आखिरत
आखिरत का
मतलब है बाद में आने वालायानी आने वाला हर लम्हा पिछले की आखिरत है. आखिरत को Law of cause and effect से समझाया जा सकता है. क़यामत
करीब है. एक हदीस से यह खूब साबित है. इतिहास के मुकाबले सबसे ज्यादा
दुनिया ख़त्म होने के इमकान आज है. एक Nuclear war फ़ोरन
सब खतम कर सकती है.
अगर
किसी ने तौहीद मान ली है तो अमल में लान ज़रूरी हैऔर इसलिए आखिरत बताना ज़रूरी है। (आम
धारणा यह है की तौहीद और आखिरात को मानने वाला रिसालत का इनकार कर ही नहीं सकता। हालांकि
रिसालत को अगर बिना किसी objection
के clearly
समझा सको तो वो सबसे बेहतर है)
कुरान के 2
तरह की आयतें है एक, मोहकम जो अपने मायनों में बिलकुल वाज़ेह हैं और सभी उनसे
एक जैसी ही मुराद लेते हैं। दूसरी
मोशाबिहात आयतें हैं, ये वो हैं जो वाज़ेह तो हैं मगर साथ ही इनकी interpretation कई तरह से हो सकती है.मुशाबिहात यानी जैसे किसी चीज़ या मुद्दे की असल को
कोई मिसाल दे कर समझाना क्योंकि अभी उसे हम exactly
समझ नहीं सकते. मोहकम की तफ़सीर होती हैऔर मुशाहाबिहात की तावील होती है.
कुरान में आया जन्नत, जहन्नुम, बरज़ख का ज़िक्र भी
मुशाबिहात है.
इन्सान का
इल्म महदूद है. बहुत सा इल्म सिर्फ तजुर्बा करके ही समझा जा सकता है. कुरान के
मुताबिक़ इन्सान को बहुत कम इल्म दिया गया है. विज्ञान भी इसका इंकार नहीं करता कि
इंसान आज भी बहुत कम जानता है.
जन्नत -जहन्नुम की लोकेशन
● कुरान से इशारतन पता लगता है कि जन्नत आसामानों में है
और जहन्नुम इसी जमीन के अंदर है.
जमीन के सेंटर या ग्रविटी से जितनी दूर जाएंगे वो बुलंदी है, वो
ऊपर है, वो ऊंचाई है. सेंटर के अंदर या पास जाते हैं तो वो गहराई कहलाती है। जमीन से दूर ऊंचाई होती है तो गहराई जमीन
के करीब होगी।
[space में खरबों galaxies है. अब तक space में अरबों km की दूरी तय कर चुके
हैं। इस Solar
system पार
करने में एक spaceship को 25+ साल से ज्यादा लगे, 16 अरब km का सफ़र था. हालाँकि ऐसी अरबो खरबों galaxies है. कुरान 7 आसमानो की बात करता है। यह पहला
असामान है जिसका सिरा अभी भी वैज्ञानिको को नहीं मिल रहा है।
जमीन में भी कई layers होती हैं. जबकि ज़मीन के अंदर अब तक रशिया में एक जगह सिर्फ
drill से approx.12km तक ही खोद पायें हैं, फिर machine पिघलने लगती है. जबकि ज़मीन की गहराई कुल 6400 kmहै, अन्दर क्या क्या है यह जानकारी तो हमें
ज्वालामुखी और जलजालों से पता लगी जब ज़मीन मलबा बाहर उगल देती है.
इंसान समुन्द्र में भी बहुत ज़्याद नहीं
जा पाया है. समुद्र की
भी 5% ही खोज कर पाए हैं, एकहद के बाद नीचे गुप अँधेरा औरपानी का बहुत pressure है.]
● कुरान
में जन्नत singular और plural दोनों में आया है. 69 जगह पर जन्नते लफ्ज़ आया है। आखिर
सबकी अलग अलग जन्नते होंगी. जन्नते आकाश में है. दुसरे
धर्मों में भी स्वर्ग आसमान में बताया जाता है. कुरान जन्नत के बारे में कहता है कि ईमानों
वालों को उरुज मिलेगा या उरुज दिया जायगा। उरुज से ही मेराज बना है। यानि उन्हें मेराज,
उरुज हो जायगा।
लाइट या बिजली की स्पीड है 3 लाख km per second है। बर्क का मतलब बिजली है। बर्क से ही बुर्राक
बना है। बुर्राक की भी यही स्पीड थी। फरिश्तों की भी इतनी स्पीड होती है। फरिशते
नूर यानि लाइट से बने है। मगर इस स्पीड से बुर्राक भी दूसरी कहकशा में नहीं पहुँच
पाएगा, उसे लाखों-करोड़ों साल लगेंगे। जमीन का गहरा या circumference ही 40 लाख km का है।
यानि इंसान को यंहा से निकलने के लिए कोई द्वार
या दरवाजा भी चाहिय। ऊपर कुछ entry points है।
वैज्ञानिक कहते हैं एक universe से
दूसरे universe में जाने के भी entry point है, shortcut हैं हालांकि इन्हे वो अभी मिले नहीं है। इसे wormhole नाम दिया गया है। wormhole के दोनों किनारों पर suck करने की क्षमता होती है, जो एक तरफ से suck करके दूसरी तरफ निकाल देती है। और यह transportation zero time में होगा यानि कोई वक्त नहीं लगेगा।
मगर वैज्ञानिकों वो दरवाजे नहीं मिलेंगे
क्योंकि कुरान ने कहा है कि हम इन्हें खोल देंगे। ये बस जन्नती लोगों को मिलेंगे,
गुजरने के लिए।
● कुरान में जहन्नुम हर जगह singular में आया है और लिखा है कि उसमें ठूँसा जायगा
यानी की एक है. कुरान हदीस से जहन्नुम गहराई में साबित होती
है। दूसरे धर्मों में भी नरक को पाताल में बताया गया है. कुरान हदीस से साबित है कि हश्र का मैदान इसी
जमीन पर होगा और ज़मीन चटियल मैदान हो जाएगा। जलजले से निचले भाग ऊपर आ जाएंगे, आसमानी लेयर्स खतम हो जायगी तो पानी भाप
बनके उड़ जायगा, जमीन के लावा, लोहा आदि ऊपर जाएंगे, ज़मीन सब उगल देगी। हरियाली
खतम, सूरज सीधा सर पर। जमीन अंदर से खाली हो जाएगी।
ज़मीन के अंदर कितने लोग आ सकते है ये पता करने
के लिए जमीन के पूरे वॉल्यूम को इंसानी
जिस्म के वॉल्यूम से डिवाइड कर दें। एक आदमी को हजार आदमी के बराबर जगह दे दे तो 41
लाख ख़राब इसमें समा सकते हैं। अनुमानों के मुताबिक़ दुनिया में अब तक सिर्फ 1 खरब
लोग ही पैदा हुए हैं. यानी ज़मीन के volumeके आगे तमाम इंसानों का volumeकुछ भी
नहीं है.
जन्नत/जहन्नुम
में कौन और कब?
7.42:
जो
लोग ईमान लाए और अच्छे कर्म करे.. वही लोग जन्नत वाले है, वो उसमें हमेशा
रहेंगे।
[मौत के अलावा जन्म का समय, जन्म का स्थान, आपका परिवार, सेहत वगैरह इन्सान के हाथ
में नहीं होता इसलिए जन्नत के लिए अमल देखे जायंगे]
17:18-20:
जो कोई इस दुनिया के जल्दी मिलने फ़ायदों की खवाहिश रखता
है, उसे हम यही देते हैं,जो
कुछ भी जिसे देना चाहे, फिर उसकी किसमत में जहन्नुम लिख देते हैं। जो आखिरात
की ख्वाहिश रखे और कोशिश करे और वो ईमान वाला हो उसकी कदर की जाएगी। इनको भी और
उनको भी हम दुनिया में ज़िंदगी का सामान दिए जा रहे हैं।
2.81: जिसने भी कोई बुरा किया और उसकी बुराई ने उसे चारों
ओर से घेर लिया तो ऐसे लोग ही जहन्नुम मे पड़ने वाले हैं और सदा ही वही रहेंगे।
16.61: यदि
अल्लाह लोगों को उनके अत्याचार पर पकड़ने ही लग जाता तो धरती पर किसीजीवधारी को न
छोड़ता,
किन्तु
वह उन्हें एक निश्चित समय तक टाले जाता है।फिर जब उनका नियत समय आ
जाता है तो वे न तो एक घड़ी पीछे हट सकते हैं और नआगे बढ़ सकते हैं।
35.45: यदि अल्लाह लोगों को उनकी कमाई के कारण पकड़ने
पर आ जाए तो इस धरती की पीठपर किसी जीवधारी को भी न छोड़े। किन्तु वह उन्हें एक नियत
समय तक ढील देताहै, फिर जब उनका नियत समय आ जाता है तो
निश्चय ही अल्लाह तो अपने बन्दों कोदेख ही रहा है।
17.14: पढ़ ले अपनी
किताब (कर्मपत्र)! आज तू स्वयं ही अपना हिसाब लेने के लिए काफ़ी है।
जन्नत-जहन्नुम की मिसालें और
अबदीयत
2.25: जो फल वहा
मिलेगा, वो कहेंगे कि ये तो वही है जो पहले हमे मिला था और उन्हे मिलता जुलता ही
फल दिया जाएगा और उनके
लिए वहाँ पाक-साफ़ जोड़े होंगे, और वे वहाँ सदैव रहेंगे।
[Mutshabihan word is used here– जिसके बारे में accurate experience करके ही मालूम किया जा सकता है]
47.15: उस जन्नत
की मिसाल ऐसी है….
[मिसाल देके समझाया भी गया
है]
32.17: कोई
नहीं जानता कि जो वो करते रहें, उसके बदलेक्या आखों की ठंडक उनके लिए रखी
गई है।
41.31: हम
सांसारिक जीवन में भी तुम्हारे सहचर मित्र हैं और आख़िरत में भी। औरवहाँ तुम्हारे
लिए वह सब कुछ है, जिसकी इच्छा तुम्हारे जी को होगी।
और वहाँतुम्हारे लिए वह सब कुछ होगा, जिसकी तुम माँग
करोगे।
11.106-108: तो जो अभागे होंगे, वे आग
में होंगे; जहाँ
उन्हें आर्तनाद करना और फुँकार मारना है। वहाँ वे सदैव रहेंगे, जब
तक आकाश और धरती स्थिर रहें, बात यह है कि तुम्हारे रब की इच्छा ही चलेगी। तुम्हारा
रब जो चाहे करे। रहे वे जो भाग्यशाली होंगे तो वे जन्नत में होंगे, जहाँ वे
सदैव रहेंगे जब तक आकाश और धरती स्थिर रहें। बात यह है कि तुम्हारे रब की
इच्छा ही चलेगी।यह एक ऐसा उपहार है, जिसकासिलसिला कभी न टूटेगा।
[यानि जब तक जमीन-आसमान की existence
होगी।]
84.19:
निश्चय
ही तुम्हें मंज़िल पर मंज़िल चढ़ना है।
[ये दुनिया और आखिरत दोनों
के बारे में हैं, वहा भी evolve होते चले जाना है।]
परलोक
में राबते
7.43: उनके सीनों में जो एक दुसरे के लिए रंजिश
होगी, उसे हम दूर कर देंगे… और वो कहंगे यदि अल्लाह हमारा मार्गदर्शन न करता तो हम कदापि मार्ग
नहीं पा सकते थे। हमारे रब के रसूल निस्संदेह हक लेकर आए थे। और उन्हें
आवाज़ दी जाएगी कि यह जन्नत है, जिसके
तुम वारिस बनाए गए हो।उन कर्मों के बदले में जो तुम करते रहे.
[वंहा एक दुसरे की जन्नतों को देख कर रंजिश नहीं होगी, अहसास तो
होगा कि उन्होंने ऐसा खुद क्यों नहीं किया. हम खुद से हिदायत नहीं पा सकते.
जन्नत कर्म करने के बाद ही मिलेगी, ऐसे ही नहीं मिल जाएगी. ये रिसालत की भी एक दलील है, दार्शनिकों
के लिए जो अपने मन में उलझ कर रह जाते है और सत्य मार्ग नहीं पा पाते]
57.12: उस दिन तुम मोमिन पुरुष और स्त्रियों को
देखोगे की उनका नूर या प्रकाश उनके आगे आगे दौड़ रहा है और उनके दाएं हाथ
में है।
[उनके कर्म एक एनर्जी के रूप में उन्हे लीड करते हुए उन्हें इस
स्टम से दूसरे सिस्टम यानि जन्नत तक ले जाएंगे मगर किसी गाइडन्स या दूसरी बड़ी
एनर्जी के मुताबिक]
57.13: कपटचारी पुरुष और स्त्रियाँ मोमिन से
कहेगी की हमारी प्रतीक्षा करो, हम भी तुम्हारे नूर मे से कुछ नूर ले लें।
उनसे कहा जायगा पीछे हटो और फिर अपने नूर की तलाश करो।
[जैसे एक गाड़ी की हेडलाइट में खराब हेडलाइट वाली गाड़ी निकलनी चाहती
है।]
7.38-50:
इन आयातों में जन्नत और जहन्नुम वालों की परस्पर बहस और एक दूसरे पर आरोप हैं. यह भी लिखा है कि इन दोनों के मध्य एक ओट होगी।
[जन्नत और जहन्नुम वालो का आपस में communication होगा मगर
एक दुसरे तक पहुँच नहीं पाएंगे इसलिए ये बातचीतऐसी ही होगी जैसे किसी छोड़े गए
सेटेलाईट या राकेट से दुनिया वालों की होती है]
जन्नत के बारे में बुनियादी बात कही गयी है, मकसद नहीं बताया गया. जैसे आम तौर पर किसी को नौकरी पर रखते हुए बेसिक बेनिफिट बताये जाते हैं, चेलेंजस नहीं. वंहा आपको हर तरह से ग्रो करने का मौका मिलेगा क्योंकि माहौल ऐसा होगा. जैसे वेस्ट में इन्सान को अपनी कला, शौक पुरे करने के भरपूर मौके मिलते हैं क्योंकि वंहा डेवेलोपमेंट, इन्फ्रा पहले से है.
परलोक
के द्वार और दोनों में आड़
57.14: उनके बीच एक दीवार खड़ी कर दी
जाएगी जिसमें एक द्वार होगा।
[इस द्वार से नूर वाले निकल कर दूसरी ओर चले जाएंगे। नूरानी जिस्म
मिल जायगा यानि energy में बदल जाएंगे, जो strong
energy बन पाएंगे वो पार पा जाएंगे
और और उनका नूर या energy स्पष्ट रूप से दिख रही होगी। जैसे समुन्द्र का fresh और salty पानी एक दुसरे से नहीं
मिल पाता क्योंकि दोनों की properties
अलग अलग होती हैं। अगर दोनों पानी की properties एक हो जाए
तो मिल जाएगा।]
7.40: जिन लोगों ने हमारी आयतों को
झुठलाया... उनके लिए आकाश के द्वार
नहीं खोले जाएंगे।
[यानि जन्नत और उसके द्वारा आसमान में हैं।]
15.14: अगर हम उन पर आसमान में कोई द्वार खोल दें तो वह
उसमें चढ़ते चले जाएंगे।
[यंहा उरुज लफ़्ज़ है। लिखा है कि हम खोल दे तो, यानि ये द्वार खुद
नहीं खुलेंगे]
15.15: फिर भी वो कहंगे किहमारी आँखें मदमदाती है बल्कि हम पर जादू
कर दिया गया है।
[द्वार खोलने पर चड़ने के बाद वो यह कहेंगे]
15.16: हमने आकाश में सुरक्षा चौकियाँ
बना रखी है और देखने वालों के लिए उसे सूसज्जित भी किया है।
[जिसे नहीं आने देना चाहते उनके लिए यह security posts बनाई हुई
है]
15.17: हमने हरफिटकारे हुए शैतान को
उससे सुरक्षित रखा है।
[इन द्वारा से वहिय आती है। फरिशतें उनसे आते जाते है, नबी गए थे।
जन्नती जाएंगे। बाकी कोई नहीं जा पाएगा]
15.18: अगर किसी ने चोरी छिपे कुछ सुनगुन
ले ली तो एक प्रत्यक्षअग्निशिखा ने भी झपट कर उसका पीछा किया।
[यह तारे, सितारे, ग्रह वगैरह सब आग के गोले है या दहकते हुए पत्थर
है, कहकशाओं ने set होने से पहले कुछ जिन्न वहिय सुनने के लिए आसमान में पहुँच जाते
थे और कोई ऐसा ही गोला या दहकता पत्थर उनका उनसे टकराने वाला होता था. मगर जब
मौजूदा हाल में universe set हुआ तो फिर जिन्नों के लिए भी यह नामुमकिन हो गया. यह बात कुरान
में कई जगह आई है]
23.99-100: यंहा यह ज़िक्र है कि लोग मौत के बाद वापिस भेजे
जाने की दरख्वासत करंगे ताकि अच्छे कर्म करके आ सके मगर यह उनकी फ़िज़ूल बात होगी और
उनके बीच एक आड़ या पर्दा या रोक या ओट रहेगा उनके दुबारा जिंदा उठाए जाने
तक.
[यंहा बरज़ख लफ्ज़ इस्तेमाल हुआ है.आलमे बरज़ख, आलम मतबल हालत है न की
दुनिया. वो वंहा से देखते सुनते हैं. इधर नहीं आ सकते]
इन सुरक्षा चौकियाँ हैं जहाँ से कोई भी जिन्न अब भविष्य की खबर नहीं ले सकता। यहाँ से सिर्फ़ वही लोग बाहर जा सकते हैं जिनके पास इजाज़त हो, जैसा कि क़ुरान 15:14-18 में बताया गया है। इसे उन लोगों के लिए भी सजाया जाता है जो इन्हें देखते हैं यानी जो ज्योतिष या खगोल विज्ञान के अनुसार इन्हें देखते हैं।
------------------------------------------
कुरान 55: 33-35: ऐ जिन्नों और मनुष्यों के समुदाय! यदि तुममें आकाशों और धरती के क्षेत्रों से गुजरने की शक्ति हो तो गुजर जाओ। तुम बिना शक्ति (bisultanin/ authrotiy) के नहीं गुजर सकते। तुम दोनों पर अग्नि की ज्वाला और धुआँ (wanuhasun/pieces of iron, melted copper, धुंवा वाला अंगारा)) छोड़ा जाएगा, जिसका तुम सामना न कर सकोगे।
कुरान 72:8-9: हमने आकाश को टटोला, तो उसे पहरेदारों और उल्काओं से भरा पाया। हम पहले सुनने के लिए आकाश में कुछ स्थानों पर बैठा करते थे। अब जो कोई भी सुनने की कोशिश करता है, वह अपने लिए एक जलता हुआ अंगारा पाता है।
------------------------------------------
परलोक
का स्थान
55.7. उसने आकाश को ऊँचा
किया और संतुलन स्थापित किया.
[The heaven is above the
earth]
50.30
: जान्नुम से पूछा जाएगा पूरी भर गई क्या, वो कहेगी और है क्या कुछ?
[यानि यह जमीन के अंदर की
बात है]
21.98:
तुम और वो तुम जिनकी अल्लाह को छोड़ कर पूजा करते हो,
वो
सब जहन्नुम के ईंधनहो।
[उलेमा यंहा मूर्तियों से मुराद लेते हैं कि जहन्नुम में मूर्तियों
को आग बनाया जाएगा, वंहा पत्थर जलेंगे। मगर मूर्तिया तो पत्थर, मेटल, प्लास्टिक
वगैरह की भी होती है। यह सब धातु जमीन में
से निकलती हैं। यानि ये पत्थर या जमीन ही जहन्नुम है।]
--------------------------------------------------------
बरज़ख
बरज़ख का मतलब आड़ है.
तोते
की हालत में हैं।
सीजजीन
और इललीयीन।
मेराज
अगर जिस्मानी होता तो जिस्म जल कर राख हो गया होता इतनी तेज स्पीड की वजह से।
इसीलिए नबी के दिल का आपरेशन किया गया था।
कुरान
– नेकों का रेकॉड सीजजीन में है।
40:46
– सुबह शाम आग पर पेश किया जाता है। (जबकि कब्र नहीं है, न ही जहन्नुम है। फिरोन
और आले फिरोन को पेश किया जाता है। यह दरअसल आलमे बरजख है)।
जब
बाकी लोग इस हालत में हो सकते हैं तो नबी क्यों नहीं।
---------------------------------------------------------
समय चक्र है या रेखा।
समय
एक चक्र नहीं पर रेखा है जिसका सबसे बड़ा प्रमाण बिग बैंग है जंहा से ये
आरम्भ हुआ अगर किसी का आरम्भ है तो अंत भी होगा। विज्ञान और वैज्ञानिक से
मानते है कि जैसे सृष्टि का फैलाव हुआ और निर्माण हुआ उसी प्रकार सृष्टि एक
विशेष समय बाद वापिस संकुचित होने लगेगी और अंत कर जायगी। जब समय रेखा है
चक्र नहीं तो समय भी एक सृष्टि है जैसे जीवन एक सृष्टि है। सभी सृष्टि
उतपत्ति है यानी उनका आरम्भ है अगर आरम्भ है तो अंत भी है। तो जन्म और जीवन
भी एक रेखा है चक्र नहीं। इसलिए पुर्नजन्म चक्र नहीं रेखा है। जन्म का
आरम्भ और अंत है। हर उतपत्ति का आरम्भ और अंत है। गीता में आत्मा को न मरने
वाला बताया गया है।
हमेशगी/ हूर/जोड़े/अज़वाज/शराब
अल्लाह
के हमेशा और आपके हमेशा में फरक है। अल्लाह की eternityऔर
आपकी eternity में
फरक है। जैसे उसकी हर सिफ़त और हमारी सिफ़ातों मे जमीन आसमान का फरक है। उससे हमारी
किसी चीज़ में बराबरी ही नहीं है। जिसकी beginningहै
उसका end भी
होगा।
कुरान
में जितनी चीजें जन्नत जहन्नुम के सुखों, दुखों के बारे में बताई गई हैं, वो सिर्फ
मार्फत है यानि हमारी समझ के अनुसार एक अनुमान दिया गया है। ये closest
चीज़ है मगर exact नहीं
है। जैसे केले का स्वाद नहीं समझाया जा सकता तो उसे कटहल से समझाया जात है। जैसे जन्नत में हूर का जिक्र आता है जिसके
मायने अप्सरा नहीं है बल्कि संगी-साथी है।
2.25: उनके लिए वहा पवित्र जोड़े
होंगे, वे वहा सदैव रहेंगे।
[यंहा आए लफ़्ज़ अज़वाजून
का तर्जुमा उलेमा, बीवियाँ करते हैं जबकि
इसके मायने जोड़े के हैं, जिसे spouse कहते हैं।]
51.49 : हमने हर चीज के जोड़े
बनाए हैं.
[यहाँ भी जोड़े के लिए
यही लफ़्ज़ ज़वजा आया है।]
शराब का मतलब दारू नहीं है
बल्कि पेय है यानि ड्रिंक। नशे को तो खमर कहते हैं। यंहा जिस चीजों से रोका गया है
उनसे खुद को और दूसरों को नुकसान पहुंचता है। वहा ये नुकसान नहीं होगा और वो चीजें
भी यंहा जैसी भी नहीं होगी।
-------------------------------------------------