किया जा रहा है। अगर यह मिल गया तो यह पूर्ण हकीकत बन जाएगा। दो species के बीच transition phase वाले fossils भी उतने प्रमाणिक तौर पर या उतनी तादाद में नहीं मिल रहे हैं जीतने वो होने चाहिए थे। इसके अलावा क्यों sapiens ही हर जगह बच पाएं और क्यों बाकी सब नसलें किसी न किसी कारण से खत्म हो गई, यह भी एक अजीब बात लगती है, हालांकि इस पर भी वैज्ञानिक अपने तर्क देते हैं जैसे शारीरिक और मानसिक तौर पर सैपियंस का अन्यों से श्रेष्ट होना। इंसानी जिस्म में tail bone होने के पीछे का कारण उसी बंदर नुमा पूर्वज को बताया जात है। इसके अलावा इंसानी जिस्म में appendix होने के पीछे यह कारण बताया जाता है कि क्योंकि इंसान evolution के नतीजे से बना है इसलिए उसमें कुछ बेकार अंग भी बने। हालांकि यही मतभेद भी दिखाई देता है क्योंकि विकास के दौरान बेकार अंगों को तो खत्म हो जाना चाहिए था। खैर, tail bone और appendix के पीछे का कारण कभी आने वाले वक्त में पता लग ही जाएगा (जैसे पैदा होने वाले बालक शिशु के पीनिस पर extra skin क्यों होती है, इसका लाभ आज हमें पता लग चुका है)।
 
Previously considered fragmented and insignificant, the "Mesentery" is now recognized as a continuous structure that plays a crucial role in holding the intestines in place. Similarly, atheists once argued that certain structures—such as the tailbone (coccyx), appendix, wisdom teeth, and penile foreskin—were vestigial, meaning they had functions in our ancestors but were no longer useful later on. However, modern research suggests that some of these organs still serve functions. In time, we may discover the roles of the remaining ones as well.
 

एवोलुशन आज भी हो रहा है, आज सीज़ेरियन ओपरेशन के कारण बड़े सर वाले बच्चे पैदा हो रहे हैं जो पहले डिलीवरी के समय मर जाते थे और प्राकृतिक तौर पर छोटे
pelvis वाली लड़कियां भी पैदा हो रही हैं जो अपनी मां से यह गुण जीन के ज़रिये इन्हेरिट कर रही हैं. यानी आने वाले समय में सीज़ेरियन और अधिक संख्या में होंगे. यह वैसे ही जैसे हाईना (लकड़भग्गो) में मादा अधिक भारी भरकम होती है क्योंकि इन जानवरों में दुसरे नर बच्चों को मार देते हैं और इसी कारण से ऐसी मादाएं अपना यह जीन आगे बढाती हुई आई हैं।
 
 
इसलिए अब पहला सवाल यह उठता है कि अगर आदम पहले इंसान थे तो वो किस काल में थे? अगर वो इन सभी प्रजातियों से पहले थे (25 लाख साल से भी अधिक पहले) तो फिर होमो सैपियंस (शुद्ध इंसानी शरीर वाले प्राणी) की उत्पत्ति ही 3 लाख साल पहले कैसे हो रही है?
 
और अगर आदम होमो सैपियंस प्रजाति में या इनके काल में हुए थे तो फिर उनसे पहले ये इंसानी नसलें कैसे मिल रही हैं? यंहा तक कि आदम के समकालीन, सैपियंस जैसी कई नसलें जिंदा थी (लगभग 50K साल पहले तक)।

अगर आदम को वाकई मिट्टी से बनाया गया था तो फिर वो इन प्रजातियों या खासतौर पर सैपियंस की नस्ल से नहीं हो सकते बल्कि वह एक अलग ही नस्ल होनी चाहिए क्योंकि यह नस्लें तो प्राकृतिक तौर पर जन्म ले रही हैं और विज्ञान यह भी सिद्ध कर चुका है कि आज के दुनिया के तमाम इंसान सैपियंस से ही निकले हैं।
 
इसलिए आदम किसी पूर्व प्रजाति के वंशज ही हो सकते हैं।
 
 
 
2■
Mitochondrial Eve and Y-chromosomal Adam are terms used to describe the most recent common ancestors of all humans alive today through direct maternal and paternal lineages respectively. Mitochondrial Eve's mitochondrial DNA is the source of the mtDNA found in all living humans. She lived about 1.5-2 lac years ago in Africa. Y-chromosomal Adam's Y-chromosomes is the source of the Y-chromosomes/DNA found in all living males. He lived about 2-3 lac years ago in Africa. Previously, it was thought that they both did not necessarily live at the same time but the possibility could not be totally ruled out that they were contemporaries or part of the same population. That's why as per new studies, he lived around 2-1.2  lac years ago and she around 1.48-0.9 lac years ago and they may have lived at the same time and in approximately the same region. Somewhere back in time, they both also had a common ancestor. Their existence highlights that certain lineages died out, leaving these two as the most recent common ancestors in their respective lines. They were part of a larger population and they are not the only ancestors of all humans, but they are the point at which all current mtDNA and Y-DNA converge.The Out of Africa theory suggests that all modern humans originated from a common population in Africa before spreading around the globe around 70K years back. It is roughly estimated that he lived around 208000 years ago and he was 8317th generations ago of ours (on the basis of avg. age 25 years per generation).
 
हम जानते हैं कि वैज्ञानिक स्वयं इसी काल में archaic homo sapiens (1.5 लाख साल से पहले वाले) and modern homo sapiens (1.5 लाख साल पहले से) में दिखे रहे विशेष अंतर को स्वीकार करते हैं। इसके अलाव वैज्ञानिक बताते हैं कि इसी काल में (1 एक लाख साल पुरानी, इज़राईल में) homo sapiens की सबसे पुरानी कब्रगाह में रिवाजों के द्वारा मौत के बाद के जीवन की ओर संकेत किया गया है। वैज्ञानिक यह भी मानते है कि इसी काल में homo sapiens ने कुंबो को बढ़ाना शुरू किया और इस सामाजिक परिवर्तन के पीछे कारण धर्म था।

ये आदम और हव्वा ही हो सकते हैं। बेहद संभावना है कि आने वाले अनुसंधानों में इनके विवरण, काल आदि बिल्कुल स्पष्ट हो जाएँ। 


3■
An ancestral bottleneck in evolution is a significant reduction in a population's size due to events such as natural disasters, disease, or environmental change, leading to a loss of genetic diversity and an increase in genetic drift. The surviving population eventually becomes the ancestor of future generations. This has occurred many times in the evolutionary history of humans, but sometimes it was very significant as mentioned below. Such bottlenecks have been found in animals as well. Regional or communal bottlenecks also took place like in Native Americans (15K years ago) and in Ashkenazi Jews (1K years ago). 

● Pleistocene Bottleneck 
in Africa and Eurasia among possibly heidelbergensis (900K–800K years ago) and lasting more than 100K years wherein nearly 1280 (1K–1.5K) breeding individuals and total a few thousand (5K-10K) remained.

● Toba Bottleneck
 in primarily Sub-Saharan Africa among h. sapiens (74K years ago) wherein 1K–10K effective individuals and total 2K-30K individuals remained (the severity of this bottleneck is debated).

● Out of Africa Bottleneck in 
non African areas like Eurasia, Australia, etc among h. sapiens of non African founders (70K-50K years ago) wherein only 150–2K breeding individuals remained.

● Y Chromosome Bottleneck 
in primarily Eurasia among h. sapiens (7K–5K years ago) wherein only a few thousand (1K-5K) male breeders remained (female to male ratio was like 17:1 in certain areas, while global estimates varying from 4:1 to 20:1).
 
अब आप खुद अंदाजा लगाइए कि इनमें से वो कौन सा समय रहा होगा जब सिर्फ आदम-हव्वा, उनकी औलादें रही होगीं और वो कौन सा समय रहा होगा जब नुह, उनके साथी रहे होंगे. ये भी अजीब बात है कि जब भी इंसानी दौर में ऐसे समय आये, ठीक उसी समय आरंभिक प्रजातियों की संख्या कम हो गयी. 

 
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ऐसा माना जाता है कि सैपियंस ने 1 लाख-50 हजार साल पहले भाषा बोलना शुरू किया। क्योंकि तभी से इंसानी शरीर में बोलने से संबंधित हड्डी/अंग पाए गए हैं। हालांकि बोलने और भाषा संबधित जीन इंसान में पहले से मौजूद थे मगर पहले इसका पूर्ण विकास नहीं नहीं हो पाया था।

इन तथ्यों के आधार पर पता लगता है बोलने में अक्षम नसलें, असल इंसान नहीं हो सकती और ये ज़रूर असल इंसान से पहले रही होंगी। 

इस काल में या इसके बाद ही आदम हो सकते हैं, इस काल से पहले नहीं। हम जानते हैं कि आदम को जुबान आती थी और दुनिया के इम्तिहान से पहले उन्हें नाम सीखाए गए थे।



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इसके साथ ही 70-50 हजार साल पहले इंसानी व्यवहार और संस्कृति में जटिल और महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिले हैं जिसे the great leap forward/ upper paleolithic revolutionCognitive revolution/ Behavioral modernity [the emergence of modern human thought and culture like art, complex tools, language, abstract thought] नाम दिया गया है। इस काल में उत्कृष्ट औज़ार, कला, चित्र, आभूषण, मृतक संस्कार, सामाजिक तानाबाना आदि देखने को मिलता है। इसी काल में इंसान अफ्रीका से बाहर निकला। 


इस काल में हुए मानव समाज व जीवन संबंधित उत्थान, तीर्व बदलाव आदि से ऐसा लग रहा है जैसे इसी समय में इंसान ने इंसानो जैसा जीवन जीना शुरू किया यानी इससे पहले इंसान ऐसा नहीं था जैसा उसे होना चाहिए था या जैसा वह आज है।
 
शायद यही आदम की फैल चुकी नस्लों का समय रहा हो। आदम से ही असल इंसान की रिहाईश दुनिया में शुरू हुई। इसी समय में सैपियंस का पलायन हुआ। हम जानते हैं कि आदम के अरब से हिन्द आने के या हिन्द से अरब जाने के, दोनों ही तरह के प्रमाण ग्रन्थों में मौजूद हैं।

हम जानते हैं कि आदम की उम्र हजार साल या उससे ज्यादा थी और नूह तक भी लगभग इसके आस पास तक ही इंसानी उम्र हुआ करती थी। यानि आदम की सिर्फ कुछ नस्लों ने ही इतने लंबे काल को व्यतीत कर लिया था। (ऐसा भी हो सकता है कि इनकी इतनी ज्यादा उम्र समझने में हमें कोई गलती लगी हो।)

 
 
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हमें इन प्रजातियों के लाखों साल पुराने प्रोटो लेंगवेज, सामाजिक गिरोह, आवास निर्माण, कलाकृतियाँ, गुफा चित्रकला, आभूषण, बरियल, दफनाने, रीति रिवाज़ो के प्रमाण मिल रहे हैं। अभी तक इंसानों को या उनके किसी भाग को प्रदर्शित करने वाली सबसे पूरानी पेंटिंग्स 40 हज़ार साल से ज़्यादा पुरानी नहीं है। इन्सानों से ज़्यादा जानवरो का चित्रण करा जाता था।

हो सकता है, इन सब चीजों का पूर्ण या आंशिक भाग, इन प्राचीन प्रजातियों ने खूद अपने आप से ही विकसित कर लिया हो, या फिर शायद रूहानी इंसानों की देखम देख यानि आदम या आदम की शूरवाती नस्लों के दिए धर्म के प्रभाव में।

लगभग 15-20 लाख साल पहले इन इंसानी नस्लों ने प्रकृति (बिजली, जवालामुखी द्वारा उत्पन्न) से पायी जाने वाली आग को अवसरिय प्रयोग करना शुरू किया. आग में पके खाने से इंसानी दिमाग और विकसित हुए क्योंकि पेट को भोजन पचाने के लिए कम ऊर्जा लगने लगी. फिर इन्होने लगभग 3-8 लाख साल पहले आग का नियंत्रित उपयोग करना सीख लिया यानी इसे संभाल के जलाये रखना. फिर 1.5-3 लाख साल पहले इन्होने आग को (पत्थर,लकड़ी से) जलाना भी सीख लिया था, मगर ये चंद प्रमाणों पर आधारित अनुमान है जबकि अधिकतर प्रमाण अनुसार खुद से आग जलाने की शुरवात या इसमें दक्षता प्राप्त 50K-1.5 लाख साल पहले हुई थी.  कुछ परिंदे भी आग लगाना और फैलाना जानते हैं। नस्ल दर नस्ल उपयोगी औषधियों के बारे में जानवर भी जानते हैं। हम जानते हैं कि आग जलाने की कला आने के बाद इंसान दुनिया में हर जानवर से ऊपर आ गया. 
 


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धार्मिक और आध्यात्मिक आस्थाओं या मान्यताओं के पुरातात्विक सबसे पुराने सबूत तुर्की से 10 हजार साल पुराने मिले हैं।
 
ये सभी इंसानी गुण हैं। इसलिए ऐसा लगता है कि भले ही इस काल में न सही, लेकिन इसके लगभग कुछ समय पहले धार्मिक इंसान होने चाहिए।
 
आदम एक इंसान थे और साथी ही एक ईश्वर के अस्तित्व को मानने और समझने वाले धार्मिक व्यक्ति भी।
 
 
 
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30 हज़ार साल पुराने कुछ चिन्ह, संकेत रूपी लिखावट पायी गयी हैं हालाँकि प्रारंभिक लिपि के सबसे प्राचीन उदाहरण 10-15 हजार साल पुराने हैं। मगर सबसे पुराने पाए गए किसी भी भाषा (विकसित, पूर्ण, शुद्द) के लेख या टैबलेट सुमेर या मेसोपोटामिया (इराक) से लगभग 4.5 हजार BC पुराने हैं। हम जानते हैं कि तीनों अब्राहमिक धर्मों की परंपराओं के अनुसार, पैगंबर इदरीस या Enoch (Book of Enoch from Dead Sea Scrolls) को पेन, लिखावट और क्ले टेबलेट से जुड़े सबसे शुरुआती व्यक्तियों में से एक माना जाता है।  बाइबिल के genealogical tree के अनुसार, इदरीस या ईनोख आदम की 7वीं पीढ़ी है और नूह 10वीं पीढ़ी है।


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पशुपालन (Animal Husbandry, herding), जानवरों के घरेलू बानाए जाने (Domestication), कृषि या खेती (Farming, agriculture) के लगभग 10-12 हजार साल पुराने सबूत मिडल ईस्ट से मिले हैं. इसे Neolithic revolution/ First Agricultural Revolution कहा जाता है [a fundamental shift from nomadic hunter-gatherer lifestyles to settled agricultural communities, marked by the domestication of plants (farming) and animals (herding)].
 
हो सकता है आने वाले समय में इससे पुराने सबूत मिल जाएँ। मगर बहुत संभव है कि वो बहुत ज्यादा पुराने यानि कई लाखों साल पुराने नहीं होंगे बल्कि ज्यादा से ज्यादा Mitochondrial Eve & chromosomal Adam के समय के आस पास के ही होंगे।
 
धर्म अनुसार पहला असल इंसान उसे ही माना जाएगा जिसके पास इन सभी क्षत्रों का ज्ञान होगा। हम जानते हैं कि आदम ही नहीं बल्कि सभी नबी आम जीवन में चरवाहे रहे हैं जैसा कहा जाता है, या उन्हें इन चीजों का इल्म था।
 


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मानव सभ्यता, संस्कृति या समाज का सबसे पुराना प्रमाण मेसोपोटामिया (इराक) और मिस्र से मिलते हैं जो 6000 साल पुराने हैं।

इससे पता लगता है कि मानव की गहन सभ्य सामाजिक प्राणी के रूप में रहने की शूरवात भले ही इस काल में न सही, लेकिन इसके लगभग कुछ समय पहले होनी चाहिए। हो सकता इससे प्राचीन प्रमाण सुरक्षित न रहे पाएं हों क्योंकि यह काफी लंबा अरसा है।
 
ऐसा माना जाता है कि सबसे पहल हज़रत नूह के समय में ही इंसान गहन सामाजिक ताने बाने में रहा, उससे पहले इंसान का इतना जटिल सामाजिक रहन सहन नहीं होता था।
 


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अभी तक ज्ञात Geographical और archeological प्रमाणों के आधर पर विश्व के कई भूभागों में बहुत बड़े सैलाबों का आना सिद्ध हो चुका है। ऐसी ही एक महा बाढ़ का ब्लैक सी (दक्षिण पूर्व यूरोप, यूक्रेन, रूस, जॉर्जिया, बुल्गेरिया, रोमानिया, तुर्की) में लगभग 5600 BC में आना माना जाता है। यह भी माना जाता है कि इस बाढ़ ने ही इस क्षेत्र में ऐसी पौराणिक कहानियों को जन्म दिया जैसे गिलगमेश की कहानी जो बाद में बाइबिल में शामिल हुई और फिर कुरान में भी है। इसके अलावा मेसोपोटामिया में भी एक बड़ी संख्या बाढ़ के आने के सबूत मिले हैं। 
 

यंहा कुछ सवाल उठते हैं जैसे कि अगर नुह के समय सैलाब पूरी दुनिया में आया था जिसमें सभी डूब गए थे सिवाय मोमिनों के और फिर उन्हीं से नसले आगे बढ़ी तो यह वाकया 15000 साल से पुराना नहीं हो सकता (मतलब पिछले 15000 साल के अंदर अंदर होना चाहिए) क्योंकि 15000 पहले तक इंसानी प्रजातियां पाई जा रही हैं जिनको वैश्विक सैलाब में डूब जानया चाहिए था। साथ ही यह मानना भी बड़ा मुशिकल है कि तमाम जमीनी जीव जंतु कैसे वैश्विक सैलाब के बाद तक कैसे ज़िंदा रह पाए, जबकि इन सभी जीव जंतु का एक कश्ती पर आना भी एक नामुकिन बात है।

और अगर आप यह मानना चाहते हैं कि नूह 15000 साल से पहले हुए थे, तो आपको यह मानना ही पड़ेगा कि यह सैलाब आलमी नहीं था बल्कि महदूद था। इसीलिए बाकी स्थानों पर जंहा सैलाब नहीं आया था, वंहा ये इंसानी प्रजातियां ज़िंदा बच गयी थी। साथ ही यह भी मानना पड़ेगा कि यह सैलाब सिर्फ़ मॉडर्न इंसानों यानि चुनिंदा होमोस से जन्मी नस्लों के लिए आया था या यूं कहें कि सिर्फ उन खास इलाकों में आया था जिन्हें सिविलाइजेशन कहा जा सकता है। और इसके बाद शुद्ध इंसानी नस्ल और सभ्यता दुबारा से नुह के बेटों से शुरू हुई और दूसरी इंसानी प्रजातियाँ उन खास इलाकों से सैलाब के दौरान खत्म हो गई। ज़ाहिर है बाकी जिन इलाकों में सैलाब नहीं आया था, वंहा ये प्रजातियाँ विचरण कर रही होगीं।
 
हालांकि यह भी मुमकिन है कि अगर सैलाब उस जगह आया था जहा इंसानी समाज, सभ्यता थी और वहा साथ ही जंगलों आदि में अन्य इंसानी प्रजातियाँ भी सहअस्तित्व में रहे थी, तो हो सकता हैं ऐसी प्रजातियाँ सैलाब से बच गई होंगी क्योंकि यह बात वैज्ञानिक तौर पर ज्ञात हो चुकी है कि जंगलों में रहने वाली जनजातियाँ, जानवर, पक्षी और एक्वेटिक एनिमल को आने वाले बड़े सैलाबों का पहले ही पता चल जाता है, जबकि आम इंसानों को इनका पता नहीं लग पाता। इसलिए शायद नुह के वक़्त में दूसरी गैर इंसानी नस्लों के साथ भी ऐसा ही हुआ हो और बच गए हो जैसे सुनामी में अंडमान की जनजातियाँ सुरक्षित बच गई थी।

 
● प्रागैतिहासिक (Prehistoric) मिस्र, जो लगभग 5500-3100 BC तक फैला था, खानाबदोश शिकारियों (nomadic hunter gatherers) से लेकर स्थिर कृषि समुदायों तक (settled agricultural communities), क्रमिक विकास का काल था। नवपाषाण काल ​​(Neolithic period) (लगभग 5500-3800 BC) में खेती (farming), पशुपालन (animal domestication) और मिट्टी के बर्तन बनाने (pottery) की शुरुआत हुई। बदेरियन संस्कृति (Badarian culture) (लगभग 4500-3800 BC) उभरी, जो विशिष्ट काले शीर्ष वाले मिट्टी के बर्तनों और तांबे के उपयोग की विशेषता थी। नक़दा काल (Naqada period) (लगभग 3800 - 3000 BC) में hierarchies और trade networks के साथ अधिक जटिल समाजों (complex societies) का उदय हुआ। सुमेरियों (इराक) को 3100 BC के आसपास पहली ज्ञात लिखित लिपि (Pictograms/Pictorial) विकसित करने का श्रेय दिया जाता है। इसके तुरंत बाद मिस्र की चित्रलिपि भी विकसित हुई.

● यूरोप में शिकारी समाजों से कृषि समुदायों का सामना हिंसक रूप से हुआ। 6-5 हज़ार साल पहले, Neolithic farmers के आगमन के बाद यंहा स्थानीय शिकारी आबादी पूरी तरह से खत्म हो गई। 

ये सभी तथ्य भी वही सिद्ध कर रहे हैं, जैसे अनुमान हम ऊपर लगाते आ रहे हैं।



●  यूरोप, मिडल ईस्ट आदि में जब विभिन्न मानव प्रजातियाँ एक दूसरे के संपर्क में आईं तो उनमें प्रतिस्पर्धा, वर्चस्व और सर्वाइवल की होड मची। पानी, खाने, रहने से संबधित रिसोर्सेज और अपने इलाके को लेके आपस में लड़ाइयाँ शुरू हुई जो बाद में ऑर्गनाइज़्ड होती चली गई। 70-50 हजार साल पहले सैपियंस जब अफ्रीका से निकल कर यूरोप, वेस्ट एशिया में पहुँचें तो उन्हें वहा नियनडरथलस मिले और ईस्ट एशिया में उन्हें डेनिसोवनस मिले। यहा इनका आपस में चीजों का शांतिप्रिय आदान-प्रदान और टकराव, दोनों शुरू हुए। सैपियंस और नियनडरथलस 50-40 हजार साल पहले एक दूसरे के संपर्क में रहे जिसमें उनकी झड़पें और प्रजनन दोनों हुए। नियनडरथलस ने सैपियंस से कुछ तकनीकें भी अपनाई। इसी तरह सैपियंस और डेनिसोवनस 50-30 हजार साल पहले एक दूसरे के संपर्क में रहे जिसमें उनकी भी झड़पें और प्रजनन दोनों हुए। सूडान से प्राप्त एक 13000 साल पुराने फोसिल से पता लगा है कि उसकी मृत्यु किसी हिंसात्मक रूप से किसी हथियार से हुई थी। इराक से भी ऐसे ही फोसिल मिले हैं। ऐसी कई फोसिल हिंसक एनकाऊनटर्स की तरफ साफ इशारा करते हैं। सैपियंस हथियार बनाने में अधिक आगे थे तो उन्हें इन युद्धों में अधिक सफलता मिली। सैपियंस, नियनडरथलस, डेनिसोवनस में अगर युद्द चल रहे थे तो कुछ जगह ये शांति से भी एक साथ रह रहे थे। 

कुरान स्पष्ट रूप से पृथ्वी पर उत्तराधिकारी (संभवत: Successor/सैपियंस) और पूर्ववर्तियों (संभवत: Predecessors/होमिनिन) द्वारा की गई हिंसा के बारे में बात करता है (जिन्हें जिन्नों से मनसूब किया जाता है)। मगर क्या यह बात, इन प्रजातियों में जारी हिंसा की ओर इशारा नहीं है? सनातन धर्म के प्राचीन ग्रंथों में जहां भी सुर और असुरों के बीच संघर्ष हुए या यूं कहें कि दैत्य, दानव, राक्षस, पिशाच आदि और मनुष्यों के बीच युद्ध का उल्लेख है तो जरा सोचिए कि यह किसका उल्लेख होगा या ये शब्द किन प्राजातियों के लिए गढ़े गए होंगे? शायद यह शब्द इन्हीं प्रजातियों के लिए प्रयोग हुए होंगे जो आपस में युद्धरत थी या मानवों के साथ साथ जीवित थी और आमने सामने थी? ऐसा भी हो सकता है कि कुछ समय बाद सभ्य या धार्मिक इंसानों ने इन शब्दों का प्रयोग उन लोगों के लिए भी प्रयोग करना शुरू कर दिया हो जिन्हें वे अपने से भिन्न और संस्कृति या सभ्यता से विहीन मानते थे?


● लिटरल मायनों में लें तो बाइबल के अनुसार लगभग 6000 साल पहले मानवता का आरंभ हुआ। आदम 4004 BC और नूह 2348 BC में हुए। भले ही इन बिबलिकल फेक्ट्स या फैमली ट्री को हम सही न माने. 
 
हालांकि अभी तक ज्ञात वैज्ञानिक प्रमाणों की रोशनी में यह 3 तिथियाँ इतनी भी ज्यादा गलत साबित नहीं हो रही जैसे आमतौर पर लोग अक्सर आदम और नूह को कई लाखों साल पहले आया मानते हैं। 
 
 
ये तो सभी को मानना पड़ेगा कि आदम अलै. और नुह अलैह. में चंद जेनेरेशन का फ़र्क़ था जिसका इशारा इस्लामिक साहित्य में दोनों की लगभग बराबर उम्र होने से भी मिलता है। इस्लामिक साहित्य में आई हज़रत आदम की 1000 साल उम्र और क़ुरान में आई हज़रत नुह की 950 साल उम्र, अब तक विज्ञान के अनुसार इतनी इंसानी उम्र सिद्ध नहीं हो सकी है। मगर हो सकता है आइंदा कुछ समुदायों, पीढ़ियों, व्यक्तियों की सिद्ध हो जाय। (मगर यह भी हो सकता है यह इनकी उम्र के वर्ष नहीं बल्कि महिनो आदि की संख्या हो।) 

खैर आम तौर पर यही माना जाता है कि आदम से लेके आज तक इंसानी उम्रें कम होती गई हैं। हालांकि विज्ञान व इतिहास के आधार पर सिर्फ यही स्वीकार किया जा सकता है कि पहले शुरवाती इंसानी नस्लों की औसत उम्र कम होती थी, औसतन लगभग 30-35 साल और फिर आधुनिक इंसानों तक आते आते उम्र बढ़ती गयी। यंहा तक कि पिछली सदी तक यह उम्र सामान्यतः 100 वर्ष तक भी पहुँच गई थी। मगर आज यह फिर से इंसान की औसत आयु उसके खान पान, रहन सहन आदि जैसे कई कारणों के प्रभाव में कम होती जा रही है जो अब 75 वर्ष के करीब है।

आक तक पाए गए hominins के fossils यही यही सिद्ध करते आये हैं कि इनकी आयु, आम मानव से कम ही होती थी क्योंकि ये बेहद कठोर परिस्थितियों में जीते थे। इनकी ऊंचाई भी आम मानव से कम ही होती थी। विज्ञान अनुसार अभी तक ज्ञात हालिया सबसे लंबा जीवन जीने वाला व्यक्ति 122 साल की था जिसकी पिछली सदी के अंत में ही मृत्यु हुई है। अभी तक ज्ञात सबसे अधिक आयु वाला जीव, ग्रीनलैंड शार्क है जो 400 साल तक भी जी जाती है। धरती पर सबसे अधिक एक कछुआ 200 साल तक जी पाया है और एक पक्षी 60 साल तक। 

हालांकि हमेशा से ही दुनिया में कुछ ऐसे समुदाय रहे हैं जो अपनी नस्ल, खानपान, रहन सहन, वातावरण आदि के कारण आम इंसानों से अधिक जीते आये हैं जैसे कुछ वर्तमान समुदाय हैं:-

Okinawa, Japan: 100 years
Sardinia, Italy: 100 years
Ikaria, Greece: 90-100 years
Nicoya,Costa Rica: 90-100 years
Loma Linda, USA: 90-100 years


शायद आदम, हव्वा, नुह वगैरह ऐसे ही या इनसे भी अधिक शारीरिक क्षमता वाले इंसानों में से रहे होंगे जिनका जीवन इतना अधिक लंबा चला (भले ही अपवाद के तौर पर सही)। क्योंकि अभी तक इनके जीवाश्म आदि नहीं मिले है इसलिए वैज्ञानिक तौर पर इनकी उम्रों के बारे में कुछ सिद्ध नहीं किया जा सकता। (हालाँकि कुरान, हादिसो में बताई गई इनकी इतनी उम्र के लिए जो लफ़्ज़ इस्तेमाल हुए हैं, उनके मायने वर्ष है या महीने या सीजन, इस पर बाद में बात करते हैं।)


इसके अलावा, अभी तक मिले इंसानी और इंसान से पहले की होमिनीन नस्लों के फॉसिल से यह बात साबित हो चुकी है कि इंसान की उंचाई (height) पहले कम थी जो लगभग 3 फ़ीट से बढ़कर आज 6 फ़ीट एवरेज हो चुकी पिछले लाखों सालों में। होमो सेपियन्स में भी उंचाई बढती रही, कुछ अपवाद स्वरुप जिसके पीछे के कारण उनकी जलवायु, खान पान, बीमारियाँ, अकाल और उनका जंगल में सार्विव करने से जुड़े हैं. इसलिए हज़रत आदम की हाइट इतनी होना एक अवैज्ञानिक तथ्य है।  

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वो Indigenous Tribes जो इंसानी संपर्क में नहीं आई हैं।


Sentinelese: अंडमान आइलैंड में। अभी तक संपर्क में नहीं आयें। कुछ दशकों पहले एक बार जब इनके और भारतीयों के बीच कुछ सामान का आदान प्रदान हुआ तो इंसानों द्वारा ऐसे वायरस अनजाने में उन तक पहुचें जो उनके इममयून सिस्टम के लिए बिल्कुल नए थे और इसलिए उनके काफी लोग बीमार होकर मर गए। इसके बाद उन्होंने इंसानों से बिल्कुल दूरी बना ली। 60 हज़ार साल से यंहा आबाद हैं। सेंटिनलीज़ जनजाति और आस पास की अन्य जंजातियां खूद को 2004 में आई सुनामी से सुरक्षित बचा पाई थी। ऐसा अंदाज़ा है कि उन्हें सुनामी आने की भनक हवा, पानी और पक्षियों की गति, व्यवहार से पहले ही पता लग गई थी और इसलिए सुनामी से पहले ही वे ऊंचे स्थानों पर चले गए थे।

Jarawa: 26 हज़ार साल से अंडमान आइलैंड में। बेहद कम संपर्क में आयें। 
Korubo: 20 हज़ार साल से अमेज़न में।  
Mashco Piro: अमेज़न में, अभी तक संपर्क में नहीं आयें। 
Ayoreo Totobiegosode: पेरू, अभी तक संपर्क में नहीं आयें। 
Flecheiros: ब्राजील में। 


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वो Indigenous Tribes जो किसी एक सर्वशक्तिमान देवता (अब्राहिमीक या तौहीद आस्था से भिन्न) में विश्वास करती हैं। इसका अर्थ यह नहीं है कि इनके अन्य देवता नहीं हैं।


Yolngu in Australia: एक सर्वशक्तिमान देवता Baru में विश्वास करते हैं। कहा जाता है कि कैपटन कूक द्वारा 1770 में ऑस्ट्रेलिया की खोज से पहले (यानि कि लगभग डेढ़ हजार साल में) शायद ईसाई मिशनरी यंहा पहुचें और उनके प्रचार प्रसार के बाद यंहा एक सर्वशक्तिमान की भावना जागृत हो गई हो, हालांकि इसके अभी तक कोई भी ऐतिहासिक या सांस्कृतिक सबूत नहीं मिले हैं।

Amazon: ऐमज़ान के जंगलों में ऐसी कई जनजातियाँ पाई गई हैं। 
Hopi in US: Maasaw नामक एक रचियता देवता में विश्वास रखते हैं। 
Inca in South America: एक सृष्टि निर्माता Viracocha में विश्वास रखते हैं। 
Zuni in Mexico: संसार और जीवन को बनाने वाले एक Awonawilona देवता में विश्वास रखते हैं।
Maasai in East Africa: एक सर्वशक्तिमान और रचियता देवता Enkai or Nagai में विश्वास रखते हैं।
Bundjalung & Wiradjuri in Wales: 
 
 
ऐसा माना जाता है कि आदम की औलादों ने जब हिजरत करी तो वो Aboriginal के रूप में अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया वगैरह पहुँची. 
 
 
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Chimpanzees (98.7%), Bonobos (98.7%), Gorilla (98.4%), Orangutans (96.9%) के डीएनए से इंसानी डीएनए काफी मिलता है मगर बहुत से genetic अंतर भी है। ये साइन लैंग्वेज समझ सकते हैं और ट्रेन किये जा सकते हैं। इसीलिए इंसान इनके किसी common ancestor से विकसित हुए हैं। सभी इंसानों का आपस में 99.9% डीएनए शेयर साझा करते हैं। जितना अधिक जिससे डीएनए मिलता है, वह उतना ही करीबी पूर्वज/रिश्तेदार माना जाता है। वैसे Gibbons का भी लगभग (96%) डीएनए इंसानो से मिलता है। हालांकि ऑक्टोपस (90%), फिश (60-70%), फ्रूट फ्लाई मक्खियां (60%), राउंडवर्म परजीवी (40%), केबेज (40%), जेलिफिश (25%) का भी डीएनए इंसानों से मिलता है जबकि ये सभी इंसानों से बिल्कुल विपरीत जीव हैं। यंहा तक कि कुत्तों से अधिक बिल्लियों का DNA इंसान से ज्यादा मिलता है। विज्ञान खुद मानता है कि DNA के मिलने का मतलब इडेंटिकल दिखना नहीं है। 
 
सबसे पहली बात है कि वैज्ञानिक क्यों शारीरिक बनावट की समानता को तब तो प्रमाण बनाते हैं जब DNA की समानता 90% हो मगर जितनी यह समानता की प्रतिशत कम होती जाती है, उतना ही यह प्रमाण विफल लगने लगते हैं? दूसरी बात कि जिस प्रकार बिल्कुल विपरीत जीव भी इंसान से काफी हद तक DNA साझा कर रहे हैं, उससे यही लगता है कि ज़रूरी नहीं के सभी जीव एक दूसरे से ही DNA inherit कर रहे हों। हो सकता है इन सभी में ये एक जैसे DNA अंश अपने आप में ही पैदा हुए हो। यह भी हो सकता है कि प्रथम इंसानी जीव जिस मिट्टी के अंदर बना, उसमें जो प्रथम ऑर्गेनिज़्म था वो ये DNA carry कर रहा हो।
 
 
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इन सभी तथ्यों के मद्देनजर यही उचित लगता है कि आदम दुनिया में मौजूद अनेकों होमो सेपीएन् में से एक चुने गए इंडिविजुअल थे जिन्हें खुदा की तरफ से पैगाम, पैगमबरी, ज्ञान, समझ, इंसानी गुण वगैरह दिए गए। स्पष्ट है, आदम को सीधा मिट्ठी से नहीं बनाया गया था। शूरवात में इनमें से किसी प्रजाति को समुन्द्र के किनारे गारे या कीचड़ जैसी गीली चिपचिपी खनखनाती मिट्टी में (अंडे जैसे शैल में - हिन्दू ग्रंथों में भी ऐसे अंडे और बीज का उल्लेख है।) से पैदा गया और फिर इसी सिलसिले से ये पैदा होते रहे। इसके एक लंबे अरसे बाद इनमें ही प्रजनन की क्षमता पैदा कर दी गई और फिर ये नर-मादा के मिलाप से पैदा होने लगे। इसके बाद यही सिलिसिला चलता रहा। और फिर एक लंबे अरसे के बाद इनमें से दो {या शायद एक, इस पर अन्य ब्लॉग में बात होगी} शख्सियत को चुन कर उनमें जब इल्म डाला गया तो वही आदम और हव्वा हुए। यानि होमो सैपियंस में से दो में अल्लाह ने इंसान में अपनी रूह या अम्र फूंका।

इसलिए Proconsul, Sahelanthropus, Ardipithecus, Australopithecus में से हम किसी एक को समुद्री गारे से बनाई हुई मख़लूक़ मान सकते हैं मगर ये सभी बेहद उचित दावेदार नहीं हैं क्योंकि एक तो ये पूर्णतया bipedal नहीं थे और पेड़ों पर रिहाइश या आशियाने से इनका संबंध पूरी तरह टूटा नहीं था। साथ ही, गिरोह या परिवार बना कर रहने वाले इनके गुण जानवरों में भी आम बात है, ये केवल इंसानी गुण नहीं होते।  
 
हालंकी इन्हीं में से एक Australopithecus Africanus (Ape-man) सबसे उचित दावेदार नज़र आता है। क्योंकि वे पूर्णतया bipedal थे और भूमि ही उनका मुख्य घर बना चुके थे। ये प्राकृतिक धारधार  हथियारों का प्रयोग तो करते थे मगर सर्वहारी थे। हो सकता है आइंदा आने वाली रीसर्च में इन्हें Australopithecus से अलग एक प्रजाति मान लिया जाए या फिर Africanus और Australopithecus में interbreeding हुई हो जिसके कारण कालांतर में यह एक ही प्रजाति बन गए हो।
 
इनके बाद Homo Sapiens ही दावेदार है जो कि साथ ही सबसे अनुचित दावेदार भी है। हालांकि आदम के आगमन या चुनाव के लिए, Homo Sapiens particularity Modern Human (1 लाख- 50 हज़ार साल के बीच कभी) ही सबसे उपयुक्त नज़र आता है। 
 
इस्लामिक, ईसाई, हिन्दू ग्रंथों में भी धरती पर शूरवात में पानी ही पानी होने का, जीव की उत्पत्ति पानी से और शब्द से सृष्टि आरंभ होने की बात मिल जाती है।

उपरोक्त सभी वैज्ञानिक प्रमाणों और तर्कसंगत तथ्यों पर कुरान क्या कहता हैं? क्या कुरान इन पर खरा उतरता है? इसके बारे में विस्तृत रूप से हम अगले ब्लॉग में पढ़ेंगे।

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दुनिया में होमो सेपियन्स की बहुत सी नस्लें रूहानी शऊर के बगैर जंगलों में आदिवासी, जनजाति के तौर पर बसी हुई हैं।

होमो सेपियन्स प्रजाति 3 लाख साल पहले अफ्रीका वजूद में आई। 1.3 लाख साल पहले तक ये पूरे अफ्रीका में फैल चुकी थी। फिर ये अफ्रीका से बाहर निकलना शुरू हुई। 1 लाख साल पहले ये मिडल ईस्ट में जा कर बसे। वंहा से ये 70 हज़ार पहले एशिया में चले गए और 40 हज़ार साल पहले यूरोप में। लगभग 50 हज़ार साल पहले ये एशिया के साउथ ईस्ट से होते हुए ऑस्ट्रेलिया पहुँचे। 20 हज़ार साल पहले ये एशिया के पूर्वी से होते हुए अमेरिका पहुचें और वंहा से 10 हज़ार साल पहले दक्षिणी अमेरिका।

होमो सेपियन्स में से जिन 2 को चुना और उन्हें रूह से नवाजा (एक को सही)। अगर सिर्फ ये माना जाए कि रूहानी शऊर हासिल करी हुई नस्लें ही पूरी दुनिया में फैली तो ये सही नहीं लगता है क्योंकि अफ्रीका से लेके साउथ अमेरिका में, भारतीय नार्थ ईस्ट से लेके ऑस्ट्रेलिया में, ब्राज़ील, अंडमान, इंडोनेशिया आदि स्थानों पर कई जंगली,आदिवासी जनजातियां जंगलों में आबाद रही हैं। ऐसा लगता है कि इन्हें रूहानी शऊर हासिल नहीं था मगर उसका माद्दा इनमें मौजूद था क्योंकि ये भी मुकम्मल इंसानी जिस्म थे। इसीलिए शायद इन्होंने रुहानी इंसानों को देख कर बहुत सी धार्मिक, सांस्कृतिक, सामाजिक चीज़ें सीखी।

इस तरह यही लगता है ये जनजातियां आदम से इतर (पहले, बाद में या साथ साथ, यह अलग विषय है) फैली हुई नस्ले हैं। आदम की नस्लें भी पूरी दुनिया मे पहुची जिन्हें रूहानी शऊर हासिल था। 

शायद दोनों का कुछ जगह जगह मेल हुआ और ऐसी नई पैदा हुई नस्लों में रूहानी शऊर नस्ल डर नस्ल बढ़ता गया। जिनसे कबीलों से मेटिंग नहीं हो पाई, वो आज भी सामूहिक तौर पर जंगली व्यवस्था में रह रहे हैं। शायद आख़िरत में इनका हिसाब किताब अलग तरह से होगा।

आज भी जब ऐसे पूर्णतया जंगली लोग मॉडर्न इंसानों के टच में आते हैं तो इनमें या अगली नस्लों में काफी बदलाव देखने को मिलता है। बल्कि एक समय के बाद ये ऑस्ट्रेलिया एबोओरिजिन और अमेरिका रेड इंडियन की तरह पूरी तरह रूहानी शख्सियत के मालिक हो जाते हैं। 

 
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Loopholes or shortcomings


We can debate how or why species evolve like natural selection, genetic drift, gene flow, etc but we know species evolve.

In Evolution theory, how first living cell originated on earth, lack of transitional fossils, speciation process is still not fully understood, incomplete fossils records, gaps in fossils records, contaminated samples, imperfect dating methods, different interpretation of dates etc. Arguments against DNA similarity between humans and apes are such as similar DNA sequences could have arisen through convergent evolution or other mechanism, the difference of both the species are greater than the similarities, parallel evolution and or gene transfer cause such similarities etc. Evolution are held due to geographical conditions, and this is called natural selection. Mosquitos develop resistance whenever provoked. The Corona virus also created its many variants after evolution. Viruses are between living and non-living organisms because they can infect others but not multiply. 

Creationists argue that natural selection can't create new species or complex features. They believe it only explains minor changes within a species, not the origin of entirely new traits or organisms. Creationists claim genetic drift is just random changes and can't explain the complexity and diversity of life. Creationists argue that DNA similarities between different species (like humans and apes) don't prove common ancestry. They believe these similarities could be due to a common designer using similar building blocks for different organism. Creationists point to gaps in the fossil record as evidence against gradual evolutionary change. They argue that the absence of intermediate fossils between major groups of organisms suggests that these groups were created separately. Creationists claim that most genetic mutations are harmful, not beneficial, and thus can't be the primary mechanism for creating the complex information required for new traits. They argue that mutations degrade the genome over time rather than building new, functional genetic information. Creationists argue that natural processes, including genetic drift and natural selection, can't explain the origin of life from non-living matter.  

Natural Selection can take a long time for change. It can be interfered by genetic drift. Genetic Drift is more important in small populations than in large. Over time it can reduce genetic diversity making adaptions harder and can counter natural selection at times. The idea that most genetic changes are due to drift and not selection is debatable.

Another challenge that scientists are facing is how organic materials transformed into profoundly complex molecules such as DNA and RNA? Natural selection attributes this conversion of organic material into DNA to chance. Furthermore, modern science has discovered that once organic material is created from inorganic material, it is needed to exist in a dry stage to prevent it from reverting back to its elementary form.

One view is that species might adapt or change but they do not become an entirely different species. Just because something is similar doesn't mean that it's within it's lineage. All living creatures have DNA, and that does not mean all things are inherently related. The vast differences genetically prove this; thus pointing to a designer instead. However, this is challenged by all.

 
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New Study Says Early Humans May Have Hibernated Through Winter. It suggests that early humans may have hibernated during long, cold winters to cope with extreme weather and food scarcity. The hypothesis says that early humans likely entered metabolic states that slowed their bodily functions for months. Genetic evidence supports the possibility that humans could enter hypometabolic states, a physiological trait preserved across many mammalian species.

Development of placenta in species caused species to give birth instead of eggs in the evolution process.  But still there are many Mammals who lay eggs. A kind of frog retains an egg in its body until the baby takes birth. Kangaroos give birth to underdeveloped babies who develop in their pouch afterwards. There are types of shark species that evolved with time that some lay eggs and some give birth.

Crow, elephant, wolves, and chimpanzees bury their dead often.

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Primordial Pond/Soup Theory suggests that life began in a "warm little pond" or a similar body of water, where organic molecules formed from simple chemical reactions.
 

One research says that DNA is 9 billion years old and older than the earth. It means first life came from outside of earth. This is one of the  theories for the origin of life on earth and called Panspermia. This theory does not contradict anything from Islam. Although it supports it. Scientists claim that humans share DNA with every living organism on earth because all life came from a single entity or ancestor. Life may have originated on some other planet and came through metroid etc into earth. Life in Earliest Humans may also have come from them (these earliest life organisms). They they evolved into h. Sapiens and two among then were chosen to be Adam and Eve when God blew Ruh (Shaoor etc) into both. They were given time to train in a Bagh (called Jannat also) on this earth itself. When training completed, they came out of it to inhabit the whole earth. Then their offspring spread across the planet. Other human species vanished with time. Only children of Adams and Eve continued to survive on earth and lived under the guidance of God.

Humanity came close to extinction 8 lac years ago which is called Ancestral Bottleneck. Only 1,280 of our ancestors survived, wiping out 98.7% of the early human lineage, lasting about 1.17 lac years, likely resulted from extreme climate shifts, prolonged droughts, and dwindling food sources, potentially explaining a gap in the African and Eurasian fossil record. This bottleneck may have played a crucial role in evolutionary event—chromosome fusion—which may have set Homo sapiens apart from earlier hominin species.

The Toba catastrophe theory suggests that evolution was impacted by a massive volcanic eruption. Over the past 3-5 million years, after the divergence of humans from other ape lineages, various human species emerged. However, around 70K-75K years ago, the Toba caldera in Indonesia experienced a mega eruption on the Volcanic Explosivity Index. This event drastically altered Earth's climate, reducing global temperatures by 3 to 3.5 degrees Celsius for several years and potentially triggering an ice age. The extreme environmental changes caused severe population bottlenecks-sharp declines in species populations due to catastrophic events such as natural disasters, famine, disease, or drought. These bottlenecks accelerated the genetic differentiation of isolated human groups. As a result, all other human species eventually went extinct, leaving only the lineage that evolved into modern humans.

Ghost species/population/DNA means an unknown species that interbred with West African people and contributed to upto 20% of their DNA  and split from homo sapiens around 5-1L years ago. 

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दुनिया मे मौजूद तमाम इंसान होमो सेपियन्स (लगभग 20-25 इंसानी प्रजाति में से एक सबसे कुशल प्रजाति) है, जो लगभग 3 लाख साल पहले अफ्रीका में जन्मे और फिर उनकी संताने पूरी दुनिया में फैल गई और अपने से पहले मौजूद बाकी तमाम प्रजातियों को खत्म करते गए या उनका खुद अकुशल होने की वजह से अंत होता गया। अंतिम प्रजाति का अंत इंडोनेशिया में लगभग 15-50 हज़ार साल पहले हुआ। 8 लाख साल पहले स्पेइन्स थे ही नहीं। Heedelbergenesis जैसी प्रजातियां थी जो दिखने और व्यवहार में हैवानी थी, पूरी तरह इंसानी नहीं।  Human bottelneck कई बार हुआ है। वैज्ञानिक तौर पर एक मर्द (chromosomal adam) और एक औरत (mitrochondial eve) को सब इंसानो का पूर्वज माना जाता है, जिन्हें अलग अलग समय में हुआ माना जाता है (न कि एक साथ) 1-2 लाख साल पहले। हो सकता है ये अवधि और कम हो जाये अभी और दोनो एक काल में साबित हो जाएं। विज्ञान के मुताबिक  आदम की ऊंचाई 90 फ़ीट नहीं थी (कई मुहददीसों ने भी इस हदीस को कुबूल नहीं किया है)। हालाँकि वैज्ञानिक तौर पर अक़्ली, रूहानी इंसान की पैदाइश ज़्यादा से ज़्यादा 70 हज़ार साल पहले मानने के सबूत बेहद हैं (सबूतों पर चर्चा लंबी हो जायगी सो फिर कभी, ये सबूत हैरतअंगेज हैं। जैसे आग जलाना, मुर्दे को दफनाना, भाषा की उत्पत्ति, धार्मिक क्रियाएं आदि)। हो सकता है ये तारीख भी भविष्य में और कम हो जाये।

खेती का आरंभ 10 हज़ार साल पहले हुआ। इंसानी सभ्यता, संस्कृति भी इसी दौर में जन्मी। इसी वक्त के आस पास विश्व मे एक बड़े सैलाब के सबूत मिलते हैं। अगर नुह के वक़्त में खेती होती थी, तूफान के बाद बचे हुए लोगों ने ज़मीन पर वापिस खेती ही शुरू करी होगी। यानी इंसान खेती करना भुला नहीं था और न ही उसे खेती दुबारा शुरू करने हज़ारों साल लगेंगे। ह. नुह का सैलाब न तो पूरी दुनिया में आया था और न ही उनकी कश्ती पर दुनिया के तमाम जानवर सवार थे और न ही उनकी उम्र 950 साल थी, क़ुरान से स्पष्ट हैं ये सब बातें। दुनिया में दूसरे स्पेइन्स मौजूद थे। मगर रूहानी इंसान या अल्लाह से जुड़े हुए इंसान सिर्फ वही थे जो नुह की कश्ती पर मौजूद थे। इन्हीं से रूहानी इंसानो के नस्लें आगे बढ़ी जिनमें नबी आते गए। तहक़ीक़ (वैज्ञानिक, ऐतिहासिक, तार्किक धार्मिक साक्ष्यों के आधार पर) के मुताबिक आदम 70 हज़ार साल से पहले नहीं कभी नही हो सकते और इसी तरह नुह 15 हज़ार साल से पहले नहीं हो सकते। आदम और नुह में ज़्यादा नस्लों का फ़र्क़ नहीं था। ज़ाहिर है, भविष्य में नई रिसर्च द्वारा दोनों का काल एक दूसरे के समीप आना चाहिए। गामिदी साहब ने नफके रूह को 10-12k हज़ार साल पहले माना है या इससे थोड़ा और पहले।

क़ुरान में कंहीं भी वाज़ेह तौर पर आदम को नबी नहीं कहा गया है। हालांकि क़ुरान से ये साफ इशारे मिलते हैं कि वो नबी थे। ये चीज़ हदीसों में ज़रूर बयान हुई है। वो वाकई नबी थे, इसमें कोई शक नहीं। वैसे ईसाई आदम को नबी नहीं मानते हैं। इसी तरह क़ुरान में कंहीं भी वाज़ेह तौर पर ये नहीं कहा गया है कि आदम दुनिया के पहले इंसान (human species) थे। ऐसे मायने अखज़ ज़रूर किये जाते हैं। मगर साफ- साफ कंहीं नहीं लिखा है। कुरान में ज़मीन पर खलीफा बनाने वाली बात का मतलब कंही से भी ये साबित नहीं करता है कि जिसे ख़लीफ़ा बनाया जा रहा है, वो पहला इंसान होगा या था। खलीफा का मतलब होता है, बाद में आने वाला या successor। तो क्या आदम से पहले भी कोई इंसानी नस्ल/ मखलूक/ पूर्व खलीफा मौजूद था/थे?

इंसान की पैदाइश के लिहाज से क़ुरान ने आदम का नाम सिर्फ उन आयतों में आता है जंहा से फरिश्तों को उन्हें सजदा करने का हुकुम दिया गया था। बाकी जगह इंसान, He, बशर जैसे लफ्जों से इंसान की मिट्टी से पैदाइश की बात कही गयी है। सिवाए एक जगह के जंहा आदम और ईसा को एक जैसा बताया गया हैं। सिर्फ एक जगह ईसा अलैह. के बारे में दलील के तौर पर आदम अलैह को ईसा अलैह सा बताया गया है। यंहा आगे कहा गया है कि हमने उसे मिट्टी से बनाया और कहा कुन और वो हो गया। ज़ाहिर है यंहा भी कई मायने निकल रहे हैं, हमें सभी पर नज़र चाहिए और उनमें से जो बाकी आयतों के मायनों को ज़्यादा क्वालीफाई करें, वो कुबूल करने चाहिए। 

यह आधुनिक समय में इस्लाम के अकादमिक अध्ययन के प्रति मुसलमानों की संकीर्ण मानसिकता का एक उदाहरण है। यह रहस्यवाद (तसव्वुफ़) पर चर्चा करने के बारे में नहीं है। आज दुनिया इल्हाद के दौर में पूरी तरह से दाखिल हो चुकी है। इसकी आखिरी बार नींव रेनेसां युग और मार्क्स, डार्विन वग़ैरग से पड़ी थी। हालांकि पहली बार इसकी नींव भारत में पड़ी थी। इल्हाद या नास्तिकों का सामना करते हुए सबसे शुरआती बुनियादी सवालों में एवोल्यूशन, आदम, हव्वा, नुह वगैरह ही हैं। इनसे मुंह मोड़ना शतुरमुर्ग की तरह ज़मीन में गर्दन घुसाने जैसा है। आज मुसलमानों के बच्चें और नस्लें इस्लाम छोड़ रही हैं और जो मान भी रहे हैं वो अक्सर सिर्फ रिवायती मज़हब ढो रहे हैं। उन्हें ज़रा सी खुली छूट या माहौल मिल जाये तो यही बच्चें मज़हब का चोगा उतार कर फ़ौरन फेंक देंगे। जब तक साइंस और इस्लाम को साथ लेके नहीं चलोगे तब तक रुढ़िवादी ही पैदा होते रहंगे जो बड़ी वजह है क़ौम को आज के हालातों तक लाने के लिए। लोगों को रिवायतों से बाहर निकलने दो, मुस्लिम को। दिल मे उठने वाले सवालों को दबाओगे तो एक दिन ज्वालामुखी फटेगा। अमल के साथ इल्म में दिलचस्पी लो। सभी मज़ाहिब में इस्लाम ने सबसे ज़्यादा इल्म पर ज़ोर दिया। हर इंसान की सलाहियत, ज़ौक़ अलग अलग होते हैं। अपनी पाबंदियां दुसरो पर नहीं थोपी जा सकती जैसा अक्सर मुस्लिम या उनके उलेमा करते हैं।  


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8 comments:

  1. Chromosomes are organized structures that package and manage DNA. Thus, chromosomes are the bookshelves that organize and store the books.

    DNA is the long molecule that carries all genetic instructions. Thus, DNA is the book of life.

    Genes are segments of DNA that code for specific proteins and traits. Thus, genes are the chapters in the book.

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  2. Natural Selection: This is when traits that help organisms survive and reproduce become more common in a population because those traits are passed down to more offspring. It's survival of the fittest.

    Genetic Drift: This is when random events cause certain traits to become more or less common in a population, regardless of whether they help or harm the organism. It's luck of the draw. It is the change of gene variant frequency in a population as a result of random sampling.

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  3. Quarks and Leptons make up Protons, Neutrons and Electrons (negative charge of atom, surrounding nucleus ). Protons, Neutrons particles are found in nucleus of an Atom. They all Protons, Neutrons and Electrons form an atom. Two atoms bonded together is called Molecule like water molecule (H2O) consists of two hydrogen and one oxygen atom).

    Amino acids are smallest molecules of a living cell or that make up protein. Nucleotides are larger and make up DNA & RNA. But the Organelles are the smallest functional units withing a cell.

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  4. Proconsul (23-14 Million years ago) and Sahelanthropus (7-6 M years ago) are considered to be the earliest ancestors of humans and apes/chimpanzee. They were not completely bipedal. The very first completely bipedal human species was Australopithecus, who lived in Africa 4 -2 Million years ago. These include various subspecies. One such subspecies named Africanus (also called African Ape-man) were omnivorous who lived in social groups and are considered to be the direct ancestor of humans.

    •Habilis: 2.4-1.4 M years ago. They were the first to make stone tools. Whether they had any (kind of) language or not is still unknown.Habilis is considered to be the ancestor of
    •Erectus: 1.9 - 0.15 M years ago. It was the first species to leave Africa reached Asia and Europe. They are considered to be the ancestor and close relative of Sapiens. They preserved natural fire and later, i.e. around 1 M years ago, they also learnt to light fire. They formed societies and communicated in broken language (a proto-language).
    • Neanderthals: in Europe and Asia 4L-40K years ago. They used to bury their dead and had some customs/rituals. They used to make paintings and jewellery from feathers. They had the ability to speak and listen.
    • Denisovans: in Asia and Europe 4L-30K years ago. They built houses. Their burials are the earliest.
    • Floresiensis: in Indonesia 1L-50K years ago. Some studies say that they were there just 12K years ago.

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  5. They all are considered to be cousins/relatives of humans. So far, based on fossils, there have been about 14 such Geno Homo species on the earth (the number differs as per views). Among these, only Sapiens survived. All humans are their descendants.

    Homo Sapiens: They emerged in Africa 3L years ago and then spread throughout the world. About 70-50K years ago, they set foot on the land of Asia from Africa. Homo Sapiens were basically like Modern Humans from the beginning, but with time, climate etc., they have evolved and changed a little. Only they are considered to be pure modern humans. The oldest burial of Homo sapiens, 1L years old, has been found in Israel in which some rituals indicate death and the afterlife. Denisovans, Neanderthals and Sapiens, all three species existed together at the same time. They interbred among themselves and were at war at many places. They learned to make efficient tools and built strong shelters using mud, wood and skins. Their artifacts, cave paintings and burial rituals indicate that they had some religious or spiritual beliefs. Only these survived in the Genus Homo and the rest became extinct. All humans today are their descendants.

    It is believed that Sapiens started speaking language 1L-50K years ago. The bones/organs related to speech have been found in their bodies. Although the genes related to speech and language were already present in them but it was not fully developed earlier. Along with this, complex and important changes were also seen in human behavior and culture 70-50K years ago, which has been named the Great Leap Forward or Upper Paleolithic Revolution. During this period, excellent tools, art, paintings, jewelry, funeral rites, social fabric etc. were seen. It was during this period that humans came out of Africa. All of this was unprecedented.

    Since research is ongoing, there is still a lot to know and some facts may change on the basis of new fossils. But it would be wrong to question the existence of these species now. However, secondary things like their area, period, interbreeding etc. may change on the basis of new findings.

    Proofs of animal husbandry, herding, domestication of animals, agriculture or farming about 10-12 thousand years old have been found from the Middle East. The oldest archaeological evidences of religious and spiritual beliefs are 10 thousand years old from Turkey. The oldest evidence of a rich human civilization, culture or society is found from Mesopotamia (Iraq) and Egypt which are 6000 years old.

    On the basis of geographical and archaeological evidence known so far, it has been proved that very large floods came in many parts of the world. One such great flood is believed to have occurred in the Black Sea (South-Eastern Europe, Ukraine, Russia, Georgia, Bulgaria, Romania, Turkey) around 5600 BC.

     

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  6. ■ Homo Habilis: 24-14 लाख साल पहले यह अफ्रीका में एक प्राचीनतम species थी. इन्होंने सर्वप्रथम stone tools प्रयोग किये और इसीलिए इन्हें handyman कहा जाता है। इन्होंने सबसे पहले पत्थरों, हड्डी आदि के औजारों को बनाना और उनका इस्तेमाल करना शुरू किया। इनकी ऊंचाई 3-4 फ़ीट होती थी। शिकार से ज़्यादा मरे पाए गए जानवरों का माँस या दूसरे जानवरों से छीन कर माँस खाते थे। ये बॉन मैरो खाते तो इनके दिमाग के आकार भी बड़े होना शुरू हुए। इनकी कोई भाषा (सांकेतिक आदि) थी या नहीं, अभी तक अज्ञात है।

    ■ Homo Erectus/Ergaster: ये 19 लाख - 1.5 लाख साल पहले तक और सर्वप्रथम Africa छोड़ने वाली species थी जो एशिया और यूरोप पहुंचे थे। Habilis को Eractus के पूर्वज माना जाता है. ये पूरी तरह से सीधा खड़ा होकर चलते थे। इनके हाथ पांव से छोटे थे और काफी हद तक इंसानों जैसा शरीरिक संतुलन था, साथ ही बढ़िया सामुहिक शिकारी भी थे। इन्होंने सर्वप्रथम शिकार करके मांस खाना आरंभ किया। ये मांस को सुखा कर सुरक्षित रख लेते थे। इनके शरीर को भरपूर प्रोटीन मिलने से इनके दिमाग बड़े होने शुरू हुए। प्राकृतिक आग का संरक्षित रखते थे और बाद में यानी लगभग 10 लाख साल पहले इन्होंने आग जलाना भी सीख लिया था। इन्होंने लगभग 5 लाख साल पहले मांस को आग पर जला कर खाना शुरू किया जिससे इनके दिमाग बड़े और दांत, आंतें छोटी होती गई। समाज बना कर आपसी समझ से जीवन बिताते थे और टूटी फूटी भाषा में संवाद करते थे यानी एक proto language ज़रूर थी। इन्हें sapiens का पूर्वज और करीबी रिश्तेदार माना जाता है।

    ● Homo Greorgicus: ये 18 लाख साल पहले तक थे। इनका जीवाश्म जॉर्जिया में पाया गया है। ये अफ्रीका से बाहर जाने वाली शुरआती प्रजातियों में से एक थी। कुछ वैज्ञानिक इन्हें eractus से ही निकली एक उपप्रजाति मानते हैं।

    ● Homo Heidelbergensis: ये 8-2 लाख साल पहले थे। माना जाता है कि इनमें से ही Denisovans, Neanderthals, Homo Sapiens का एक Common Ancestor Africa में 8-6 लाख साल पहले रहा करता था जिससे ये तीनों निकले होंगे और दुनिया में अलग अलग Species के रूप में विकसित हो गए होंगे। ये साधरण shelter बनाकर रहते थे।

    ● Homo Denisovans: ये 4 लाख - 30 हजार साल पहले Asia और Europe में थे. इन्होंने Neanderthals & Sapiens के साथ interbreeding करी। Denisovans के कुछ DNA अंश (6%) पापुआ न्यू गिनी से फ़िजी आईलैंड और ऑस्ट्रेलिया आदि भूभाग के लोगों में पाए गए हैं यानि इनका और Modern Humans में सम्पर्क रहा है। ये औजार निर्माता थे और आवासों का निर्माण भी करते थे। ये समाज बना कर रहते थे। इनके बरियल सबसे पहले के हैं। ससाइबेरिया की एक गुफा से इनके अवशेष मिले थे। कुछ लोग यह मानते हैं कि ये Sapiens से अलग एक प्रजाति है और कुछ यह मानते हैं कि ये Neanderthals की ही एक उपप्रजाति है। ये इंसानों के cousins माने जाते हैं।

    ● Homo Neanderthals/lensis: ये 4 लाख - 40 हजार साल पहले Europe और West Asia में थे। ये सैपियंस से पहले ही मिडल ईस्ट पहुँच चुके थे और उनसे बुद्धि और शारीरिक तौर पर अधिक सक्षम थे। इनके शवों से मिले सबूतों से लगता है कि इनके कुछ रीति रिवाज थे। इनकी और सैपियंस की इंटेरबरीडिंग हुई थी और इतने बड़े स्तर पर हुई कि शायद इसी कारण से ये लुप्त हो गए। इसीलिए अफ्रीका से बाहर के वासीयों को अपने जींस (जीनोम) का 2% भाग इन्हीं से मिला है। ये ठंडे प्रदेशों में रहते थे और नजदीक से शिकार करके खाते थे। ये पेंटिंग, पंखों से आभूषण बनाते थे। समाज मे रहते थे। बोलने सुनने की क्षमता रखते थे और मुर्दा को दफनाते थे। ये इंसानों के close relatives, cousins माने जाते हैं।

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  7. ■ Homo Sapiens/Modern Humans: ये 3 लाख साल पहले Africa में उभरे और फिर प्युर विश्व में फैल गए। लगभग 70-50 हजार साल पहले इन्होंने अफ्रीका से एशिया की धरती पर कदम रखा था। लगभग 45000 साल पहले तक ये पूरे यूरोप और वेस्ट एशिया में फैल चुके थे। Eractus को Sapiens के पूर्वज माना जाता है।

    Homo Sapiens आरंभ से ही मूलभूत तौर पर Modern Human की तरह ही थे मगर समय, जलवायु आदि के साथ और बेहतर विकसित होते हुए इनमें थोड़ा-बहुत बदलाव भी आया है। आरंभ में इनका दिमाग 1200-1400 क्यूबिक सेंटीमीटर होता था और अब सामान्यत 1250-1350 होता है। वैसे मॉडर्न होमो सैपियंस को ही प्योर मॉडर्न हुमन माना जाता है। इन्हें दो भागों में भी बांटा जाता है यानी archaic homo sapiens (1.5 लाख साल से पहले वाले) and modern homo sapiens (1.5 लाख साल पहले से)।

    इसका सबसे पुराना fossils 3 लाख साल पुराना मोरोको से मिला है जिसमें प्राचीन और आधुनिक दोनों इंसानी फीचर मौजूद हैं। जबकि इथोपिया से प्योर मॉडर्न हुमन के 1.95-1.60 लाख साल पुराने Fossils मिले हैं जो पूरी तरह से मॉडर्न एनाटोमिकल फीचर रखते हैं जैसे ऊंचा-गोल ब्रैनकेस और ठुड्डी। यानि बाद में यह species अधिक से अधिक इंसानी रूप लेती चली गई। होमो सेपीएन्स की सबसे पुरानी burial, एक लाख साल पुरानी, इसराईल में मिली है जिसमें कुछ रिवाजों के द्वारा मौत व उसके बाद के जीवन की ओर संकेत किया गया है।

    यह neanderthals से जेनेटिक तौर पर भिन्न Species है और दोनों में Interbreeding होती रही है। 40 हजार साल तक Sapiens और Neanderthals एक साथ Europe और Asia में विचरण कर रहे थे। Denisovans, Neanderthals, Sapiens तीनों प्रजातियाँ एक साथ एक समय पर अस्तित्व में रही हैं।

    निएंडरथल और सेपीएन्स के बीच 1 लाख साल से अधिक वर्षों तक युद्ध चला था। ये पहले से ही यूरोप, मध्य पूर्व और एशिया में स्थापित थे। इन्होंने अफ्रीका से हो रहे मानव प्रवास को काफी हद तक विलंबित किया मगर अंत में कुशल हथियारों और रणनीति के कारण मानवों ने इन्हें हरा दिया।

    इनमें पहले से कई गुना अधिक रीज़निंग गुण, एब्सट्रेक्ट आर्ट और थिंकिंग पाई गई है। इन गुणों के पैदा होने के पीछे इनके द्वारा खाया जाने वाला एक विशेष मशरूम को माना जाता है जिससे इनके दिमाग बेहद ज्यादा विकसित हुए। 40-10 हजार साल पहले इन्होंने कुशल औज़ार बनाने और मिट्टी, लकड़ी, खालों की मदद से रहने के लिए मजबूत शेल्टर बनाना सीख लिए थे। इन्होंने अपनी सारी कमियों को अपने कुशल औजारों से दूर कर लिया। दसियों हजार साल पुरानी इनकी बनाई कलाकृतियाँ (artifacts), cave paintings, burial rituals यह इशारा करते हैं इनके कुछ धार्मिक या आध्यात्मिक विश्वास भी थे। इन्होंने कुंबो को बनाना और चलाना शुरू किया और इस सामाजिक परिवर्तन के पीछे सबसे बड़ा कारण धर्म को माना जाता है। समान आस्था या विश्वास होने के कारण सभी सैपियंस एक दूसरे के करीब आते गए और Neanderthals के खिलाफ भिड़ खड़े हुए।

    Genus Homo में केवल यही ज़िंदा रह पाए और बाकी सब लुप्त हो गए। आज के सभी मानव इनके वंशज हैं।

    उपरोक्त के अलावा भी कई अन्य Species रही हैं। कुछ अन्य कम महत्पूर्ण प्रजातियां जो Homo Sapiens से भिन्न हैं:-

    ● Homo Naledi: ये 3.35-2.36 लाख साल पहले Africa में थे। इन्होंने ही सबसे पहले अपने मृतकों को दफनाया और गुफा की दीवारों पर चित्र बनाये जो पहले केवल सेपीएन्स और निएंडरथल (जो इनके बाद हुए) द्वारा ही किए जाते पाए गए थे। इनके द्वारा अवशेषों को गुफाओं में एक खास तरीके से दफनाया जाता था, जिसमें शवों को मोड़कर मिट्टी से ढक दिया गया था और गुफाओं की दीवारों पर काफी कुछ उकेरा भी जाता था। ये गुफाएं 2.41-3.35 वर्ष पुरानी है।

    ● Homo Luzonensis: ये 67-50 हजार साल पहले फिलीपींस में थे।

    ● Homo Floresiensis/Hobbits: ये 1 लाख - 50 हजार साल पहले तक इंडोनेशिया में रह रहे थे। यह बौने मानव की एक प्रजाति थी और एक नई प्रजाति के रूप में घोषित की गई है। इनके जीवाश्म लगभग 12 हजार वर्ष या उससे भी पुराने हैं, जो इन्हें आधुनिक मनुष्यों के समकालीन (contemporary) बनाते हैं। इनके छोटे रूप में विकसित होते चले जाने कि वजह यह मानी जाती कि जब ये इन द्वीपों पर पहुंचे तो यंहा भोजन बेहद कम उपलब्ध था और इसके कारण बड़े शरीर वालों का सर्वाइव करना मुश्किल होता था जिससे छोटे शरीर वाले अधिक सक्षमता से रह पाते थे। ये इंसानों के cousins माने जाते हैं।

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  8. Inorganic compounds don’t contain carbon-hydrogen bonds. Organic compounds or molecules (combination of atoms) are chemical compounds that contain carbon and hydrogen atoms. They are found in all living things like Amino acids (simple molecule that are building blocks of proteins and made of carbon, hydrogen, oxygen, nitrogen), proteins (complex molecule), carbohydrates, fats, DNA. Molecules make RNA (one of or probably the first replicator on earth) makes proteins which makes DNA.

    From Smallest to Largest components of life: Atoms → Simple Molecules → Organic Molecules → Macro molecules → Organelles → Cells → Tissues → Organs → Organ Systems → Organism.

    Proto cell - single cellular organism - multi cellular organism - living beings

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